# शिक्षक दिवस समारोह में सलाहकार केखरीलहौली येहोमे का दावा, नागालैंड बना देश का तीसरा सबसे साक्षर राज्य

> नागालैंड की साक्षरता दर बढ़कर 95.7 प्रतिशत हो गई है, जिससे राज्य देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। शिक्षक दिवस पर राज्य के शिक्षा सलाहकार ने इसका श्रेय दशकों से जुटे शिक्षकों को दिया।

**Type:** article · **Category:** नागालैंड · **Published:** 2026-09-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/nagaland/shikshaka-divasa-samaroha-men-salahakara-kekhrielhoulie-yhome-ka-dava-nagaland-bana-desha-ka-tisara-sabase-sakshara-rajya-28170 · **Language:** Hindi
**Tags:** नागालैंड साक्षरता दर, नागालैंड शिक्षक दिवस, केखरीलहौली येहोमे, नागालैंड शिक्षा, एससीईआरटी नागालैंड, केरल मिजोरम साक्षरता, नागालैंड स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर

नागालैंड अब देश का तीसरा सबसे साक्षर राज्य बन गया है और राज्य की साक्षरता दर 95.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह जानकारी शिक्षा एवं एससीईआरटी सलाहकार डॉ. केखरीलहौली येहोमे ने शनिवार को कोहिमा के लोकल ग्राउंड में आयोजित राज्य-स्तरीय शिक्षक दिवस समारोह में दी।

## राज्य बनने के बाद जबरदस्त बदलाव
येहोमे ने बताया कि 1963 में जब नागालैंड को राज्य का दर्जा मिला था, तब यहां की साक्षरता दर महज 21.95 प्रतिशत थी, जो उस समय इसे देश के सबसे कम साक्षर इलाकों में शामिल करती थी। छह दशक से ज्यादा वक्त बीतने के बाद अब राज्य की साक्षरता दर 95.7 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जिससे यह देश में केरल और मिजोरम के बाद तीसरे स्थान पर आ गया है। उन्होंने इसे एक अपेक्षाकृत युवा समाज के लिए बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि यह शिक्षकों की लगातार कई पीढ़ियों की मेहनत के बिना संभव नहीं होता।

## शिक्षकों को दिया श्रेय
येहोमे ने शिक्षकों का आभार जताया कि उन्होंने छात्रों की ज़िंदगी संवारने के साथ-साथ ऐसे मूल्य और सीख दी जो स्कूली जीवन के बाद भी उनके साथ रहते हैं। उन्होंने बताया कि नागालैंड में फिलहाल सरकारी और निजी स्कूलों में कुल 32,714 शिक्षक कार्यरत हैं, और कहा कि राज्य की मुश्किल भौगोलिक बनावट और चुनौतीपूर्ण कामकाजी हालात को देखते हुए उनका योगदान खासतौर पर उल्लेखनीय है। शिक्षण को सबसे नेक पेशों में से एक बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक अक्सर अपने छात्रों के प्रति वही स्नेह, चिंता और प्रतिबद्धता दिखाते हैं जो वे अपने बच्चों के लिए दिखाते हैं।

## आगे की राह के लिए तीन प्राथमिकताएं
येहोमे ने बताया कि राज्य सरकार अब समूची स्कूली शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए तीन मुख्य क्षेत्रों, इंफ्रास्ट्रक्चर, मानव संसाधन और पाठ्यक्रम पर काम कर रही है। उन्होंने माना कि नागालैंड के सरकारी और निजी, दोनों तरह के स्कूलों में अब भी बुनियादी ढांचे की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। कुछ स्कूलों में तो शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं, जिससे खासकर छात्राओं को दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि सरकार अलग-अलग विकास परियोजनाओं के जरिए इन कमियों को धीरे-धीरे दूर करने की योजना बना रही है।

## शिक्षकों के प्रशिक्षण और बेहतर प्रबंधन पर जोर
येहोमे के मुताबिक दूसरा फोकस क्षेत्र मानव संसाधन को मजबूत करना होगा, जिसके तहत शिक्षकों का बेहतर प्रशिक्षण, कर्मचारियों का बेहतर प्रबंधन और स्कूलों तथा फील्ड दफ्तरों के बीच बेहतर तालमेल बिठाया जाएगा। इसके साथ ही सरकार प्रशासन और गवर्नेंस को भी बेहतर बनाने की योजना बना रही है, और एक मजबूत स्कूल फीडर सिस्टम के जरिए छात्रों के लिए शिक्षा को और व्यक्तिगत बनाने पर भी काम करेगी।

## अगली पीढ़ी के लिए नया पाठ्यक्रम
तीसरा और, येहोमे के मुताबिक शायद सबसे अहम, पहलू पाठ्यक्रम को नए सिरे से तैयार करना और पढ़ाई के नए-नए तरीके अपनाना है, ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम एक विश्व स्तरीय शिक्षा व्यवस्था खड़ी की जा सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को लगातार खुद को बदलते रहना होगा ताकि जेनरेशन ज़ेड, जेनरेशन अल्फा और आने वाली पीढ़ियों को तेज़ी से बदलती दुनिया के लिए तैयार किया जा सके, और छात्रों को 21वीं सदी में जरूरी कौशल सिखाने पर ज्यादा ध्यान दिया जा सके।

## इसका आप पर असर
यह सिर्फ नागालैंड के लिए एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि इससे पता चलता है कि राज्य आने वाले वर्षों में स्कूलों, शिक्षकों और बच्चों के भविष्य पर किस तरह निवेश करने वाला है।

- **भारत में:** नागालैंड की यह तरक्की उन राज्यों के लिए एक मिसाल बनती है जो अब भी साक्षरता के मामले में पीछे हैं। शिक्षकों पर केंद्रित और समुदाय की भागीदारी वाला यह मॉडल कुछ दशकों में बड़ा बदलाव लाने का उदाहरण बन सकता है।
- **नागालैंड में:** राज्य सरकार ने माना है कि कई स्कूलों में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं, जिससे खासकर छात्राओं को दिक्कत होती है। अब इन कमियों को दूर करने के लिए विकास परियोजनाओं पर ज़ोर बढ़ने की उम्मीद है, खासकर मुश्किल पहाड़ी इलाकों में।
- **शिक्षकों के लिए:** सरकारी और निजी स्कूलों में काम कर रहे 32,714 शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण, बेहतर प्रबंधन और फील्ड दफ्तरों के साथ बेहतर तालमेल का फायदा मिल सकता है।
- **छात्रों के लिए:** जेनरेशन ज़ेड और जेनरेशन अल्फा को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम में बदलाव की योजना है, जिससे नागालैंड के मौजूदा और आने वाले छात्रों को 21वीं सदी के हिसाब से नए कौशल सिखाने वाली पढ़ाई मिल सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. नागालैंड की मौजूदा साक्षरता दर कितनी है?
नागालैंड की साक्षरता दर अब 95.7 प्रतिशत हो गई है।

### 2. साक्षरता के मामले में नागालैंड देश में किस स्थान पर है?
नागालैंड देश में तीसरे स्थान पर है, इससे आगे सिर्फ केरल और मिजोरम हैं।

### 3. राज्य बनने के समय नागालैंड की साक्षरता दर कितनी थी?
1963 में राज्य बनने के समय यह महज 21.95 प्रतिशत थी।

### 4. यह जानकारी किसने दी?
शिक्षा एवं एससीईआरटी सलाहकार डॉ. केखरीलहौली येहोमे ने कोहिमा में राज्य-स्तरीय शिक्षक दिवस समारोह में यह जानकारी दी।

### 5. नागालैंड के स्कूलों में कितने शिक्षक कार्यरत हैं?
नागालैंड में फिलहाल सरकारी और निजी स्कूलों में कुल 32,714 शिक्षक कार्यरत हैं।

### 6. सरकार शिक्षा में किन तीन क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है?
इंफ्रास्ट्रक्चर, मानव संसाधन और पाठ्यक्रम पर।

### 7. नागालैंड के स्कूलों में अभी क्या दिक्कतें हैं?
कई स्कूलों में अब भी शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, जिससे खासकर छात्राओं को परेशानी होती है।

### 8. पाठ्यक्रम में बदलाव क्यों किया जा रहा है?
ताकि जेनरेशन ज़ेड, जेनरेशन अल्फा और आने वाली पीढ़ियों को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करने वाली विश्व स्तरीय शिक्षा व्यवस्था बनाई जा सके।

## प्रेरणा और सबक
नागालैंड की 1963 की महज 21.95 प्रतिशत साक्षरता से देश में तीसरे स्थान तक की यह यात्रा हर उस समुदाय के लिए सीख है जो इसी तरह के फासले को पाटना चाहता है।

- **तेज़ी नहीं, निरंतरता ज़रूरी:** करीब 74 प्रतिशत अंकों का यह फासला किसी एक योजना से नहीं पटा, बल्कि छह दशकों तक शिक्षकों की कई पीढ़ियों की लगातार मेहनत से पटा।
- **पहले लोगों में निवेश करें:** मुश्किल भौगोलिक हालात और चुनौतीपूर्ण कामकाजी परिस्थितियों के बावजूद, आज मौजूद 32,714 शिक्षकों पर ध्यान देना सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर से ज्यादा अहम माना गया।
- **बुनियादी कमियां भी साथ-साथ दूर करें:** 95.7 प्रतिशत साक्षरता तक पहुंचने के बाद भी सरकार अब भी स्कूलों में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर करने में जुटी है, यानी बड़ी उपलब्धि और छोटी कमियां साथ-साथ ठीक की जा सकती हैं।
- **अगली पीढ़ी के लिए बदलते रहें:** इस उपलब्धि को अंतिम पड़ाव मानने के बजाय राज्य अब जेनरेशन ज़ेड और जेनरेशन अल्फा को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम बदलने पर काम कर रहा है।

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