# सरायपाली में समोसा बेचकर रमेश बेहरा ने खड़ा किया कामयाब कारोबार, रोज बिकते हैं 700 समोसे

> महासमुंद के कुटेला चौक पर ठेला लगाने वाले रमेश बेहरा पिछले 10 वर्षों से समोसे बेच रहे हैं और अपनी खास तकनीक के दम पर रोजाना कुछ ही घंटों में 700 समोसे बेच लेते हैं।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/saraipali-men-samosa-bechakara-ramesh-behera-ne-khara-kiya-kamayaba-karobara-roja-bikate-hain-700-samose-42898 · **Language:** Hindi
**Tags:** समोसा बिजनेस, रमेश बेहरा, सरायपाली, महासमुंद, बिजनेस आइडिया, स्ट्रीट फूड

सड़क किनारे लगने वाला एक सामान्य ठेला भी अगर स्वाद और अनुशासन के साथ संचालित किया जाए, तो वह बड़े मुनाफे वाले व्यापार में तब्दील हो सकता है। खानपान से जुड़े छोटे उद्यमों में कम लागत और सरल कार्यप्रणाली के बावजूद ग्राहकों का भरोसा जीतना सबसे अहम माना जाता है। गुणवत्ता, सही तकनीक और लगातार की गई मेहनत से सीमित संसाधनों में भी किस तरह बड़ा ग्राहक वर्ग तैयार किया जा सकता है, इसका उदाहरण छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में देखने को मिलता है।

## कुटेला चौक पर रोज उमड़ती है ग्राहकों की भीड़
महासमुंद जिले के अंतर्गत आने वाले सरायपाली क्षेत्र के कुटेला चौक पर रमेश बेहरा पिछले 10 सालों से अपना ठेला संचालित कर रहे हैं। इलाके में उनकी पहचान समोसा किंग के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनके ठेले पर सुबह से लेकर शाम तक लोगों का आना-जाना बना रहता है। स्थिति यह है कि रोजाना करीब 700 समोसे महज कुछ ही घंटों के भीतर बिक जाते हैं। नाश्ते की तलाश में आने वाले स्थानीय निवासियों के लिए यह ठेला एक भरोसेमंद ठिकाना बन चुका है।

## धीमी आंच पर 20 मिनट तक तलने का अनोखा तरीका
रमेश बेहरा के अनुसार, उनके समोसों की लोकप्रियता किसी गोपनीय फार्मूले की बजाय पकाने की सही पद्धति पर टिकी है। उनका मानना है कि समोसा तैयार करना सरल दिख सकता है, लेकिन सही बनावट हासिल करना एक हुनर है। अत्यधिक गर्म तेल में डालने पर समोसा ऊपर से जल जाता है और भीतर से कच्चा रह जाता है। इस समस्या से बचने के लिए वे हर समोसे को मध्यम आंच पर लगभग 20 मिनट तक तलते हैं।

लंबे समय तक धीमी आंच पर पकने के कारण समोसे बाहर से बेहद खस्ता और अंदर से पूरी तरह पककर तैयार होते हैं। भरावन के लिए आलू के मिश्रण में अमचूर, हल्का गरम मसाला और धनिया पाउडर का संतुलित तड़का लगाया जाता है। यही स्वाद और निरंतरता ग्राहकों को बार-बार उनके पास खींच लाती है।

## 20 रुपए की प्लेट और पारिवारिक हुनर की विरासत
रमेश अपने ग्राहकों को 20 रुपए की प्लेट में तीन बड़े समोसे परोसते हैं। इस थाली में समोसों के साथ छोले, तीखी और मीठी चटनी के अलावा मिर्च और लहसुन से बनी विशेष झटपट चटनी भी शामिल होती है। ग्राहकों का मानना है कि इस स्वाद के पीछे मसालों के सही अनुपात के साथ-साथ ईमानदारी और अपनापन भी शामिल है।

समोसा बनाने का यह हुनर रमेश को अपने पिता से विरासत में मिला, जो पहले इसी जगह पर ठेला लगाते थे। पिता द्वारा शुरू किए गए इस काम को रमेश ने आधुनिक व्यावसायिक समझ और स्वच्छता के साथ आगे बढ़ाया है। एक दशक की निरंतरता के बाद आज उनका ठेला सिर्फ एक नाश्ते की दुकान न रहकर सरायपाली का एक लोकप्रिय स्थानीय ब्रांड बन चुका है।

## इसका आप पर असर
यह समाचार दर्शाता है कि छोटे पूंजी निवेश और खानपान के हुनर के सहारे स्थानीय स्तर पर एक स्थिर स्वरोजगार स्थापित किया जा सकता है।

- **भारत में:** कम लागत वाले पारंपरिक स्ट्रीट फूड व्यवसाय स्वरोजगार तलाश रहे युवाओं के लिए एक व्यवहार्य विकल्प पेश करते हैं। सही गुणवत्ता और साफ-सफाई बनाए रखने पर यह न्यूनतम जोखिम में नियमित आय का स्रोत बन सकता है।
- **महासमुंद में:** सरायपाली के कुटेला चौक पर ग्राहकों को मात्र 20 रुपए में भरपेट और उच्च गुणवत्ता वाला नाश्ता निरंतर मिल रहा है। स्थानीय खाद्य संस्कृति में किफायती दरों पर भरोसेमंद विकल्प मिलने से आम उपभोक्ताओं को सीधा लाभ होता है।
- **छोटे व्यापारियों के लिए:** खाद्य उत्पाद की तैयारी में तकनीकी अनुशासन बनाए रखना ग्राहकों का स्थायी भरोसा जीतने का मुख्य आधार है। धीमी आंच पर पकाने जैसी आसान विधियों से उत्पाद की विशिष्टता बाजार में पहचान दिलाती है।
- **पारिवारिक उद्यमों के लिए:** पारंपरिक पारिवारिक हुनर को समयबद्ध योजना के साथ आगे बढ़ाकर पीढ़ीगत आजीविका को सुरक्षित किया जा सकता है। पिता के काम को निरंतरता देकर युवा पीढ़ी अपना आत्मनिर्भर करियर बना सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
रमेश बेहरा के समोसा कारोबार की यह उल्लेखनीय सफलता स्वाद, मूल्य और पकाने की विशेष तकनीक के सटीक तालमेल की वजह से संभव हुई है।

- **पकाने की विशेष पद्धति:** अधिकांश विक्रेता जल्दबाजी में तेज आंच पर समोसे तलते हैं जिससे वे अंदर से कच्चे रह जाते हैं। रमेश हर बैच को लगभग 20 मिनट तक मध्यम आंच पर पकाते हैं, जिससे समोसा बाहर से खस्ता बनता है।
- **किफायती मूल्य निर्धारण:** 20 रुपए में तीन बड़े समोसों के साथ छोले और दो तरह की चटनियां परोसने का मॉडल हर वर्ग के ग्राहकों को आकर्षित करता है। इस किफायती दर ने कुटेला चौक पर एक विशाल और निष्ठावान ग्राहक आधार खड़ा कर दिया।
- **पारिवारिक अनुभव और निरंतरता:** रमेश ने यह काम अपने पिता से सीखा और पिछले 10 सालों से बिना रुकावट उसी स्थान पर सेवाएं दे रहे हैं। लंबे समय तक स्वाद और सेवा में निरंतरता बनाए रखने से उनका ठेला स्थानीय स्तर पर एक ब्रांड बन गया।

## सवाल-जवाब

### 1. रमेश बेहरा का समोसा ठेला कहां स्थित है?
रमेश बेहरा का समोसा ठेला छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरायपाली के कुटेला चौक पर स्थित है।

### 2. रमेश बेहरा को स्थानीय लोग किस नाम से जानते हैं?
सरायपाली के स्थानीय लोग रमेश बेहरा को 'समोसा किंग' के नाम से जानते हैं।

### 3. रमेश बेहरा के ठेले पर रोजाना कितने समोसे बिकते हैं?
उनके ठेले से रोजाना कुछ ही घंटों के भीतर करीब 700 समोसे बिक जाते हैं।

### 4. समोसे को खस्ता बनाने के लिए रमेश कौन सी तकनीक अपनाते हैं?
वे समोसों को तेज आंच पर तलने के बजाय मध्यम आंच पर करीब 20 मिनट तक धीमी गति से तलते हैं।

### 5. रमेश बेहरा के यहां समोसे की एक प्लेट की क्या कीमत है?
एक प्लेट की कीमत 20 रुपए है, जिसमें तीन बड़े समोसे, छोले, तीखी-मीठी चटनी और मिर्च-लहसुन की चटनी दी जाती है।

### 6. रमेश बेहरा यह समोसा व्यवसाय कितने समय से चला रहे हैं?
रमेश बेहरा पिछले 10 सालों से कुटेला चौक पर यह समोसा ठेला संचालित कर रहे हैं।

### 7. रमेश ने समोसा बनाने का हुनर किससे सीखा?
रमेश ने समोसा बनाने का हुनर अपने पिता से सीखा, जो पहले इसी स्थान पर ठेला लगाते थे।

## प्रेरणा और सबक
सीमित संसाधनों और एक छोटे ठेले से मजबूत कारोबार खड़ा करने की यह यात्रा स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने वालों के लिए व्यावहारिक सीख देती है।

- **गुणवत्ता ही सबसे बड़ा प्रचार है:** किसी फैंसी दुकान की जगह उत्पाद के बुनियादी स्वाद और बनावट पर ध्यान केंद्रित करना स्थायी ग्राहक तैयार करता है। जब आपका उत्पाद उत्कृष्ट होता है, तो विज्ञापन के बिना भी लंबी कतारें लग जाती हैं।
- **काम में धैर्य और अनुशासन:** समोसे को पूरे 20 मिनट तक धीमी आंच पर तलने का नियम बताता है कि जल्दबाजी से बचकर ही सही परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। प्रक्रिया के प्रति यह समर्पण हर व्यवसाय में सफलता की कुंजी है।
- **विरासत का सम्मान और विस्तार:** पिता के छोटे से काम को छोटा न समझकर उसी को अपनी पहचान बनाना और एक दशक तक टिके रहना यह सिखाता है कि लगन से किसी भी साधारण काम को बड़ा रूप दिया जा सकता है।

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