# बैड एप्पल्स रिव्यू (2026): साओर्से रोनन की डार्क कॉमेडी स्कूल सिस्टम की खोलती है पोल

> स्वीडिश निर्देशक जोनातन एट्ज़लर की फिल्म बैड एप्पल्स में साओर्से रोनन एक बेबस टीचर की भूमिका में नजर आती हैं, जहां एक उपद्रवी बच्चे के गायब होने पर व्यवस्था की विसंगतियां खुलकर सामने आती हैं।

**Type:** article · **Category:** मूवी रिव्यू · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/movie-review/bad-apples-rivyu-2026-saoirse-ronan-ki-darka-komedi-skula-sistama-ki-kholati-hai-pola-33908 · **Language:** Hindi
**Tags:** बैड एप्पल्स, साओर्से रोनन, फिल्म रिव्यू, हॉलीवुड कॉमेडी, ब्रिटिश सिनेमा, डार्क कॉमेडी

फिल्म बैड एप्पल्स का रिव्यू (2026) करते हुए यह साफ नजर आता है कि एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक की जिंदगी कितनी तनावपूर्ण हो सकती है। स्वीडिश फिल्म निर्माता जोनातन एट्ज़लर ने अपनी पहली अंग्रेजी फीचर फिल्म के जरिए ब्रिटेन की स्कूली व्यवस्था पर एक तीखा और मनोरंजक व्यंग्य कसा है। कहानी के केंद्र में मारिया नाम की एक निष्ठावान शिक्षिका है, जिसका किरदार साओर्से रोनन ने निभाया है। मारिया बच्चों का भविष्य संवारने का सपना देखती है, लेकिन उसकी पूरी ऊर्जा और समय डैनी नाम के एक बेहद हिंसक और अनियंत्रित छात्र को संभालने में ही खत्म हो जाता है। डैनी की लगातार हरकतों और गुस्से के कारण पूरी क्लास अव्यवस्था की गिरफ्त में रहती है, जिससे बाकी बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ता है।

## सिस्टम की अनदेखी और तनावपूर्ण माहौल
कक्षा में लगातार बढ़ते तनाव के बीच मारिया को स्कूल प्रशासन से कोई सहारा नहीं मिलता। स्कूल का हेडटीचर उसकी रोजमर्रा की परेशानियों को नजरअंदाज करता है, जबकि दखलअंदाजी करने वाले अभिभावक शिक्षकों के हर छोटे-बड़े फैसले पर सवाल खड़े करते हैं। स्थिति तब बेहद गंभीर रूप ले लेती है जब डैनी से जुड़े एक हिंसक झगड़े में एक दूसरे छात्र की हड्डी टूट जाती है। इस हादसे के बाद व्यवस्था की लाचारी देखकर मारिया ऐसा कदम उठाने का फैसला करती है जिसकी कोई भी सामान्य पाठ्यचर्या इजाजत नहीं दे सकती।

## तहखाने में विशेष क्लास और अप्रत्याशित राहत
डैनी के आतंक से आजिज आकर मारिया उसे अपने घर के अंधेरे तहखाने में बंद कर देती है, ताकि उसे अकेले में खास तरीके से सुधारा जा सके। यह कहानी का सबसे चौंकाने वाला मोड़ है, लेकिन असली विडंबना इसके बाद सामने आती है। जब डैनी स्कूल नहीं पहुंचता, तो बाकी छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों में कोई घबराहट नहीं होती, बल्कि सभी चैन की सांस लेते हैं। पूरा कस्बा उस बच्चे के अचानक गायब होने पर सवाल उठाने के बजाय खामोश रहना पसंद करता है, जिससे समाज की गहरी संवेदनहीनता उजागर होती है।

## स्क्रीनप्ले और कॉमेडी का संतुलन
पटकथा लेखक जेस ओ'केन ने कहानी को बेहद चुटीले और धारदार अंदाज में लिखा है। फिल्म की शुरुआत एक सेब तोड़ने वाले प्लांट के दृश्य से होती है, जो इस पुरानी कहावत की ओर इशारा करती है कि एक सड़ा हुआ सेब पूरी टोकरी को खराब कर देता है। हालांकि यह रूपक बहुत सीधा लगता है, लेकिन कहानी के भीतर छिपा गहरा व्यंग्य और हास्य दर्शकों को लगातार बांधे रखता है। यह एक ऐसी प्रफुल्लित करने वाली कॉमेडी है जो अपनी सीमाओं को लांघकर दर्शकों को हंसाने का दम रखती है।

## कलाकारों का बेहतरीन अभिनय
फिल्म के तीसरे हिस्से में कई ऐसे मोड़ आते हैं जो तर्क की सीमाओं को चुनौती देते हैं, लेकिन साओर्से रोनन का संवेदनशील अभिनय पूरी कहानी को हकीकत से जोड़े रखता है। रोनन के बारे में एक समीक्षक ने कहा कि इन दिनों उन्हें ऐतिहासिक परिधानों से बाहर देखना दुर्लभ है, और उन्हें हास्य भूमिका में देखना काफी ताज़ा और रोमांचक लगता है। रोनन के भीतर की हताशा और बेबसी साफ झलकती है, फिर भी उनके किरदार के प्रति सहानुभूति बनी रहती है क्योंकि वह अपने छात्रों का भला चाहती हैं। बाल कलाकार एडी वॉलर ने डैनी के रूप में खौफनाक लेकिन भीतर से कोमल बच्चे का किरदार बखूबी निभाया है। वहीं निया ब्राउन ने पॉलीन नाम की होनहार छात्रा के रोल में बेहतरीन काम किया है, जिसकी अति-उत्साही आदतें मारिया की योजनाओं को बिगाड़ने का खतरा पैदा करती हैं।

## इसका आप पर असर
यह फिल्म आधुनिक शिक्षा प्रणाली के तनाव और शिक्षकों की अनदेखी मानसिक स्थिति पर रोशनी डालती है।

- **सिनेमा प्रेमियों के लिए:** यह फिल्म साओर्से रोनन को उनके सामान्य ऐतिहासिक किरदारों से अलग एक ब्लैक कॉमेडी अवतार में देखने का बेहतरीन मौका देती है। दर्शक एक अनोखी कहानी और सामाजिक व्यंग्य का लुत्फ उठा सकते हैं।
- **शिक्षकों और अभिभावकों के लिए:** यह कहानी स्कूलों में हिंसक छात्रों के प्रबंधन और प्रशासनिक अनदेखी के कड़वे सच को सामने लाती है। यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और कक्षा में अनुशासन के जटिल मुद्दों पर चर्चा को बढ़ावा देती है।
- **मनोरंजन के नजरिए से:** फिल्म की तेज गति और असामान्य मोड़ दर्शकों को बांधकर रखते हैं। यह गंभीर सामाजिक संदेश को हास्य के जरिए प्रभावी ढंग से पेश करती है।
- **ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली पर नजर:** कहानी यह दिखाती है कि कैसे व्यवस्था की कमियों के कारण कई बार शिक्षक अकेले संघर्ष करने पर मजबूर हो जाते हैं। दर्शक इस व्यवस्था की कमियों और उसके परिणामों को बेहतर समझ सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
फिल्म की कहानी आधुनिक स्कूली ढांचे में शिक्षकों पर बढ़ते दबाव और अनियंत्रित व्यवहार की अनदेखी से उपजी परिस्थितियों को दर्शाती है।

- **अत्यधिक मानसिक तनाव:** कक्षा में एक हिंसक छात्र के लगातार व्यवधान और प्रशासनिक मदद की कमी के कारण मारिया चरम हताशा की स्थिति में पहुंच जाती है। उसके पास स्थिति को संभालने के वैध विकल्प खत्म हो जाते हैं।
- **व्यवस्था की विफलता:** स्कूल का हेडटीचर और माता-पिता वास्तविक समस्या का समाधान तलाशने के बजाय शिक्षकों पर ही दोष मढ़ते हैं। इसके चलते गंभीर घटनाएं होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
- **सामाजिक संवेदनहीनता:** जब समस्याग्रस्त बच्चा अचानक गायब हो जाता है, तो समुदाय उसकी खोजबीन करने के बजाय राहत महसूस करता है। यह दिखाता है कि समाज जड़ से समाधान खोजने के बजाय समस्या को दबाना ज्यादा आसान समझता है।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या बैड एप्पल्स देखने लायक फिल्म है?
हां, साओर्से रोनन के शानदार कॉमिक अभिनय और शिक्षा प्रणाली पर तीखे व्यंग्य के लिए यह फिल्म जरूर देखी जा सकती है।

### 2. बैड एप्पल्स जैसी कौन सी अन्य फिल्में हैं?
यह फिल्म इलेक्शन और बैड टीचर जैसी व्यंग्यात्मक व स्कूल आधारित डार्क कॉमेडी फिल्मों की याद दिलाती है।

### 3. फिल्म में मुख्य भूमिका किसने निभाई है?
फिल्म में मुख्य शिक्षिका मारिया की भूमिका साओर्से रोनन ने निभाई है।

### 4. बैड एप्पल्स का निर्देशन किसने किया है?
इस फिल्म का निर्देशन स्वीडिश फिल्म निर्माता जोनातन एट्ज़लर ने किया है।

### 5. फिल्म में डैनी का किरदार किसने निभाया है?
डैनी के उपद्रवी छात्र का किरदार नए अभिनेता एडी वॉलर ने निभाया है।

## रिव्यू
**फ़िल्म:** बैड एप्पल्स
**रेटिंग:** 4/5
**निर्देशक:** जोनातन एट्ज़लर
**कलाकार:** साओर्से रोनन, एडी वॉलर, निया ब्राउन
**शैली:** डार्क कॉमेडी सटायर


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