# पत्नी के नाम की FD पर कटा TDS किसका रिफंड बनेगा? क्लबिंग नियम की पूरी समझ

> अगर पति अपनी पत्नी के नाम FD कराते हैं और उस पर TDS कट जाता है, तो ब्याज की आय क्लबिंग प्रावधानों के तहत पति की मानी जाती है और रिफंड भी पति को ITR में ही क्लेम करना होता है।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-06-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/patni-ke-nama-ki-fd-para-kata-tds-kisaka-riphnda-banega-klabinga-niyama-ki-puri--1499 · **Language:** Hindi
**Tags:** फिक्स्ड डिपॉजिट TDS, क्लबिंग प्रावधान, पत्नी के नाम FD, इनकम टैक्स रिटर्न, TDS रिफंड, सीनियर सिटीजन टैक्स, PAN नंबर

रिटायरमेंट के बाद अपनी जमा पूंजी को सुरक्षित रखने और टैक्स की देनदारी कुछ कम करने के इरादे से बहुत से लोग गृहिणी पत्नी के नाम पर बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खुलवा देते हैं। योजना सीधी लगती है, लेकिन उलझन तब शुरू होती है जब उसी FD के ब्याज पर बैंक TDS काट लेता है। सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि बैंक ने जो टैक्स काटा, उसका क्लेम आखिर किसके नाम पर बनेगा, पति के या पत्नी के।

## आय किसकी मानी जाएगी, यह क्लबिंग नियम तय करता है
इनकम टैक्स के नियम इस सवाल का जवाब बिल्कुल साफ कर देते हैं। अगर पैसा असल में पति का है और वह पत्नी के नाम पर निवेश किया गया है, तो उस निवेश पर मिलने वाला ब्याज पत्नी की नहीं, बल्कि पति की ही आय गिना जाता है। इसे ही कानून की भाषा में क्लबिंग प्रोविजंस कहते हैं, यानी पत्नी के नाम मिली यह ब्याज आय जुड़कर पति की कुल आय का हिस्सा बन जाती है।

## क्या पत्नी TDS रुकवाने वाला फॉर्म दे सकती हैं?
TrendKia से बातचीत में टैक्स और निवेश एक्सपर्ट बलवंत जैन ने इस पहलू को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि इनकम टैक्स कानून में कुछ शर्तों के साथ ऐसा घोषणा-पत्र जमा करने की छूट है, जिसके बाद बैंक TDS नहीं काटता। सीनियर सिटीजन को यह सुविधा तभी मिलती है जब उनकी कुल आय पर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती।

लेकिन यहीं असली पेच है। इस स्थिति में पत्नी को FD की वास्तविक टैक्सपेयर नहीं माना जाएगा। FD भले ही उनके नाम पर खुली हो, पर ब्याज की आमदनी क्लबिंग प्रावधानों के चलते पति की आय में ही गिनी जाती है। इसी वजह से पत्नी ऐसा कोई फॉर्म जमा नहीं कर सकतीं, जिससे TDS की कटौती रोकी जा सके।

## तो कटा हुआ TDS वापस कैसे आएगा?
घबराने की कोई जरूरत नहीं है, यह रकम कहीं डूबती नहीं। बैंक ने जो TDS काटा है, उसका क्लेम पति अपनी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय कर सकते हैं। ITR फॉर्म में इसके लिए एक खास विकल्प मौजूद रहता है।

तरीका सीधा है। रिटर्न भरते वक्त उस ब्याज की पूरी रकम को अपनी कुल आय में दिखाएं और पत्नी का PAN नंबर पूरी सावधानी से, बिल्कुल सही दर्ज करें। जैसे ही यह जानकारी सही-सही दर्ज होती है, बैंक की ओर से काटा गया TDS सीधे पति के टैक्स अकाउंट में क्रेडिट हो जाता है और रिफंड का रास्ता खुल जाता है।

## इसका आप पर असर
**अगर आपने पत्नी के नाम FD कराई है तो यह आपके सीधे काम की बात है।**

- पत्नी का बिना TDS कटौती वाला फॉर्म इस FD पर नहीं चलेगा, क्योंकि ब्याज की आय कानूनन आपकी (पति की) मानी जाती है।
- कटा हुआ TDS डूबता नहीं, बशर्ते आप ITR में वह ब्याज अपनी कुल आय में दिखाएं और पत्नी का PAN सही दर्ज करें, तभी रिफंड आपके खाते में क्रेडिट होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. पत्नी के नाम FD पर मिले ब्याज को किसकी आय माना जाता है?
अगर पैसा पति का है और निवेश पत्नी के नाम है, तो ब्याज क्लबिंग प्रावधानों के तहत पति की आय में जोड़ा जाता है।

### 2. क्या पत्नी TDS कटने से रोकने वाला घोषणा-पत्र जमा कर सकती हैं?
नहीं, इस मामले में पत्नी FD की वास्तविक टैक्सपेयर नहीं मानी जातीं, इसलिए वे ऐसा फॉर्म जमा नहीं कर सकतीं।

### 3. कटा हुआ TDS वापस कैसे मिलेगा?
पति अपनी ITR भरते समय इस TDS का क्लेम कर सकते हैं, इसके लिए रिटर्न में खास विकल्प मौजूद रहता है।

### 4. रिफंड पाने के लिए ITR में क्या ध्यान रखना जरूरी है?
ब्याज की रकम को अपनी कुल आय में दिखाएं और पत्नी का PAN नंबर बिल्कुल सही दर्ज करें, तभी TDS आपके टैक्स अकाउंट में क्रेडिट होगा।

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