# शेयर बाजार में क्लोजिंग ऑक्शन के नए नियम तय, डेरिवेटिव्स और कीमतों के निपटान पर पड़ेगा सीधा असर

> बाजार नियामक सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सत्र के नियमों में बदलाव किया है, जिसके तहत ट्रेडिंग समय और अनएग्जीक्यूटेड ऑर्डर्स के ट्रांसफर को लेकर नए प्रावधान लागू होंगे।

**Type:** article · **Category:** मनी · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/money/share-market-men-closing-auction-ke-nae-niyama-taya-derivatives-aura-kimaton-ke-nipatana-para-parega-sidha-asara-48104 · **Language:** Hindi
**Tags:** सेबी, क्लोजिंग ऑक्शन, डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग, शेयर बाजार, एनएसई, बीएसई, फ्यूचर्स और ऑप्शंस

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने शेयर बाजारों में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) से जुड़ी पूरी व्यवस्था में अहम फेरबदल किए हैं। इस नए तंत्र का मुख्य उद्देश्य बाजार बंद होने के समय होने वाले सौदों में पारदर्शिता बढ़ाना और अंतिम 30 मिनट के भीतर शेयरों और सूचकांकों के फ्यूचर्स और ऑप्शंस में दिखने वाले अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है। इन संशोधनों का सीधा प्रभाव ट्रेडिंग के समय, सौदों के निपटान की प्रक्रिया और आइसबर्ग ऑर्डर्स के ट्रांसफर पर दिखाई देगा। बीएसई और एनएसई दोनों ही प्रमुख एक्सचेंजों पर यह संशोधित ढांचा लागू किया जाएगा।

## ऑर्डर पूलिंग और क्लोजिंग ऑक्शन की नई कार्यप्रणाली
नए तंत्र के तहत ट्रेडिंग संस्थान और शेयर एक्सचेंज नियमित कारोबारी घंटे समाप्त होने पर सभी खरीद और बिक्री ऑर्डरों को एक साझा पूल में एकत्रित करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए एक ऐसा औसत मूल्य खोजा जाता है जिस पर अधिकतम संख्या में शेयरों का परस्पर मिलान और कारोबार संभव हो सके। इससे पहले की व्यवस्था में, कारोबार बंद होने की घंटी बजने के आखिरी 30 मिनट के दौरान ऑर्डर्स जुटाकर औसत भाव तय किया जाता था। वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और लंदन स्टॉक एक्सचेंज जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसी तरह का ट्रेडिंग मॉडल पहले से उपयोग में लाया जाता रहा है।

एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसैलवन राधाकृष्णन ने कहा, 'सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के ढांचे में संशोधन किया है। 7 दिसंबर से क्लोजिंग ऑक्शन सेशन दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे के बीच चलेगा, जबकि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग दोपहर 3:45 बजे तक जारी रहेगी।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स के लिए एक्सपायरी सेटलमेंट उनके अंतर्निहित घटकों के अंतिम 30 मिनट के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस पर ही आधारित रहेगा। इससे किसी एक नीलामी में तय हुई क्लोजिंग कीमत पर अत्यधिक निर्भरता कम होगी। राधाकृष्णन के अनुसार, अनएग्जीक्यूटेड लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर्स को क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में स्थानांतरित करने से जुड़े बदलाव 8 फरवरी 2027 से प्रभाव में आएंगे।

## कारोबारी समय में बदलाव और विंडो का नया स्वरूप
नियमों की नई समयसीमा के अनुसार, 7 दिसंबर 2026 से नियमित कैश मार्केट में कारोबार दोपहर 3:30 बजे तक बदस्तूर चलेगा। इसके तुरंत बाद, विशेष शेयरों की आधिकारिक क्लोजिंग कीमत निर्धारित करने के लिए दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे तक एक अलग 10 मिनट की ऑक्शन विंडो सक्रिय कर दी जाएगी। पहले की व्यवस्था में नियमित कारोबार का समय दोपहर 3:15 बजे खत्म हो जाता था और क्लोजिंग ऑक्शन सत्र दोपहर 3:15 बजे से 3:35 बजे तक संचालित होता था। नई व्यवस्था में क्लोजिंग ऑक्शन दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे के बीच आयोजित होगा।

इस संशोधन में निवेशकों के लिए ऑर्डर देने की प्रक्रिया को भी विभाजित किया गया है। निवेशक दोपहर 3:31 बजे से 3:36 बजे के दौरान सामान्य ऑर्डर्स और प्राइस-स्पेसिफिक ऑर्डर्स दोनों लगा सकेंगे। दोपहर 3:36 बजे के बाद सामान्य ऑर्डर्स लगाने की खिड़की बंद हो जाएगी, परंतु प्राइस-स्पेसिफिक ऑर्डर्स को दोपहर 3:40 बजे तक लगाने या बदलने की अनुमति रहेगी। इसके अतिरिक्त, नीलामी की तैयारी के लिए लगने वाला समय भी पहले के 5 मिनट से घटाकर दोपहर 3:30 बजे से 3:31 बजे के बीच मात्र 1 मिनट कर दिया गया है।

## रैंडम क्लोजिंग टाइम और अंतिम मिनट की हलचल पर रोक
संशोधित नियमों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू यह है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन दोपहर 3:38 बजे से 3:40 बजे के बीच किसी भी यादृच्छिक यानी रैंडम समय पर समाप्त हो जाएगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य उन ट्रेडर्स को रोकना है जो बिल्कुल अंतिम पलों का इंतजार करते हैं और बड़े बदलाव करके कीमतों को असामान्य रूप से प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। रैंडम क्लोजिंग लागू होने से ट्रेडर्स को अपने सौदे निर्धारित समय से पहले ही लगाने होंगे, जिससे फ्यूचर्स और ऑप्शंस के लिए अधिक संतुलित और वास्तविक औसत मूल्य निकल सकेगा।

डेरिवेटिव्स सेगमेंट के लिए समय सारिणी में भी स्थिति स्पष्ट की गई है। सामान्य कारोबारी दिनों में इंडेक्स फ्यूचर्स और ऑप्शंस में दोपहर 3:45 बजे तक ट्रेडिंग जारी रहेगी। हालांकि, जिस दिन किसी कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी होगी, उस दिन इंडेक्स फ्यूचर्स और ऑप्शंस 15 मिनट पहले यानी दोपहर 3:30 बजे ही बंद हो जाएंगे। यह समय कटौती स्टॉक फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर लागू नहीं होगी, और वे एक्सपायरी वाले दिन भी सामान्य दिनों की तरह दोपहर 3:45 बजे तक ट्रेड होते रहेंगे।

## अनएग्जीक्यूटेड और आइसबर्ग ऑर्डर्स के ट्रांसफर का प्रावधान
अधूरे रह गए सौदों को लेकर नियामक ने चरणबद्ध योजना बनाई है। इसके तहत अधिकांश पेंडिंग प्राइस-स्पेसिफिक ऑर्डर्स को क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। 8 फरवरी 2026 और राधाकृष्णन द्वारा उल्लिखित 8 फरवरी 2027 की समयसीमा के अंतर्गत यह बदलाव धीरे-धीरे लागू होंगे। बड़े आइसबर्ग ऑर्डर्स, जिनमें सामान्यतः पूरे ऑर्डर का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही स्क्रीन पर दिखता है, वे भी क्लोजिंग ऑक्शन में पूरी तरह विजिबल यानी दृश्यमान ऑर्डर के रूप में भेज दिए जाएंगे। यदि कोई निवेशक इस व्यवस्था में शामिल नहीं होना चाहता है, तो उसे ऑप्ट-आउट करने का विकल्प चुनना होगा।

निवेशकों को यह समझना आवश्यक है कि किसी शेयर की क्लोजिंग कीमत केवल उसका अंतिम ट्रेडेड प्राइस नहीं होती। बीएसई और एनएसई दोनों एक्सचेंज सत्र के अंतिम 30 मिनट में हुए सभी सौदों के आधार पर वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) की गणना करते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी शेयर में पूरे दिन ₹1,000 से ₹1,020 के बीच कारोबार हुआ और बाजार बंद होने के ठीक पहले ₹970 पर बहुत छोटे आकार का सौदा हो गया, तो उस अकेले छोटे सौदे को शेयर का आधिकारिक क्लोजिंग भाव नहीं माना जा सकता। अंतिम सौदा कई बार भ्रामक संकेत दे सकता है, जबकि वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस अधिक वॉल्यूम वाले सौदों को अधिक वजन देता है ताकि वास्तविक कीमत की सही तस्वीर सामने आए।

## प्राइस डिस्कवरी, ईटीएफ और मौजूदा ऑक्शन का गणित
जीरोधा के विवरण के अनुसार, संशोधित क्लोजिंग ऑक्शन से प्राइस डिस्कवरी में महत्वपूर्ण सुधार होता है। इससे तय होने वाला अंतिम भाव यह दर्शाता है कि वास्तव में खरीदार और विक्रेता किस स्तर पर सहमत हैं। साथ ही आखिरी मिनटों में कीमतों को कृत्रिम रूप से प्रभावित करना कठिन हो जाता है, बड़े संस्थागत ऑर्डर्स अधिक सुगमता से पूरे किए जा सकते हैं, और इंडेक्स फंड्स तथा ईटीएफ के लिए ट्रैकिंग एरर में भारी कमी आती है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह क्लोजिंग ऑक्शन सेशन व्यवस्था मुख्य रूप से स्टॉक्स और इंडेक्स के फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर लागू होती है, न कि नियमित इक्विटीज पर।

वर्तमान समय में क्लोजिंग ऑक्शन की कार्यप्रणाली को एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए दोपहर 3:15 बजे किसी कंपनी के शेयर का संदर्भ मूल्य ₹1,000 है। ऑक्शन विंडो के भीतर खरीदार और विक्रेता अपनी कीमतें और शेयरों की संख्या दर्ज करते हैं। इसके बाद एक्सचेंज संभावित कीमतों का आकलन करता है और संतुलन मूल्य यानी इक्विलिब्रियम प्राइस का चयन करता है। जिस कीमत पर सबसे अधिक शेयरों का लेन-देन संभव होता है, वही औसत संतुलन मूल्य बन जाता है। इस गणित में जो खरीदार ₹1,010 देने को तैयार है, वह अपनी सीमा के भीतर ₹1,005 या ₹1,000 पर भी सौदा स्वीकार कर लेगा। इसी तरह ₹1,000 पर बेचने को तैयार विक्रेता ₹1,000 या उससे अधिक पर बिक्री के लिए राजी रहेगा। एक्सचेंज इसी तर्क के आधार पर अधिकतम वॉल्यूम वाले स्तर को चुनता है।

## एक्सचेंजों पर संकेतकों की उपलब्धता के नियम
विभिन्न प्रतिभूतियों के लिए बाजार में दिखने वाले डेटा संकेतकों को लेकर स्पष्ट नियम निर्धारित हैं। एनएसई के स्टॉक्स के मामले में, नॉन-सीएएस स्टॉक्स के लिए दोपहर 3:00 बजे के बाद होने वाले पहले ट्रेड से सांकेतिक क्लोजिंग देखी जा सकती है, जबकि इनके लिए रेफरेंस प्राइस और इम्बैलेंस क्वांटिटी लागू नहीं होती। वहीं सीएएस वाले स्टॉक्स के लिए रेफरेंस प्राइस, सांकेतिक क्लोजिंग और इम्बैलेंस क्वांटिटी दोपहर 3:20 बजे से प्रदर्शित होने लगती है।

बीएसई पर लिस्टेड स्टॉक्स के संदर्भ में यह सुविधा केवल सीएएस स्टॉक्स के लिए दोपहर 3:20 बजे से उपलब्ध होती है, और यह मीट्रिक्स नॉन-सीएएस शेयरों पर लागू नहीं होते। फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडर्स केवल रेफरेंस प्राइस और सांकेतिक क्लोजिंग देख सकते हैं, क्योंकि पूरे सत्र में कारोबार अनवरत चलता रहता है इसलिए इम्बैलेंस क्वांटिटी यहां लागू नहीं होती। दूसरी ओर, सूचकांकों यानी इंडेक्स के लिए केवल सांकेतिक क्लोजिंग देखी जा सकती है, जिसकी गणना एक्सचेंज अपने घटक शेयरों के मूल्य के आधार पर करता है।

## इसका आप पर असर
डेरिवेटिव्स और शेयरों में कारोबार करने वाले खुदरा व संस्थागत निवेशकों के लिए बाजार बंद होने के समय सौदों का निष्पादन और मूल्य निर्धारण अब अधिक व्यवस्थित होगा।

- **समय में बदलाव:** सामान्य दिनों में इंडेक्स डेरिवेटिव्स 3:45 बजे तक ट्रेड होंगे, लेकिन एक्सपायरी के दिन दोपहर 3:30 बजे बंद हो जाएंगे। ट्रेडर्स को एक्सपायरी के दिन अपनी पोजीशन 15 मिनट पहले ही रोलओवर या क्लोज करनी होगी।
- **अंतिम मिनट के उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण:** ऑक्शन सत्र 3:38 बजे से 3:40 बजे के बीच रैंडम समय पर समाप्त होगा। इससे आखिरी सेकंड में ऑर्डर डालकर कीमतों को प्रभावित करने वाले जोखिम से सामान्य निवेशकों की सुरक्षा होगी।
- **आइसबर्ग ऑर्डर्स की पारदर्शिता:** बड़े आइसबर्ग ऑर्डर्स अब क्लोजिंग ऑक्शन में पूरी तरह दिखाई देंगे। खुदरा निवेशकों को बड़े संस्थागत सौदों की असली आपूर्ति और मांग का सटीक अंदाजा लग सकेगा।
- **ईटीएफ और म्यूचुअल फंड्स:** क्लोजिंग प्राइस की बेहतर डिस्कवरी से ट्रैकिंग एरर में भारी गिरावट आएगी। इंडेक्स फंड्स और ईटीएफ निवेशकों को उनके निवेश पर वास्तविक बाजार भाव के बेहद करीब एनएवी प्राप्त होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
नियामक ने यह कदम बाजार बंद होने के आखिरी मिनटों में होने वाले अवांछित उतार-चढ़ाव को रोकने और प्रमुख वैश्विक एक्सचेंजों की कार्यप्रणाली के अनुरूप तंत्र तैयार करने के लिए उठाया है।

- **मूल्य विकृति पर रोक:** आखिरी पलों में छोटे सौदे डालकर क्लोजिंग कीमतों को प्रभावित करने की कोशिशें देखी जा रही थीं। नया तंत्र सभी ऑर्डर्स को एक जगह एकत्रित कर संतुलन मूल्य खोजता है ताकि अंतिम भाव वास्तविक मांग को दर्शाए।
- **वैश्विक मानकों का पालन:** न्यूयॉर्क और लंदन जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में क्लोजिंग ऑक्शन का सफल मॉडल पहले से चल रहा है। घरेलू बाजारों में संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अपनाया गया है।
- **पारदर्शिता की आवश्यकता:** छिपे हुए बड़े आइसबर्ग ऑर्डर्स की वजह से कई बार बाजार में वास्तविक लिक्विडिटी का सही अंदाजा नहीं मिल पाता था। ऑक्शन में इन ऑर्डर्स को दृश्यमान बनाकर बाजार को अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन किस समय आयोजित किया जाएगा?
नया क्लोजिंग ऑक्शन सत्र दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे के बीच आयोजित होगा, जो 3:38 से 3:40 के बीच रैंडम समय पर समाप्त हो जाएगा।

### 2. क्या एक्सपायरी के दिन इंडेक्स डेरिवेटिव्स के समय में कोई बदलाव हुआ है?
हां, सामान्य दिनों में इंडेक्स फ्यूचर्स व ऑप्शंस 3:45 बजे तक चलेंगे, लेकिन एक्सपायरी के दिन वे 15 मिनट पहले यानी दोपहर 3:30 बजे बंद हो जाएंगे।

### 3. क्लोजिंग कीमत की गणना किस आधार पर की जाती है?
क्लोजिंग कीमत अंतिम सौदे के बजाय अंतिम 30 मिनट में हुए सभी ट्रेडों के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) पर आधारित होती है।

### 4. आइसबर्ग ऑर्डर्स के साथ ऑक्शन विंडो में क्या बदलाव होगा?
क्लोजिंग ऑक्शन सत्र में आइसबर्ग ऑर्डर्स पूरी तरह से दिखाई देने वाले ऑर्डर्स में बदल जाएंगे, बशर्ते निवेशक ने ऑप्ट-आउट का विकल्प न चुना हो।

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