शेयर बाजार में बड़ी गिरावट की आस छोड़ें, क्वालिटी स्टॉक्स में धीरे-धीरे पूंजी लगाने का बेहतरीन मौका निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड के सीआईओ शैलेश राज भान के अनुसार, बाजार में सुस्ती का यह दौर लंबी अवधि के लिए मजबूत शेयर चुनने का सबसे अनुकूल समय है। इक्विटी बाजार में किसी भारी गिरावट या क्रैश की प्रतीक्षा कर रहे रिटेल निवेशकों के हाथ से एक बड़ा वित्तीय अवसर निकल सकता है। देश के तीसरे सबसे बड़े फंड हाउस, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड के प्रेसिडेंट और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (इक्विटी) शैलेश राज भान ने वेल्थ क्रिएशन को लेकर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया है। उनका स्पष्ट मानना है कि मौजूदा दौर किसी काल्पनिक गिरावट के इंतजार में बैठने के बजाय चुनिंदा, मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध तरीके से पूंजी लगाने का है। आगामी तीन वर्षों के निवेश क्षितिज को ध्यान में रखने वालों के लिए मौजूदा कंसोलिडेशन पिछले दो-तीन कठिन सालों की तुलना में कहीं बेहतर जोखिम-प्रतिफल संतुलन पेश कर रहा है। कंसोलिडेशन के दौर को अवसर में बदलें निवेशक निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड वित्तीय वर्ष 2026 तक 3.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्तियों का प्रबंधन कर रहा है और इसके पोर्टफोलियो में 220 से अधिक म्यूचुअल फंड योजनाएं संचालित हैं। ऐसे में फंड हाउस के निवेश प्रमुख का यह रुख घरेलू इक्विटी रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। एक वित्तीय पॉडकास्ट, द वेल्थ फॉर्मूला में बातचीत करते हुए जब उनसे पूछा गया कि क्या यह नए सिरे से पूंजी आवंटन का अनुकूल समय है, तो उन्होंने सहमति जताते हुए कहा, “हां, काफी हद तक यह सही समय है।” हालांकि, उन्होंने अंधाधुंध खरीदारी से बचने और केवल चुनिंदा मजबूत व्यवसायों पर ही फोकस करने की नसीहत दी है। बाजार की मौजूदा सुस्ती और सीमित दायरे में होने वाले कारोबार को किसी भय के तौर पर देखने के बजाय रणनीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। पिछले दो से तीन साल घरेलू और वैश्विक स्तर पर काफी अनिश्चितताओं से भरे रहे हैं। ऐसे में स्थिरता का यह दौर निवेशकों को घबराहट से दूर रहकर लंबी अवधि के लिए क्वालिटी पोर्टफोलियो बनाने की सुविधा देता है। जो लोग केवल इस उम्मीद में हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे कि सूचकांक और अधिक टूटेंगे, वे भविष्य में आने वाली संभावित तेज रिकवरी और तेजी के चरण से पूरी तरह वंचित रह सकते हैं। अल्पकालिक शोर और वैश्विक चिंताओं से ऊपर उठें वित्तीय बाजारों में हमेशा किसी न किसी प्रकार की अनिश्चितता बनी रहती है। कभी केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों में बदलाव की चर्चाएं हावी होती हैं, कभी भू-राजनीतिक तनाव व युद्ध का माहौल बनता है, तो कभी वैश्विक आर्थिक मंदी की चिंताएं सामने आती हैं। यदि कोई निवेशक प्रत्येक वैश्विक और घरेलू घटनाक्रम के पूरी तरह शांत होने की प्रतीक्षा करेगा, तो वह कभी भी सही समय पर निवेश नहीं कर पाएगा। अत्यधिक सतर्कता अक्सर वेल्थ क्रिएशन की राह में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है। आगामी छह महीनों के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव की चिंता करने के बजाय निवेशकों को अपने चुने हुए व्यवसाय के तीन साल बाद के परिदृश्य का विश्लेषण करना चाहिए। यदि किसी कंपनी का बिजनेस मॉडल, लाभ कमाने की क्षमता, बैलेंस शीट की मजबूती और कर्ज का स्तर अगले तीन वर्षों में आज से कहीं अधिक सशक्त नजर आता है, तो मौजूदा मूल्यांकन पर उसमें निवेश करना एक समझदारी भरा निर्णय साबित होगा। उतार-चढ़ाव को अपना सहयोगी बनाएं ठहरे हुए या गिरावट वाले बाजार से डरने की कतई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि शांत बाजार निवेशकों को सोच-विचार कर फैसले लेने की आजादी देता है। जब इक्विटी सूचकांक रिकॉर्ड ऊंचाई पर तेजी से दौड़ रहे होते हैं, तब निवेशक अक्सर बगैर किसी गहन रिसर्च और वित्तीय विश्लेषण के ऊंची कीमतों पर शेयर खरीद लेते हैं। इसके विपरीत, जब बाजार ठंडा होता है, तब कंपनियों के नकदी प्रवाह, बहीखाते, प्रबंधन की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी क्षमता की बारीकी से जांच करने का पूरा समय मिलता है। उतार-चढ़ाव को शत्रु मानने के बजाय उसे एक रणनीतिक अवसर समझना चाहिए। वर्तमान दौर में निवेश योग्य विकल्पों की संख्या पहले के मुकाबले काफी व्यापक हो गई है। विकास के नए अवसर अब केवल चुनिंदा लार्जकैप दिग्गजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप श्रेणियों में भी कई बेहतरीन और मजबूत कंपनियां उभर रही हैं। विभिन्न मार्केट कैप वाली उत्कृष्ट कंपनियों की पहचान कर उनमें धैर्यपूर्वक निवेश बनाए रखना ही दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण की सबसे प्रभावी रणनीति है। इसका आप पर असर खुदरा निवेशकों को बाजार में बड़ी गिरावट की प्रतीक्षा करने के बजाय अनुशासित और चरणबद्ध तरीके से इक्विटी निवेश जारी रखने की सलाह दी गई है। • भारत में खुदरा निवेशकों के लिए: बाजार में किसी बड़े क्रैश का इंतजार करने से भविष्य की संभावित तेजी छूटने का जोखिम रहता है। निवेशकों को एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) या धीरे-धीरे खरीदारी का रास्ता चुनना चाहिए। • तीन साल के नजरिए पर प्रभाव: छह महीने के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव की चिंता छोड़ लंबी अवधि के फंडामेंटल्स पर ध्यान केंद्रित करना अधिक लाभकारी है। उन कंपनियों को प्राथमिकता दें जिनका बहीखाता और मुनाफा अगले तीन वर्षों में और मजबूत होने की संभावना है। • पोर्टफोलियो विविधीकरण: अवसर अब केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं बल्कि व्यापक बाजार में फैले हैं। निवेशक लार्जकैप के साथ-साथ मजबूत बैलेंस शीट वाली मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी अपना पोर्टफोलियो संतुलित कर सकते हैं। • बाजार की सुस्ती का उपयोग: शांत बाजार निवेशकों को कंपनियों के कर्ज, नकदी प्रवाह और बिजनेस मॉडल की गहन समीक्षा का पर्याप्त समय देता है। बिना सोचे-समझे किसी भी शेयर में पैसा लगाने से बचें और केवल गुणवत्तापूर्ण शेयरों पर ही दांव लगाएं। ऐसा क्यों हुआ निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड के सीआईओ ने यह विचार साझा किए हैं क्योंकि लगातार अनिश्चितताओं के बाद बाजार एक कंसोलिडेशन के दौर में प्रवेश कर चुका है। • कंसोलिडेशन का दौर: पिछले दो से तीन साल के चुनौतीपूर्ण और अत्यधिक उतार-चढ़ाव भरे माहौल के बाद इक्विटी बाजार में स्थिरता आई है। यह ठहराव निवेशकों को उचित वैल्यूएशन पर गुणवत्तापूर्ण संपत्तियों को जमा करने का मौका दे रहा है। • वैश्विक चिंताओं का लगातार बना रहना: ब्याज दरों में फेरबदल, वैश्विक सुस्ती और भू-राजनीतिक तनावों का शोर हमेशा बना रहता है। हर छोटी-बड़ी खबर के सामान्य होने का इंतजार करने से निवेशक अच्छे एंट्री प्वाइंट्स खो देते हैं। • ब्रॉड-बेस्ड विकास के अवसर: भारतीय अर्थव्यवस्था में आर्थिक विस्तार अब केवल कुछ चुनिंदा दिग्गजों तक सीमित नहीं रहा है। मिडकैप और स्मॉलकैप सेक्टरों में कई ऐसी कंपनियां मौजूद हैं जिनके फंडामेंटल मजबूत हैं और वे लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सकती हैं। सवाल-जवाब 1. निप्पॉन इंडिया एमएफ के सीआईओ की मौजूदा बाजार पर क्या सलाह है? उनका सुझाव है कि बाजार में किसी बड़े क्रैश का इंतजार करने के बजाय अगले तीन साल के नजरिए से अच्छी कंपनियों के शेयर धीरे-धीरे खरीदने चाहिए। 2. क्या मौजूदा समय में आक्रामक तरीके से निवेश करना सही है? हां, उन्होंने इसे निवेश शुरू करने का काफी हद तक सही समय बताया है, लेकिन अंधाधुंध खरीदारी के बजाय केवल मजबूत कंपनियों को चुनने की सलाह दी है। 3. निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) कितना है? वित्तीय वर्ष 2026 तक कंपनी 3.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का प्रबंधन कर रही है और उसके पास 220 से अधिक म्यूचुअल फंड स्कीमें हैं। 4. गिरते या शांत बाजार में निवेश करने का क्या फायदा बताया गया है? शांत बाजार में निवेशकों को कंपनियों के बिजनेस मॉडल, मुनाफा, कर्ज और भविष्य की संभावनाओं का गहराई से विश्लेषण करने का पर्याप्त समय मिलता है। 5. निवेशकों को किन श्रेणियों की कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए? सीआईओ के अनुसार अब सिर्फ बड़ी कंपनियों में ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी मजबूत बिजनेस मौजूद हैं, जिनमें लंबी अवधि के लिए निवेश किया जा सकता है। https://trendkia.com/money/sheyara-bajara-men-bari-giravata-ki-asa-chhoren-kvaliti-stoksa-men-dhire-dhire-punji-lagane-ka-behatarina-mauka-45674 TrendKia — Har trend, sabse pehle.