अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद वायदा बाजार धड़ाम, डाउ जोन्स और नैस्डैक में भारी गिरावट अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण हासिल करने के बाद बुधवार को वायदा बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक बाजारों में बेचैनी बढ़ गई है। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मचा दी है, जहां डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत के बाद वॉल स्ट्रीट के प्रमुख वायदा सूचकांकों में तेज बिकवाली देखी जा रही है। राजनीतिक सत्ता संतुलन में आए इस अप्रत्याशित बदलाव ने वाशिंगटन में विधायी गतिरोध और कड़े कॉरपोरेट नियमों की आशंकाओं को जन्म दिया है। नतीजतन, एशियाई शेयर बाजारों से लेकर अमेरिकी शेयर बाजार तक निवेशकों की धारणा पर गहरा नकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। वायदा बाजार में तेज गिरावट और सूचकांकों की स्थिति बुधवार के शुरुआती कारोबार में अमेरिकी वायदा बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। डाउ जोन्स वायदा कम से कम 479 अंक फिसलकर 51,416 के निचले स्तर तक चला गया। इसी तरह, प्रौद्योगिकी शेयरों की अगुवाई करने वाले नैस्डैक 100 सूचकांक में 690 अंकों से अधिक का गोता लगा और यह 27,615.75 के निचले स्तर तक लुढ़क गया। व्यापक बाजार का प्रतिनिधित्व करने वाला S&P 500 वायदा भी 1% से अधिक टूटकर 7,490 के निचले स्तर पर पहुंच गया। प्रतिशत के लिहाज से नैस्डैक 100 वायदा में 2% की कमजोरी आई, जबकि S&P 500 वायदा 1.2% और डाउ जोन्स वायदा 0.8% की गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। मध्यावधि चुनाव के परिणाम और राजनीतिक फेरबदल मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस सदन में 52 सीटें जीतकर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है। इसके विपरीत, डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा और वह केवल 40 सीटों पर सिमट गई। सदन में डेमोक्रेट्स ने 6 सीटें जीतीं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को 6 सीटों का नुकसान हुआ। इसके अलावा दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। रिपब्लिकन पार्टी को उम्मीद से कहीं अधिक नुकसान उठाना पड़ा है। इस पराजय के मुख्य कारणों में देश में जीवन यापन की बढ़ती लागत, शुल्क वृद्धि और ईरान संघर्ष के कारण पेट्रोल की कीमतों में आया भारी उछाल माना जा रहा है, जिसने आम नागरिकों में गहरा असंतोष पैदा किया था। चुनाव नतीजों के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि वह इन नतीजों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं और उन्होंने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने का वादा किया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि वह मतपत्र पर होते तो भारी अंतर से जीत हासिल होती। उन्होंने आगे यह भी कहा कि वह राजनीतिक विश्लेषक की भूमिका निभाते हुए उम्मीदवारों की जीत और हार के कारणों की समीक्षा करेंगे। तकनीकी क्षेत्र और नियामकीय नीतियों पर असर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि डेमोक्रेट्स के नियंत्रण से AI तकनीक पर कड़े नियम और कॉरपोरेट जगत पर सख्त निगरानी लागू हो सकती है। इस संभावित बदलाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। दूसरी तरफ, कॉरपोरेट मोर्चे से कुछ सकारात्मक नतीजे भी सामने आए। AMD ने तीसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर आय और राजस्व दर्ज किया, जिसके चलते आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में उसके शेयरों में 3% से अधिक की तेजी आई। इससे सेमीकंडक्टर क्षेत्र की अन्य कंपनियों को भी सहारा मिला। इसके अलावा सुपर माइक्रो कंप्यूटर और एरिस्टा नेटवर्क्स के शेयरों में भी बेहतर नतीजों के दम पर मजबूती देखी गई। एक्सिस डायरेक्ट के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट (डेरिवेटिव्स एंड टेक्निकल रिसर्च) हेमांग गोर ने स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की घबराहट और वैश्विक तकनीकी भिन्नता ने बुधवार को भारतीय बाजारों के लिए कमजोर रुख तय किया, जहां गिफ्ट निफ्टी 30 अंक गिरकर 23,725 पर संकेत दे रहा था। अमेरिकी वायदा और डॉलर में गिरावट आई क्योंकि बाजार डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित विधायी नियंत्रण का आकलन कर रहे थे, जो AI क्षेत्र के कारोबार में उतार-चढ़ाव ला सकता है। वॉल स्ट्रीट का पिछला सत्र और एशियाई बाजारों का रुख वायदा बाजार की गिरावट से ठीक पहले मंगलवार को वॉल स्ट्रीट पर मिलाजुला रुख देखा गया था। उस सत्र में डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 197.26 अंक यानी 0.4% गिरकर 51,786.72 पर बंद हुआ था। इसके उलट, नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स 207.65 अंक यानी 0.83% चढ़कर 25,372.01 पर पहुंचा, और S&P 500 इंडेक्स 27.52 अंक यानी 0.4% की बढ़त के साथ 7,568.92 पर बंद हुआ था। टेक क्षेत्र में तेजी मुख्य रूप से AMD के नतीजों से पहले AI शेयरों में आई रिकवरी के कारण थी, जबकि 10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के 4.95% पर रहने और एप्पल के कमजोर मार्जिन आउटलुक ने डाउ जोन्स पर दबाव बनाए रखा। वैश्विक स्तर पर एशियाई बाजारों में व्यापक गिरावट देखने को मिली। जापान का निक्केई सूचकांक 3% टूट गया, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1% गिरा, जबकि हांगकांग और चीन के बाजारों में 0.50% की गिरावट दर्ज की गई। कॉरपोरेट नतीजों में एप्पल ने प्रति शेयर 2.10 डॉलर की कमाई दर्ज की, जो 1.99 डॉलर के अनुमान से बेहतर थी, जबकि राजस्व 114.5 अरब डॉलर रहा, जो अनुमानित 113.4 अरब डॉलर से अधिक था। हालांकि, अमेज़न, इंटेल और अल्फाबेट के निराशाजनक नतीजों तथा कमजोर मार्गदर्शन के बाद AI खर्चों को लेकर निवेशकों का सतर्क रुख बरकरार है। चार्ल्स श्वाब के नोट के अनुसार, निवेशकों को चिंता है कि AI पर अत्यधिक पूंजीगत खर्च के कारण कंपनियों के फ्री कैश फ्लो को नुकसान पहुंचा है। रोजगार आंकड़े और जिंस बाजार की चाल बाजार की नजर अब अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर टिकी है। अक्टूबर महीने की ADP रोजगार रिपोर्ट जारी होने वाली है, जो सितंबर में 90,000 की मजबूत वृद्धि के बाद आ रही है। हालांकि, सितंबर की नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट में केवल 29,000 की वृद्धि दर्ज की गई थी, जिससे पता चलता है कि ADP रिपोर्ट और आधिकारिक सरकारी आंकड़ों में अंतर देखने को मिलता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि शुक्रवार को जारी होने वाली अक्टूबर की नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट में 65,000 नौकरियों की मध्यम वृद्धि देखने को मिल सकती है। चार्ल्स श्वाब के नोट में यह भी रेखांकित किया गया है कि सरकार के विभाजित होने की संभावना है, और ऐतिहासिक रूप से बाजार विधायी गतिरोध का स्वागत करते हैं क्योंकि इससे कड़े नियमों के लागू होने की गति धीमी पड़ जाती है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार मध्यावधि चुनावों के बाद प्रमुख सूचकांकों में तेजी का रुख रहा है तथा नवंबर और दिसंबर का महीना मौसमी रूप से मजबूत रहता है, हालांकि पुराना इतिहास हमेशा दोहराया जाए यह जरूरी नहीं है। कमोडिटी और मुद्रा बाजार में भी हलचल देखी जा रही है। कच्चे तेल की कीमतें दबाव में हैं, जहां अमेरिकी WTI क्रूड लगभग सपाट रहकर 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है और ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर उतार-चढ़ाव दिखा रहा है। प्राकृतिक गैस की कीमतों में 1% की गिरावट आई है, जबकि गैसोलीन के दाम ऊंचे बने हुए हैं। सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से हाजिर सोना 1% उछलकर 3,975 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया, वहीं हाजिर चांदी 1.5% से अधिक चढ़कर 50.50 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गई। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर पांच सप्ताह के निचले स्तर 101.5 पर आ गया है। इसका आप पर असर अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में सत्ता परिवर्तन और वायदा बाजार की तेज गिरावट का सीधा असर वैश्विक शेयर बाजारों, ऊर्जा की कीमतों और सुरक्षित निवेश साधनों पर पड़ेगा। • भारतीय शेयर बाजारों पर: गिफ्ट निफ्टी में 30 अंकों की गिरावट के कारण घरेलू बाजारों में सतर्क शुरुआत देखने को मिल सकती है। निवेशकों को विशेष रूप से आईटी और तकनीकी शेयरों में आने वाले कुछ दिनों तक अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए। • सुरक्षित निवेश साधनों पर: सोने की कीमतें 3,975 डॉलर प्रति औंस और चांदी 50.50 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई हैं। यदि राजनीतिक अनिश्चितता जारी रहती है तो कीमती धातुओं में निवेश करने वालों को बढ़त देखने को मिल सकती है। • मुद्रा और डॉलर की चाल पर: अमेरिकी डॉलर पांच सप्ताह के निचले स्तर 101.5 पर खिसक गया है। डॉलर में कमजोरी से उभरते बाजारों की मुद्राओं को तात्कालिक राहत मिल सकती है, हालांकि बॉन्ड यील्ड की चाल पर नजर रखना जरूरी होगा। • ऊर्जा और ईंधन लागत पर: ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर और WTI 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। पेट्रोल और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर परिवहन और महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत और बाजार में आई अचानक गिरावट के पीछे आर्थिक असंतोष और तकनीकी नीतियों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता मुख्य कारण है। • चुनावी हार के बुनियादी कारण: मतदाताओं में जीवन यापन की ऊंची लागत, हालिया शुल्क वृद्धि और ईरान संघर्ष की वजह से पेट्रोल की कीमतों में आई भारी तेजी को लेकर गहरा आक्रोश था। इन कारकों ने सीधे तौर पर रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष को कमजोर किया और सदन में सीटों का नुकसान कराया। • तकनीकी नियमों की आशंका: सदन में डेमोक्रेट्स का पूर्ण नियंत्रण आने से निवेशकों को यह अंदेशा है कि बड़ी टेक कंपनियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विकास पर कड़े नियम थोपे जा सकते हैं। इस डर से नैस्डैक 100 वायदा में 690 अंकों से अधिक की तेज गिरावट आई। • विधायी गतिरोध का परिदृश्य: ट्रंप प्रशासन और डेमोक्रेटिक नियंत्रण वाली कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव की संभावना बन गई है। हालांकि इतिहास में ऐसे गतिरोध से नियमों में अचानक बदलाव रुकने का फायदा मिलता रहा है, तात्कालिक रूप से बाजार ने अनिश्चितता को तरजीह दी है। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में किस पार्टी ने नियंत्रण हासिल किया? डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस सदन में 52 सीटें जीतकर पूर्ण नियंत्रण हासिल किया, जिसमें उन्होंने 6 सीटों की बढ़त दर्ज की। 2. चुनाव नतीजों के बाद वायदा बाजार में कितनी गिरावट आई? डाउ जोन्स वायदा कम से कम 479 अंक गिरकर 51,416 पर आ गया और नैस्डैक 100 वायदा 690 अंक टूटकर 27,615.75 पर पहुंच गया। 3. रिपब्लिकन पार्टी की हार के प्रमुख कारण क्या रहे? जीवन यापन की बढ़ती लागत, शुल्क वृद्धि और ईरान संघर्ष के चलते पेट्रोल की बढ़ी कीमतों से जनता में नाराजगी मुख्य कारण रही। 4. टेक शेयरों और AI पर निवेशकों को क्या चिंता है? निवेशकों को डर है कि डेमोक्रेट्स के नियंत्रण से AI तकनीक पर कड़े नियम और कॉरपोरेट कंपनियों पर सख्त निगरानी लागू हो सकती है। 5. कमोडिटी बाजार में सोने और कच्चे तेल की क्या स्थिति है? हाजिर सोना 1% बढ़कर 3,975 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के पास बना हुआ है। https://trendkia.com/money/us-madhyavadhi-chunava-men-democrats-ki-jita-ke-bada-vayada-bajara-dharama-dow-jones-aura-nasdaq-men-bhari-giravata-56182 TrendKia — Har trend, sabse pehle.