# एडवोकेट जनरल के इस्तीफे की मांग पर नागालैंड बार एसोसिएशन 25 सितंबर को अदालती काम से रहेगा दूर

> एडवोकेट जनरल के.एन. बालगोपाल के इस्तीफे और स्थानीय वकील की नियुक्ति की मांग को लेकर नागालैंड बार एसोसिएशन ने 25 सितंबर को अदालती कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला लिया है।

**Type:** article · **Category:** नागालैंड · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/nagaland/advocate-general-ke-istiphe-ki-manga-para-nagaland-bar-association-25-sitnbara-ko-adalati-kama-se-rahega-dura-36983 · **Language:** Hindi
**Tags:** नागालैंड, नागालैंड बार एसोसिएशन, एडवोकेट जनरल, के.एन. बालगोपाल, अदालत बहिष्कार, कोहिमा, सुप्रीम कोर्ट

नागालैंड बार एसोसिएशन ने राज्य के एडवोकेट जनरल के.एन. बालगोपाल के इस्तीफे की मांग पर सरकार की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने के विरोध में 25 सितंबर को अदालती कार्यवाही से अलग रहने का फैसला किया है। बार एसोसिएशन द्वारा पारित एक आधिकारिक प्रस्ताव के अनुसार, अधिवक्ताओं ने मौजूदा एडवोकेट जनरल को पद से हटाने की मांग पर राज्य सरकार की निष्क्रियता के खिलाफ यह विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है।

## जिला अदालतों में बिना कोट और बैंड के पहुंचेंगे वकील
इस आंदोलन की कार्ययोजना के तहत जिला अदालतों में पेश होने वाले वकीलों को 25 सितंबर को एक खास तरीके से विरोध जताने का निर्देश दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, संबंधित अदालतों में वकील मौजूद तो रहेंगे, लेकिन वे अपनी निर्धारित पोशाक जैसे कोट और बैंड नहीं पहनेंगे। बार एसोसिएशन का कहना है कि 25 सितंबर की इस सांकेतिक कार्रवाई के बाद परिस्थितियों की समीक्षा की जाएगी और उसी आधार पर भविष्य के कदमों पर फैसला लिया जाएगा।

## स्थानीय एडवोकेट जनरल की मांग और तीन महीने की समयसीमा
बार एसोसिएशन ने अपने इस लंबे विरोध प्रदर्शन के पीछे दो मुख्य वजहें बताई हैं। पहली बड़ी मांग यह है कि राज्य के एडवोकेट जनरल पद पर नागालैंड के ही किसी स्थानीय वकील को नियुक्त किया जाए। एसोसिएशन का तर्क है कि 1963 में नागालैंड को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद से अब तक वहां का कोई भी स्थानीय वकील इस संवैधानिक पद पर आसीन नहीं हो सका है। इस मांग को पूरा करने के लिए वकीलों ने राज्य सरकार को तीन महीने का समय दिया था, जिसकी समयसीमा 13 सितंबर को समाप्त हो चुकी है।

## सुप्रीम कोर्ट में कथित टिप्पणी को लेकर उपजा विवाद
विरोध का दूसरा बड़ा कारण एडवोकेट जनरल के.एन. बालगोपाल द्वारा 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में की गई कथित टिप्पणी है। उन पर आरोप है कि उन्होंने शीर्ष अदालत की कार्यवाही के दौरान कहा था कि नागालैंड में केवल दो तरह के रोजगार हैं, सरकारी नौकरी और अंडरग्राउंड काम। एसोसिएशन ने इस कथित बयान को नागालैंड के लोगों का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी से एडवोकेट जनरल का नैतिक अधिकार समाप्त हो गया है, जिसके चलते सरकार की बेरुखी और विवादित बयान दोनों के खिलाफ 25 सितंबर को अदालती काम का बहिष्कार किया जा रहा है।

## इसका आप पर असर
नागालैंड में अदालती कामकाज ठप होने से आम मुकदमों की सुनवाई पर सीधा असर पड़ेगा।

- **भारत में:** अन्य राज्यों के वकीलों और वादियों के लिए यह घटनाक्रम राज्य सरकारों और बार संगठनों के बीच स्थानीय प्रतिनिधित्व के विवाद को सामने लाता है। सुप्रीम कोर्ट में दिए जाने वाले बयानों की संवेदनशीलता को लेकर भी कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो सकती है।
- **नागालैंड में:** 25 सितंबर को राज्य की जिला और अन्य अदालतों में सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई टल सकती है, जिससे वादियों को नई तारीखें लेनी होंगी। स्थानीय वकीलों द्वारा बिना कोट और बैंड के सांकेतिक उपस्थिति दर्ज कराने से न्यायिक कार्यवाही उस दिन प्रभावित रहेगी।
- **कानूनी नियुक्तियों पर:** राज्य में एडवोकेट जनरल जैसे शीर्ष कानूनी पद पर स्थानीय प्रतिनिधित्व की मांग जोर पकड़ रही है। यदि सरकार इस गतिरोध को नहीं सुलझाती है तो आने वाले दिनों में न्यायिक कार्यप्रणाली में टकराव और बढ़ सकता है।
- **वादकारियों की तैयारी:** जिन लोगों के मुकदमों की तारीख 25 सितंबर तय है, उन्हें अदालत में औपचारिक बहस या गवाही के लिए आगे की तारीख मिलने की पूरी संभावना है। संबंधित पक्षों को अपने वकीलों से संपर्क कर अगली अदालती कार्यवाही की जानकारी ले लेनी चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
यह गतिरोध नागालैंड बार एसोसिएशन की एडवोकेट जनरल के इस्तीफे की मांग पर सरकार के कदम न उठाने और सुप्रीम कोर्ट में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद पैदा हुआ है।

- **स्थानीय प्रतिनिधित्व की लंबे समय से चली आ रही मांग:** बार एसोसिएशन का कहना है कि 1963 में राज्य गठन के बाद से कभी भी नागालैंड के स्थानीय वकील को एडवोकेट जनरल नहीं बनाया गया। संगठन ने राज्य सरकार को इस पद पर स्थानीय चेहरे की नियुक्ति के लिए तीन महीने का समय दिया था, जिसकी समयसीमा 13 सितंबर को खत्म हो गई।
- **सुप्रीम कोर्ट में विवादित टिप्पणी का आरोप:** एडवोकेट जनरल के.एन. बालगोपाल पर आरोप है कि उन्होंने 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान कहा था कि नागालैंड में केवल दो तरह के रोजगार हैं, सरकारी और अंडरग्राउंड। वकीलों के अनुसार यह बयान नागालैंड की जनता का अपमान करने वाला है और इससे पद की गरिमा प्रभावित हुई है।
- **सरकार की ओर से कार्रवाई का अभाव:** समयसीमा समाप्त होने के बाद भी राज्य सरकार द्वारा कोई सकारात्मक कदम न उठाए जाने के कारण एसोसिएशन ने विरोध तेज करते हुए 25 सितंबर को अदालती काम से दूर रहने का फैसला लिया।

## सवाल-जवाब

### 1. नागालैंड बार एसोसिएशन 25 सितंबर को अदालत से क्यों दूर रह रहा है?
एसोसिएशन एडवोकेट जनरल के.एन. बालगोपाल के इस्तीफे और स्थानीय वकील की नियुक्ति की मांग पर सरकार की बेरुखी के विरोध में यह कदम उठा रहा है।

### 2. जिला अदालतों में वकील 25 सितंबर को कैसे विरोध दर्ज कराएंगे?
जिला अदालतों के वकील अपनी-अपनी अदालतों में उपस्थित तो रहेंगे, लेकिन वे अपने आधिकारिक कोट और बैंड नहीं पहनेंगे।

### 3. एडवोकेट जनरल पद को लेकर बार एसोसिएशन की प्रमुख मांग क्या है?
बार एसोसिएशन की मांग है कि 1963 में राज्य बनने के बाद से इस पद पर कभी किसी स्थानीय वकील की नियुक्ति नहीं हुई है, इसलिए अब नागालैंड के स्थानीय वकील को ही एडवोकेट जनरल बनाया जाए।

### 4. एडवोकेट जनरल के खिलाफ किस कथित टिप्पणी पर विवाद हुआ है?
सुप्रीम कोर्ट में 1 सितंबर की कार्यवाही के दौरान उन पर यह कथित बयान देने का आरोप है कि नागालैंड में केवल सरकारी और अंडरग्राउंड, दो ही तरह के रोजगार हैं।

### 5. बार एसोसिएशन ने सरकार को क्या समयसीमा दी थी?
एसोसिएशन ने स्थानीय एडवोकेट जनरल नियुक्त करने के लिए तीन महीने का समय दिया था, जो 13 सितंबर को पूरा हो गया।

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