नागालैंड के फेक में वन्यजीव मामले और पक्षी जब्ती के विरोध में चाखेसांग युवाओं का बड़ा प्रदर्शन फेक जिले में चाखेसांग समुदाय के हजारों युवाओं ने वेझोतो हेसुह पर दर्ज वन्यजीव केस वापस लेने, जब्त ग्रेट बार्बेट लौटाने और रिश्वत के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर रैली निकाली। नागालैंड के फेक जिले में वन्यजीव विभाग की कार्रवाई को लेकर स्थानीय समुदाय में भारी आक्रोश देखा गया, जहां पारंपरिक परिधानों में सजे हजारों युवाओं ने सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सेंट्रल चाखेसांग यूथ ऑर्गनाइजेशन के नेतृत्व में आयोजित इस विशाल मार्च में वेझोतो हेसुह के खिलाफ दर्ज वन्यजीव मामले को तुरंत खारिज करने, पोरबा गांव से जब्त किए गए ग्रेट बार्बेट पक्षी को वापस सौंपने और विभागीय कर्मियों पर लगे रिश्वत के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई गई। यह प्रदर्शन रुकित्ज़ु जंक्शन से शुरू होकर त्सुत्सेरो स्थित अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय तक पहुंचा, जहां युवाओं ने राज्य प्रशासन को अपनी मांगों से अवगत कराया। सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ पूरा विवाद इस पूरे विवाद की जड़ें उस घटना से जुड़ी हैं जब दीमापुर वन्यजीव प्रभाग की वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल यूनिट ने 11 सितंबर को वेझोतो हेसुह को तलब किया था। अधिकारियों की यह कार्रवाई हेसुह के सोशल मीडिया प्रोफाइल पर साझा की गई कुछ तस्वीरों और वीडियो के आधार पर की गई थी। युवा संगठन के अनुसार, इन पोस्ट्स में एक वीडियो शामिल था जिसमें हेसुह असम में एक बंदर को मिठाई खिला रहे थे, एक अन्य वीडियो में पिंजरे में बंद एक पक्षी दिख रहा था, और एक तस्वीर में एक पक्षी उनके कंधे पर बैठा नजर आ रहा था। संगठन ने स्पष्ट किया कि ये वन्यजीव न तो हेसुह के अपने थे और न ही उन्हें उनके द्वारा पालतू बनाकर रखा गया था। इसके साथ ही इन दृश्यों में किसी भी प्रकार की क्रूरता, शिकार, बंदी बनाने अथवा जानबूझकर नुकसान पहुंचाने जैसी कोई बात मौजूद नहीं थी। अवैध वसूली के आरोप और निष्पक्ष जांच की मांग प्रदर्शनकारियों ने वन्यजीव विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की स्वतंत्र जांच कराने पर जोर दिया है। युवा संगठन का आरोप है कि मामले के दौरान हेसुह को छोड़ने के एवज में 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। जब उन्होंने यह रकम देने से साफ इनकार कर दिया, तब उनके खिलाफ औपचारिक रूप से कानूनी मामला दर्ज कर दिया गया। इस कथित वसूली के खुलासे के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी फैल गई, जिसके चलते संगठन ने मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। पोरबा गांव से पालतू ग्रेट बार्बेट की जब्ती पर गहरा आक्रोश रैली के दौरान 14 सितंबर को पोरबा गांव से एक ग्रेट बार्बेट पक्षी की जब्ती का मामला भी प्रमुखता से उठाया गया। सेंट्रल चाखेसांग यूथ ऑर्गनाइजेशन ने बताया कि इस पक्षी की देखभाल एक छोटा बच्चा पिछले 6 से 7 वर्षों से बेहद प्यार और अपनेपन के साथ कर रहा था। वन विभाग द्वारा अचानक पक्षी को छीनकर ले जाने से वह बच्चा गहरे मानसिक तनाव में है और पूरे गांव के निवासियों में गहरा असंतोष है। संगठन ने जोर देकर कहा कि कानून लागू करते समय अधिकारियों को स्थानीय परंपराओं, ग्रामीण संस्कृति और समुदाय की मानवीय भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 371A के तहत विशेष अधिकारों का हवाला प्रदर्शन के दौरान संगठन ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371A के तहत नागालैंड को मिले विशेष संवैधानिक संरक्षण का भी उल्लेख किया। संगठन का तर्क है कि नागालैंड में केंद्रीय कानूनों को लागू करते समय राज्य की पारंपरिक प्रथाओं और विशेष संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी नहीं की जा सकती। अतिरिक्त उपायुक्त म्हालो हुमत्सो ने प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन स्वीकार करते हुए भरोसा दिलाया कि इसे जल्द से जल्द मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया जाएगा। वहीं, युवा संगठन ने राज्य सरकार और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को सात दिनों का अल्टीमेटम दिया है। यदि तय समय सीमा के भीतर हेसुह पर दर्ज मामला वापस नहीं लिया गया, जब्त पक्षी वापस नहीं लौटाया गया और रिश्वत के आरोपों की जांच शुरू नहीं हुई, तो संगठन ने आगे कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है। इसका आप पर असर इस घटनाक्रम का सीधा असर स्थानीय जनजातीय अधिकारों, पालतू पशु-पक्षियों के संरक्षण और वन्यजीव कानूनों के क्रियान्वयन पर पड़ेगा। • भारत में: वन्यजीव संरक्षण कानूनों और पारंपरिक सामुदायिक जीवनशैली के बीच संतुलन को लेकर देश भर में नई प्रशासनिक बहस शुरू हो सकती है। गैर-व्यावसायिक पशु-पक्षी प्रेम और कानूनी उल्लंघनों के बीच स्पष्ट अंतर तय करने की मांग मजबूत होगी। • नागालैंड में: वन विभाग द्वारा सोशल मीडिया पोस्ट्स की निगरानी और जब्ती अभियानों के तरीकों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सात दिनों की समय सीमा समाप्त होने के बाद राज्य में व्यापक नागरिक आंदोलन की स्थिति बन सकती है। • जनजातीय क्षेत्रों में: संविधान के अनुच्छेद 371A के तहत मिलने वाले पारंपरिक अधिकारों के संरक्षण पर नागरिक समाज का दबाव बढ़ेगा। ग्रामीण स्तर पर पीढ़ियों से पाले जा रहे वन्य जीवों को लेकर नियमों के पुनर्मूल्यांकन की मांग उठेगी। • आम नागरिकों के लिए: सोशल मीडिया पर वन्यजीवों के साथ तस्वीरें और वीडियो साझा करते समय आम लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। किसी भी अवैध विभागीय दबाव या रिश्वत की मांग के खिलाफ संगठित शिकायत दर्ज कराने की मिसाल बनेगी। ऐसा क्यों हुआ यह बड़ा विरोध प्रदर्शन एक स्थानीय युवक पर वन्यजीव अधिनियम के तहत दर्ज मामले, एक लंबे समय से पले पक्षी की जब्ती और वन कर्मियों पर लगे रिश्वत के आरोपों के कारण भड़का। • सोशल मीडिया निगरानी: दीमापुर की वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल यूनिट ने युवक की ऑनलाइन वीडियो और तस्वीरों के आधार पर बिना जमीनी छानबीन के कानूनी नोटिस जारी कर दिया था। • कथित रिश्वत की मांग: युवक को छोड़ने के बदले 1 लाख रुपये की अनुचित मांग की गई, और पैसे देने से इनकार करने पर औपचारिक केस दर्ज कर दिया गया। • घरेलू पक्षी की जब्ती: पोरबा गांव में एक बालक द्वारा पिछले छह से सात वर्षों से पाले जा रहे ग्रेट बार्बेट पक्षी को अधिकारियों ने जबरन कब्जे में ले लिया, जिससे स्थानीय भावनाएं आहत हुईं। • संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी: आंदोलनकारियों का मानना है कि केंद्रीय कानून लागू करते समय नागालैंड को संविधान के अनुच्छेद 371A के तहत मिले पारंपरिक संरक्षण की उपेक्षा की गई। सवाल-जवाब 1. चाखेसांग युवाओं ने फेक जिले में प्रदर्शन क्यों किया? वेझोतो हेसुह पर दर्ज वन्यजीव केस वापस लेने, जब्त ग्रेट बार्बेट पक्षी लौटाने और रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों की जांच के लिए यह प्रदर्शन किया गया। 2. वेझोतो हेसुह पर क्या आरोप लगाए गए थे? उन्हें सोशल मीडिया पर बंदर को मिठाई खिलाने और पक्षियों के साथ तस्वीरें साझा करने के मामले में दीमापुर वन्यजीव इकाई ने तलब किया था। 3. युवा संगठन ने वन विभाग के अधिकारियों पर क्या आरोप लगाए हैं? संगठन का आरोप है कि हेसुह को छोड़ने के लिए 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी और इनकार करने पर केस दर्ज किया गया। 4. जब्त किए गए ग्रेट बार्बेट पक्षी की क्या पृष्ठभूमि है? पोरबा गांव में यह पक्षी पिछले छह से सात वर्षों से एक छोटे लड़के की देखरेख में रह रहा था जिसे 14 सितंबर को जब्त किया गया। 5. संगठन ने सरकार को क्या समय सीमा दी है? सेंट्रल चाखेसांग यूथ ऑर्गनाइजेशन ने अपनी मांगें पूरी करने के लिए राज्य सरकार को सात दिनों की समय सीमा दी है। https://trendkia.com/nagaland/chakhesang-youths-march-in-nagaland-s-phek-demanding-wildlife-case-withdrawal-and-return-of-seized-bird-40055 TrendKia — Har trend, sabse pehle.