यूपीआई से बीमा प्रीमियम भरने वालों को बड़ी राहत, नए नियमों के बावजूद नहीं देना होगा कोई एमडीआर शुल्क नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बीमा भुगतानों को एक विशेष श्रेणी में रखते हुए स्पष्ट किया है कि यूपीआई के जरिए बीमा पॉलिसी खरीदने या प्रीमियम भरने पर कोई अतिरिक्त मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं देना होगा। यूपीआई (UPI) के जरिए भुगतान करने वाले देश के करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन बीमा उत्पादों की खरीद करने या उनके प्रीमियम का भुगतान करने पर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लगाया जाएगा। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद डिजिटल माध्यम से अपने इंश्योरेंस प्रीमियम का भुगतान करने वाले ग्राहकों को किसी भी तरह का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। 15 अक्टूबर से लागू होने वाले हैं नए नियम दरअसल, आगामी 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक मूल्य के कुछ विशिष्ट यूपीआई (UPI) भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा के सामने आने के बाद से ही डिजिटल भुगतान करने वाले आम ग्राहकों और व्यापारियों के बीच काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। लोग इस बात को लेकर चिंतित थे कि क्या उनके बीमा प्रीमियम भुगतान, ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म के ऑटो-पे और अन्य जरूरी सेवाओं पर भी अतिरिक्त शुल्क वसूल किया जाएगा। हालांकि, अब इस मामले में स्थिति पूरी तरह साफ कर दी गई है। बीमा क्षेत्र के लिए अलग श्रेणी तय एनपीसीआई (NPCI) ने पॉलिसी धारकों के हितों की रक्षा के लिए बीमा क्षेत्र को एक अलग श्रेणी में वर्गीकृत किया है। इस विशेष वर्गीकरण की वजह से बीमा प्रीमियम के लिए किए जाने वाले भुगतानों को एमडीआर (MDR) के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसका सीधा फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा जो बड़ी राशि का बीमा प्रीमियम भरते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक सालाना 50,000 रुपये का बीमा प्रीमियम यूपीआई (UPI) के जरिए चुकाता है, तो उसे एक भी पैसा अतिरिक्त चार्ज के तौर पर नहीं देना होगा। यदि इस श्रेणी पर सामान्य मर्चेंट चार्ज लागू होता, तो पॉलिसी धारकों को जेब से अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ते। अन्य आवश्यक डिजिटल भुगतानों पर क्या होगा असर? नए नियमों के दायरे में नेटफ्लिक्स (Netflix) जैसे लोकप्रिय ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म के प्रीमियम ऑटो-पे, स्कूल फीस, पेट्रोल पंप और किराने की दुकानों पर होने वाले लेनदेन को लेकर भी लगातार चर्चा चल रही है। हालांकि, ग्राहकों को यह समझना होगा कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट का बोझ हमेशा सीधे तौर पर ग्राहक पर नहीं पड़ता, बल्कि इसे व्यापारियों या सेवा प्रदाताओं को वहन करना होता है। लेकिन बीमा क्षेत्र में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए इसे इस शुल्क से दूर रखा गया है। सरकार का लक्ष्य साल 2033 तक देश के हर नागरिक तक बीमा कवर पहुंचाना है, और इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए डिजिटल भुगतानों को आसान और पूरी तरह निशुल्क रखना बेहद जरूरी माना जा रहा है। इसका आप पर असर यह निर्णय डिजिटल बैंकिंग का उपयोग करने वाले ग्राहकों और पॉलिसीधारकों को आवश्यक वित्तीय सेवाओं पर अतिरिक्त लेनदेन शुल्क से सीधे बचाता है। • प्रीमियम पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं: आपको यूपीआई (UPI) के जरिए अपने बीमा प्रीमियम का भुगतान करने पर कोई अतिरिक्त लेनदेन शुल्क नहीं देना होगा। इसका मतलब है कि आपकी महंगी पॉलिसियों का नवीनीकरण मर्चेंट चार्ज से पूरी तरह मुक्त रहेगा। • बड़े प्रीमियम पर भारी बचत: यदि आप 50,000 रुपये तक का भारी-भरकम प्रीमियम चुकाते हैं, तो आप सैकड़ों रुपये की वह बचत कर पाएंगे जो MDR के तहत चार्ज हो सकती थी। इससे बड़े लेनदेन के लिए डिजिटल भुगतान बेहद किफायती बना रहेगा। • ऑटो-पे की सुविधा जारी रहेगी: आप 15 अक्टूबर के बाद भी बिना किसी छिपे हुए शुल्क की चिंता किए अपनी बीमा पॉलिसियों के ऑटो-पे को जारी रख सकते हैं। इससे बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के आपकी पॉलिसी सक्रिय रहेगी। • आसान डिजिटल नवीनीकरण: पॉलिसीधारक जीवन, स्वास्थ्य या वाहन बीमा का नवीनीकरण करने के लिए किसी भी यूपीआई (UPI) ऐप का उपयोग बेझिझक कर सकते हैं। शुल्क से बचने के लिए आपको किसी ऑफलाइन भुगतान माध्यम पर निर्भर होने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसा क्यों हुआ यूपीआई (UPI) MDR शुल्क से बीमा को बाहर रखने का निर्णय देश में वित्तीय सुरक्षा को बढ़ाने और डिजिटल भुगतानों को सरल बनाने की सरकारी नीति का हिस्सा है। • 15 अक्टूबर के नियमों पर स्पष्टता: 2,000 रुपये से अधिक के कुछ यूपीआई (UPI) भुगतानों पर MDR लागू होने की खबर से बाजार में काफी असमंजस था। एनपीसीआई (NPCI) ने इस विशेष वर्गीकरण के जरिए यह सुनिश्चित किया कि आवश्यक सेवाएं इस बदलाव से प्रभावित न हों। • बीमा कवरेज को बढ़ावा देना: सरकार ने साल 2033 तक देश के हर नागरिक तक स्वास्थ्य और सामान्य बीमा पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए डिजिटल भुगतान के रास्ते से अतिरिक्त शुल्कों की अड़चन को हटाना जरूरी था। • मर्चेंट के बोझ को रोकना: बीमा क्षेत्र को छूट देकर एनपीसीआई (NPCI) ने यह सुनिश्चित किया है कि बीमा कंपनियां ट्रांजैक्शन कॉस्ट का बोझ ग्राहकों पर न डालें। इससे डिजिटल माध्यम से पॉलिसी खरीदना पारंपरिक तरीकों जितना ही किफायती बना रहेगा। सवाल-जवाब 1. क्या 15 अक्टूबर के बाद यूपीआई से बीमा प्रीमियम भरने पर कोई चार्ज लगेगा? नहीं, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बीमा क्षेत्र को विशेष श्रेणी में रखा है, इसलिए यूपीआई से बीमा प्रीमियम भरने पर कोई MDR शुल्क नहीं लगेगा। 2. यूपीआई पर नया एमडीआर (MDR) नियम कब से लागू हो रहा है? यूपीआई भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े नए नियम 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहे हैं। 3. क्या यह नियम 2,000 रुपये से कम के भुगतानों पर भी लागू होगा? नहीं, नए नियमों के तहत केवल 2,000 रुपये से अधिक के विशिष्ट भुगतानों पर ही मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की बात कही गई है। 4. यदि मैं 50,000 रुपये का भारी बीमा प्रीमियम यूपीआई से चुकाता हूं, तो मुझे कितना शुल्क देना होगा? आपको शून्य शुल्क देना होगा। बीमा प्रीमियम भुगतान को पूरी तरह छूट दी गई है, जिससे आपकी पूरी राशि सुरक्षित रहेगी और कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं कटेगा। https://trendkia.com/money/upi-se-bima-primiyama-bharane-valon-ko-bari-rahata-nae-niyamon-ke-bavajuda-nahin-dena-hoga-koi-mdr-shulka-32971 TrendKia — Har trend, sabse pehle.