त्योहारी सीजन में घर खरीदारों की नई पसंद: बजट, 3BHK स्पेस और रेडी-टू-मूव मकानों पर बढ़ा भरोसा त्योहारी सीजन में घर खरीदने वाले अब सिर्फ ऑफर्स या लोकेशन ही नहीं देख रहे, बल्कि बजट, समय पर पजेशन और 3BHK जैसे बड़े फ्लैट्स को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं। सर्वेक्षणों के अनुसार 50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये का बजट वर्ग सबसे ज्यादा लोकप्रिय बना हुआ है। भारत में त्योहारी सीजन के दौरान रियल एस्टेट बाजार में घर खरीदारों के रुख में उल्लेखनीय बदलाव देखा जा रहा है। मकान खरीदने की योजना बना रहे परिवार अब महज आकर्षक विज्ञापनों, उपहारों या लोकेशन तक सीमित नहीं हैं। इसके बजाय वे मकान की वास्तविक सामर्थ्य, पजेशन मिलने की निश्चित समयसीमा और बिल्डर की विश्वसनीयता को निर्णय का मुख्य आधार बना रहे हैं। संपत्ति की बढ़ती कीमतों और नौकरी की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच ग्राहक अपने मासिक बजट, होम लोन की EMI और लंबी अवधि की देनदारियों का गहन विश्लेषण करने के बाद ही कोई सौदा तय कर रहे हैं। बजट को लेकर बढ़ती सतर्कता और मूल्य वर्ग की प्राथमिकताएं बाजार अध्ययन बताते हैं कि त्योहारी सीजन में मकानों की मांग निरंतर सक्रिय बनी हुई है, लेकिन खरीदारों का चयन पहले से अधिक नपा-तुला हो गया है। कोलीयर्स के होमबाइंग सेंटीमेंट सर्वे 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग आधे उत्तरदाता अगले दो वर्षों के भीतर घर खरीदने की पक्की तैयारी कर रहे हैं। इस सर्वेक्षण में 46% प्रतिभागियों ने 50 लाख रुपये से लेकर 1.5 करोड़ रुपये के बीच की संपत्ति को अपनी प्राथमिकता बताया। वहीं एनारॉक द्वारा 14 प्रमुख शहरों में 8,320 लोगों पर किए गए उपभोक्ता सर्वेक्षण में भी इसी तरह का रुझान सामने आया। इस अध्ययन में 34% उत्तरदाताओं ने 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये के दायरे वाले मकानों को चुना, जबकि 27% खरीदार 1.5 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों के पक्ष में दिखे। हालांकि, बढ़ती कीमतें खरीदारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। सर्वेक्षण में शामिल करीब 65% लोग मकानों के बढ़ते दामों को लेकर कम से कम मध्यम स्तर पर चिंतित थे, जबकि 44% लोगों ने कहा कि वे चिंताओं के बावजूद अपनी तय खरीद योजना को आगे बढ़ाने का इरादा रखते हैं। प्रॉपर्टीड्रोन रियल्टी के को-फाउंडर और CEO निखिल मावले का कहना है कि घर खरीदने में वित्तीय पहलू सबसे निर्णायक साबित हो रहे हैं। उनके अनुसार, 50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये का बजट दायरा ऐसे खरीदारों के एक बड़े वर्ग को आकर्षित करता है जो सही जगह, पर्याप्त जगह, आधुनिक सुविधाओं और बजट के बीच संतुलन चाहते हैं। निखिल मावले ने रेखांकित किया कि खरीदार किसी भी सौदे पर हस्ताक्षर करने से पहले अपनी लोन पात्रता, ब्याज लागत, आपातकालीन बचत और भविष्य की आय की स्थिरता का पूरा आकलन कर रहे हैं। ऐसे में डेवलपर्स यदि व्यावहारिक कीमतें और लचीली भुगतान शर्तें पेश करें, तो वे इस त्योहारी दौर में ग्राहकों को आसानी से जोड़ सकते हैं। रेडी-टू-मूव संपत्तियों पर अधिक भरोसा घर खरीदारों के फैसले में पजेशन मिलने की निश्चितता सबसे मजबूत कारक बनकर उभरी है। कोलीयर्स के अनुसार, 60% से अधिक संभावित खरीदार बिल्कुल नए लॉन्च या निर्माणाधीन परियोजनाओं के मुकाबले पूरी तरह तैयार यानी रेडी-टू-मूव या पजेशन के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। तैयार संपत्तियों का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि खरीदार भुगतान करने से पहले फ्लैट का वास्तविक निरीक्षण कर सकते हैं और निर्माण की गुणवत्ता अपनी आंखों से देख सकते हैं। इसके अलावा पजेशन की स्पष्ट तारीख मिलने से निर्माण कार्य में होने वाली देरी का जोखिम समाप्त हो जाता है। होम लोन लेकर घर खरीदने वाले परिवारों के लिए यह राहत बेहद अहम होती है, क्योंकि निर्माण में देरी होने पर उन्हें एक तरफ मौजूदा घर का किराया और दूसरी तरफ बैंक की EMI दोनों एक साथ भरने पड़ते हैं। सीमित मासिक बजट वाले परिवारों पर यह दोहरा वित्तीय बोझ भारी पड़ता है, जिसके चलते वे तैयार संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, उम्र के आधार पर इस पसंद में थोड़ा अंतर भी दिखा है। 30 वर्ष से कम उम्र के लगभग आधे उत्तरदाता निर्माण के चरण में मौजूद संपत्तियों को खरीदने में सहज दिखे। इसके विपरीत 30 वर्ष से अधिक आयु के केवल 36% खरीदार ही निर्माणाधीन परियोजनाओं में पैसा लगाने के पक्ष में थे। जानकारों का सुझाव है कि किसी भी परियोजना में बुकिंग कराने से पहले ग्राहकों को डेवलपर का पुराना रिकॉर्ड, सभी सरकारी स्वीकृतियां, स्थल पर निर्माण की वास्तविक प्रगति और अनुबंध में दर्ज पजेशन की तारीख की अच्छी तरह पड़ताल करनी चाहिए। बड़े घरों और 3BHK की मांग में निरंतर तेजी घर में अधिक जगह और दीर्घकालिक सुविधा की चाह रखने वाले परिवार बड़े मकानों की ओर रुख कर रहे हैं। एनारॉक के 8,320 उत्तरदाताओं के सर्वेक्षण में 48% लोगों ने 3BHK फ्लैट को अपनी पहली पसंद बताया। वहीं कोलीयर्स के आंकड़े दर्शाते हैं कि दो और तीन बेडरूम वाले अपार्टमेंट्स ने मिलकर खरीदारों की कुल प्राथमिकताओं का 62% हिस्सा साझा किया। दिल्ली-NCR, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे तेजी से बढ़ते रोजगार केंद्रों में बड़े और खुले घरों की मांग विशेष रूप से मजबूत बनी हुई है। इसके उलट मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में प्रति वर्ग फुट ऊंची कीमतों और जगह की कमी के चलते खरीदारों को अपने तय बजट के भीतर रहने के लिए अक्सर छोटे आकार के अपार्टमेंट्स से समझौता करना पड़ता है। श्याम ग्रुप, धोलेरा SIR के डायरेक्टर हार्दिक शाह के मुताबिक, 50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये की सीमा किफायती होने और भविष्य की आकांक्षाओं के बीच एक व्यावहारिक समझौते को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसरों और आर्थिक परिदृश्य को लेकर लोगों के मन में चल रही चिंताओं के कारण खरीदार अब अपनी EMI, बचत और संपत्ति की कुल खरीद लागत पर बहुत बारीक नजर रख रहे हैं। हार्दिक शाह ने यह भी जोड़ा कि खरीदार ऐसे घर चाहते हैं जो घरेलू बजट पर अत्यधिक दबाव डाले बिना परिवार की जरूरतों को पूरा करें। इसके साथ ही ऑफिस से नजदीकी, बेहतर कनेक्टिविटी, सामाजिक बुनियादी ढांचा और बिल्डर की बाजार में साख भी निर्णय को गहराई से प्रभावित कर रही है। डेवलपर्स और ग्राहकों के लिए आगे की राह रियल एस्टेट विश्लेषकों का मानना है कि उपभोक्ता अपनी संपत्ति खरीदने की योजनाओं को टाल नहीं रहे हैं, बल्कि वे जोखिम और वहनीयता को लेकर कहीं अधिक सतर्क हो गए हैं। किसी भी सौदे में उतरने से पहले परिवारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि होम लोन की मासिक किस्त उनकी मौजूदा जीवनशैली, नियमित खर्चों और आपातकालीन बचत को प्रभावित किए बिना आसानी से चुकाई जा सके। केवल त्योहारी छूट या तात्कालिक उपहारों के झांसे में आने के बजाय संपत्ति की कुल लागत की विभिन्न विकल्पों से तुलना करना समझदारी भरा कदम होगा। डेवलपर्स के लिए भी यह समय अपनी रणनीतियों को बाजार की मांग के अनुकूल ढालने का है। प्रतिस्पर्धी कीमतें, व्यावहारिक फ्लोर प्लान, पारदर्शी भुगतान योजनाएं और तय समयसीमा पर मकान सौंपने का वादा ही बाजार की मांग को बनाए रखने की कुंजी साबित होगा। इस त्योहारी सीजन में वही परियोजनाएं सफल होंगी जो खरीदारों को सामर्थ्य, सहूलियत और लंबे समय के मूल्य का वास्तविक संतुलन प्रदान करेंगी। इसका आप पर असर त्योहारी सीजन में मकान खरीदने की योजना बना रहे परिवारों के लिए यह बदलाव सीधे तौर पर वित्तीय सुरक्षा और निर्णय लेने के तरीके को प्रभावित करता है। • मासिक बजट पर प्रभाव: घर खरीदार अब फैंसी ऑफर्स के बजाय अपनी मासिक EMI क्षमता और बचत को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे परिवार अनावश्यक वित्तीय कर्ज के जोखिम से बचकर सुरक्षित निवेश कर सकते हैं। • रेडी-टू-मूव को प्राथमिकता: 60% से अधिक खरीदार तैयार मकानों का चयन कर रहे हैं। इससे निर्माण में होने वाली देरी के दौरान किराया और EMI एक साथ भरने का दोहरा वित्तीय बोझ टल जाता है। • 3BHK की पसंद: लगभग 48% खरीदार 3BHK स्पेस तलाश रहे हैं। परिवारों को सलाह दी जाती है कि वे भविष्य की जरूरतों और कुल लागत की तुलना करके ही बड़े फ्लैट का फैसला लें। • डेवलपर की पड़ताल: खरीदार बुकिंग से पहले प्रोजेक्ट अप्रूवल और पुराने ट्रैक रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रहे हैं। इससे पजेशन में देरी या प्रोजेक्ट अटकने के कानूनी और वित्तीय जोखिम काफी कम हो जाते हैं। ऐसा क्यों हुआ त्योहारी सीजन में खरीदारों की प्राथमिकताओं में आए इस बदलाव के पीछे संपत्ति की बढ़ती कीमतें, निर्माण की अनिश्चितता और रोजगार को लेकर आर्थिक सतर्कता प्रमुख कारण हैं। • बढ़ती संपत्ति कीमतें: देश भर के प्रमुख शहरों में घरों की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। एनारॉक के अनुसार लगभग 65% खरीदार इस मूल्य वृद्धि को लेकर चिंतित हैं, जिसके कारण वे 50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये के व्यावहारिक बजट पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। • निर्माण में देरी का डर: पूर्व में कई परियोजनाओं में हुई देरी के कारण खरीदारों में अविश्वास बढ़ा है। इसी वजह से 60% से अधिक लोग तैयार मकानों को चुन रहे हैं ताकि पजेशन को लेकर कोई संशय न रहे। • आर्थिक व रोजगार संबंधी चिंताएं: आर्थिक अनिश्चितता और नौकरी की सुरक्षा को लेकर चल रही सावधानियों ने खरीदारों को आपातकालीन बचत और EMI के बीच संतुलन बनाने के लिए मजबूर किया है। सवाल-जवाब 1. त्योहारी सीजन में खरीदारों के बीच कौन सा बजट वर्ग सबसे लोकप्रिय है? कोलीयर्स के अनुसार 46% खरीदार 50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये के वर्ग को पसंद कर रहे हैं, जबकि एनारॉक के सर्वेक्षण में 34% ने 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये के मकानों को प्राथमिकता दी। 2. कितने प्रतिशत खरीदार रेडी-टू-मूव या तैयार संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं? कोलीयर्स के आंकड़ों के अनुसार 60% से अधिक संभावित घर खरीदार निर्माणाधीन परियोजनाओं के मुकाबले तैयार या पूर्णता के करीब पहुंच चुकी संपत्तियों को पसंद कर रहे हैं। 3. क्या खरीदार छोटे फ्लैटों की तुलना में बड़े फ्लैट्स पसंद कर रहे हैं? हां, एनारॉक के 8,320 लोगों के सर्वेक्षण में 48% उत्तरदाताओं ने 3BHK को अपनी पहली पसंद बताया, जबकि 2 और 3 बेडरूम फ्लैट्स की कुल हिस्सेदारी 62% दर्ज की गई। 4. निर्माणाधीन परियोजनाओं को लेकर युवा खरीदारों का क्या रुख है? 30 वर्ष से कम उम्र के लगभग 50% उत्तरदाता निर्माण के दौरान संपत्ति खरीदने में सहज हैं, जबकि 30 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में यह आंकड़ा केवल 36% है। 5. क्या बढ़ती संपत्ति कीमतों के कारण लोग घर खरीदने की योजना छोड़ रहे हैं? नहीं, 65% खरीदार बढ़ती कीमतों से चिंतित जरूर हैं, लेकिन 44% लोगों ने कहा कि वे अपनी तय योजनाओं के अनुसार खरीदारी जारी रखेंगे। https://trendkia.com/money/tyohari-sijana-men-ghara-kharidaron-ki-nai-pasnda-bajata-3bhk-spesa-aura-ready-to-move-makanon-para-barha-bharosa-46583 TrendKia — Har trend, sabse pehle.