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  "title": "केज़ोमा गांव में 26 अगस्त को सजेगा दूसरा मिलेट महोत्सव, मोटे अनाजों की खेती और पोषण पर रहेगा ज़ोर",
  "summary": "नागालैंड के केज़ोमा गांव में 26 अगस्त को द्वितीय मिलेट महोत्सव आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य पारंपरिक मोटे अनाजों की खेती और उनके स्वास्थ्य लाभों को बढ़ावा देना है।",
  "content": "नागालैंड के केज़ोमा गांव में 26 अगस्त को लगातार दूसरे साल मिलेट महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। इस एक दिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक मोटे अनाजों की उपयोगिता, उनके पोषण संबंधी लाभों और जलवायु परिवर्तन के दौर में टिकाऊ खेती के महत्व को उजागर करना है। यह महोत्सव केज़ोमा स्थित जाके ग्राउंड में सुबह 11 बजे से आयोजित किया जाएगा, जहां स्थानीय किसानों और आम जनता को मोटे अनाजों से जुड़ी कई नई जानकारियां दी जाएंगी।\n\nकृषि विभाग और ग्राम परिषद का संयुक्त प्रयास\nइस विशेष महोत्सव की रूपरेखा केज़ोमा विलेज काउंसिल द्वारा नागालैंड सरकार के कृषि विभाग और उससे जुड़े सहयोगी क्षेत्रों के समन्वय से तैयार की गई है। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मोटे अनाजों के प्रचार-प्रसार के लिए चलाए जा रहे अभियानों के तहत इस गांव में यह महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।\n\nकार्यक्रम में नागालैंड के कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) और कृषि एवं भूमि राजस्व विभाग के आयुक्त सह सचिव डॉ. ज़ासेकुोली चूसी विशेष अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। वे स्थानीय किसानों का उत्साहवर्धन करने के साथ-साथ पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने से जुड़ी प्राथमिकताओं पर अपने विचार साझा करेंगे।\n\nजलवायु अनुकूलता और स्वास्थ्य लाभों पर ध्यान\nहाल के वर्षों में मिलेट्स यानी मोटे अनाजों ने अपने बेहतरीन स्वास्थ्यवर्धक गुणों और कम पानी में भी उपज देने की क्षमता के कारण दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया है। पारंपरिक अनाज फसलों की तुलना में मिलेट्स विपरीत मौसम और कम बारिश की स्थिति में भी आसानी से पनप सकते हैं। इस वजह से ये अनाज खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।\n\nपोषण के लिहाज से भी मिलेट्स अत्यंत समृद्ध माने जाते हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में डाइटरी फाइबर, खनिज और अन्य आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। पूर्वोत्तर भारत के स्वदेशी समुदाय ऐतिहासिक रूप से अपनी दैनिक खुराक में विभिन्न प्रकार के मोटे अनाजों का उपयोग करते रहे हैं। इस आयोजन के ज़रिए उन्हीं स्वदेशी फसलों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है।\n\nप्रदर्शनियां और आर्थिक संभावनाएं\nजाके ग्राउंड में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में कई आकर्षक स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉलों पर स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले विभिन्न प्रकार के मोटे अनाज, उनसे तैयार किए गए मूल्यवर्धित उत्पाद और मिलेट्स पर आधारित पारंपरिक व्यंजन प्रदर्शित किए जाएंगे।\n\nआयोजकों के अनुसार, इन प्रदर्शनी स्टॉलों का मुख्य उद्देश्य केवल खान-पान का प्रदर्शन करना ही नहीं है, बल्कि किसानों को यह दिखाना भी है कि मोटे अनाजों की खेती और उनके प्रसंस्कृत उत्पादों के व्यापार से आर्थिक लाभ कैसे कमाए जा सकते हैं। केज़ोमा विलेज काउंसिल और आयोजन समिति ने क्षेत्र के किसानों, कृषि प्रेमियों और आम नागरिकों को इस महोत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: जलवायु परिवर्तन के दौर में यह आयोजन देश भर के किसानों को कम पानी वाली टिकाऊ फसलों को अपनाने और उपभोक्ताओं को पौष्टिक मिलेट्स को अपनी डाइट में शामिल करने के लिए प्रेरित करता है।\n\nनागालैंड में: राज्य के किसानों और स्थानीय उद्यमियों को पारंपरिक फसलों की आधुनिक प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के ज़रिए नए आर्थिक अवसर खोजने में मदद मिलेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दूसरा मिलेट महोत्सव कब और कहां आयोजित होगा?\nयह महोत्सव 26 अगस्त को सुबह 11 बजे से नागालैंड के केज़ोमा गांव स्थित जाके ग्राउंड में आयोजित होगा।\n\n2. केज़ोमा में इस महोत्सव का आयोजन कौन कर रहा है?\nइसका आयोजन केज़ोमा विलेज काउंसिल और नागालैंड सरकार के कृषि विभाग तथा सहयोगी क्षेत्रों द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।\n\n3. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कौन होंगे?\nनागालैंड के कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) एवं सचिव डॉ. ज़ासेकुोली चूसी कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे।\n\n4. महोत्सव में किस तरह के स्टॉल लगाए जाएंगे?\nमहोत्सव में स्थानीय मिलेट किस्मों, उनसे बने वैल्यू-एडेड प्रसंस्कृत उत्पादों और पारंपरिक मिलेट व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे।\n\n5. मिलेट्स को पर्यावरण के अनुकूल क्यों माना जाता है?\nमिलेट्स कम पानी में उगते हैं और कठिन जलवायवीय परिस्थितियों व सूखे को आसानी से सहन कर सकते हैं।",
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  "category": "नागालैंड",
  "publishedAt": "2026-08-25",
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  "site": "TrendKia"
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