{
  "type": "article",
  "title": "भारतीय स्टेट बैंक ने बढ़ाया कर्ज की दरों का दायरा, जानिए किन लोन पर चढ़ेगी किस्त",
  "summary": "भारतीय स्टेट बैंक ने EBLR, RLLR और चुनिंदा MCLR में इजाफा कर दिया है, जिसके चलते कर्जदारों की मासिक किस्त या भुगतान अवधि बढ़ सकती है।",
  "content": "सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक ने अपने कर्ज पोर्टफोलियो से जुड़ी प्रमुख मानक दरों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। बैंक के इस कदम से एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड लेंडिंग रेट यानी EBLR, रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट यानी RLLR और चुनिंदा अवधियों वाले मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट यानी MCLR में इजाफा दर्ज किया गया है। नई दरों के लागू होने से ऐसे तमाम ग्राहक प्रभावित होंगे जिनके होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन इन बेंचमार्क दरों से जुड़े हैं। ब्याज दर में इस संशोधन के चलते कर्जदारों की मासिक किस्त यानी EMI पर सीधा दबाव आ सकता है अथवा उनके कर्ज भुगतान की समयसीमा लंबी खिंच सकती है।\n\nEBLR और RLLR में हुआ 25 आधार अंकों का इजाफा\nबैंक की ओर से तय की गई नई व्यवस्था के तहत EBLR को 7.90% से बढ़ाकर 8.15% तय किया गया है। इसी तरह खुदरा ग्राहकों के लिए अहम माने जाने वाले RLLR में भी इतनी ही बढ़ोतरी करते हुए इसे 7.50% से बढ़ाकर 7.75% कर दिया गया है। ये दोनों ही संशोधित दरें 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी मानी गई हैं। बैंक की व्यवस्था के अनुसार रेपो दर में किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव का सीधा असर उससे संबंधित होम लोन और रिटेल लोन की दरों पर पड़ता है। ऐसे मामलों में जब बेंचमार्क दर ऊपर जाती है, तो ग्राहकों के सामने दो स्थितियां बनती हैं, या तो उनकी मासिक किस्त की रकम बढ़ जाती है या फिर बैंक उसी किस्त पर लोन चुकाने के कुल महीनों की संख्या बढ़ा देते हैं। हालांकि वास्तविक प्रभाव हर ग्राहक के लोन अनुबंध, रीसेट साइकल और बैंक की शर्तों पर ही तय होगा।\n\nMCLR की दरों में 0.15 प्रतिशत की बढ़ोतरी\nभारतीय स्टेट बैंक ने आंतरिक फंड लागत पर आधारित दर यानी MCLR की कई अवधियों में 0.15 प्रतिशत अंक का इजाफा किया है। हालांकि बैंक ने सबसे छोटी अवधियों के लिए दरों को स्थिर रखा है। ओवरनाइट और एक महीने की अवधि वाला MCLR बिना किसी फेरबदल के 7.85% पर ही बना हुआ है। वहीं दूसरी तरफ तीन महीने की अवधि के लिए दर 8.25% से बढ़कर 8.40% हो गई है। छह महीने के लिए लागू होने वाली दर 8.60% से चढ़कर 8.75% पर पहुंच गई है।\n\nइसी तरह आम तौर पर खुदरा और कॉरपोरेट कर्ज के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले एक साल के MCLR को 8.70% से बढ़ाकर 8.85% कर दिया गया है। दो साल की अवधि के लिए दर 8.75% से बढ़ाकर 8.90% और तीन साल की अवधि के लिए दर 8.80% से बढ़ाकर 8.95% तय की गई है। इस तरह तीन महीने से लेकर तीन साल तक के सभी टेन्योर पर 0.15 प्रतिशत अंक का अतिरिक्त भार जोड़ा गया है।\n\nMCLR का गणित और फिक्स्ड डिपॉजिट की स्थिति\nMCLR असल में वह न्यूनतम आधार दर होती है जिसके नीचे कोई भी वाणिज्यिक बैंक आमतौर पर लोन जारी नहीं कर सकता। इसकी गणना में बैंक के धन जुटाने पर आने वाली लागत, कैश रिजर्व रेशियो बनाए रखने का खर्च और दिन-प्रतिदिन के परिचालन खर्च शामिल होते हैं। ग्राहक की जोखिम श्रेणी और लोन की विशिष्ट शर्तों के हिसाब से अंतिम ब्याज दर में कुछ स्प्रेड जुड़ सकता है।\n\nएक तरफ जहां कर्ज की लागत बढ़ गई है, वहीं दूसरी ओर भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD की ब्याज दरों में कोई फेरबदल नहीं किया है। बैंक में सामान्य नागरिकों के लिए जमा योजनाओं पर 3.05% से 6.60% तक का ब्याज मिल रहा है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह दायरा 3.55% से 7.10% के बीच बना हुआ है। जमा पर मिलने वाली ये दरें 15 दिसंबर 2025 से निरंतर प्रभावी हैं।\n\nइसका आप पर असर\nइस फैसले से भारतीय स्टेट बैंक से कर्ज लेने वाले मौजूदा और नए ग्राहकों की वित्तीय लागत सीधे तौर पर बढ़ जाएगी।\n\n• भारत में: फ्लोटिंग रेट पर होम लोन या ऑटो लोन लेने वाले ग्राहकों पर तुरंत असर दिखेगा। उनकी मासिक ईएमआई बढ़ सकती है या फिर लोन चुकाने की कुल अवधि में इजाफा हो जाएगा।\n• बजट प्रबंधन: घर का मासिक बजट तय करने वाले लोगों को अतिरिक्त ब्याज भुगतान के लिए तैयार रहना होगा। लोन रीसेट की अगली तारीख से यह नई दर खाते पर लागू हो जाएगी।\n• फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशक: बचत करने वाले आम और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दरों में कोई राहत नहीं मिली है। उन्हें 15 दिसंबर 2025 से चली आ रही पुरानी दरों पर ही रिटर्न मिलेगा।\n• नए कर्जदार: नया लोन लेने की योजना बना रहे ग्राहकों को अब पहले के मुकाबले अधिक ब्याज दर पर लोन स्वीकृत किया जाएगा। उन्हें आवेदन से पहले अलग-अलग अवधि के लिए लागू नई दरों का मूल्यांकन करना चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nभारतीय स्टेट बैंक ने अपने लेंडिंग पोर्टफोलियो की लागत संरचना और बाजार की स्थितियों के तालमेल को बनाए रखने के लिए यह संशोधन किया है।\n\n• फंड लागत में बदलाव: बैंक की धन जुटाने की सीमांत लागत और आंतरिक खर्चों में वृद्धि के चलते बेंचमार्क दरों की समीक्षा की गई है। इसी के आधार पर तीन महीने से तीन साल तक के MCLR में 0.15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई।\n• एक्सटर्नल बेंचमार्क समायोजन: EBLR और RLLR में किया गया 25 आधार अंकों का इजाफा नीतिगत ब्याज दरों और बाजार के बाहरी पैमानों के साथ संतुलन साधने के लिए प्रभावी हुआ है। इसके लागू होने से बैंक की उधारी दरें नई बाजार स्थितियों के अनुरूप हो गई हैं।\n• जमा दरों का संतुलन: बैंक ने जमा दरों को 15 दिसंबर 2025 के स्तर पर यथावत रखते हुए केवल कर्ज की दरों में बदलाव किया है। इससे बैंक के लेंडिंग मार्जिन पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिलती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारतीय स्टेट बैंक ने किन-किन ब्याज दरों में बदलाव किया है?\nबैंक ने EBLR, RLLR और तीन महीने से तीन साल तक की अवधि वाली MCLR दरों में बढ़ोतरी की है।\n\n2. EBLR और RLLR की नई दरें क्या हैं?\nसंशोधन के बाद EBLR बढ़कर 8.15% और RLLR बढ़कर 7.75% हो गया है।\n\n3. नई ब्याज दरें किस तारीख से लागू की गई हैं?\nयह संशोधित दरें 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हैं।\n\n4. एक साल की अवधि के लिए नया MCLR कितना तय हुआ है?\nएक साल के लिए MCLR को 8.70% से बढ़ाकर 8.85% कर दिया गया है।\n\n5. क्या ओवरनाइट और एक महीने की MCLR दर में भी कोई बदलाव हुआ है?\nनहीं, ओवरनाइट और एक महीने की MCLR दर बिना किसी बदलाव के 7.85% पर बरकरार है।\n\n6. क्या फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD की ब्याज दरों में कोई संशोधन हुआ है?\nनहीं, FD की ब्याज दरें नहीं बदली गई हैं और 15 दिसंबर 2025 से लागू पुरानी दरें ही प्रभावी हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/money/state-bank-of-india-ne-barhaya-karja-ki-daron-ka-dayara-janie-kina-lona-para-charhegi-kista-47822",
  "category": "मनी",
  "publishedAt": "2026-10-15",
  "tags": [
    "भारतीय स्टेट बैंक",
    "एसबीआई लोन",
    "ब्याज दर",
    "होम लोन ईएमआई",
    "एमसीएलआर",
    "रेपो रेट लोन"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}