सबर कारीगरों ने कोसी घास और खजूर के पत्तों से रचा इतिहास, 90 रुपये से शुरू होने वाले इको-फ्रेंडली हस्तशिल्प की देशभर में धूम जमशेदपुर से 60 किलोमीटर दूर स्थित पुरुलिया गांव में सबर समुदाय के लोग प्राकृतिक घास और पत्तों से टिकाऊ सजावटी उत्पाद तैयार कर रहे हैं। प्रभाकर के मार्गदर्शन में तैयार ये उत्पाद 8 से 10 साल तक चलते हैं और इनकी बिक्री से होने वाला मुनाफा सीधे समुदाय के उत्थान में खर्च होता है। झारखंड के जमशेदपुर शहर से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर बसा पुरुलिया गांव इन दिनों अपनी बेमिसाल हस्तकला के दम पर एक खास पहचान बना रहा है। यहां सबर समुदाय के हुनरमंद कारीगर अपने पारंपरिक कौशल का इस्तेमाल करके कोसी घास और खजूर के पत्तों से बेहतरीन हस्तशिल्प तैयार कर रहे हैं। स्थानीय स्तर से शुरू हुआ सबर हस्तशिल्प का यह सफर अब पूरे देश में अपनी छाप छोड़ रहा है और पर्यावरण अनुकूल वस्तुओं के शौकीनों का ध्यान खींच रहा है। प्रभाकर की पहल और समुदाय का पारंपरिक हुनर सबर समुदाय के इस हस्तशिल्प को नई ऊंचाई तक पहुंचाने और गांव को आत्मनिर्भरता की राह दिखाने में प्रभाकर नाम के व्यक्ति की अहम भूमिका रही है। वे स्थानीय कारीगरों को कोसी घास और खजूर के पत्तों की बारीकियों को समझकर उनसे मजबूत और सुंदर उपयोगी वस्तुएं तैयार करने का बाकायदा प्रशिक्षण देते हैं। प्राकृतिक संसाधनों से तैयार इन उत्पादों की फिनिशिंग और डिजाइन किसी भी आधुनिक सजावटी सामान को टक्कर देती है। दैनिक उपयोग और सजावट की आकर्षक वस्तुएं प्रभाकर के अनुसार, सबर हस्तशिल्प की इस पूरी श्रृंखला में घरेलू सजावट से लेकर दफ्तर और पढ़ाई में काम आने वाली कई वस्तुएं शामिल हैं। कारीगर अपने हाथों से राउंड बॉक्स, फ्लावर पॉट, पेंसिल बॉक्स, वॉल मैट, हैंडबैग, लैंप कवर, टेबल ट्रे और टेबल मैट का निर्माण करते हैं। इसके साथ ही खजूर के पत्तों और कोसी घास के मेल से मजबूत फाइल कवर तथा अन्य उपयोगी उत्पाद भी गढ़े जाते हैं, जो पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त हैं। किफायती दाम, लंबी उम्र और सामाजिक बदलाव हाथ से बनी इन तमाम कलाकृतियों की कीमत केवल 90 रुपये से शुरू होकर 350 रुपये तक रखी गई है, जिससे यह आम खरीदारों की पहुंच में आसानी से आ सके। इन उत्पादों की सबसे बड़ी खूबी इनकी मजबूती है, जो सामान्य रखरखाव के साथ 8 से 10 साल तक बिना खराब हुए चलती हैं, बशर्ते इन्हें सीधे पानी के संपर्क से बचाकर रखा जाए। इस उद्यम की बिक्री से मिलने वाला पूरा मुनाफा सबर समुदाय के सामाजिक और आर्थिक सुधार पर खर्च किया जाता है। खरीदारी या सीधे संपर्क के लिए इच्छुक लोग फोन नंबर 8116059371 पर जानकारी ले सकते हैं। इसका आप पर असर पर्यावरण अनुकूल सजावट और हस्तशिल्प पसंद करने वाले आम उपभोक्ताओं के लिए यह एक टिकाऊ और किफायती विकल्प है। • भारत में: देश भर के खरीदार मात्र 90 से 350 रुपये के बजट में पूरी तरह प्राकृतिक और 8 से 10 साल तक टिकने वाले सजावटी उत्पाद खरीद सकते हैं। दिए गए फोन नंबर पर सीधे ऑर्डर देकर बिचौलियों के बिना आदिवासी समुदाय की आजीविका में सीधा योगदान दिया जा सकता है। • झारखंड में: जमशेदपुर और आसपास के इलाकों के ग्रामीण सबर कारीगरों को स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार और आत्मनिर्भरता मिल रही है। इस पहल से पारंपरिक कला को नया बाजार मिलने के साथ ही स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक सबर समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और विलुप्त होती प्राकृतिक हस्तकला को आधुनिक बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की गई। • सीधा कारण: सबर समुदाय की कमजोर आर्थिक स्थिति में सुधार लाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रभाकर ने प्रशिक्षण की शुरुआत की। इस उद्यम का प्राथमिक लक्ष्य ग्रामीणों को आजीविका के ठोस साधन मुहैया कराना है। • संसाधनों की सुलभता: इलाके में कोसी घास और खजूर के पत्तों की प्रचुरता ने कम लागत में टिकाऊ उत्पाद बनाने का आधार तैयार किया। स्थानीय कच्चे माल के इस्तेमाल से उत्पादन लागत 90 से 350 रुपये के बीच सीमित रखने में मदद मिली। • बाजार की मांग: प्लास्टिक से बने सामान के मुकाबले पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ हस्तशिल्प की बढ़ती मांग ने इस उत्पाद को पहचान दिलाई। टिकाऊ गुणवत्ता और 8 से 10 साल की जीवन अवधि के चलते खरीदारों का विश्वास बढ़ा। सवाल-जवाब 1. सबर हस्तशिल्प के उत्पाद कहां तैयार किए जा रहे हैं? यह उत्पाद झारखंड में जमशेदपुर से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित पुरुलिया गांव में सबर समुदाय द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। 2. इन हस्तनिर्मित उत्पादों को बनाने में किन चीजों का उपयोग होता है? इन सभी कलाकृतियों और घरेलू सामानों को बनाने के लिए मुख्य रूप से कोसी घास और खजूर के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। 3. इस हस्तशिल्प श्रृंखला में कौन-कौन से उत्पाद उपलब्ध हैं? इनमें राउंड बॉक्स, फ्लावर पॉट, पेंसिल बॉक्स, वॉल मैट, हैंडबैग, लैंप कवर, टेबल ट्रे, टेबल मैट और फाइल कवर शामिल हैं। 4. सबर हस्तशिल्प के उत्पादों की कीमत कितनी है? इन प्राकृतिक उत्पादों की कीमत 90 रुपये से शुरू होकर 350 रुपये तक है। 5. इन उत्पादों की उम्र कितनी होती है और इनका रखरखाव कैसे किया जाता है? ये उत्पाद 8 से 10 साल तक चलते हैं, लेकिन इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए पानी से बचाना जरूरी होता है। 6. सबर हस्तशिल्प के उत्पाद खरीदने के लिए संपर्क कैसे करें? खरीदार इन उत्पादों की जानकारी और खरीद के लिए फोन नंबर 8116059371 पर संपर्क कर सकते हैं। प्रेरणा और सबक सबर समुदाय और प्रभाकर का यह सामूहिक प्रयास दर्शाता है कि स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक हुनर के समन्वय से सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाया जा सकता है। • संसाधनों का सही उपयोग: अपने आसपास मिलने वाली घास और पत्तों जैसी साधारण चीजों को मूल्यवान उत्पादों में बदला जा सकता है। प्रकृति के अनुकूल रहकर भी टिकाऊ बिजनेस मॉडल तैयार किया जा सकता है। • सामूहिक विकास की सोच: व्यक्तिगत लाभ के बजाय उद्यम के मुनाफे को पूरे समुदाय के जीवन स्तर को सुधारने में लगाना असली सफलता है। सामाजिक उद्यम से वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। • किफायती और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद: कम कीमत में भी 8 से 10 साल चलने वाला मजबूत सामान बनाकर बड़े ब्रांड्स के सामने मिसाल पेश की जा सकती है। ईमानदारी से किया गया काम दूरदराज के गांव को भी देशव्यापी पहचान दिला सकता है। https://trendkia.com/money/sabar-karigaron-ne-kosi-ghasa-aura-khajura-ke-patton-se-racha-itihasa-90-rupaye-se-shuru-hone-vale-iko-phrendali-hastashilpa-ki-de-53195 TrendKia — Har trend, sabse pehle.