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  "type": "article",
  "title": "नागालैंड में रबर खेती की समीक्षा, राज्यपाल नंद किशोर यादव ने बुनियादी ढांचे और उत्पादन आंकड़ों का लिया जायजा",
  "summary": "नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने लोक भवन में आयोजित बैठक में रबर उत्पादन, प्रसंस्करण केंद्रों और ड्रोन छिड़काव जैसी प्रमुख पहलों की समीक्षा की।",
  "content": "कोहिमा स्थित लोक भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने राज्य में रबर की खेती की प्रगति और इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की। दीमापुर स्थित रबर बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों ने राज्यपाल को नागालैंड के विभिन्न जिलों में रबर बागानों की मौजूदा स्थिति, कुल उत्पादन, बुनियादी ढांचे के विकास, किसान प्रशिक्षण तथा जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।\n\nरबर उत्पादन और बागानों के क्षेत्र का आंकड़ेवार विवरण\nसमीक्षा बैठक में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक नागालैंड में कुल 29,794.39 हेक्टेयर क्षेत्र में रबर की खेती की जा रही थी। इस कुल कृषि क्षेत्र में से 11,977.71 हेक्टेयर हिस्से में परिपक्व बागान शामिल थे, जहां से रबर का दोहन किया जा रहा है, जबकि 17,816.68 हेक्टेयर क्षेत्र में अपरिपक्व बागान मौजूद थे। उत्पादन क्षमता की बात करें तो राज्य में कुल 13,617.21 मीट्रिक टन रबर का उत्पादन दर्ज किया गया, जिससे प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादकता 1,166.03 किलोग्राम दर्ज की गई।\n\nरबर बोर्ड की प्रमुख पहल और प्रसंस्करण केंद्रों का विकास\nबैठक में रबर बोर्ड द्वारा चलाए जा रहे कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की प्रगति का भी जायजा लिया गया। इनमें मुख्य रूप से इंडियन नेचुरल रबर ऑपरेशन्स फॉर असिस्टेड डेवलपमेंट यानी INROAD प्रोजेक्ट शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में बड़े पैमाने पर रबर बागानों के विकास को बढ़ावा देना और रबर पारिस्थिकी तंत्र को मजबूत करना है, ताकि स्थानीय किसानों की आजीविका में सुधार के साथ-साथ टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिल सके।\n\nअधिकारियों ने राज्यपाल को बताया कि व्यक्तिगत किसानों की प्रसंस्करण लागत को कम करने और रबर शीट की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए समूह प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। ये केंद्र किसानों को सामूहिक रूप से रबर प्रसंस्करण की सुविधा प्रदान करते हैं। इसके अलावा, क्षमता निर्माण के तहत किसानों को आधुनिक तकनीकों से अवगत कराने के लिए ऑन-फील्ड प्रशिक्षण, व्यावहारिक प्रदर्शन, जागरूकता कार्यक्रम और शैक्षणिक दौरों का आयोजन लगातार किया जा रहा है।\n\nटैपर्स का कौशल विकास और ड्रोन तकनीक से रोग नियंत्रण\nराज्य में प्रशिक्षित रबर टैपर्स की कमी को दूर करने के उद्देश्य से रबर बोर्ड ने टैपर्स इंटेंसिव स्किल इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (TISP) के कार्यान्वयन में तेजी लाई है। इस कार्यक्रम के जरिए स्थानीय युवाओं और श्रमिकों को वैज्ञानिक तरीके से रबर निकालने की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जा रही है। वहीं दूसरी ओर, बागानों को बीमारियों से बचाने के लिए आधुनिक ड्रोन तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। रबर के पेड़ों में होने वाली एब्नॉर्मल लीफ फॉल बीमारी से निपटने के लिए वोखा, पेरेन और निउलैंड जिलों के चयनित क्षेत्रों में 171.15 हेक्टेयर बागानों पर ड्रोन से कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव किया गया है।\n\nक्षेत्रीय चुनौतियां और भविष्य की कार्ययोजना\nसमीक्षा के दौरान रबर क्षेत्र के सामने आ रही मुख्य व्यावहारिक चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। राज्य में खराब ग्रामीण सड़क संपर्क, कुशल टैपर्स की कमी, दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिकों पर अत्यधिक निर्भरता, सीमित बाजार पहुंच और जंगली जानवरों द्वारा रबर बागानों को पहुंचाए जाने वाले नुकसान को प्रमुख बाधाओं के रूप में चिन्हित किया गया।\n\nभविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए रबर बोर्ड के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसान शिक्षा, कौशल विकास और समूह प्रसंस्करण केंद्रों के विस्तार का काम जारी रहेगा। बोर्ड नागालैंड सरकार के भूमि संसाधन विभाग के साथ मिलकर समन्वय से काम करेगा। इसके साथ ही, पूर्वोत्तर में रबर खेती के दायरे को और बढ़ाने के लिए प्रस्तावित INROAD 2.0 पहल के तहत अपनी गतिविधियों के विस्तार की तैयारियां भी की जा रही हैं।\n\nइसका आप पर असर\nपाठकों के लिए इसका प्रभाव: नागालैंड में रबर उत्पादन को बढ़ावा देने से घरेलू प्राकृतिक रबर की आपूर्ति मजबूत होगी, जिससे पूर्वोत्तर के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और किसानों की आय में सुधार होगा।\n\n• भारत में: नागालैंड से रबर उत्पादन बढ़ने से देश की आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे औद्योगिक विनिर्माण के लिए कच्चे माल की सुलभता बढ़ेगी और रबर उत्पादों की कीमतें स्थिर रहने में मदद मिलेगी।\n• नागालैंड में: स्थानीय किसानों को समूह प्रसंस्करण सुविधाओं और ड्रोन आधारित कीटनाशक छिड़काव का सीधा लाभ मिलेगा। इससे 29,794.39 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली रबर की फसलों का बचाव होगा और किसानों की उत्पादन लागत घटेगी।\n• स्थानीय श्रमिकों के लिए: TISP योजना के तहत मिलने वाले वैज्ञानिक प्रशिक्षण से स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। इससे बाहरी राज्यों के श्रमिकों पर निर्भरता घटेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।\n• ग्रामीण बुनियादी ढांचे के लिए: परिवहन बाधाओं की पहचान होने से वोखा, पेरेन और निउलैंड जैसे जिलों में ग्रामीण सड़कों के सुधार को गति मिलेगी। सड़कें बेहतर होने से किसान अपने कृषि उत्पादों को आसानी से प्रमुख बाजारों तक पहुंचा सकेंगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. 31 मार्च 2026 तक नागालैंड में कुल कितने क्षेत्र में रबर की खेती दर्ज की गई?\n31 मार्च 2026 तक नागालैंड में कुल 29,794.39 हेक्टेयर क्षेत्र में रबर की खेती दर्ज की गई, जिसमें 11,977.71 हेक्टेयर परिपक्व और 17,816.68 हेक्टेयर अपरिपक्व बागान शामिल हैं।\n\n2. समीक्षा बैठक के अनुसार नागालैंड में रबर का कुल उत्पादन कितना रहा?\nराज्य में कुल 13,617.21 मीट्रिक टन रबर का उत्पादन हुआ, जिसकी औसत उत्पादकता 1,166.03 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई।\n\n3. INROAD परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?\nइंडियन नेचुरल रबर ऑपरेशन्स फॉर असिस्टेड डेवलपमेंट (INROAD) परियोजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में बड़े पैमाने पर रबर बागानों का विस्तार करना और किसानों की आजीविका में सुधार करना है।\n\n4. रबर बागानों में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किस काम के लिए किया गया?\nवोखा, पेरेन और निउलैंड जिलों के 171.15 हेक्टेयर क्षेत्र में एब्नॉर्मल लीफ फॉल बीमारी से निपटने के लिए ड्रोन से कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव किया गया।\n\n5. नागालैंड में रबर क्षेत्र के सामने मुख्य चुनौतियां क्या हैं?\nप्रमुख चुनौतियों में खराब ग्रामीण सड़कें, कुशल टैपर्स की कमी, बाहरी मजदूरों पर निर्भरता, सीमित बाजार पहुंच और जंगली जानवरों द्वारा बागानों को पहुंचाया जाने वाला नुकसान शामिल हैं।",
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  "category": "नागालैंड",
  "publishedAt": "2026-09-03",
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