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  "type": "article",
  "title": "कोहिमा में पुलिस स्मृति दिवस पर नगालैंड के एडीजीपी ने 154 अमर जवानों को दी श्रद्धांजलि",
  "summary": "कोहिमा स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रेंचामो पी किकोन ने कर्तव्य पथ पर प्राण न्योछावर करने वाले देश भर के 154 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।",
  "content": "नगालैंड पुलिस मुख्यालय कोहिमा में बुधवार को पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रेंचामो पी किकोन ने सेवारत पुलिस बल को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले बहादुर साथियों की विरासत प्रत्येक जवान की कार्यशैली का आधार बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस की वर्दी समाज में जनता के भरोसे, सुरक्षा और सर्वोच्च बलिदान की पहचान है।\n\nलद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स की ऐतिहासिक घटना और स्मृति दिवस का इतिहास\nपुलिस स्मृति दिवस की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने बताया कि इस दिन का इतिहास 21 अक्टूबर 1959 की उस साहसिक घटना से जुड़ा है, जब लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में लापता साथियों की खोजबीन के लिए डिप्टी सेंट्रल इंटेलिजेंस ऑफिसर करम सिंह के नेतृत्व में 20 सदस्यीय पुलिस दल रवाना हुआ था। उस दौरान चीनी सैनिकों ने अचानक घात लगाकर इस गश्ती दल पर हमला कर दिया था, जिसमें बल के दस साहसी सदस्य वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस दिन की शुरुआत मूल रूप से उन अमर जवानों की स्मृति में की गई थी, लेकिन अब यह दिन उस तारीख के बाद से देश सेवा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले प्रत्येक पुलिसकर्मी के सर्वोच्च योगदान को नमन करने का प्रतीक बन चुका है।\n\nकर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और शोक संतप्त परिवारों को पूर्ण समर्थन\nरेंचामो पी किकोन ने जवानों से आह्वान किया कि शहीद साथियों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी दी जा सकती है, जब हम उन बुनियादी नैतिक मूल्यों की रक्षा करें जिनके लिए उन्होंने अपने जीवन का बलिदान दिया। उन्होंने पुलिस बल से अपराध नियंत्रण, सार्वजनिक शांति व व्यवस्था बनाए रखने और जनता की सेवा पूरी ईमानदारी तथा मानवीय संवेदना के साथ करने का संकल्प दोहराने को कहा। समाज में वर्तमान में मौजूद शांति व्यवस्था को पुलिसकर्मियों के अनवरत त्याग और समर्पण का परिणाम बताते हुए उन्होंने शहीद परिवारों को नगालैंड पुलिस की ओर से हर संभव सहायता और साथ देने का अटूट भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि इन परिवारों का नुकसान कभी न पूरा होने वाला है।\n\n154 बलिदानी जवानों का सम्मान और राष्ट्रीय एकता दिवस की यात्रा\nअतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने जानकारी दी कि 31 अगस्त को समाप्त हुए 12 महीनों के दौरान भारत भर में 154 पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा में अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले इन सभी जांबाजों को नमन किया। उन्होंने बल को संदेश दिया कि जवानों का अदम्य साहस उनके दैनिक आचरण को प्रेरित करे और नागरिकों के प्रति उनका समर्पण एक नैतिक दिशा निर्देशक का कार्य करे।\n\nराज्य पुलिस की विशेष पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि नगालैंड पुलिस की एक नौ सदस्यीय मोटरसाइकिल टीम 7 अक्टूबर को 2,845 किलोमीटर की लंबी यात्रा पर निकली थी, जो सात राज्यों से होकर गुजर रही है। यह दल मध्य प्रदेश के जबलपुर तक पहुंच चुका है और 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में शामिल होने के लिए गुजरात के केवड़िया में अन्य राज्यों के दलों से मिलेगा। इसके अलावा नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर भी राज्य पुलिस के प्रतिनिधियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कोहिमा में एआईजीपी शौका केखातो ने शहीद जवानों की नामवली पढ़कर सुनाई, जिसके बाद निशान और अंगरक्षक टोली ने समाधि स्थल पर बिगुल बजाकर सम्मान दिया और उपस्थित अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित किए।\n\nइसका आप पर असर\nयह आयोजन कानून व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस बल के प्रति समाज के सम्मान और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है।\n\n• भारत में: देश भर के नागरिकों को यह विश्वास मिलता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल पूरी निष्ठा से कार्यरत हैं। पिछले 12 महीनों में जान गंवाने वाले 154 कर्मियों का सम्मान सुरक्षा तंत्र की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।\n• नगालैंड में: स्थानीय नागरिकों और शहीद परिवारों को पुलिस नेतृत्व की ओर से निरंतर प्रशासनिक और नैतिक समर्थन का सीधा आश्वासन मिला है। इस तरह के आयोजनों से राज्य में नागरिक और पुलिस प्रशासन के बीच आपसी विश्वास मजबूत होता है।\n• कर्तव्यरत कर्मियों के लिए: सेवारत पुलिसकर्मियों के भीतर ईमानदारी और निष्पक्षता से कानून का पालन कराने की नई प्रेरणा उत्पन्न होती है। इससे थानों और फील्ड ड्यूटी में तैनात कर्मियों के कार्य आचरण में अधिक संवेदनशीलता आती है।\n• युवाओं के लिए: राष्ट्रीय एकता और सेवा भावना को बढ़ावा देने वाले अभियानों से युवाओं में वर्दीधारी सेवाओं के प्रति सम्मान बढ़ता है। केवड़िया जाने वाली मोटरसाइकिल रैली जैसे कार्यक्रम अंतर-राज्यीय समन्वय का सीधा संदेश देते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपुलिस स्मृति दिवस का आयोजन कर्तव्य के दौरान जान गंवाने वाले बहादुर पुलिसकर्मियों के बलिदान को याद करने और सेवारत जवानों में कर्तव्यनिष्ठा का संचार करने के लिए प्रतिवर्ष किया जाता है।\n\n• ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों के अप्रत्याशित हमले में दस भारतीय पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इसी घटना के बाद से इस विशेष दिन को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई।\n• शहीदों को श्रद्धांजलि: 31 अगस्त को समाप्त हुए 12 महीनों में भारत भर में 154 पुलिसकर्मियों ने अपनी ड्यूटी के दौरान प्राणों की आहुति दी। इस औपचारिक सभा के जरिए इन सभी अमर कर्मियों के योगदान को संस्थागत रूप से दर्ज और सम्मानित किया गया।\n• बल का मनोबल बढ़ाना: सेवारत जवानों को यह संदेश देना आवश्यक था कि वर्दी का मूल उद्देश्य जनता का विश्वास जीतना और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने जवानों को ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।\n• राष्ट्रव्यापी समन्वय: राज्य पुलिस के जवानों ने 2,845 किलोमीटर की लंबी यात्रा के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और शहीदों के सम्मान का संदेश पूरे देश में प्रसारित करने की पहल की। यह दल गुजरात के केवड़िया में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय एकता दिवस परेड का हिस्सा बनेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास किस घटना से जुड़ा हुआ है?\nयह दिन 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों के हमले में शहीद हुए 10 पुलिसकर्मियों की याद में शुरू हुआ था।\n\n2. 31 अगस्त को समाप्त हुए 12 महीनों में देश भर में कितने पुलिसकर्मियों ने प्राण गंवाए?\nइस 12 महीने की अवधि के दौरान पूरे भारत में कुल 154 पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।\n\n3. नगालैंड पुलिस की मोटरसाइकिल टीम किस यात्रा पर निकली है?\nनौ सदस्यीय यह टीम 7 राज्यों से होते हुए 2,845 किलोमीटर की यात्रा कर 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस परेड के लिए गुजरात के केवड़िया पहुंचेगी।\n\n4. कोहिमा में आयोजित कार्यक्रम में शहीदों की नामावली किसने पढ़कर सुनाई?\nकोहिमा स्थित पुलिस मुख्यालय में एआईजीपी शौका केखातो ने शहीद जवानों की आधिकारिक नामावली पढ़कर सुनाई।",
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