# PPF का गणित: 30 साल के अनुशासन से बनेगा 1.54 करोड़ का फंड, फिर 20 साल तक हर महीने पेंशन के बावजूद बचेगा डेढ़ करोड़

> पब्लिक प्रोविडेंट फंड में लंबी अवधि तक हर साल 1.5 लाख रुपये लगाकर रिटायरमेंट पर बड़ा कोष बनाया जा सकता है, जिससे पेंशन भी मिलेगी और मूल राशि भी सुरक्षित रहेगी।

**Category:** मनी · **Published:** 2026-06-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/ppf-ka-ganita-30-sala-ke-anushasana-se-banega-1-54-karora-ka-phnda-phira-20-sala-399

नौकरी के दौरान बचत का ऐसा रास्ता ढूंढना जो जोखिम-मुक्त भी हो और रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी की गारंटी भी दे, हर कमाने वाले की चाहत होती है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF ठीक इसी जरूरत को पूरा करता है। अगर आपने अब तक यह खाता नहीं खुलवाया है, तो जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे, अंत में हाथ उतना ही बड़ा कोष लगेगा। इस लेख में हम सिलसिलेवार समझेंगे कि कैसे लंबी अवधि का अनुशासन आपको रिटायरमेंट पर करोड़पति बना सकता है।

## तीन स्तरों पर टैक्स की बचत
PPF की सबसे बड़ी खूबी इसका टैक्स ढांचा है। यह निवेश EEE श्रेणी में आता है, यानी तीन अलग-अलग मोर्चों पर छूट मिलती है। पहला, जो रकम आप जमा करते हैं वह कर के दायरे से बाहर रहती है; दूसरा, उस पर मिलने वाला ब्याज भी टैक्स फ्री होता है; और तीसरा, मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी राशि भी 100% कर-मुक्त रहती है। कर और निवेश जानकारों के अनुसार, पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वाला करदाता आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत एक वित्तीय वर्ष में 1.50 लाख रुपये तक की जमा पर छूट का दावा कर सकता है, जबकि इस पर मिलने वाला ब्याज धारा 10 के तहत कर के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके साथ-साथ यह निवेश 100 फीसदी जोखिम-मुक्त भी है, क्योंकि इसकी गारंटी सरकार देती है।

## खाता कैसे और कितने में खुलता है
शुरुआत बेहद आसान है। नियमों के मुताबिक कोई भी निवेशक किसी भी बैंक या नजदीकी पोस्ट ऑफिस में महज 100 रुपये जमा कर PPF खाता खुलवा सकता है। हालांकि खाता चालू रखने के लिए हर वित्तीय वर्ष में कम से कम 500 रुपये जमा करना जरूरी है। ऊपरी सीमा की बात करें तो एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक डाले जा सकते हैं, और यह रकम एकमुश्त या साल भर में अधिकतम 12 किस्तों में जमा की जा सकती है। खाते की मूल लॉक-इन अवधि 15 साल की होती है।

## 15 साल की मियाद को आगे बढ़ाने की ट्रिक
असली खेल मैच्योरिटी के बाद शुरू होता है। PPF की मूल अवधि भले 15 साल हो, लेकिन इसे 5-5 साल के ब्लॉक में जितनी बार चाहें बढ़ाया जा सकता है। इसका फायदा यह है कि निवेशक मैच्योरिटी की रकम निकाले बिना ही इस जोखिम-मुक्त विकल्प में अपना पैसा बढ़ता हुआ देखता रहता है। जानकारों का मानना है कि थोड़ी समझदारी और इसी तरह की तरकीबों से एक साधारण निवेशक रिटायरमेंट के बाद मोटा कोष खड़ा कर सकता है।

## 30 साल का हिसाब: ऐसे बनेंगे 1.54 करोड़
एक उदाहरण से बात साफ हो जाएगी। मान लीजिए कोई कमाने वाला व्यक्ति 30 साल की उम्र में PPF खाता खोलता है और 15 साल पूरे होने के बाद तीन बार (हर बार 5 साल के लिए) इसकी अवधि बढ़ाता है। इस तरह वह कुल 30 साल तक लगातार निवेश करता रहेगा। अगर वह हर साल खाते में 1.50 लाख रुपये डालता है और इस पूरी अवधि में औसत ब्याज दर 7.10% सालाना मानी जाए, तो 30 साल बाद उसके खाते में मैच्योरिटी राशि 1,54,50,911 रुपये जमा हो चुकी होगी।

## रिटायरमेंट के बाद की रणनीति: पेंशन भी, पूंजी भी
इतनी बड़ी रकम जुटाने के बाद सवाल उठता है कि इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए। विशेषज्ञ इस मैच्योरिटी राशि को सिस्टमेटिक विदड्रॉल प्लान (SWP) में लगाने की सलाह देते हैं। यह एक इक्विटी आधारित साधन है जो लंबी अवधि में 7% तक का रिटर्न देता है। यानी आप एकमुश्त रकम SWP में डालकर उससे नियमित आमदनी निकाल सकते हैं। गणित यह कहता है कि अगर आप अगले 20 साल तक हर साल 1 लाख रुपये की पेंशन के रूप में निकालते रहें, तब भी 7% के रिटर्न की वजह से आपका मूल फंड घटने के बजाय बना रहता है और अवधि के अंत में भी डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा की पूंजी आपके पास सुरक्षित रहती है। यही PPF और SWP के मेल की असली ताकत है।

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