नागालैंड के मुख्यमंत्री ने अमित शाह से की मुलाकात, एफएनटीए और पीएपी व्यवस्था पर हुई चर्चा नागालैंड के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात कर फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी के क्रियान्वयन और प्रोटेक्टेड एरिया परमिट नियमों में ढील दिए जाने को लेकर विचार-विमर्श किया। नागालैंड के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच राज्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई, जिसमें प्रमुख रूप से फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी के गठन और प्रोटेक्टेड एरिया परमिट व्यवस्था में संशोधन के मामले शामिल रहे। फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी और राष्ट्रपति की मंजूरी इस अहम मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया में निरंतर सहयोग के लिए गृह मंत्री के प्रति आभार प्रकट किया। हाल ही में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी बिल 2026 को अपनी स्वीकृति प्रदान की है, जिसके बाद से इस दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। सितंबर के महीने में ही इस विधेयक को नागालैंड विधानसभा में पारित किया गया था, जिसे अब वैधानिक मुहर मिल चुकी है। पूर्वी जिलों के लिए स्वायत्तता की दिशा में बड़ा कदम राज्य के छह पूर्वी जिलों के निवासियों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में इस मंजूरी को एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। इस प्रशासनिक व्यवस्था के लागू होने से तुएनसांग, मोन, लॉन्गलेंग, किफिरे, नोक्लाक और शामटोर जैसे क्षेत्रों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। इस समझौते की रूपरेखा इस साल 5 फरवरी को केंद्र सरकार, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के तहत तैयार की गई थी, जो इस क्षेत्र की आठ मान्यता प्राप्त जनजातियों का शीर्ष संगठन है। प्रोटेक्टेड एरिया परमिट और आगे की प्रक्रिया मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बैठक के दौरान प्रोटेक्टेड एरिया परमिट नियमों को आसान बनाने पर भी गंभीरता से चर्चा की गई। गृह मंत्री ने इस मामले में सकारात्मक रुख दिखाते हुए नियमों में ढील देने का आश्वासन दिया है। इससे पहले मार्च महीने में इस विधेयक का एक शुरुआती प्रारूप विधानसभा में लाया गया था, जिसे केंद्र सरकार, संगठन और स्थानीय विधायकों के बीच विभिन्न प्रावधानों पर स्पष्टता चाहने के कारण टाल दिया गया था। विधेयक का सफर और सर्वसम्मति विभिन्न स्तरों पर हुई लंबी चर्चाओं और संशोधनों के बाद आखिरकार इस रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। इसके बाद 3 सितंबर को नागालैंड विधानसभा में इस विधेयक को पूरी तरह से सर्वसम्मति के साथ पारित कर दिया गया, जिससे राज्य के पूर्वी हिस्सों को प्रशासनिक स्वायत्तता मिलने का रास्ता साफ हो गया। इसका आप पर असर यह निर्णय नागालैंड के पूर्वी जिलों के निवासियों के प्रशासनिक और विकासात्मक ढांचे को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। • भारत में: यह कदम देश के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में क्षेत्रीय स्वायत्तता और स्थानीय शासन को मजबूत करने की दिशा में एक नया उदाहरण पेश करता है। • नागालैंड में: तुएनसांग, मोन, लॉन्गलेंग, किफिरे, नोक्लाक और शामटोर जिलों के लोगों को बेहतर प्रशासनिक अधिकार और विकास कार्यों में तेजी देखने को मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक प्रगति केंद्र सरकार, राज्य प्रशासन और स्थानीय जनजातीय संगठनों के बीच लंबी वार्ताओं का परिणाम है। • त्रिपक्षीय समझौता: केंद्र, नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन के बीच हुए समझौते ने इस व्यवस्था की नींव रखी। • विधानसभा की प्रक्रिया: मार्च में रोके गए विधेयक को विभिन्न पक्षों की आपत्तियों और स्पष्टीकरण के बाद सितंबर में सर्वसम्मति से पारित किया गया। सवाल-जवाब 1. फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी बिल को कब मंजूरी मिली? इस विधेयक को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है। 2. यह विधेयक किस तारीख को विधानसभा में पारित हुआ था? नागालैंड विधानसभा ने 3 सितंबर को इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था। 3. इस समझौते में कौन सा प्रमुख संगठन शामिल था? इस प्रक्रिया में ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन ने मुख्य भूमिका निभाई जो क्षेत्र की आठ जनजातियों का प्रतिनिधित्व करता है। 4. किन जिलों को इस नई व्यवस्था के तहत कवर किया जाएगा? इसके अंतर्गत तुएनसांग, मोन, लॉन्गलेंग, किफिरे, नोक्लाक और शामटोर जिले शामिल हैं। https://trendkia.com/nagaland/nagaland-ke-mukhya-mantri-ne-amit-shah-se-ki-mulakat-fnta-aur-pap-vyavastha-par-hui-charcha-51963 TrendKia — Har trend, sabse pehle.