# नागालैंड में पांच विधायकों के पाला बदलने पर नेशनल पीपुल्स पार्टी पहुंची विधानसभा अध्यक्ष के पास, अयोग्यता की मांग उठाई

> नागालैंड में नेशनल पीपुल्स पार्टी के सभी पांच विधायकों के नगा पीपुल्स फ्रंट में शामिल होने के बाद पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की हैं।

**Type:** article · **Category:** नागालैंड · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/nagaland/nagaland-men-pancha-vidhayakon-ke-pala-badalane-para-national-people-s-party-pahunchi-vidhanasabha-adhyaksha-ke-pasa-ayogyata-ki-m-43789 · **Language:** Hindi
**Tags:** नागालैंड, नेशनल पीपुल्स पार्टी, नगा पीपुल्स फ्रंट, विधानसभा अध्यक्ष, दल बदल विरोधी कानून, दसवीं अनुसूची

नागालैंड के राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब नेशनल पीपुल्स पार्टी ने अपने पांच बागी विधायकों को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने के लिए औपचारिक कदम उठा दिया। इन पांचों विधायकों ने हाल ही में सत्तारूढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट का दामन थाम लिया था। इस दल-बदल के खिलाफ नेशनल पीपुल्स पार्टी ने राज्य विधानसभा के अध्यक्ष का दरवाजा खटखटाया है और दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की मांग रखी है।

## सत्तारूढ़ दल में शामिल होने से बदला संख्याबल
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम 1 अक्टूबर को शुरू हुआ, जब नेशनल पीपुल्स पार्टी के पांचों विधायकों ने आधिकारिक तौर पर नगा पीपुल्स फ्रंट में जाने का फैसला किया। इस कदम के बाद 60 सदस्यीय नागालैंड विधानसभा के भीतर सत्तारूढ़ दल की कुल सदस्य संख्या बढ़कर 39 पहुंच गई है। इन बागी विधायकों के पाला बदलने से सदन का गणित काफी हद तक बदल गया है। उल्लेखनीय है कि यह घटनाक्रम नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के नगा पीपुल्स फ्रंट में विलय होने के एक साल बाद सामने आया है।

## अलग-अलग याचिकाओं के जरिए कानूनी चुनौती
नेशनल पीपुल्स पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वेवोयी विदेओ ने जानकारी दी कि पार्टी ने बागी विधायकों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं सौंपी हैं। प्रत्येक विधायक के खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर आवेदन देकर संविधान के दल-बदल विरोधी नियमों के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने का अनुरोध किया गया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि वह विधानसभा अध्यक्ष के संवैधानिक पद का पूरा सम्मान करती है और कानून के स्थापित नियमों के मुताबिक ही अध्यक्ष के समक्ष अपनी दलीलें पेश करेगी।

## दसवीं अनुसूची के तहत विलय का दावा
विधानसभा के लिए वर्ष 2023 के आम चुनावों में नेशनल पीपुल्स पार्टी के टिकट पर चुने गए इन पांच विधायकों में ए न्यमनेई कोन्याक, नुकलुतोशी, सी किपिली संगतम, डॉ त्सेलहाउतुओ रुत्सो और बेनेई एम लामथियू शामिल हैं। विधानसभा सचिवालय के अनुसार, इन सभी पांचों विधायकों ने 1 अक्टूबर को आधिकारिक सूचना पेश करते हुए यह दावा किया था कि उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के अंतर्गत नगा पीपुल्स फ्रंट के साथ अपनी पार्टी की विधायी इकाई का विलय कर लिया है।

## विधानसभा अध्यक्ष के पाले में फैसला
नेशनल पीपुल्स पार्टी द्वारा अयोग्यता याचिकाएं औपचारिक रूप से दायर करने के बाद अब पूरी स्थिति पर फैसला विधानसभा अध्यक्ष को करना है। भारतीय संविधान के दल-बदल विरोधी कानून के तहत विधायकों की अयोग्यता से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करने, कानूनी पहलुओं की पड़ताल करने और अंतिम फैसला सुनाने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास सुरक्षित है।

## इसका आप पर असर
नागालैंड की राजनीति में इस घटनाक्रम से विधानसभा के समीकरण और दल-बदल कानून की व्याख्या पर गहरा असर पड़ेगा।

- **भारत में:** संसद और अन्य राज्यों की विधानसभाओं के लिए दसवीं अनुसूची के तहत समूचे विधायक दल के विलय के दावों और कानूनी वैधता पर यह एक नया संदर्भ तैयार कर सकता है। इससे यह स्पष्ट होगा कि छोटी क्षेत्रीय पार्टियों के चुने हुए प्रतिनिधियों के पाला बदलने पर कानूनी सुरक्षा के दायरे क्या हैं।
- **नागालैंड में:** सत्तारूढ़ दल की संख्या 39 होने से सरकार की स्थिति विधानसभा के भीतर और अधिक मजबूत हो गई है। यदि अध्यक्ष द्वारा अयोग्यता की याचिकाएं स्वीकार की जाती हैं, तो संबंधित क्षेत्रों में उपचुनाव की नौबत आ सकती है।
- **मतदाताओं के लिए:** वर्ष 2023 के चुनावों में नेशनल पीपुल्स पार्टी को मिले जनमत और अब विधायकों द्वारा लिए गए नए राजनीतिक रुख के बीच स्थानीय राजनीतिक समीकरण प्रभावित होंगे। यह फैसला यह तय करेगा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की सदस्यता बरकरार रहती है या नहीं।
- **राजनीतिक दलों के लिए:** पूर्वोत्तर के क्षेत्रीय दलों के बीच आंतरिक अनुशासन और गठबंधन की राजनीति में नए कानूनी टकराव की स्थिति बन सकती है। विपक्षी खेमे को इस याचिका के परिणाम के आधार पर अपनी अगली राजनीतिक रणनीति तय करनी होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक टकराव तब पैदा हुआ जब नेशनल पीपुल्स पार्टी के टिकट पर चुने गए सभी पांच विधायकों ने पाला बदलकर सत्तारूढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट में जाने का फैसला कर लिया।

- **सीधा कारण:** 1 अक्टूबर को सभी पांच विधायकों ने विधानसभा सचिवालय को औपचारिक जानकारी देकर दावा किया कि उन्होंने दसवीं अनुसूची के तहत नगा पीपुल्स फ्रंट में अपनी विधायी इकाई का विलय कर लिया है। इसके जवाब में नेशनल पीपुल्स पार्टी ने इसे अवैध दल-बदल मानते हुए अयोग्यता याचिकाएं दायर कर दीं।
- **पृष्ठभूमि और स्थितियां:** यह घटनाक्रम नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के नगा पीपुल्स फ्रंट में हुए विलय के ठीक एक साल बाद सामने आया है। राज्य में सत्ता पक्ष के विस्तार और राजनीतिक ध्रुवीकरण के चलते विधायकों ने पाला बदलने का रास्ता चुना।
- **कानूनी अधिकार क्षेत्र:** दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत किसी विधायक की सदस्यता रद्द करने या विलय को वैध मानने का विशेषाधिकार पूरी तरह विधानसभा अध्यक्ष के पास है, इसलिए मामला औपचारिक रूप से उनके समक्ष लाया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. नेशनल पीपुल्स पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से क्या मांग की है?
पार्टी ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत अपने पांच बागी विधायकों को विधानसभा सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग की है।

### 2. किन पांच विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दायर की गई हैं?
याचिकाएं ए न्यमनेई कोन्याक, नुकलुतोशी, सी किपिली संगतम, डॉ त्सेलहाउतुओ रुत्सो और बेनेई एम लामथियू के खिलाफ दायर की गई हैं।

### 3. विधायकों ने किस दल का दामन थामा है और कब?
इन पांचों विधायकों ने 1 अक्टूबर को सत्तारूढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट का दामन थामा।

### 4. इस दल-बदल के बाद नगा पीपुल्स फ्रंट की विधानसभा में क्या स्थिति हो गई है?
60 सदस्यीय नागालैंड विधानसभा में सत्तारूढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट के सदस्यों की संख्या बढ़कर 39 हो गई है।

### 5. विधायकों ने अपने बचाव में क्या दावा पेश किया है?
विधायकों ने 1 अक्टूबर को दावा किया था कि उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत नगा पीपुल्स फ्रंट में विलय किया है।

### 6. इस मामले पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार किसके पास है?
दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता याचिकाओं पर सुनवाई और निर्णय लेने का अधिकार नागालैंड विधानसभा अध्यक्ष के पास है।

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