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  "type": "article",
  "title": "आईटीसी लिमिटेड के कारोबार को दो हिस्सों में बांटने की सलाह, क्या एफएमसीजी दिग्गज में आने वाला है बड़ा बदलाव?",
  "summary": "विश्लेषकों का मानना है कि आईटीसी लिमिटेड को अपने तंबाकू और गैर-तंबाकू कारोबार को अलग कर देना चाहिए ताकि शेयरधारकों के लिए छिपी हुई वैल्यू अनलॉक हो सके। कंपनी के शेयरों में पिछले पांच वर्षों से सुस्ती बनी हुई है और बाजार में इसका मूल्यांकन भी कम चल रहा है।",
  "content": "यदि आपने कभी गोल्ड फ्लेक, क्लासिक, इंडिया किंग्स, आशीर्वाद, सनफीस्ट या यिप्पी नूडल्स जैसे ब्रांड्स का इस्तेमाल किया है, तो आप इसके निर्माता आईटीसी लिमिटेड से जरूर परिचित होंगे। तंबाकू उत्पादक के तौर पर अपनी शुरुआत करने वाली यह 116 साल पुरानी कंपनी एफएमसीजी बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। हालांकि, बाजार इस दिग्गज कंपनी पर ज्यादा ध्यान देता नहीं दिख रहा है, और यह कभी भारत की टॉप 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शुमार होने से फिसलकर अब 23वें स्थान पर आ गई है। पिछले पांच वर्षों में आईटीसी के शेयर में नाममात्र की बढ़त देखने को मिली है, जबकि इसके बावजूद कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी 25.99 प्रतिशत और कम प्राइस-टू-इक्विटी अनुपात 17.45x पर बना हुआ है।\n\nबॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर मौजूदा स्थिति और हालिया गिरावट\nवर्तमान में बीएसई पर आईटीसी के शेयर करीब 264 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं, और कंपनी का बाजार पूंजीकरण 3.31 लाख करोड़ रुपये है। यह आंकड़ा इसके 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर 426.50 रुपये से करीब 38 प्रतिशत की भारी गिरावट को दर्शाता है। वास्तव में, यह शेयर अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर 256.25 रुपये के काफी करीब पहुंच चुका है। साल-दर-साल आधार पर देखें तो आईटीसी का शेयर 27 प्रतिशत से अधिक नीचे आ चुका है, जबकि पिछले एक साल में इसमें 35 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। पिछले पांच वर्षों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो इस शेयर में 36 प्रतिशत की जोरदार गिरावट दर्ज की गई है।\n\nतंबाकू से लेकर एफएमसीजी के शीर्ष तक का सफर\nशुरुआत में तंबाकू उद्योग में उतरने के बावजूद, समय के साथ आईटीसी ने खुद को एफएमसीजी क्षेत्र के प्रमुख दावेदार के रूप में विकसित किया है। साल 1996 में कंपनी का बाजार पूंजीकरण 5,571 करोड़ रुपये था, जो 2005 में बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया और 2012 में 2 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को भी पार कर गया। साल 2017 तक आईटीसी देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी बनी रही, जब तक कि हिंदुस्तान यूनिलीवर ने 2018 में पहली बार इसे पीछे नहीं छोड़ दिया। भले ही कंपनी को दूसरे सबसे बड़े एफएमसीजी का स्थान मिला, फिर भी यह देश की टॉप 10 मूल्यवान कंपनियों में शामिल रही। साल 2024 में एक समय ऐसा भी आया जब आईटीसी का बाजार पूंजीकरण 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया था।\n\nबाजार की उदासीनता और मूल्यांकन का गणित\nहालांकि, धीरे-धीरे आईटीसी ने अपनी पुरानी स्थिति गंवा दी है, लेकिन इसके बावजूद यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी का रुतबा बरकरार रखे हुए है। ऐसा प्रतीत होता है कि निवेशकों ने बड़े पैमाने पर इस शेयर से दूरी बना ली है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विपमेंट्स के विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी का तंबाकू कारोबार लगभग 11X 1-वर्षीय फॉरवर्ड ईपीएस पर उपलब्ध है। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार यह मानकर चल रहा है कि तंबाकू कारोबार की कमाई भविष्य में निचले स्तर पर ही बनी रहेगी, गैर-तंबाकू कारोबार का मूल्य कम आंका गया है और इस बिजनेस के प्रति निवेशकों में काफी उदासीनता है।\n\n1-वर्षीय फॉरवर्ड ईपीएस का अर्थ\n1-वर्षीय फॉरवर्ड ईपीएस का मतलब उस प्रति शेयर आय से है जिसके अगले 12 महीनों के दौरान जनरेट होने की उम्मीद है। इसी से हम फॉरवर्ड पी/ई अनुपात निकालते हैं।\n\nअगले 12 महीनों में अपेक्षित ईपीएस = 25 रुपये\n\nऔर 1-वर्षीय फॉरवर्ड पी/ई होगा: 500 रुपये / 25 रुपये = 20x\nइसका सीधा मतलब यह है कि निवेशक उस कमाई का 20 गुना भुगतान कर रहे हैं जो उन्हें उम्मीद है कि कंपनी आने वाले साल में कमाएगी।\n\nकारोबारी विभाजन की वकालत और हॉस्पिटैलिटी का उदाहरण\nविश्लेषकों का मानना है कि तंबाकू कारोबार के लिए उनका 16X 2-वर्षीय फॉरवर्ड पी/ई मल्टीपल उचित प्रतीत होता है। कोटक के विश्लेषकों का दृढ़ विश्वास है कि आईटीसी को अपने तंबाकू और गैर-तंबाकू कारोबार को अलग कर देना चाहिए। उनका मानना है कि इस बिजनेस में 1:2 का विभाजन छिपी हुई वैल्यू को बाहर निकाल सकता है। गौरतलब है कि कारोबार को अलग करने का यह विचार नया नहीं है। आईटीसी इस दिशा में पहले भी कदम उठा चुकी है जब उसने इस साल अपने होटल कारोबार को अलग कर दिया था। आईटीसी ने अपने हॉस्पिटैलिटी बिजनेस को 6 जनवरी 2026 से एक स्वतंत्र कंपनी आईटीसी होटल्स लिमिटेड के रूप में डीमर्ज कर दिया था। प्रत्येक पात्र शेयरधारक को हर 10 आईटीसी शेयरों पर 1 शेयर मिला था, और आईटीसी की इस हॉस्पिटैलिटी बिजनेस में अभी भी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि 60 प्रतिशत हिस्सा पब्लिकली ट्रेड होता है।\n\nअलग होने से शेयरधारकों को मिलने वाले फायदे\nविश्लेषकों का यह भी कहना है कि तंबाकू इकाई उन वैल्यू निवेशकों को आकर्षित करेगी जो स्थिर रिटर्न और हाई डिविडेंड यील्ड की तलाश में रहते हैं। दूसरी ओर, गैर-तंबाकू इकाई ग्रोथ निवेशकों के साथ-साथ उन तमाम निवेशकों को अपनी ओर खींचेगी जो तंबाकू से जुड़ी ईएसजी चिंताओं से बचना चाहते हैं। कुल मिलाकर, विश्लेषकों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 से 2029 के दौरान आईटीसी का तंबाकू सेगमेंट ईबीआईटी स्थिर रहेगा, जबकि गैर-तंबाकू एफएमसीजी सेगमेंट का ईबीआईटी 19 प्रतिशत की सीएजीआर से आगे बढ़ेगा। इसी के आधार पर, आईटीसी के लिए 12 महीने का टार्गेट प्राइस 360 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जो संभावित तेजी का संकेत देता है।\n\nइसका आप पर असर\nआईटीसी लिमिटेड के शेयरों में चल रही सुस्ती और कारोबार विभाजन की संभावनाओं का असर सीधे तौर पर निवेशकों और बाजार की धारणा पर पड़ रहा है।\n\n• भारत में: खुदरा निवेशक जो इस एफएमसीजी दिग्गज में निवेश करना चाहते हैं, वे बाजार के मूल्यांकन और भविष्य के विभाजन के फैसलों पर नजर बनाए रख सकते हैं।\n• शेयरधारकों के लिए: कंपनी के तंबाकू और गैर-तंबाकू कारोबार के अलग होने से शेयरधारकों को लंबी अवधि में बेहतर वैल्यू मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।\n• डिविडेंड चाहने वालों के लिए: तंबाकू कारोबार से जुड़े रहने वाले निवेशक स्थिर लाभांश और डिविडेंड यील्ड का लाभ उठाना जारी रख सकते हैं।\n• ग्रोथ निवेशकों के लिए: गैर-तंबाकू कारोबार के अलग होने पर ग्रोथ निवेशकों को एक ऐसा विकल्प मिल सकता है जो ईएसजी चिंताओं से मुक्त होगा।\n• बाजार सहभागियों के लिए: विश्लेषकों के 360 रुपये के टार्गेट प्राइस को ध्यान में रखते हुए निवेशक अपने पोर्टफोलियो की रणनीति तय कर सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आईटीसी लिमिटेड के शेयर अभी किस स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं?\nबीएसई पर आईटीसी के शेयर लगभग 264 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं।\n\n2. विश्लेषक आईटीसी के कारोबार को किस अनुपात में बांटने की सलाह दे रहे हैं?\nविश्लेषकों का सुझाव है कि कंपनी को अपने तंबाकू और गैर-तंबाकू कारोबार को 1:2 के अनुपात में विभाजित करना चाहिए।\n\n3. आईटीसी का बाजार पूंजीकरण कितना है?\nवर्तमान में आईटीसी का बाजार पूंजीकरण करीब 3.31 लाख करोड़ रुपये है।\n\n4. विश्लेषकों ने आईटीसी के लिए क्या टार्गेट प्राइस तय किया है?\nविश्लेषकों ने आईटीसी के लिए 12 महीने का टार्गेट प्राइस 360 रुपये प्रति शेयर तय किया है।\n\n5. कंपनी ने हाल ही में कौन सा कारोबार अलग किया था?\nआईटीसी ने अपने हॉस्पिटैलिटी बिजनेस को अलग करके इस साल जनवरी में आईटीसी होटल्स लिमिटेड के रूप में डीमर्ज किया था।",
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  "category": "मनी",
  "publishedAt": "2026-09-07",
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    "आईटीसी लिमिटेड",
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