# नागालैंड में बाल सुरक्षा तंत्र की समीक्षा, बाल अधिकार आयोग ने बुनियादी ढांचे और बजट की कमी पर जताई चिंता

> कोहिमा के लोक भवन में राज्यपाल नंद किशोर यादव ने बाल संरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की, जहाँ आयोग ने विशेष देखभाल वाले बच्चों के लिए जरूरी सुविधाओं और फंड के अभाव का मुद्दा उठाया।

**Type:** article · **Category:** नागालैंड · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/nagaland/nagaland-men-bala-suraksha-tntra-ki-samiksha-bala-adhikara-ayoga-ne-buniyadi-dhanche-aura-bajata-ki-kami-para-jatai-chinta-37975 · **Language:** Hindi
**Tags:** नागालैंड, बाल अधिकार संरक्षण, नंद किशोर यादव, कोहिमा, पॉक्सो एक्ट, बाल सुरक्षा

नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने गुरुवार को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के कामकाज का विस्तृत जायजा लिया। कोहिमा स्थित लोक भवन में आयोजित इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान बाल अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े तंत्र को मजबूत करने और धरातल पर आ रही दिक्कतों को दूर करने पर गहन चर्चा हुई। आयोग के प्रतिनिधियों ने बैठक में बताया कि राज्य भर में बाल सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे का विस्तार करने, जरूरी कर्मचारियों की तैनाती करने और नियमित वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था करने में गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं।

## विशेष देखभाल वाले बच्चों के लिए सुविधाओं का अभाव
समीक्षा बैठक के दौरान आयोग की ओर से प्रस्तुत विवरण में इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया गया कि देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हैं। विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे नाबालिगों, नशीले पदार्थों के सेवन के शिकार हुए बच्चों तथा दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास और उपचार के लिए विशेष केंद्रों व प्रशिक्षित विशेषज्ञों की भारी कमी बनी हुई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब तक इन संवेदनशील वर्गों के लिए समर्पित संस्थागत सुविधाएं तैयार नहीं की जातीं, तब तक सुरक्षा पहलों का पूरा लाभ जमीनी स्तर पर नहीं पहुंच सकता।

## कानूनों के क्रियान्वयन और अंतर-विभागीय समन्वय का ब्योरा
आयोग ने वर्ष 2023 से लेकर अब तक की अपनी प्रमुख गतिविधियों और उपलब्धियों का ब्योरा राज्यपाल के समक्ष रखा। इस अवधि में राज्य के विभिन्न जिलों में बाल संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनों की निगरानी पर विशेष बल दिया गया। इनमें किशोर न्याय अधिनियम 2015, पॉक्सो कानून 2012, शिक्षा का अधिकार कानून 2009 और बाल एवं किशोर श्रम निषेध कानून 1986 का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के प्रयास शामिल रहे। इसके अलावा आयोग ने पुलिस, न्यायपालिका, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा और श्रम विभागों के साथ गैर-सरकारी संगठनों का एक साझा मंच तैयार किया है, ताकि मामलों का त्वरित निस्तारण हो सके। जनजातीय निकायों, ग्राम परिषदों और स्कूलों के सहयोग से सुदूर इलाकों तक जागरूकता अभियान भी संचालित किए गए।

## संस्थागत निरीक्षण, विशेष प्रशिक्षण और भविष्य की रूपरेखा
बाल अधिकारों की वास्तविक स्थिति परखने के लिए आयोग ने बाल देखरेख संस्थानों, संप्रेक्षण गृहों, विशेष गृहों और शैक्षणिक संस्थानों का नियमित निरीक्षण किया। पुलिसकर्मियों को किशोर न्याय और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर सघन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। इसके साथ ही मीडिया बिरादरी के लिए बाल-अनुकूल रिपोर्टिंग और बच्चों की पहचान सुरक्षित रखने पर विशेष कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। पूर्वोत्तर क्षेत्र में बाल अधिकारों के संयुक्त रोडमैप के तहत आयोग ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग में आयोजित समागम में भाग लेकर तवांग घोषणापत्र तैयार करने में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

भविष्य की कार्ययोजना साझा करते हुए आयोग ने अदालतों और थानों में बाल-अनुकूल कक्ष स्थापित करने पर जोर दिया ताकि कानूनी प्रक्रियाओं के संपर्क में आने वाले बच्चों को भयमुक्त माहौल मिल सके। आने वाले दिनों में सभी जिलों में बाल तस्करी की रोकथाम, नशा मुक्ति, डिजिटल सुरक्षा और दिव्यांग बच्चों के अधिकारों के प्रति स्थानीय समुदायों व प्रशासनिक तंत्र को और अधिक जागरूक करने का अभियान जारी रखा जाएगा।

## इसका आप पर असर
इस प्रशासनिक समीक्षा से नागालैंड में बच्चों के लिए कानूनी और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था अधिक जवाबदेह बनेगी।

- **भारत में:** पूर्वोत्तर राज्यों में बाल अधिकारों के साझा ढांचे और अंतर-विभागीय समन्वय पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान केंद्रित होगा। इससे क्षेत्रीय नीतियों और बजटीय आवंटन में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
- **नागालैंड में:** थानों और अदालतों में बाल-अनुकूल कक्ष बनने से कानूनी प्रक्रिया के दौरान बच्चों को मानसिक तनाव और भय से राहत मिलेगी। विशेष पुनर्वास केंद्रों और फंड की मांग पूरी होने से नशा मुक्ति तथा दिव्यांग बच्चों की देखभाल आसान होगी।
- **माता-पिता और अभिभावकों के लिए:** बाल तस्करी और डिजिटल अपराधों के प्रति जिलास्तरीय जागरूकता कार्यक्रमों से अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। किसी भी शोषण की स्थिति में स्थानीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराना अधिक सुगम होगा।
- **कानून प्रवर्तन और प्रशासन के लिए:** पुलिसकर्मियों को दी जाने वाली विशेष ट्रेनिंग से मामलों की जांच अधिक मानवीय और नियमसम्मत तरीके से पूरी होगी। इससे किशोर न्याय और पॉक्सो मामलों में बच्चों के अधिकारों का हनन रुकेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह समीक्षा बैठक राज्य में बाल अधिकारों के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति और संस्थागत सीमाओं का आकलन करने के लिए आयोजित की गई थी।

- **सीधा कारण:** राज्यपाल द्वारा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने संसाधनों की भारी कमी से अवगत कराया। बैठक का मुख्य उद्देश्य मौजूदा योजनाओं की प्रगति और संस्थागत बाधाओं को समझना था।
- **बुनियादी ढांचे की कमी:** नशीली दवाओं की लत, मानसिक तनाव और दिव्यांगता से प्रभावित बच्चों के लिए राज्य में विशेष आश्रय स्थलों और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। आवश्यक बजट के अभाव में इन सुविधाओं का विस्तार रुका हुआ था।
- **क्षेत्रीय प्रतिबद्धता:** हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में हस्ताक्षरित तवांग घोषणापत्र के बाद राज्य में बाल संरक्षण तंत्र को आधुनिक और प्रभावी बनाने की प्रक्रिया तेज हुई है। सभी संबंधित विभागों को एक मंच पर लाकर कानूनी अनुपालन को चुस्त करना अनिवार्य हो गया था।

## सवाल-जवाब

### 1. राज्यपाल नंद किशोर यादव ने किस आयोग की समीक्षा की?
उन्होंने नागालैंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के कामकाज और गतिविधियों की समीक्षा की।

### 2. यह समीक्षा बैठक कहाँ आयोजित की गई थी?
यह समीक्षा बैठक कोहिमा स्थित लोक भवन में आयोजित की गई थी।

### 3. आयोग ने किन प्रमुख समस्याओं का उल्लेख किया?
आयोग ने बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षित कर्मचारियों और आवश्यक बजट की भारी कमी को प्रमुख चुनौती बताया।

### 4. किन बच्चों की देखभाल के लिए विशेष सुविधाओं की कमी बताई गई?
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, नशीले पदार्थों के सेवन और दिव्यांगता से जूझ रहे बच्चों के लिए सुविधाओं का अभाव बताया गया।

### 5. आयोग किन प्रमुख कानूनों के क्रियान्वयन की निगरानी करता है?
आयोग किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम, शिक्षा का अधिकार और बाल श्रम निषेध कानून की निगरानी करता है।

### 6. आयोग की भविष्य की प्राथमिकताओं में क्या शामिल है?
अदालतों व थानों में बाल-अनुकूल कक्ष स्थापित करना तथा बाल तस्करी, नशा मुक्ति और डिजिटल सुरक्षा पर जागरूकता बढ़ाना मुख्य प्राथमिकता है।

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