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  "title": "पेंशन फंड नियामक का बड़ा फैसला, एक अक्टूबर 2026 से बदलेंगे नेशनल पेंशन सिस्टम के नियम",
  "summary": "पेंशन नियामक पीएफआरडीए ने नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत पॉइंट ऑफ प्रेजेंस शुल्कों में बड़ा बदलाव किया है जो एक अक्टूबर 2026 से लागू होगा।",
  "content": "नेशनल पेंशन सिस्टम के निवेशकों के लिए शुल्क ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ने पॉइंट ऑफ प्रेजेंस से जुड़े शुल्कों की वसूली की पूरी प्रक्रिया को संशोधित कर दिया है। नया नियम एक अक्टूबर 2026 से प्रभाव में आएगा, जिससे योग्य एनपीएस और एनपीएस लाइट खातों के लिए फीस वसूलने का तरीका बिल्कुल बदल जाएगा। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद ग्राहकों को शुल्क भुगतान के मामले में एक नया ढांचा देखने को मिलेगा।\n\nशुल्क वसूली और ऑनबोर्डिंग फीस के नए नियम\nसंशोधित नियमों के तहत अब निवेशकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पीएफआरडीए चार्ज इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि निवेश कॉमन स्कीम के तहत है या फिर मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क के अंतर्गत आने वाली किसी योजना में किया गया है। इसके अलावा नियामक ने ऑनबोर्डिंग फीस वसूलने के तरीके में भी बदलाव किया है। नई व्यवस्था के मुताबिक पॉइंट ऑफ प्रेजेंस के माध्यम से एनपीएस खाता खोलने पर प्रत्येक परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर के लिए 200 रुपये का एकमुश्त ऑनबोर्डिंग शुल्क लगेगा।\n\nहालांकि ग्राहकों को खाता खोलते समय एक साथ पूरी राशि का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी। सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियां इस शुल्क को प्रति तिमाही 50 रुपये की चार किस्तों में वसूल करेंगी और यह राशि ग्राहकों की एनपीएस होल्डिंग्स से यूनिट्स को कम करके निकाली जाएगी। ग्राहकों से एकत्र की गई इस राशि को तिमाही समाप्त होने के अगले महीने में संबंधित पॉइंट ऑफ प्रेजेंस को स्थानांतरित कर दिया जाएगा।\n\nपॉइंट ऑफ प्रेजेंस और उसकी भूमिका\nपॉइंट ऑफ प्रेजेंस एक अधिकृत मध्यस्थ निकाय होता है जो ग्राहकों को एनपीएस से जुड़ी विभिन्न सेवाएं प्रदान करता है। अपनी अधिकृत क्षमता के आधार पर बैंक, वित्तीय संस्थान और अन्य पंजीकृत संस्थाएं इस भूमिका का निर्वहन कर सकती हैं। ये संस्थाएं ग्राहकों को एनपीएस खाता खुलवाने, अंशदान जमा करने, सेवा अनुरोधों का प्रबंधन करने और अन्य खाता संबंधी गतिविधियों को पूरा करने में मदद करती हैं। इसलिए यह संशोधित ढांचा उन निवेशकों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है जो बैंक शाखाओं या अन्य पीओपी-सहायता प्राप्त चैनलों के माध्यम से अपने खातों का संचालन करते हैं।\n\nएसेट्स अंडर मैनेजमेंट पर वार्षिक शुल्क\nपीएफआरडीए ने योग्य एनपीएस और एनपीएस लाइट योजनाओं के लिए एसेट्स अंडर मैनेजमेंट का 0.20 प्रतिशत वार्षिक पीओपी शुल्क भी निर्धारित किया है। ऐसे शुल्क जो आमतौर पर निवेशक के खाते में एक अलग लेनदेन के रूप में दिखाई देते हैं, उनके विपरीत यह फीस योजनाओं के नेट एसेट वैल्यू के माध्यम से समायोजित की जाएगी। इस राशि की गणना प्रत्येक तिमाही की जाएगी और इसका भुगतान संबंधित पीओपी को कर दिया जाएगा।\n\nलागू होने वाला जीएसटी और अन्य कर नियमों के अनुसार अलग से वसूले जाएंगे। चूंकि इस वार्षिक शुल्क का समायोजन एनएवी के जरिए होता है, इसलिए निवेशकों को अपने कैश बैलेंस से कोई सीधा पैसा कटता हुआ नहीं दिखेगा, लेकिन इस शुल्क का प्रभाव सीधे तौर पर उनकी कुल होल्डिंग्स के मूल्य पर पड़ेगा।\n\nडिजिटल खाता खोलने पर लागू होने वाले शुल्क\nपूरी तरह से डिजिटल और नॉन-फेस-टू-फेस प्रक्रिया के जरिए खोले जाने वाले खातों के लिए नियामक ने अलग से प्रावधान किए हैं। इस प्रकार की ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया के लिए 100 रुपये तक का एकमुश्त शुल्क लागू हो सकता है। यह शुल्क इस बात पर निर्भर करेगा कि पॉइंट ऑफ प्रेजेंस के पंजीकरण के समय पीएफआरडीए द्वारा क्या शर्तें तय की गई थीं और बाद में किस तरह के नियामक निर्देश जारी किए गए हैं।\n\nनए नियमों के आने के बाद ग्राहकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे किस चैनल के जरिए जुड़ रहे हैं। नए निवेशकों को ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी करने से पहले यह जांच करनी चाहिए कि उनका खाता किसी पॉइंट ऑफ प्रेजेंस के माध्यम से खुल रहा है या फिर पूरी तरह से डिजिटल मार्ग से। वहीं मौजूदा ग्राहकों को भी यह समझना जरूरी है कि उनका एनपीएस खाता मूल रूप से किस माध्यम से खोला गया था, क्योंकि इसी बात से यह तय होता है कि उन पर पीओपी शुल्क लागू होंगे या नहीं।\n\nपीएफआरडीए ने सभी पॉइंट ऑफ प्रेजेंस को निर्देश दिया है कि वे अपनी वेबसाइटों पर अपने संशोधित शुल्कों को प्रमुखता से प्रदर्शित करें। इसकी मदद से ग्राहक एक अक्टूबर 2026 से नया खाता खोलने या पीओपी-सहायता प्राप्त एनपीएस सेवाओं का लाभ उठाने से पहले लागू शुल्कों की तुलना कर सकेंगे और लागत का अनुमान लगा सकेंगे।\n\nइसका आप पर असर\nएनपीएस के नए नियमों से खाताधारकों की शुल्क संरचना और कटौतियों पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• भारत में: सभी एनपीएस और एनपीएस लाइट खाताधारकों को अक्टूबर 2026 से नए शुल्क ढांचे का सामना करना होगा। इससे निवेशकों को अपनी खाता ओपनिंग और वार्षिक होल्डिंग लागतों की बेहतर समझ मिलेगी।\n• ऑनबोर्डिंग फीस: नया खाता खोलने पर 200 रुपये का शुल्क अब एकमुश्त नहीं बल्कि 50 रुपये की चार तिमाही किस्तों में कटेगा। इससे शुरुआती निवेश पर एक साथ वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा।\n• वार्षिक शुल्क: एसेट्स अंडर मैनेजमेंट का 0.20 प्रतिशत वार्षिक शुल्क सीधे एनएवी के जरिए समायोजित होगा। इससे निवेशकों को अलग से नकदी भुगतान नहीं करना होगा, लेकिन यह कुल होल्डिंग मूल्य को प्रभावित करेगा।\n• डिजिटल चैनल: पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया से खाता खोलने पर 100 रुपये तक का शुल्क लग सकता है। इससे निवेशकों को डिजिटल बनाम बैंक-सहायता प्राप्त चैनलों के बीच चयन करने में आसानी होगी।\n• पारदर्शिता: सभी पीओपी को अपनी वेबसाइट पर शुल्क प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है। इससे ग्राहक खाता खोलने से पहले लागत की तुलना कर सकेंगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एनपीएस के नए नियम कब से लागू होंगे?\nएनपीएस के नए नियम एक अक्टूबर 2026 से लागू होंगे।\n\n2. नया एनपीएस खाता खोलने पर कितना ऑनबोर्डिंग शुल्क लगेगा?\nपॉइंट ऑफ प्रेजेंस के जरिए खाता खोलने पर प्रत्येक पीआरएएन के लिए 200 रुपये का एकमुश्त ऑनबोर्डिंग शुल्क लगेगा।\n\n3. ऑनबोर्डिंग शुल्क की वसूली कैसे की जाएगी?\nसेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियां इस शुल्क को प्रति तिमाही 50 रुपये की चार किस्तों में एनपीएस होल्डिंग्स से यूनिट्स काटकर वसूल करेंगी।\n\n4. वार्षिक पीओपी शुल्क कितना निर्धारित किया गया है?\nयोग्य योजनाओं के लिए एसेट्स अंडर मैनेजमेंट का 0.20 प्रतिशत वार्षिक पीओपी शुल्क निर्धारित किया गया है।\n\n5. वार्षिक शुल्क का भुगतान किस प्रकार होगा?\nयह शुल्क योजनाओं के नेट एसेट वैल्यू के माध्यम से समायोजित किया जाएगा और प्रत्येक तिमाही संबंधित पीओपी को दिया जाएगा।\n\n6. डिजिटल माध्यम से खाता खोलने पर कितना शुल्क लग सकता है?\nपूरी तरह से डिजिटल और नॉन-फेस-टू-फेस प्रक्रिया से खाता खोलने पर 100 रुपये तक का शुल्क लागू हो सकता है।",
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  "publishedAt": "2026-08-31",
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