नागालैंड मतदाता सूची संशोधन: 5 लाख वोटरों को नोटिस भेजने की तैयारी, 1.59 लाख नाम हटाए गए नागालैंड में विशेष गहन संशोधन के तहत जारी ड्राफ्ट रोल में 11.99 लाख मतदाताओं के नाम शामिल हैं, जबकि 2005 की सूची से मिलान न होने पर करीब 5 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे। नागालैंड में चल रहे विशेष गहन संशोधन यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत चुनावी तंत्र ने मतदाता सूची की शुद्धि को लेकर एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस प्रक्रिया के तहत राज्य भर में करीब पांच लाख ऐसे मतदाताओं को चुनाव अधिकारियों की तरफ से औपचारिक नोटिस भेजे जाने की तैयारी की जा रही है, जिनके विवरण का मिलान वर्ष 2005 की मतदाता सूची से नहीं हो सका है अथवा जिनके मैपिंग रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। निर्वाचन अधिकारियों द्वारा यह कदम ड्राफ्ट रोल जारी किए जाने के बाद उठाया जा रहा है, जिसमें पिछले कुल मतदाताओं में से लगभग 1.59 लाख प्रविष्टियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। मैपिंग विसंगतियों के चलते 36.64 प्रतिशत मतदाता दायरे में अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी अवा लोरिन ने इस व्यापक प्रशासनिक कवायद के आंकड़े साझा करते हुए स्पष्ट किया कि कुल मतदाताओं में से 9.33 प्रतिशत लोग 'नो मैपिंग' की श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा 27.31 प्रतिशत मतदाताओं को विवरण संबंधी विसंगतियों अथवा मैपिंग त्रुटियों के तहत वर्गीकृत किया गया है। यदि इन दोनों श्रेणियों को मिला दिया जाए, तो यह आंकड़ा कुल मतदाता वर्ग के 36.64 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है। इसका सीधा मतलब यह है कि एक बहुत बड़े वर्ग के चुनावी रिकॉर्ड का सत्यापन अभी बाकी है और उनकी मौजूदा प्रविष्टि 2005 के रिकॉर्ड के साथ मेल नहीं खा रही है। अवा लोरिन ने आगे जानकारी दी कि चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारी (AERO) उन सभी नागरिकों को विधिवत नोटिस जारी करेंगे जिनका नाम या तो 2005 की सूची से सीधे तौर पर नहीं जुड़ पाया है या फिर जो यह साबित करने में असमर्थ रहे हैं कि वे उस वर्ष की सूची में दर्ज किसी पंजीकृत व्यक्ति के प्रत्यक्ष वंशज हैं। जिन लोगों को यह नोटिस प्राप्त होगा, उन्हें ईआरओ अथवा एईआरओ के समक्ष निर्धारित दस्तावेज पेश करने होंगे। इसके लिए आवश्यक दस्तावेजों की संख्या और प्रकार संबंधित मतदाता की जन्मतिथि अथवा जन्म के वर्ष पर निर्भर करेगा। दस्तावेजी सत्यापन और अंतिम सूची का तय कार्यक्रम अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि नोटिस मिलने का मतलब मतदाता सूची से तत्काल नाम कटना नहीं है। उनके शब्दों में, "यदि वे आपके दावे और आपके दस्तावेजों से संतुष्ट हो जाते हैं, तो आपका नाम अंतिम सूची में बना रहेगा।" हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी जोड़ी कि यदि कोई व्यक्ति अपना दावा स्थापित करने या अपेक्षित कागजात जमा करने में विफल रहता है, तो उसका नाम आगामी 22 नवंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची से पूरी तरह बाहर कर दिया जाएगा। प्रशासन ने यह भरोसा भी दिलाया है कि जो मतदाता 2005 की सूची में पंजीकृत नहीं थे, उन्हें वर्तमान सूची से स्वतः या मनमाने ढंग से नहीं हटाया जाएगा। ऐसे नागरिकों को यह अवसर मिलेगा कि वे 2005 की सूची में मौजूद किसी व्यक्ति से अपना पारिवारिक संबंध प्रमाणित कर सकें। इसके अलावा, जहां भी लागू हो, वे दावे और आपत्तियों की तय अवधि के दौरान नए पंजीकरण के लिए भी अर्जी लगा सकते हैं। नोटिस और सत्यापन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए ईआरओ कार्यालयों, जिला मुख्यालयों अथवा मतदान केंद्र स्तर पर विशेष सुनवाई आयोजित की जाएगी। यह पूरा सत्यापन कार्य अंतिम सूची के प्रकाशन से पूर्व 18 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। दावे-आपत्तियों की खिड़की और नए युवा मतदाता मुख्य निर्वाचन अधिकारी भाग्यश्री बनायत ने संशोधन अभियान के विस्तृत नियम स्पष्ट करते हुए बताया कि दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयावधि 20 सितंबर से 20 अक्टूबर तक खुली रहेगी। इस एक महीने की खिड़की के दौरान उन सभी वास्तविक मतदाताओं को अपना नाम फिर से जुड़वाने का मौका दिया जाएगा जो किसी कारणवश ड्राफ्ट रोल से छूट गए हैं। ऐसे व्यक्ति आवश्यक घोषणा पत्र और सहायक दस्तावेजों के साथ फॉर्म 6 भरकर अपना दावा पेश कर सकते हैं। यही समय सीमा उन नए मतदाताओं के लिए भी उपलब्ध रहेगी जो पहली बार मतदान करने के पात्र बने हैं। इसके तहत 1 अक्टूबर 2026 की अर्हक तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले सभी युवा अपना पंजीकरण करवा सकेंगे। इस विशेष पुनरीक्षण से जुड़े सभी फॉर्म और आवश्यक दिशा-निर्देश बूथ लेवल अधिकारियों (BLO), स्थानीय चुनाव कार्यालयों और मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से सुलभ कराए गए हैं। पात्र नागरिक चाहें तो अपने आवेदन ऑनलाइन माध्यम से भी जमा कर सकते हैं। आधार कार्ड की स्थिति और निरस्त नामों का विवरण मतगणना प्रपत्रों में आधार विवरण दर्ज कराने को लेकर उठ रहे सवालों पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी भाग्यश्री बनायत ने स्थिति साफ की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आधार नंबर प्रदान करना पूरी तरह से स्वैच्छिक है और आधार को अपने आप में नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता। मतदाता सूची में आधार सीडिंग की कोई बाध्यकारी प्रक्रिया नहीं चलाई जा रही है, इसलिए फॉर्म में आधार या मोबाइल नंबर साझा करना नागरिक की अपनी मर्जी पर निर्भर है। अधिकारियों के अनुसार, 16 अगस्त से 14 सितंबर के बीच आयोजित गणना प्रक्रिया के दौरान कुल 13,57,208 मतदाताओं को कवर किया गया था। इनमें से 11,99,456 मतदाताओं (88.38 प्रतिशत) ने अपने गणना फॉर्म विधिवत जमा किए। जांच के दौरान लगभग 1.59 लाख प्रविष्टियों को हटाने योग्य पाया गया। इसमें 29,944 मृतक मतदाता शामिल थे, जो कुल संख्या का 2.13 प्रतिशत हैं। वहीं 1,23,749 मतदाताओं (9.12 प्रतिशत) को अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित अथवा अन्य श्रेणियों में रखा गया। इसके अतिरिक्त 5,059 मतदाता (0.37 प्रतिशत) एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए, जिनका नाम केवल एक ही जगह बरकरार रखा जाएगा। जिलों में फॉर्म संग्रह की स्थिति अनुपस्थित और स्थानांतरित वर्ग में वे लोग भी शामिल हैं जो दूसरे राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता बन चुके हैं, जिनका पता नहीं चल सका, जिन्होंने 14 सितंबर तक अपने फॉर्म जमा नहीं किए, या जिन्होंने पंजीकरण कराने से मना कर दिया। जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो दीमापुर में सबसे अधिक 36,629 गणना फॉर्म ऐसे रहे जिनका संग्रह नहीं हो सका। इसके बाद चुमौकेदिमा में 28,626, कोहिमा में 24,178 और वोखा में 11,500 प्रपत्र एकत्र नहीं किए जा सके। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, कुल 3,297 मतदाताओं ने अपने फॉर्म वापस नहीं लौटाए हैं। इसका आप पर असर नागालैंड के लाखों नागरिकों के लिए यह चुनावी संशोधन सीधे तौर पर उनके मताधिकार और नागरिक पहचान के सत्यापन से जुड़ा हुआ है। • नागालैंड में: जिन मतदाताओं का 2005 की सूची से मिलान नहीं हुआ है, उन्हें ईआरओ और एईआरओ के सामने पेश होकर अपने दस्तावेज साबित करने होंगे। यदि वे 18 नवंबर तक अपना दावा साबित नहीं कर पाते हैं, तो 22 नवंबर को आने वाली अंतिम सूची से उनका नाम कट जाएगा। • छूटे हुए मतदाताओं के लिए: ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए वास्तविक नागरिक 20 सितंबर से 20 अक्टूबर तक फॉर्म 6 भरकर पुनः नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें निर्धारित घोषणा पत्र और आवश्यक कागजी प्रमाण साथ लगाने होंगे। • नए युवाओं के लिए: जो युवा 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे इस एक महीने की विंडो में अपना नाम जुड़वा सकते हैं। यह प्रक्रिया बूथ लेवल ऑफिसर के माध्यम से या ऑनलाइन पूरी की जा सकती है। • पहचान पत्र और आधार: मतदाताओं को यह ध्यान रखना होगा कि आधार नंबर देना पूरी तरह ऐच्छिक है और यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है। बिना आधार दिए भी मतदाता अपने आवश्यक जन्म संबंधी दस्तावेज जमा कर सत्यापन करा सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ नागालैंड में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन का मुख्य उद्देश्य फर्जी, दोहरे और स्थानांतरित नामों को हटाकर पारदर्शी चुनावी रिकॉर्ड तैयार करना है। वर्ष 2005 की मतदाता सूची को एक महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है ताकि वास्तविक स्थानीय नागरिकों और उनके वंशजों की सटीक पहचान सुनिश्चित की जा सके। • 2005 सूची से मिलान न होना: राज्य के 36.64 प्रतिशत मतदाताओं का विवरण 2005 के रिकॉर्ड से नहीं मिल सका या उसमें गंभीर विसंगतियां पाई गईं। इनमें से 9.33 प्रतिशत 'नो मैपिंग' और 27.31 प्रतिशत मैपिंग विसंगतियों के दायरे में आए हैं। • मृतक और विस्थापित प्रविष्टियों की छंटनी: जांच अभियान में 29,944 मृत मतदाता और 1,23,749 अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित लोग पाए गए। इसके अलावा 5,059 ऐसे लोग मिले जिनके नाम कई मतदान केंद्रों पर दर्ज थे। • दस्तावेजी प्रमाण की अनिवार्यता: चुनाव आयोग ने नियम बनाया है कि जो लोग 2005 के रिकॉर्ड में नहीं थे, उन्हें उस सूची में शामिल किसी व्यक्ति से अपना पारिवारिक संबंध प्रमाणित करना होगा। इसी वजह से अधिकारियों को 5 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी करने का फैसला लेना पड़ा। सवाल-जवाब 1. नागालैंड में कितने मतदाताओं को नोटिस मिलने की संभावना है? राज्य के लगभग 5 लाख मतदाताओं को 2005 की मतदाता सूची से मिलान न होने और मैपिंग विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किए जाने की संभावना है। 2. ड्राफ्ट रोल से कुल कितने नाम हटाए गए हैं? ड्राफ्ट रोल में पिछले 13.57 लाख मतदाताओं में से करीब 1.59 लाख नाम हटाए गए हैं, जिससे अब 11.99 लाख मतदाता बचे हैं। 3. दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समय सीमा क्या है? दावे और आपत्तियों की खिड़की 20 सितंबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक खुली रहेगी। 4. अंतिम मतदाता सूची किस तारीख को प्रकाशित की जाएगी? अधिकारियों द्वारा सत्यापन की प्रक्रिया 18 नवंबर तक पूरी की जाएगी और अंतिम मतदाता सूची 22 नवंबर को प्रकाशित होगी। 5. क्या मतदाता सूची के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है? नहीं, आधार नंबर देना पूरी तरह स्वैच्छिक है और आधार अपने आप में नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। 6. किस जिले में सबसे अधिक फॉर्म एकत्र नहीं हो सके? दीमापुर जिले में सबसे अधिक 36,629 गणना फॉर्म एकत्र नहीं किए जा सके। https://trendkia.com/nagaland/nagaland-matadata-suchi-snshodhana-5-lakha-votaron-ko-notisa-bhejane-ki-taiyari-1-59-lakha-nama-hatae-gae-36230 TrendKia — Har trend, sabse pehle.