रूसी तेल खरीदारों पर अमेरिकी संसद में कड़ा विधेयक, 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रूस और ईरान पर पाबंदियों से जुड़ा विधेयक आगे बढ़ गया है, जिससे राष्ट्रपति को रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है। अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में एक नए विधायी कदम को मंजूरी की दिशा में आगे बढ़ाया गया है, जिससे रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले मुल्कों पर व्यापारिक दबाव काफी बढ़ सकता है। इस विधायी प्रस्ताव के कानून बनने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ऐसे देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का व्यापक अधिकार मिल जाएगा। सदन के भीतर हुई आधिकारिक चर्चा के दौरान भारत का नाम भी उन देशों में शामिल रहा जो रूस से ऊर्जा की खरीद जारी रखे हुए हैं। संसदीय प्रक्रिया से जुड़ी शुरुआती बाधाएं हटने के बाद अब यह मसौदा अंतिम मतदान के बेहद करीब पहुंच चुका है। संसदीय समिति की मंजूरी और विधायी प्रक्रिया इस प्रक्रिया के तहत 14 सितंबर को अमेरिकी हाउस रूल्स कमेटी में मतदान कराया गया, जहां इसे 7 के मुकाबले 3 मतों से आगे बढ़ाने का फैसला हुआ। इस विधेयक का आधिकारिक नाम 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' रखा गया है। समिति स्तर पर विचार-विमर्श के दौरान विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा रखे गए कई संशोधनों को खारिज कर दिया गया। इसके अगले दिन यानी 15 सितंबर को दोपहर के आसपास इस नियम पर सदन में व्यापक बहस शुरू हुई, जिसके बाद प्रतिनिधि सभा ने इसे अंतिम पारित करने की तैयारी पूरी की। सीनेट से पहले ही मिल चुका है भारी समर्थन संसद के उच्च सदन यानी अमेरिकी सीनेट ने इस कानून को काफी पहले ही भारी बहुमत से हरी झंडी दे दी थी। सीनेट में 7 अगस्त को हुए मतदान में इस विधेयक के पक्ष में 86 वोट पड़े थे जबकि इसके विरोध में केवल 11 सदस्यों ने मतदान किया था। प्रतिनिधि सभा में यदि यह मसौदा अंतिम रूप से पारित हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए व्हाइट हाउस भेजा जाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर करते ही यह कानून का रूप ले लेगा, जिसके बाद यह पूरी तरह राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर करेगा कि वे किन देशों पर और किस स्तर तक शुल्क लागू करना चाहते हैं। इस प्रस्ताव के तहत किसी भी देश पर सीधे या स्वचालित रूप से 100 प्रतिशत शुल्क नहीं थोपा जाएगा। रूसी कच्चे तेल का आयात और कूटनीतिक तनाव रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने के बाद से भारत ने बड़े पैमाने पर रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद की है। इस ऊर्जा व्यापार के कारण वॉशिंगटन और नई दिल्ली के कूटनीतिक संबंधों में कुछ तनाव भी देखने को मिला है। सदन में चर्चा के दौरान प्रतिनिधि स्टेनी होयर के नेतृत्व में डेमोक्रेटिक सदस्यों ने एक संशोधन पेश किया था, जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों की एक सूची दी गई थी। इस सूची में भारत के साथ-साथ चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान के नाम शामिल किए गए थे। भारतीय निर्यात और द्विपक्षीय व्यापार पर असर यह टैरिफ प्रावधान इसलिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि सीनेट का मूल विधेयक मुख्य रूप से रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े वैश्विक खरीदारों को लक्षित करता है। हालांकि इसमें सूचीबद्ध हर देश पर तुरंत या अनिवार्य रूप से नया कर नहीं लगाया जाएगा, फिर भी भारत के लिए यह जोखिम उसके निर्यात क्षेत्र को सीधे प्रभावित कर सकता है। अमेरिका वर्तमान में भारत के सबसे प्रमुख निर्यात बाजारों में से एक है। यदि किसी भी उत्पाद श्रेणी पर अतिरिक्त सीमा शुल्क लगाया जाता है, तो कई औद्योगिक क्षेत्रों में लागत और कीमतों पर भारी दबाव बन सकता है। यदि अमेरिका इन व्यापारिक पाबंदियों का इस्तेमाल करता है, तो भारतीय निर्यात के प्रमुख खंडों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वित्तीय और व्यापारिक बाजार अब प्रतिनिधि सभा में होने वाले अंतिम मतदान और उसके बाद व्हाइट हाउस के रुख पर नजर बनाए हुए हैं। इस कानून का मूल उद्देश्य आयात शुल्क तय करने में अमेरिकी राष्ट्रपति के विवेकाधिकार को 100 प्रतिशत तक बढ़ाना है। भारत पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस नए कानूनी अधिकार का उपयोग किस तरह करते हैं, जो आने वाले समय में ऊर्जा कूटनीति और द्विपक्षीय वस्तु व्यापार दोनों की दिशा तय कर सकता है। इसका आप पर असर अमेरिकी संसद के इस कदम से भारतीय निर्यातकों और ऊर्जा आयात से जुड़े क्षेत्रों पर संभावित व्यापारिक असर पड़ सकता है। • भारत में: देश की कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में निर्यात लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। यदि राष्ट्रपति नए शुल्कों को मंजूरी देते हैं, तो भारतीय सामान पर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव बढ़ेगा। • ऊर्जा व्यापार: भारत द्वारा रूस से की जाने वाली रियायती तेल खरीद पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी और कूटनीतिक तनाव गहरा सकता है। तेल शोधन कंपनियों को अपनी खरीद रणनीतियों और आपूर्ति स्रोतों की प्राथमिकताओं पर पुनः विचार करना पड़ सकता है। • निर्यात क्षेत्र: अमेरिका को सामान भेजने वाले कई प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को अतिरिक्त सीमा शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। इससे निर्यात ऑर्डर और विदेशी बाजारों में उत्पाद मार्जिन प्रभावित होने की आशंका रहेगी। • नीतिगत बातचीत: वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच होने वाली द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं में नई शर्तें जुड़ सकती हैं। दोनों देशों के नीति निर्माताओं को व्यापार संतुलन और आपूर्ति शृंखला से जुड़े नियमों पर नए सिरे से चर्चा करनी होगी। ऐसा क्यों हुआ यह विधेयक रूस और ईरान के ऊर्जा निर्यात से मिलने वाले राजस्व को रोकने के उद्देश्य से अमेरिकी संसद में पेश किया गया है। • युद्ध का वित्तीय स्रोत रोकना: रूस और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी सांसद रूस के तेल और गैस से होने वाले राजस्व को सीमित करने के उपाय तलाश रहे हैं। इस विधेयक का प्राथमिक लक्ष्य उन देशों पर दबाव बनाना है जो अभी भी मॉस्को से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीद रहे हैं। • द्विपक्षीय विधायी पहल: सीनेट में लिंडसे ओ. ग्राहम के नेतृत्व वाले इस विधेयक को पहले ही 86-11 के भारी मतों से मंजूरी मिल चुकी थी। प्रतिनिधि सभा में भी दोनों प्रमुख दलों के सदस्यों ने ऊर्जा प्रतिबंधों को सख्त करने के लिए इस प्रक्रिया को गति दी। • विपक्षी संशोधनों की अस्वीकृति: डेमोक्रेटिक सांसदों द्वारा चीन, तुर्किये और भारत सहित प्रमुख तेल खरीदारों की सूची जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि रूल्स कमेटी ने इन संशोधनों को खारिज कर विधेयक को राष्ट्रपति के विवेकाधिकार पर केंद्रित रखते हुए आगे बढ़ाया। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में किस विधेयक को आगे बढ़ाया गया है? सदन ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को आगे बढ़ाया है, जिसके तहत 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। 2. हाउस रूल्स कमेटी में इस विधेयक पर मतदान का क्या परिणाम रहा? कमेटी ने 14 सितंबर को 7-3 के मत से इस विधेयक को सदन के पटल पर आगे बढ़ाने की मंजूरी दी। 3. क्या अमेरिकी सीनेट इस कानून को पहले ही पारित कर चुकी है? हां, सीनेट ने 7 अगस्त को 86 के मुकाबले 11 मतों से इस विधेयक को मंजूरी दी थी। 4. क्या इस विधेयक से भारत पर स्वचालित रूप से 100% शुल्क लग जाएगा? नहीं, यह विधेयक किसी भी देश पर स्वतः शुल्क नहीं लगाता, बल्कि यह निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवेकाधिकार पर छोड़ता है। 5. सदन में किस डेमोक्रेटिक नेता के संशोधन में भारत का नाम शामिल था? प्रतिनिधि स्टेनी होयर के नेतृत्व में पेश किए गए संशोधन में भारत, चीन और तुर्किये सहित कई देशों के नाम शामिल थे। https://trendkia.com/money/us-house-advances-russia-and-iran-sanctions-bill-with-tariffs-up-to-100-percent-33364 TrendKia — Har trend, sabse pehle.