# पांच सप्ताह की गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी की नजर 14 से 18 सितंबर के तीन बाजार जोखिमों पर

> 14 से 18 सितंबर के कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स और निफ्टी50 पांच सप्ताह की गिरावट के बाद सावधानी के साथ शुरू हो रहे हैं। ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पास और अमेरिकी 10 साला ट्रेजरी बॉन्ड की उपज 4.99% से ऊपर रहने से जोखिम बने हैं, जबकि एफआईआई की 1,795 करोड़ रुपये की बिकवाली के बीच डीआईआई की 6,419 करोड़ रुपये की खरीदारी सहारा दे रही है।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/pancha-saptaha-ki-giravata-ke-bada-sensex-aura-nifty-ki-najara-14-se-18-sitnbara-ke-tina-bajara-jokhimon-para-31753 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स, निफ्टी50, कच्चा तेल, अमेरिकी बॉन्ड उपज, विदेशी निवेशक, फेडरल रिजर्व

14 से 18 सितंबर के कारोबारी सप्ताह में भारतीय इक्विटी बाजार सावधानी के साथ उतर रहे हैं। सेंसेक्स और निफ्टी50 ने पांचवें सप्ताह भी गिरावट दर्ज की है, और निवेशकों की नजर अब महंगे कच्चे तेल, अमेरिकी बॉन्ड उपज, फेडरल रिजर्व के 16 सितंबर के फैसले तथा विदेशी व घरेलू निवेशकों के लेनदेन पर है।

## पांच सप्ताह की गिरावट ने मूड बिगाड़ा
पिछले सप्ताह निफ्टी50 2.02% घटकर 23,398 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स लगभग 2.27% की गिरावट के साथ 74,781 पर समेटा। शुरुआती सूचकांकों में आई यह तेज गिरावट केवल एक सप्ताह का उतार-चढ़ाव नहीं थी। महंगे कच्चे तेल, ऊंची वैश्विक बॉन्ड उपज और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर किया हुआ है।

बड़े आकार के शेयरों पर दबाव खास तौर पर बना हुआ है, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ सहारा जरूर दिया है। यह सहायता गिरावट को पूरी तरह रोकने में कामयाब नहीं हुई, इसलिए आगामी सत्रों में यह देखना अहम होगा कि स्थानीय खरीदारी बाहरी दबाव को कितना संतुलित कर पाती है।

## विदेशी बिकवाली के बीच घरेलू खरीदारी
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने चौथे लगातार सप्ताह भी इक्विटी में नेट बिकवाली की। एफआईआई ने इस अवधि में 1,795 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे साफ है कि बाहर से आने वाला दबाव अभी खत्म नहीं हुआ है। यह सिलसिला बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि लगातार निकास सूचकांकों की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इसी अवधि में 6,419 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। डीआईआई की यह खरीदारी बाजार में कुछ संतुलन बनाए रखती है और विदेशी निकास के असर को सीमित करने में मदद करती है। आगामी सत्रों में एफआईआई और डीआईआई का अंतर सबसे अहम रहेगा, क्योंकि डीआईआई की खरीदारी जारी रही तो नीचे की ओर गिरावट सीमित हो सकती है।

विदेशी बिकवाली में नई तेजी आई तो निफ्टी और सेंसेक्स पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए केवल सूचकांक का स्तर नहीं, बल्कि खरीदारी और बिकवाली का आकार भी दिशा तय करेगा।

## तेल की कीमतें अगले सप्ताह भी रहेंगी अहम
अंतरराष्ट्रीय संकेत भी संवेदनशील हैं। ब्रेंट क्रूड लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल के पास बना हुआ है, और आपूर्ति को लेकर चिंता और जारी भूराजनीतिक तनाव ने कीमतों को इस स्तर के करीब रखा है। कच्चा तेल आगामी सप्ताह में भारतीय इक्विटी के लिए सबसे बड़े कारकों में रहने की संभावना है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित तेल पर भारी रूप से निर्भर है, इसलिए क्रूड में बढोतरी का असर सीधे अर्थव्यवस्था के लेखे-जोखे पर पड़ता है। कीमतों में यह मजबूती लंबे समय तक बनी रही तो ऊर्जा आयात पर खर्च बढ़ेगा, चालू खाते के संतुलन पर दबाव पड़ेगा और महंगाई का जोखिम बढ़ सकता है।

## अमेरिकी बॉन्ड उपज से डॉलर संपत्तियाँ आकर्षक
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की उपज भी भारतीय निवेशकों के लिए अहम संकेत है। 10 साला बॉन्ड की उपज 4.99% को पार कर 2023 के बाद देखे गये स्तर तक पहुंची थी, हालांकि इसके बाद इसमें थोड़ी नरमी आई। अमेरिका में लगातार बने महंगाई के दबाव और राजकोषीय स्थितियों ने उपज को ऊंचा रखा हुआ है।

जब अमेरिकी उपज ऊंची होती है तो डॉलर में उपलब्ध संपत्तियाँ उभरते बाजारों के निवेश के मुकाबले अधिक आकर्षक लग सकती हैं। इससे विदेशी निवेशक भारत जैसे बाजारों में अपनी हिस्सेदारी घटा सकते हैं, जिससे इक्विटी और रुपये दोनों पर दबाव बढ़ता है। यही कारण है कि अमेरिकी बॉन्ड बाजार का हर बड़ा बदलाव भारतीय बाजार में पूंजी के रुख को लेकर सवाल खड़ा कर देता है।

## महंगाई और फेडरल रिजर्व का असर
फेडरल रिजर्व की 16 सितंबर की बैठक से पहले अमेरिकी महंगाई के नए आंकड़े निवेशकों के लिए अहम पृष्ठभूमि बन गए हैं। अगस्त में उपभोक्ता कीमतें सालाना आधार पर 3.4% रहीं, जो जुलाई के मुकाबले अपरिवर्तित थीं। कोर महंगाई 2.5% से घटकर 2.4% हुई।

मासिक आधार पर उपभोक्ता कीमतों में 0.4% की वृद्धि दर्ज की गई, और इसमें पेट्रोल की ऊंची कीमतों का योगदान खासा रहा। यह रिपोर्ट फेडरल रिजर्व के नीति निर्णय से कुछ दिन पहले आई है, इसलिए ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों पर इसका असर पड़ सकता है। निवेशक अब इस बात का अंदाज़ा लगा रहे हैं कि नीति में क्या संकेत मिलेंगे और उससे वैश्विक पूंजी का रुख कैसे बदलेगा।

## निफ्टी50 की तकनीकी बनावट अभी कमजोर है
तकनीकी पक्ष से निफ्टी50 नए सप्ताह में कमजोर बनावट के साथ प्रवेश कर रहा है। पिछले सप्ताह सूचकांक में 2.02% की गिरावट आई और हाल के 24,774 के स्विंग उच्च स्तर से यह लगभग 5.55% नीचे आ चुका है। यह गिरावट बताती है कि बाजार ने हाल के उच्च स्तर से अहम हिस्सा वापस गंवाया है।

मास्टर कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड के चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रवि सिंह ने बताया कि निफ्टी ने पांचवें लगातार सप्ताह भी गिरावट दर्ज की है और बिकवाली के दबाव में बना हुआ है। 24,774 के हाल के स्विंग उच्च स्तर से लगभग 5.55% की करेक्शन ने व्यापक रुझान की कमजोरी को दिखाया है। सूचकांक 21 दिवसीय और 55 दिवसीय ईएमए दोनों से नीचे कारोबार कर रहा है, इसलिए मंदी का रुझान अभी कायम है।

इन संकेतों का मतलब यह है कि निफ्टी50 को दिशा बदलने के लिए पहले अपनी तकनीकी कमजोरी दूर करनी होगी। 21 दिवसीय और 55 दिवसीय ईएमए से नीचे रहना बिकवाले पक्ष को फायदा देता है, जबकि इन स्तरों के ऊपर टिकाव ही रुझान में सुधार का संकेत माना जाएगा।

## निफ्टी50 के सहायता और प्रतिरोध स्तर
निफ्टी50 के लिए तात्काल सहायता 23,200 पर है, जबकि 23,000 को अधिक महत्वपूर्ण सहायता क्षेत्र माना जा रहा है। अगर सूचकांक इस हिस्से की ओर लगातार बढ़ता है, तो वहां समेकन और संभावित बेस बनने की स्थिति बन सकती है। इसका मतलब है कि खरीदारों को पहले इस क्षेत्र में अपनी पकड़ दिखानी होगी।

ऊपर की ओर 23,600 पहली महत्वपूर्ण रुकावट रहेगी। इस स्तर को निर्णायक रूप से पार करने पर शॉर्ट कवरिंग आ सकती है और सूचकांक 23,900 की ओर जा सकता है। फिलहाल, जब तक मुख्य प्रतिरोध स्तर वापस हासिल नहीं होते, रणनीति में तेजी के चक्कर में खरीदारी के बजाय रैली पर बिकवाली को अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।

## बैंक निफ्टी में भी मंदी का संकेत
बैंक निफ्टी भी दबाव में रहा और 1.33% घटकर अपने तीसरे लगातार साप्ताहिक नुकसान के साथ बंद हुआ। लगभग 90 दिनों तक समेकन में रहने के बाद सूचकांक अपनी ऊपर की ओर झुकी ट्रेंडलाइन के नीचे बंद हुआ, जिससे तकनीकी बनावट कमजोर होने का संकेत मिला।

नकारात्मक एमएसीडी और 21 दिवसीय तथा 55 दिवसीय ईएमए से नीचे स्थिति ने मंदी के नजरिए को और मजबूत किया। हालांकि, सप्ताह के दौरान निचले स्तरों पर खरीदारी दिखी और बैंक निफ्टी अपने साप्ताहिक निम्न स्तर से लगभग 900 अंक की वसूली कर पाया। यह वसूली बताती है कि नीचे के स्तरों पर कुछ खरीदार अभी भी मौजूद हैं।

डॉ. रवि सिंह के अनुसार रणनीति अभी भी ऊपरी तेजी में बिकवाली की है। 57100 से 57200 का क्षेत्र अहम प्रतिरोध है, जो दोनों प्रमुख ईएमए के साथ मिलता है। नीचे की ओर 56000 तात्काल सहायता है और इस स्तर से निर्णायक नीचे टूटने पर 55500 से 55600 के क्षेत्र में और कमजोरी आ सकती है।

## अगले सत्रों में क्या देखना होगा
इस पूरे समीकरण में निवेशकों को तीन बातें साफ दिखती हैं। तेल की कीमतें आयात बिल और महंगाई की चिंता बढ़ा रही हैं, अमेरिकी उपज विदेशी पूंजी के रुख को प्रभावित कर रही है, और घरेलू संस्थागत खरीदारी गिरावट को सीमित करने की कोशिश कर रही है। 14 से 18 सितंबर के सत्र इसी संतुलन के इर्दगिर्द बीतने की संभावना है।

निफ्टी50 और सेंसेक्स ने जो पांच सप्ताह की गिरावट दर्ज की है, वह बाजार को तुरंत कोई आसान राह नहीं देती। फिर भी डीआईआई की खरीदारी, निफ्टी के सहायता स्तर और बैंक निफ्टी में निचले स्तरों पर खरीदारी यह दिखाती है कि दिशा पूरी तरह एकतरफा नहीं है। अगला बड़ा संकेत वैश्विक बाजार, तेल और पूंजी प्रवाह से ही मिलेगा।

## इसका आप पर असर
**निवेशकों के लिए सबसे बड़ा असर बाजार में उतार-चढ़ाव और निफ्टी तथा सेंसेक्स के अहम स्तरों की निगरानी है।**

- **पोर्टफोलियो:** सेंसेक्स और निफ्टी50 ने पांचवें सप्ताह भी गिरावट दर्ज की है। इसलिए शेयरों में अस्थिरता बनी रह सकती है और निवेशकों को कीमतों के उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना होगा।
- **तेल:** ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। ऊर्जा आयात पर निर्भरता के कारण यह आयात बिल, चालू खाते और महंगाई के जोखिम को बढ़ा सकता है।
- **विदेशी धन:** एफआईआई ने चौथे लगातार सप्ताह 1,795 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह बिकवाली जारी रही तो बेंचमार्क सूचकांकों पर दबाव बढ़ सकता है।
- **घरेलू सहारा:** डीआईआई ने 6,419 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यह खरीदारी विदेशी निकास के असर को सीमित करती है और गिरावट को संभालने में मदद करती है।
- **देखने लायक स्तर:** निफ्टी50 में 23,200 और 23,000 सहायता हैं, जबकि 23,600 पहला प्रतिरोध है। बैंक निफ्टी में 56000 सहायता और 57100 से 57200 प्रतिरोध हैं, इसलिए ये स्तर अगली दिशा समझने में मदद करेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
बाजार की कमजोरी का कारण एक घटना नहीं, बल्कि तेल, अमेरिकी उपज और विदेशी पूंजी के मिले-जुले दबाव हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत की आयात निर्भरता से जुड़ी चिंता बढ़ाती हैं, जबकि अमेरिकी बॉन्ड में अधिक उपज विदेशी निवेशकों को डॉलर संपत्तियों की ओर खींच सकती है। पांच सप्ताह की गिरावट और चौथे सप्ताह विदेशी बिकवाली दिखाती है कि ये दबाव कुछ समय से बने हुए हैं।

- **तेल का दबाव:** ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पास है और आपूर्ति तथा भूराजनीतिक तनाव जारी हैं। इससे महंगाई और आयात बिल को लेकर चिंता बनी हुई है।
- **अमेरिकी उपज:** अमेरिकी 10 साला ट्रेजरी बॉन्ड की उपज 4.99% से ऊपर गई थी और 2023 के बाद देखे स्तर तक पहुंची थी। अमेरिका में महंगाई और राजकोषीय स्थितियों ने उपज को ऊंचा रखा है।
- **पूंजी का रुख:** एफआईआई चौथे लगातार सप्ताह 1,795 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं। इसके मुकाबले डीआईआई की 6,419 करोड़ रुपये की खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया।
- **पहले से जारी रुझान:** निफ्टी50 और सेंसेक्स की गिरावट पांच सप्ताह तक फैली है, जबकि बैंक निफ्टी तीसरे सप्ताह गिरा है। इसका नतीजा पांच सप्ताह की गिरावट और तीसरी साप्ताहिक कमी के रूप में सामने आ चुका है।
- **आगे क्या देखना होगा:** फेडरल रिजर्व का 16 सितंबर का नीति निर्णय, महंगाई के आंकड़े और एफआईआई तथा डीआईआई का लेनदेन दिशा तय करेंगे। तकनीकी रूप से निफ्टी50 के 23,200, 23,000 और 23,600 स्तर भी अहम रहेंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. 14 से 18 सितंबर के सप्ताह में बाजार को सबसे ज्यादा दबाव किस बात से मिल रहा है?
महंगा कच्चा तेल, अमेरिकी बॉन्ड उपज और लगातार विदेशी बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है।

### 2. पिछले सप्ताह निफ्टी50 और सेंसेक्स ने क्या किया?
निफ्टी50 2.02% घटकर 23,398 पर बंद हुआ और सेंसेक्स लगभग 2.27% घटकर 74,781 पर रहा।

### 3. एफआईआई और डीआईआई ने कितना लेनदेन किया?
एफआईआई ने 1,795 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि डीआईआई ने 6,419 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

### 4. ब्रेंट क्रूड का भारत पर क्या असर पड़ता है?
भारत ऊर्जा के लिए आयातित तेल पर निर्भर है। 105 डॉलर प्रति बैरल के पास कीमतें आयात बिल, चालू खाता और महंगाई के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

### 5. अमेरिकी महंगाई के आंकड़े क्या दिखाते हैं?
अगस्त में सालाना उपभोक्ता महंगाई 3.4% रही और कोर महंगाई 2.4% हुई। मासिक महंगाई 0.4% रही।

### 6. फेडरल रिजर्व का फैसला कब है?
फेडरल रिजर्व का नीति निर्णय 16 सितंबर को है। महंगाई की रिपोर्ट इस फैसले से कुछ दिन पहले आई है।

### 7. निफ्टी50 के अहम स्तर कौन से हैं?
23,200 तात्काल सहायता और 23,000 अहम सहायता है। 23,600 पहला बड़ा प्रतिरोध है और उसके ऊपर 23,900 दिखाई देता है।

### 8. बैंक निफ्टी की तकनीकी रणनीति क्या है?
57100 से 57200 प्रतिरोध और 56000 तात्काल सहायता है। 56000 टूटने पर 55500 से 55600 तक कमजोरी आ सकती है।

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