पहला प्यार दूसरी बार रिव्यू (2026): पुराने रिश्तों और अधूरे जज्बातों को नया रूप देती हल्की-फुल्की लव स्टोरी अनुज सैनी के निर्देशन और लव फिल्म्स के बैनर तले बनी 'पहला प्यार दूसरी बार' स्कूल रीयूनियन, पुराने क्रश और जिंदगी के दूसरे मौकों को एक मनोरंजक अंदाज में पेश करती है। सिनेमा प्रेमियों के लिए एक नई रोमांटिक कॉमेडी सामने आई है और इस 'पहला प्यार दूसरी बार' रिव्यू में हम विस्तार से समझेंगे कि यह कहानी आज की पीढ़ी की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है। भागदौड़ भरी जिंदगी, करियर की होड़ और रिश्तों की उलझनों के बीच अक्सर कॉलेज और स्कूल के पुराने जज्बात पीछे छूट जाते हैं। लव रंजन और अंकुर गर्ग द्वारा लव फिल्म्स के बैनर तले निर्मित यह फिल्म उन्हीं दबे हुए एहसासों को हंसी, रोमांस और यादों के सहारे पर्दे पर उभारने का प्रयास करती है। निर्देशक अनुज सैनी ने युवाओं के नजरिए को ध्यान में रखते हुए एक ऐसी दुनिया रची है, जिसमें पुरानी गलतियों को सुधारने और प्यार को दूसरा मौका देने का संदेश छिपा है। कहानी का ताना-बाना और स्कूल रीयूनियन का माहौल फिल्म का मुख्य कथानक स्कूल खत्म होने के पूरे दस साल बाद आयोजित होने वाले एक स्कूल रीयूनियन पर आधारित है। तीन जिगरी दोस्त लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर साथ आते हैं। उनके मन में अपने पुराने क्रश और पहले प्यार को लेकर जज्बात अब भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। वे सभी पुरानी उम्मीदों, दिल की धड़कनों और हल्की घबराहट के साथ इस समारोह में शामिल होते हैं ताकि जिन बातों को कहने की हिम्मत वे स्कूल के दिनों में नहीं जुटा पाए थे, उन्हें अब खुलकर कह सकें। शुरुआत में यह सफर पुरानी यादों को ताजा करने का एक सीधा और सादा मेल-मिलाप लगता है, लेकिन जैसे-जैसे महफिल आगे बढ़ती है, घटनाओं का रुख अप्रत्याशित मोड़ों की तरफ मुड़ जाता है। दोस्तों के बीच कई तरह की गलतफहमियां, कॉमिक टकराव और संवेदनशील मोड़ सामने आते हैं। फिल्म इस बात को बड़ी खूबसूरती से रेखांकित करती है कि समय भले ही तेजी से बीत जाए और लोगों की प्राथमिकताएं बदल जाएं, मगर पहले प्यार की सादगी और बचपन की यादें हमेशा दिल के किसी कोने में जिंदा रहती हैं। यह कहानी केवल कॉलेज या स्कूल रोमांस तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह भी दिखाती है कि उम्र और समझ बढ़ने पर इंसान अपने पुराने बिखरे रिश्तों को कैसे नए सिरे से जोड़ सकता है। कलाकारों का अभिनय और ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी इसकी युवा स्टार कास्ट है, जिसमें अलीशा चोपड़ा, स्पर्श वालिया, साक्षी वैद्य, कुणाल वैद्य, सरगुन कौर लूथरा और तुषार छिब्बर शामिल हैं। इन सभी नए दौर के कलाकारों ने अपने किरदारों में जबरदस्त ताजगी भरी है। पूरी फिल्म में कहीं भी यह महसूस नहीं होता कि कोई एक्टर बनावटी भाव दिखा रहा है। दोस्तों की आपसी बातचीत, छेड़छाड़ और हंसी-मजाक बिल्कुल वैसा ही लगता है जैसा आम जिंदगी में होता है। कुणाल वैद्य अपने शानदार स्क्रीन प्रेजेंस और सहज चार्म से पूरी फिल्म में दर्शकों का ध्यान आकर्षित करते हैं। उनका कॉमिक अंदाज और रोमांटिक डायलॉग बोलने की शैली माहौल को हल्का-फुल्का और खुशनुमा बनाए रखती है। दूसरी तरफ, अलीशा चोपड़ा और स्पर्श वालिया ने अपने भावनात्मक दृश्यों में गजब की परिपक्वता दिखाई है। उनके दृश्यों में गहराई नजर आती है, जहां बिना बोले भी कई बातें बयां हो जाती हैं। वहीं साक्षी वैद्य, सरगुन कौर लूथरा और तुषार छिब्बर ने अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और दोस्ताना अंदाज से पूरी कहानी में लगातार ऊर्जा बनाए रखी है। सभी कलाकारों के बीच का तालमेल पर्दे पर बेहद स्वाभाविक नजर आता है, जिससे दर्शक खुद को किरदारों के सफर से आसानी से जोड़ लेते हैं। अनुज सैनी का निर्देशन और कहानी कहने का अंदाज निर्देशक अनुज सैनी ने स्कूल रीयूनियन और पहले प्यार जैसे जाने-पहचाने विषय को चुना है, लेकिन उनका ट्रीटमेंट काफी आधुनिक और ताजगी भरा है। लव फिल्म्स की पहचान रही तेज रफ्तार और हास्य से भरे संवादों का प्रभाव यहां साफ दिखाई देता है। निर्देशक ने कहानी को कभी भी उपदेशात्मक नहीं बनने दिया। फिल्म दर्शकों को सिखाने की कोशिश करने के बजाय उनके चेहरे पर मुस्कान लाने और उन्हें अपने पुराने दिनों की याद दिलाने पर फोकस करती है। रोमांटिक कॉमेडी शैलियों में सबसे बड़ी चुनौती हास्य और भावुकता के बीच संतुलन बनाए रखने की होती है। अनुज सैनी इस कसौटी पर काफी हद तक खरे उतरे हैं। उन्होंने फिल्म की रफ्तार को कहीं भी सुस्त नहीं पड़ने दिया। किरदारों की आपसी खींचतान और अलग-अलग कहानियों को आपस में जोड़ने का उनका तरीका काफी सुलझा हुआ है। सबसे अच्छी बात यह है कि फिल्म का क्लाइमेक्स किसी फिल्मी ड्रामे की बजाय एक व्यावहारिक और संतोषजनक नतीजे की तरफ बढ़ता है, जो निर्देशक की परिपक्व सोच को दर्शाता है। सिनेमैटोग्राफी और तकनीकी पक्ष विजुअल के स्तर पर यह फिल्म काफी आकर्षक और जीवंत नजर आती है। सिनेमैटोग्राफी में शहरी परिवेश, देर रात तक चलने वाली पार्टियों और स्कूल के दिनों के फ्लैशबैक सीन्स को बेहतरीन रंगों के साथ कैद किया गया है। कलर पैलेट बेहद ब्राइट और पॉजिटिव रखा गया है, जिससे स्क्रीन पर एक ताजी ऊर्जा महसूस होती है। स्कूल के दिनों के पुराने दृश्यों और वर्तमान रीयूनियन के दृश्यों के बीच कैमरे के एंगल और लाइटिंग के जरिए एक साफ अंतर दिखाया गया है। कैमरा मूवमेंट बहुत ही सहज हैं, जो कहानी के बहाव में किसी तरह की रुकावट नहीं डालते। खासकर रोमांटिक पलों और जज्बाती बातचीत के दौरान इस्तेमाल किए गए क्लोज-अप शॉट्स किरदारों के आंतरिक संघर्ष और खुशी को बड़ी बारीकी से पर्दे पर पेश करते हैं। संगीत और बैकग्राउंड स्कोर का असर किसी भी लव स्टोरी की सफलता में संगीत रीढ़ की हड्डी माना जाता है, और इस मामले में यह फिल्म दर्शकों को निराश नहीं करती। इसका संगीत आज की युवा पीढ़ी की पसंद के बिल्कुल अनुकूल तैयार किया गया है। गाने केवल समय काटने के लिए नहीं रखे गए हैं, बल्कि वे कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। रोमांटिक ट्रैक पुराने दिनों के आकर्षण और दिल टूटने के दर्द को बड़े मधुर अंदाज में छूते हैं। वहीं रीयूनियन और पार्टी से जुड़े गीत बेहद जोशीले हैं, जो कहानी की गति को तेज बनाए रखते हैं। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी बेहद सधा हुआ है। कॉमिक दृश्यों में यह हल्की धुन के जरिए हंसी को बढ़ाता है, जबकि संवेदनशील दृश्यों में यह खामोशी और सुरों के जरिए जज्बातों को गहरा करता है। फिल्म की कमजोरियां और अंतिम फैसला खूबियों के बावजूद, फिल्म में कुछ कमजोरियां भी साफ नजर आती हैं। कहानी का जो बुनियादी ढांचा है, वह कई पुरानी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्मों जैसा ही महसूस होता है। रीयूनियन के बहाने पुराने प्यार से मिलने और फिर गलतफहमियां पैदा होने का फॉर्मूला पहले भी कई बार देखा जा चुका है। कुछ जगहों पर कहानी का आगे का मोड़ आसानी से भांपा जा सकता है, जिससे ताजगी थोड़ी कम हो जाती है। इसके बावजूद, अपने उम्दा कलाकारों के स्वाभाविक अभिनय, दिलकश संगीत और सकारात्मक संदेश की बदौलत यह फिल्म देखने लायक बन जाती है। यदि आप हल्की-फुल्की, मजेदार और पुराने दिनों की याद दिलाने वाली रोमांटिक कहानियों के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक सुखद अनुभव साबित हो सकती है। इसका आप पर असर यह फिल्म युवाओं और पुरानी यादों को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए एक हल्का-फुल्का वीकेंड विकल्प प्रदान करती है। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: यह फिल्म किसी भारी-भरकम तनाव के बिना दो घंटे का खुशनुमा मनोरंजन देती है। अगर आप दोस्तों या पार्टनर के साथ मजेदार फिल्म देखना चाहते हैं तो यह अच्छा विकल्प है। • टिकट बुकिंग और बजट: मल्टीप्लेक्स और स्थानीय सिनेमाघरों में टिकट की सामान्य दरें लागू रहेंगी। अग्रिम टिकट बुक करने से पहले अपने नजदीकी थिएटर के शो टाइमिंग की जांच कर लें। • पारिवारिक दर्शक: फिल्म का विषय युवाओं, स्कूल रीयूनियन और आधुनिक दोस्ती पर केंद्रित है। इसमें किसी भी तरह की असहज सामग्री नहीं है और युवा इसे आसानी से देख सकते हैं। • कंटेंट चयन: यदि आप किसी अनोखी या गंभीर कहानी की तलाश में हैं, तो इसका जाना-पहचाना प्लॉट आपको थोड़ा सामान्य लग सकता है। इसे केवल मनोरंजक और सरल रोमांटिक कॉमेडी मानकर ही देखें। ऐसा क्यों हुआ फिल्म निर्माताओं ने आज के युवाओं के जीवन में बढ़ते तनाव और पुरानी यादों के प्रति आकर्षण को ध्यान में रखकर इस प्रोजेक्ट को तैयार किया है। आधुनिक सिनेमा में हल्के-फुल्के पारिवारिक और दोस्ताना रोमांस की मांग लगातार बनी रहती है। • नॉस्टैल्जिया का बढ़ता चलन: आज के समय में स्कूल और कॉलेज रीयूनियन से जुड़ी कहानियां दर्शकों को अपनी पुरानी जिंदगी की याद दिलाती हैं। निर्माता इसी भावुक जुड़ाव को मनोरंजक अंदाज में बड़े पर्दे पर पेश करना चाहते थे। • लव फिल्म्स की पहचान: लव रंजन और अंकुर गर्ग का प्रोडक्शन हाउस हमेशा से युवाओं की बातचीत और शहरी रिश्तों पर केंद्रित कहानियां बनाता रहा है। यह फिल्म उसी स्थापित सिनेमाई शैली को नए कलाकारों के साथ आगे बढ़ाती है। • नए कलाकारों को मंच: सिनेमा उद्योग में फ्रेश चेहरों और नई प्रतिभाओं को मुख्यधारा की रोमांटिक कहानियों में मौका देने के उद्देश्य से इस कास्ट को चुना गया। सवाल-जवाब 1. क्या पहला प्यार दूसरी बार देखने लायक है? हां, अगर आप हल्की-फुल्की रोमांटिक कॉमेडी, दोस्तों की मस्ती और खूबसूरत गानों के शौकीन हैं तो यह एक मनोरंजक फिल्म है। 2. पहला प्यार दूसरी बार जैसी और कौन सी फिल्में हैं? यह फिल्म 'ये जवानी है दीवानी', 'छिछोरे' और 'सोनू के टीटू की स्वीटी' जैसी रीयूनियन और दोस्ती-रोमांस पर आधारित फिल्मों की याद दिलाती है। 3. पहला प्यार दूसरी बार के निर्देशक और निर्माता कौन हैं? इस फिल्म का निर्देशन अनुज सैनी ने किया है और इसे लव रंजन व अंकुर गर्ग ने लव फिल्म्स के बैनर तले प्रोड्यूस किया है। 4. फिल्म की कहानी किस विषय पर आधारित है? कहानी स्कूल की पढ़ाई पूरी होने के दस साल बाद होने वाले एक रीयूनियन और उसमें शामिल दोस्तों के पुराने प्यार के इर्द-गिर्द घूमती है। 5. फिल्म में मुख्य भूमिकाएं किन कलाकारों ने निभाई हैं? फिल्म में कुणाल वैद्य, अलीशा चोपड़ा, स्पर्श वालिया, साक्षी वैद्य, सरगुन कौर लूथरा और तुषार छिब्बर ने मुख्य किरदार निभाए हैं। 6. फिल्म की सबसे बड़ी खूबी और कमी क्या है? कलाकारों की स्वाभाविक केमिस्ट्री और शानदार म्यूजिक इसकी खूबी है, जबकि इसका जाना-पहचाना और थोड़ा प्रिडिक्टेबल प्लॉट इसकी कमजोरी है। रिव्यू फ़िल्म: पहला प्यार दूसरी बार रेटिंग: 3.5/5 निर्देशक: अनुज सैनी कलाकार: अलीशा चोपड़ा, स्पर्श वालिया, साक्षी वैद्य, कुणाल वैद, सर्गुन कौर लूथरा, तुषार छिब्बर और अन्य शैली: रोमांटिक कॉमेडी अवधि: 142 मिनट रिलीज़: 23 अक्टूबर 2026 भाषा: हिंदी https://trendkia.com/movie-review/pehla-pyaar-doosri-baar-rivyu-2026-purane-rishton-aura-adhure-jajbaton-ko-naya-rupa-deti-halki-phulki-lava-stori-51777 TrendKia — Har trend, sabse pehle.