चुमुकेदिमा में बड़े कचरा उत्पादकों को चेतावनी: नियम मानें या भरें जुर्माना चुमुकेदिमा के उपायुक्त ने सभी बल्क वेस्ट जेनरेटर्स से कहा है कि वे पंजीकरण कराएं, परिसर में कचरा प्रबंधन का ढांचा लगाएं और गीले कचरे की कंपोस्टिंग शुरू करें, वरना नागालैंड के नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत जुर्माना और बिजली-पानी कनेक्शन कटने का खतरा है। चुमुकेदिमा में बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वाले संस्थानों को अब अपनी जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कचरा प्रबंधन सिर्फ सफाई कर्मचारियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय में हुई एक दिवसीय कार्यशाला में चुमुकेदिमा के उपायुक्त पोलन जॉन ने कहा कि हर पक्षकार, खासकर बल्क वेस्ट जेनरेटर्स (BWG) के तहत आने वाले संस्थानों को सुप्रीम कोर्ट के समयबद्ध आदेशों और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का पूरी तरह पालन करना होगा। बड़े कचरा उत्पादकों के लिए खास कार्यशाला इस कार्यशाला की अध्यक्षता चुमुकेदिमा की एसडीओ श्रेयंसी जैन ने की। कार्यशाला में उन संस्थानों और प्रतिष्ठानों को बुलाया गया जो रोजाना बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करते हैं, ताकि टिकाऊ कचरा प्रबंधन के तरीकों पर चर्चा हो सके। उपायुक्त ने इस मौके पर साफ किया कि कचरा उठाना और उसका निपटान करना अकेले सफाई कर्मचारियों का काम नहीं है, बल्कि हर घर, हर संस्था और हर व्यावसायिक प्रतिष्ठान को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी। संविधान और सुप्रीम कोर्ट का हवाला पोलन जॉन ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए बताया कि संविधान का अनुच्छेद 51A(g) हर नागरिक को पर्यावरण की रक्षा करने का मौलिक कर्तव्य सौंपता है, और साफ-सुथरे व स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार से ही जुड़ा है। उन्होंने बताया कि संशोधित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 शहरी और ग्रामीण, दोनों इलाकों पर लागू होते हैं और हर व्यक्ति व संस्था को तय मानकों के मुताबिक कचरे को अलग करना, स्टोर करना और तय अधिकारियों को सौंपना अनिवार्य है। कौन गिना जाएगा बल्क वेस्ट जेनरेटर उपायुक्त ने बताया कि किसी प्रतिष्ठान का निर्मित क्षेत्रफल करीब 20,000 वर्ग मीटर हो, रोजाना पानी की खपत करीब 40,000 लीटर हो, या रोजाना करीब 100 किलो कचरा निकलता हो, तो इनमें से कोई भी एक शर्त पूरी होने पर वह संस्थान BWG की श्रेणी में आ जाएगा। पालन के लिए क्या करना होगा BWG की श्रेणी में आने वाले संस्थानों को अपने परिसर में ही कचरा प्रबंधन का पूरा ढांचा खड़ा करना होगा, कचरे का सही तरीके से निपटान करना होगा, ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा और नियमित रूप से पालन रिपोर्ट जमा करनी होगी। इसके अलावा उनके परिसर का निरीक्षण भी किया जाएगा ताकि जमीनी हकीकत परखी जा सके। गीले कचरे की खाद बनाना जरूरी पोलन जॉन ने खास तौर पर गीले कचरे पर जोर दिया और कहा कि इसका निपटान संस्थानों को अपने ही परिसर में करना होगा, जिसके लिए उपयुक्त कंपोस्टिंग यानी खाद बनाने की सुविधा लगानी होगी। उन्होंने बताया कि इसमें तकनीकी मदद संबंधित विभागों और नागालैंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ली जा सकती है। नियम न मानने पर जुर्माना और कनेक्शन कटने का खतरा उपायुक्त ने चेतावनी दी कि नियमों का पालन न करने पर "पॉल्यूटर पेज़" यानी प्रदूषक भुगतान करे सिद्धांत के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है, और लगातार नियम तोड़ने वाले प्रतिष्ठानों की बिजली व पानी की आपूर्ति भी काटी जा सकती है। इस पहल को "पूरी सरकार, पूरे समाज" के दृष्टिकोण वाला बताते हुए पोलन जॉन ने सभी चिन्हित BWG और पक्षकारों से समयबद्ध आदेशों का जल्द से जल्द पालन करने की अपील की। इसका आप पर असर अगर आपका प्रतिष्ठान चुमुकेदिमा में है और आकार, पानी की खपत या कचरे की मात्रा से जुड़ी किसी भी एक शर्त को पूरा करता है, तो अब सख्ती शुरू होने से पहले आपको कागजी कार्रवाई और जरूरी ढांचा तैयार करना होगा। • भारत में: यह सुप्रीम कोर्ट की उस मुहिम का हिस्सा है जिसमें सिर्फ सफाई कर्मचारियों पर नहीं बल्कि बड़े कचरा उत्पादकों पर भी सीधी जिम्मेदारी डाली जा रही है। दूसरे राज्यों में भी इसी तरह के BWG नियम और निरीक्षण लागू हो रहे हैं, इसलिए कारोबार, अस्पताल, हॉस्टल और बड़ी हाउसिंग सोसाइटी वालों को भी वैसी ही पंजीकरण और कंपोस्टिंग की मांग का सामना करना पड़ सकता है। • चुमुकेदिमा, नागालैंड में: चिन्हित BWG को ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा, परिसर में ही कचरा प्रबंधन का ढांचा लगाना होगा और गीले कचरे के लिए कंपोस्टिंग शुरू करनी होगी, वरना "पॉल्यूटर पेज़" नियम के तहत जुर्माना भरना पड़ सकता है। लगातार नियम तोड़ने वालों की बिजली-पानी की सप्लाई भी कट सकती है, इसलिए प्रतिष्ठान मालिकों को निरीक्षण नोटिस का इंतजार किए बिना अभी से पंजीकरण और ढांचा तैयार करना शुरू कर देना चाहिए। • घरों और संस्थानों के लिए: BWG श्रेणी में न आने वाले लोगों को भी 2026 के नियमों के तहत कचरा अलग करके तय कर्मचारियों को सौंपना होगा। ऐसा न करने पर स्थानीय सख्ती बढ़ने के बाद जुर्माना लग सकता है। • कारोबारियों के लिए: कंपोस्टिंग और प्रोसेसिंग का ढांचा लगाने में शुरुआती खर्च जरूर आएगा, लेकिन जो प्रतिष्ठान समय रहते नियम मान लेंगे, वे बाद में निरीक्षण, जुर्माने या कनेक्शन कटने जैसी परेशानी से बच जाएंगे। ऐसा क्यों हुआ चुमुकेदिमा में यह मुहिम सीधे सुप्रीम कोर्ट के समयबद्ध आदेशों और नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 की अधिसूचना से जुड़ी है, जिसने पहली बार शहरी के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों पर भी साफ जिम्मेदारी तय कर दी। नागालैंड के जिला प्रशासन अब इस ऊपर से आए आदेश को जमीनी स्तर पर लागू करने में जुटे हैं। • अदालत की समयसीमा: सुप्रीम कोर्ट ने कचरा प्रबंधन को लेकर समयबद्ध आदेश दिए हैं, और अनुच्छेद 51A(g) व अनुच्छेद 21 के तहत मिले संवैधानिक कर्तव्यों ने उपायुक्त कार्यालय को BWG से सख्ती से पालन कराने का कानूनी आधार दिया। • नए नियमों का दायरा बढ़ा: संशोधित 2026 नियम अब ग्रामीण इलाकों पर भी लागू होते हैं और आकार, पानी की खपत व कचरे की मात्रा से जुड़ी शर्तें तय करते हैं, जिससे कई बड़े प्रतिष्ठान पहली बार BWG की जिम्मेदारी के दायरे में आ गए हैं। • गीला कचरा सबसे बड़ी कमजोर कड़ी: पोलन जॉन का कंपोस्टिंग पर खास जोर बताता है कि बिना प्रबंधन वाला गीला कचरा एक बड़ी समस्या माना जा रहा है, इसीलिए परिसर में ही प्रोसेसिंग और नागालैंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तकनीकी मदद पर जोर दिया गया। • आगे क्या होगा: प्रशासन ने साफ किया है कि निरीक्षण, ऑनलाइन पंजीकरण की जांच और जुर्माने व कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई उन प्रतिष्ठानों पर होगी जो नियम नहीं मानेंगे। सवाल-जवाब 1. यह अपील किसने की? चुमुकेदिमा के उपायुक्त पोलन जॉन ने बल्क वेस्ट जेनरेटर्स पर हुई कार्यशाला में यह अपील की। 2. कार्यशाला कब और कहां हुई? यह मंगलवार को चुमुकेदिमा स्थित उपायुक्त कार्यालय में आयोजित हुई। 3. कार्यशाला की अध्यक्षता किसने की? चुमुकेदिमा की एसडीओ श्रेयंसी जैन ने कार्यशाला की अध्यक्षता की। 4. कौन सा प्रतिष्ठान BWG की श्रेणी में आता है? जिस प्रतिष्ठान का निर्मित क्षेत्रफल करीब 20,000 वर्ग मीटर, रोजाना पानी की खपत करीब 40,000 लीटर या रोजाना कचरा करीब 100 किलो हो, वह इनमें से किसी एक शर्त के पूरा होने पर भी BWG माना जाएगा। 5. BWG को क्या करना होगा? उन्हें अपने परिसर में कचरा प्रबंधन का ढांचा लगाना, कचरे का सही निपटान करना, ऑनलाइन पंजीकरण कराना, पालन रिपोर्ट जमा करना और गीले कचरे के लिए कंपोस्टिंग की सुविधा बनानी होगी, साथ ही निरीक्षण भी होगा। 6. नियम न मानने पर क्या होगा? नियम न मानने वाले प्रतिष्ठानों पर 'पॉल्यूटर पेज़' सिद्धांत के तहत जुर्माना लग सकता है, और लगातार नियम तोड़ने पर बिजली-पानी की आपूर्ति भी काटी जा सकती है। https://trendkia.com/nagaland/chumoukedima-men-bare-kachara-utpadakon-ko-chetavani-niyama-manen-ya-bharen-jurmana-29602 TrendKia — Har trend, sabse pehle.