# पुरानी गाड़ियों के मालिकाना हक ट्रांसफर के नियम बदलेगी केंद्र सरकार, हर्ष मल्होत्रा ने दी जानकारी

> सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि पुरानी गाड़ियों के आरसी ट्रांसफर को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार नई नीतियां तैयार कर रही है। ईज ऑफ व्हीकल ओनरशिप इंडेक्स के अनुसार कई राज्यों में ट्रांसफर में भारी देरी और कागजी झंझट बने हुए हैं।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/purani-gariyon-ke-malikana-haka-transaphara-ke-niyama-badalegi-kendra-sarakara-harsh-malhotra-ne-di-janakari-56644 · **Language:** Hindi
**Tags:** आरसी ट्रांसफर, हर्ष मल्होत्रा, सड़क परिवहन मंत्रालय, वाहन स्वामित्व, आरटीओ नियम, रोड टैक्स

पुरानी गाड़ियों की खरीद और बिक्री के बाद मालिकाना हक ट्रांसफर करने की जटिल प्रक्रिया को केंद्र सरकार जल्द आसान बनाने जा रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बुधवार को इस बात की पुष्टि की कि केंद्र इस संबंध में नए नीतिगत कदमों पर काम कर रहा है। यह घोषणा इंडिया टेक.ओआरजी और कंज्यूमर वॉयस द्वारा तैयार किए गए ईज ऑफ व्हीकल ओनरशिप इंडेक्स के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान की गई। सरकार का उद्देश्य विभिन्न राज्यों के बीच नियमों और प्रक्रियाओं में मौजूद अंतर को खत्म करना है, ताकि खरीदारों और विक्रेताओं को अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।

## राज्यों के बीच नियमों के अंतर से बढ़ती हैं मुश्किलें
वाहन ओनरशिप ट्रांसफर की जमीनी हकीकत पर बोलते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्यों के स्तर पर नियमों और उनके क्रियान्वयन में बड़ा अंतर है। हर्ष मल्होत्रा ने कहा, "स्वामित्व के ट्रांसफर में कई परेशानियां और चुनौतियां सामने आती हैं। केंद्र सरकार इसके लिए नीतियों पर काम कर रही है... राज्यों के बीच नीतियों का एकीकरण और उनका क्रियान्वयन बेहद महत्वपूर्ण है।" उन्होंने जोर दिया कि जब राज्य स्तर की नीतियों और उनके पालन में कमियां रह जाती हैं, तो उपभोक्ताओं को बार-बार एक जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

## ईज ऑफ व्हीकल ओनरशिप इंडेक्स में दक्षिणी राज्य सबसे आगे
वाहन ट्रांसफर और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के मूल्यांकन पर आधारित ईज ऑफ व्हीकल ओनरशिप इंडेक्स में आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु ने सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। यह इंडेक्स नियमों की स्पष्टता, ऑनलाइन प्रणालियों की दक्षता, काम की रफ्तार और पारदर्शिता के आधार पर तैयार किया गया है। इसके अलावा संस्थागत सहयोग, डीलर स्तर पर मिलने वाली मदद और प्रक्रिया की लागत व सामर्थ्य को भी रैंकिंग का पैमाना बनाया गया। इन पैमानों के चलते इन राज्यों में उपभोक्ताओं के लिए ट्रांसफर का अनुभव दूसरे राज्यों की तुलना में काफी बेहतर रहा।

## आरसी ट्रांसफर में राज्यों के बीच भारी अंतर
इंडेक्स से जुड़े अध्ययन में सामने आया है कि विभिन्न राज्यों में रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट ट्रांसफर होने के समय में जमीन-आसमान का फर्क है। उदाहरण के तौर पर आंध्र प्रदेश में आरसी ट्रांसफर का काम सामान्य तौर पर 7 से 10 दिनों के भीतर पूरा हो जाता है, जबकि उत्तर प्रदेश में इसी प्रक्रिया में 30 दिन से भी अधिक का समय लग जाता है। इसके अतिरिक्त अध्ययन में शामिल 15 में से 13 राज्यों में आज भी कागजी दस्तावेजों की मांग की जाती है। इस वजह से ऑनलाइन आवेदन जमा करने के बावजूद आवेदकों को व्यक्तिगत रूप से आरटीओ दफ्तर के चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

## रोड टैक्स की दरों में 66,000 रुपये तक का अंतर
गाड़ियों पर लगने वाले टैक्स और खर्चों के मामले में भी राज्यों के बीच भारी असमानता देखने को मिलती है। रिपोर्ट के अनुसार 6 लाख रुपये की पेट्रोल कार पर लगने वाला रोड टैक्स अलग-अलग राज्यों में पूरी तरह भिन्न है। उत्तर प्रदेश में इस वाहन पर मात्र 3 प्रतिशत रोड टैक्स लिया जाता है, जबकि कर्नाटक और तेलंगाना में यही टैक्स दर 14 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। टैक्स के इस भारी अंतर की वजह से एक ही मॉडल और कीमत की गाड़ी के लिए उपभोक्ताओं को 66,000 रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है।

## केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन के सुझाव
अनावश्यक देरी और औपचारिकताओं को समाप्त करने के लिए रिपोर्ट में सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में आवश्यक संशोधनों की सिफारिश की गई है। इसके तहत पूरी प्रक्रिया के हर चरण के लिए समयसीमा तय करने का प्रस्ताव दिया गया है। सिफारिशों के अनुसार ट्रांसफर आवेदनों को 1 से 2 दिनों में मंजूरी मिलनी चाहिए और 2 से 3 दिनों के भीतर नई आरसी डाक द्वारा भेजी जानी चाहिए। इसके साथ ही एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर के लिए एनओसी जारी करने का काम 2 दिनों में और रोड टैक्स रिफंड का निपटारा 14 दिनों के भीतर पूरा करने का सुझाव दिया गया है।

## सर्वे में सामने आया उपभोक्ताओं का दर्द
इस इंडेक्स के तहत 1,000 खरीदारों और विक्रेताओं के बीच एक विस्तृत सर्वेक्षण भी किया गया। सर्वे के निष्कर्ष बताते हैं कि वाहन बेचने के लंबे समय बाद भी लोग कानूनी उलझनों से मुक्त नहीं हो पाते। लगभग 39 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बताया कि गाड़ी बेचने के बावजूद उनकी आरसी ट्रांसफर का काम लंबित पड़ा रहा। वहीं मात्र 9.6 प्रतिशत लोगों ने माना कि उनका ट्रांसफर कार्य दो हफ्तों के भीतर संपन्न हो सका। इन निष्कर्षों से स्पष्ट है कि डिजिटल सेवाओं के असमान विस्तार और आरटीओ स्तर पर कागजी प्रक्रियाओं के चलते देशभर के वाहन खरीदार और विक्रेता अब भी भारी परेशानियों से जूझ रहे हैं।

## इसका आप पर असर
पुरानी गाड़ी खरीदने या बेचने वालों के लिए आरसी ट्रांसफर की प्रक्रिया में लगने वाले समय और आरटीओ के अनावश्यक चक्करों से राहत मिलने की उम्मीद है।

- **भारत में:** केंद्र सरकार द्वारा नियमों के एकीकरण से देश भर में आरसी ट्रांसफर और एनओसी हासिल करने की प्रक्रिया आसान हो सकेगी। इससे वाहन बेचने के बाद भी नाम न बदलने से होने वाले कानूनी और चालान के जोखिम से सुरक्षा मिलेगी।
- **आंध्र प्रदेश में:** इस राज्य में वाहन ट्रांसफर सबसे तेज गति से हो रहा है और प्रक्रिया 7 से 10 दिनों में पूरी हो जाती है। यहां के निवासियों को अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम प्रशासनिक देरी का सामना करना पड़ता है।
- **उत्तर प्रदेश में:** राज्य में 6 लाख की पेट्रोल कार पर 3 प्रतिशत की दर से सबसे सस्ता रोड टैक्स लगता है। हालांकि आरसी ट्रांसफर में 30 दिन से अधिक लगने के कारण आवेदकों को तय समयसीमा बनने तक लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
- **कर्नाटक और तेलंगाना में:** इन राज्यों में 14 प्रतिशत की ऊंची टैक्स दर के कारण खरीदारों को उत्तर प्रदेश की तुलना में 66,000 रुपये से अधिक खर्च करने पड़ते हैं। प्रस्तावित सुधार लागू होने पर टैक्स रिफंड की प्रक्रिया 14 दिनों में पूरी करने में मदद मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
देशभर में पुरानी गाड़ियों के मालिकाना हक ट्रांसफर में आने वाली अड़चनें अलग-अलग राज्यों के अपने नियमों और अलग प्रक्रियाओं की वजह से पैदा होती हैं। डिजिटल पोर्टल होने के बावजूद कागजी काम और फिजिकल वेरिफिकेशन की अनिवार्यता ने इस प्रक्रिया को धीमा कर दिया है।

- **सीधा कारण:** राज्यों के बीच अलग-अलग मोटर वाहन नियम और आरटीओ में एक समान डिजिटल व्यवस्था का अभाव इस समस्या की मुख्य वजह है। इसके चलते पोर्टल पर ऑनलाइन अर्जी देने के बाद भी कागजात लेकर दफ्तर जाना पड़ता है।
- **कागजी औपचारिकताओं की अनिवार्यता:** अध्ययन के अनुसार 15 में से 13 राज्य आज भी भौतिक दस्तावेजों की मांग करते हैं। पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया न होने से आवेदनों की स्क्रूटनी और वेरिफिकेशन में हफ्तों का समय लग जाता है।
- **टैक्स ढांचे और समयसीमा में भारी अंतर:** रोड टैक्स की दरों में 3 प्रतिशत से 14 प्रतिशत तक का अंतर और ट्रांसफर में 7 से लेकर 30 दिनों से ज्यादा का समय लगने से राज्यों के बीच तालमेल बिगड़ता है। इसी असमानता को पाटने के लिए केंद्र सरकार केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन की योजना बना रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. पुरानी गाड़ियों के ट्रांसफर नियमों पर सरकार ने क्या घोषणा की है?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि केंद्र सरकार पुरानी गाड़ियों के मालिकाना हक ट्रांसफर को आसान बनाने के लिए नए नीतिगत बदलाव ला रही है।

### 2. ईज ऑफ व्हीकल ओनरशिप इंडेक्स में किन राज्यों ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया?
इस इंडेक्स में आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु ने नियमों, डिजिटल सिस्टम और पारदर्शिता के आधार पर सर्वोच्च रैंक हासिल की है।

### 3. विभिन्न राज्यों में आरसी ट्रांसफर में कितना समय लगता है?
आंध्र प्रदेश में यह प्रक्रिया 7 से 10 दिनों में पूरी हो जाती है, जबकि उत्तर प्रदेश में ट्रांसफर होने में 30 दिन से अधिक का समय लगता है।

### 4. राज्यों में रोड टैक्स में कितना फर्क देखा गया है?
6 लाख रुपये की कार पर उत्तर प्रदेश में 3 प्रतिशत और कर्नाटक व तेलंगाना में 14 प्रतिशत टैक्स है, जिससे 66,000 रुपये से ज्यादा का अंतर आ जाता है।

### 5. रिपोर्ट में आरसी ट्रांसफर के लिए क्या समयसीमा तय करने की सिफारिश की गई है?
रिपोर्ट में 1-2 दिन में मंजूरी, 2-3 दिन में आरसी डिस्पैच, 2 दिन में एनओसी और 14 दिन के भीतर रोड टैक्स रिफंड का सुझाव दिया गया है।

### 6. सर्वेक्षण में वाहन बिक्री के बाद ट्रांसफर को लेकर क्या आंकड़े सामने आए?
सर्वे में शामिल 39 प्रतिशत लोगों की आरसी बिक्री के बाद भी पेंडिंग थी, जबकि केवल 9.6 प्रतिशत मामलों में दो सप्ताह में ट्रांसफर पूरा हुआ।

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