# पैतृक संपत्ति बेचकर 50 लाख रुपये कैश लेने पर कैसे लगता है इनकम टैक्स, समझें कैपिटल गेन और सेक्शन 269SS के कड़े नियम

> पैतृक संपत्ति बेचकर 50 लाख रुपये नकद प्राप्त करने के मामले में इनकम टैक्स विभाग के सेक्शन 269SS और कैपिटल गेन टैक्स नियमों के तहत कर दायित्व और आईटीआर दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया समझें।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-07-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/paitrika-snpatti-bechakara-50-lakha-rupaye-kaisha-lene-para-kaise-lagata-hai-income-tax-samajhen-capital-gain-aura-section-269ss-k-12281 · **Language:** Hindi
**Tags:** इनकम टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स, पैतृक संपत्ति, सेक्शन 269SS, आईटीआर 2, कैश लेनदेन नियम

भारतीय कर प्रणाली और इनकम टैक्स के नियम काफी जटिल माने जाते हैं। सरकार की ओर से कर नियमों को आसान बनाने के अनेक प्रयासों के बावजूद, सामान्य नागरिकों के लिए इनकी सटीक जानकारी हासिल करना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक उपयोगकर्ता ने अपनी मां से जुड़ा एक मामला साझा किया, जिसमें उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति को बेचकर 50 लाख रुपये की पूरी राशि नकद में स्वीकार कर ली थी। संपत्ति बेचते समय उन्हें कर नियमों की जानकारी नहीं थी, लेकिन राशि प्राप्त होने के बाद इस विषय में सलाह लेना जरूरी समझा गया। जब इस मामले की जानकारी एक टैक्स एक्सपर्ट को दी गई, तो उन्होंने इस प्रकार के नकद लेनदेन और उस पर लागू होने वाले इनकम टैक्स प्रावधानों को पूरी तरह स्पष्ट किया।

## बिल्डर के साथ नकद लेनदेन और सीए की सलाह
सोशल मीडिया यूजर के अनुसार, उनकी मां को संपत्ति बिक्री से जुड़े टैक्स नियमों की समझ नहीं थी। इसी अज्ञानता के कारण वे संबंधित बिल्डर की बातों में आ गईं और अपनी विरासत में मिली संपत्ति को बेचकर 50 लाख रुपये कैश के रूप में प्राप्त कर लिए। जिस समय यह सौदा तय हुआ, उस दौरान वे अकेली थीं और बिल्डर ने उन्हें पूरी रकम नकद में लेने के लिए सहमत कर लिया। संपत्ति का सौदा पूरा होने के बाद जब इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर भरने का समय आया, तब उन्होंने इस लेनदेन की जानकारी अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी सीए को दी। इसके बाद टैक्स एक्सपर्ट ने उन्हें संपत्ति बिक्री पर लगने वाले टैक्स और नकद लेनदेन से जुड़े सभी कानूनी नियमों के बारे में विस्तार से समझाया।

## पैतृक संपत्ति की बिक्री और आईटीआर फॉर्म का चयन
टैक्स एक्सपर्ट ने स्पष्ट किया कि पैतृक संपत्ति की बिक्री से होने वाली आय को सामान्य श्रेणी की नियमित कमाई के रूप में प्रदर्शित नहीं किया जा सकता है। इसके बजाय, ऐसी कमाई को आईटीआर में अनिवार्य रूप से कैपिटल गेन यानी पूंजीगत लाभ के तहत दर्ज करना होता है। यदि किसी करदाता की संबंधित फाइनेंशियल ईयर में इसके अलावा कोई अन्य आय नहीं रही है, तो उनके रिटर्न फॉर्म का चयन केवल इसी पूंजीगत आय के आधार पर तय किया जाता है। नियम के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति की कुल कमाई केवल संपत्ति बिक्री से प्राप्त कैपिटल गेन से जुड़ी हुई है, तो उन्हें आईटीआर-2 फॉर्म भरकर अपना विवरण जमा करना होता है।

## कैपिटल गेन टैक्स की गणना और होल्डिंग अवधि के नियम
पैतृक संपत्ति पर कैपिटल गेन टैक्स की गणना करते समय संपत्ति की मूल लागत और उसके स्वामित्व की अवधि को ध्यान में रखना बेहद आवश्यक होता है। टैक्स एक्सपर्ट के अनुसार, बिक्री से प्राप्त कुल राशि में से उस लागत को घटाया जाता है जो संपत्ति के पूर्व मालिक ने इसे खरीदते समय खर्च की थी। इसके साथ ही, संपत्ति से जुड़े अन्य वैध खर्चों को शामिल करते हुए और बाजार मूल्य के हिसाब से समायोजन करने के बाद ही वास्तविक कर योग्य मूल्य निकाला जाता है।

इसके अलावा, संपत्ति के पूर्व मालिक ने जितने समय तक उस संपत्ति को अपने पास रखा था, उस पूरी अवधि को संपत्ति बेचने वाले नए मालिक के होल्डिंग पीरियड में जोड़ दिया जाता है। इस संयुक्त अवधि के आधार पर ही यह तय होता है कि बिक्री से मिली राशि पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होगा या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स। आमतौर पर पैतृक संपत्ति से होने वाली कमाई लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के दायरे में आती है। टैक्स की दरें संपत्ति की खरीदारी की तिथि पर भी निर्भर करती हैं। यदि संपत्ति 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई थी, तो उस पर 20 फीसदी की दर से टैक्स लगता है और इसमें इंडेक्सेशन यानी महंगाई दर का लाभ भी प्रदान किया जाता है। वहीं, यदि संपत्ति 23 जुलाई 2024 को या उसके बाद खरीदी गई है, तो उस पर बिना इंडेक्सेशन लाभ के सीधे 12.5 फीसदी की दर से टैक्स चुकाना पड़ता है।

## सेक्शन 269SS और 20 हजार रुपये की कैश सीमा
इनकम टैक्स के कड़े नियमों के अनुसार, किसी भी अचल संपत्ति के लेनदेन में 20,000 रुपये से अधिक की राशि नकद में स्वीकार नहीं की जा सकती है। आयकर कानून का सेक्शन 269SS स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि संपत्ति से जुड़ा कोई भी लेनदेन 20,000 रुपये से अधिक कैश में करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि कोई व्यक्ति इस तय सीमा से अधिक राशि नकद में लेता है या देता है, तो उसे इनकम टैक्स विभाग से नोटिस जारी किया जा सकता है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि करदाता नियमों के तहत इस राशि पर बनता हुआ कर भुगतान कर देता है, तो वह आगे की दंडात्मक कार्रवाइयों से बच सकता है, लेकिन इस पर नियमानुसार टैक्स देना पूरी तरह अनिवार्य रहता है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** अचल संपत्ति की बिक्री में 20,000 रुपये से अधिक नकद स्वीकार करने पर सेक्शन 269SS के तहत इनकम टैक्स विभाग का नोटिस आ सकता है।

**प्रॉपर्टी विक्रेताओं के लिए:** पैतृक संपत्ति की कमाई को आईटीआर-2 फॉर्म में कैपिटल गेन दर्ज करना होगा, जिसमें 23 जुलाई 2024 के कट-ऑफ के अनुसार 20% (इंडेक्सेशन के साथ) या 12.5% टैक्स लागू होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. पैतृक संपत्ति बेचने से मिली राशि को आईटीआर में किस श्रेणी में दिखाना चाहिए?
पैतृक संपत्ति से होने वाली कमाई को सामान्य आय के रूप में नहीं, बल्कि आईटीआर-2 फॉर्म के तहत कैपिटल गेन (Capital Gains) श्रेणी में दिखाना अनिवार्य है।

### 2. क्या संपत्ति बिक्री में 50 लाख रुपये कैश में लिए जा सकते हैं?
नहीं, सेक्शन 269SS के अनुसार प्रॉपर्टी के लेनदेन में 20,000 रुपये से अधिक नकद स्वीकार करना या देना मना है और इस पर टैक्स नोटिस आ सकता है।

### 3. 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई पैतृक संपत्ति पर कितना टैक्स लगता है?
23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई संपत्तियों पर 20 फीसदी की दर से कैपिटल गेन टैक्स लगता है और इसमें इंडेक्सेशन यानी महंगाई की छूट भी मिलती है।

### 4. 23 जुलाई 2024 के बाद खरीदी गई संपत्ति पर क्या टैक्स दर लागू होगी?
23 जुलाई 2024 को या उसके बाद खरीदी गई संपत्तियों पर सीधे 12.5 फीसदी टैक्स लगता है और इसमें इंडेक्सेशन की छूट नहीं दी जाती है।

### 5. पैतृक संपत्ति के होल्डिंग पीरियड की गणना कैसे की जाती है?
पैतृक संपत्ति के मामले में पूर्व मालिक की स्वामित्व अवधि को वर्तमान विक्रेता की होल्डिंग अवधि में जोड़ा जाता है, जिससे लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म का निर्धारण होता है।

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