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  "title": "दिल्ली की 125 साल पुरानी रेस कोर्स मस्जिद पर संकट, असदुद्दीन ओवैसी और मीरवाइज उमर फारूक ने जताई चिंता",
  "summary": "दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को छह दिन के भीतर खाली करने का नोटिस मिलने के बाद विवाद बढ़ गया है। असदुद्दीन ओवैसी और मीरवाइज उमर फारूक ने केंद्र सरकार से इसमें तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।",
  "content": "राजधानी दिल्ली में एक सदी से भी अधिक पुरानी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों की तरफ से मिले निर्देशों के बाद इस स्थल को खाली करने के आदेश दिए गए हैं, जिसके चलते सियासत और धार्मिक हलकों में गहरी चिंता का माहौल है। इस पूरे प्रकरण को लेकर कई प्रमुख नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और प्रशासनिक रुख पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।\n\nप्रशासनिक कार्रवाई और छह दिन की डेडलाइन\nविवादों के केंद्र में 125 साल पुरानी ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद है, जिससे जुड़े लोगों का कहना है कि उन्हें अपना परिसर छोड़ने के लिए मात्र छह दिनों का समय दिया गया है। हालात तब और गंभीर हो गए जब इस परिसर की बिजली और पानी की आपूर्ति पूरी तरह से काट दी गई। भूमि और विकास कार्यालय यानी L&DO द्वारा प्रवेश द्वारों को बंद कर दिए जाने की वजह से स्थानीय नमाजियों को अंदर दाखिल होने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।\n\nनेतृत्व और नेताओं की प्रतिक्रियाएं\nइस पूरे मामले पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है। ओवैसी ने कहा कि 1977 से यह स्थल वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है, इसके बावजूद वक्फ बोर्ड ने गिराए जाने के इस आदेश के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि साल 2023 से दिल्ली वक्फ बोर्ड का औपचारिक गठन नहीं हुआ है, जिस वजह से इस विवाद को सुलझाने की पूरी जिम्मेदारी अब केंद्रीय मंत्री के कंधों पर आ जाती है।\n\nऐतिहासिक वक्फ संपत्ति का दर्जा\nदस्तावेजों के अनुसार यह मस्जिद 1977 से ही एक अधिसूचित वक्फ संपत्ति रही है और इसे एक धरोहर स्थल के तौर पर भी मान्यता प्राप्त है। इस मसले पर कश्मीरी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त और अधिसूचित वक्फ संपत्तियों को इस प्रकार के संकट का सामना करना पड़े, तो देश में बाकी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने वक्फ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए कि वे इस धरोहर का बचाव करने में पूरी तरह असफल रहे हैं।\n\nहुजरा कुआं मस्जिद और अन्य मामले\nअसदुद्दीन ओवैसी ने इससे पहले रेस कोर्स के पास ही मौजूद एक अन्य प्राचीन धार्मिक स्थल हुजरा कुआं मस्जिद को ढहाए जाने की कोशिशों की भी कड़ी निंदा की थी। उन्होंने बताया कि इस जगह पर लोगों को नमाज अदा करने से रोका जा रहा है और इसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति को डराया-धमकाया जा रहा है, जबकि इस सिलसिले में कोई भी आधिकारिक नोटिस जारी नहीं किया गया था। उनका कहना था कि इस तरह की कार्रवाइयां धार्मिक अधिकारों पर सीधा प्रहार करती हैं।\n\nजमीयत उलेमा-ए-हिंद का प्रतिनिधिमंडल\nइस पूरे घटनाक्रम के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद संगठन भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। संगठन के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की थी और उन्हें एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन के माध्यम से सफदरजंग मकबरे के पीछे स्थित उस कब्रिस्तान और रेस कोर्स मस्जिद की पूरी हिफाजत करने की पुरजोर मांग की गई। जमीयत ने पानी-बिजली की कटी हुई लाइनों को तत्काल बहाल करने और वहां नमाज का सिलसिला निर्बाध रूप से जारी रखने का आग्रह किया है।\n\nइसका आप पर असर\nइस विवाद का सीधा असर राजधानी के स्थानीय नमाजियों और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों के संरक्षण से जुड़े नियमों पर पड़ेगा।\n\n• दिल्ली में: स्थानीय निवासियों और नमाजियों को मस्जिद के गेट बंद होने और बिजली-पानी कटने से पूजा-पाठ में भारी बाधा का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों के कड़े रुख से लोगों में चिंता बढ़ गई है।\n• भारत में: यह घटना देश भर में अधिसूचित वक्फ संपत्तियों और ऐतिहासिक धरोहरों की कानूनी सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती है। इससे अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों के भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह पूरा विवाद भूमि और विकास कार्यालय द्वारा दिए गए बेदखली के नोटिस और वक्फ संपत्तियों के प्रशासनिक प्रबंधन में कमियों के कारण पैदा हुआ है।\n\n• नोटिस और डेडलाइन: अधिकारियों ने परिसर को खाली करने के लिए छह दिन का अल्टीमेटम दिया है और पानी-बिजली के कनेक्शन काट दिए हैं।\n• वक्फ बोर्ड की निष्क्रियता: साल 2023 से दिल्ली वक्फ बोर्ड का औपचारिक गठन नहीं होने के कारण बोर्ड इस मामले में कोई ठोस कानूनी कदम उठाने में विफल रहा है।\n• प्रशासनिक विवाद: 1977 से अधिसूचित वक्फ संपत्ति होने और धरोहर स्थल के रूप में दर्ज होने के बावजूद इस ऐतिहासिक ढांचे पर कार्रवाई की जा रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दिल्ली की कौन सी ऐतिहासिक मस्जिद विवादों में है?\nदिल्ली की 125 साल पुरानी रेस कोर्स मस्जिद को लेकर यह विवाद चल रहा है।\n\n2. अधिकारियों ने परिसर खाली करने के लिए कितना समय दिया है?\nसंबंधित लोगों को छह दिनों के भीतर परिसर खाली करने का नोटिस दिया गया है।\n\n3. इस मामले में केंद्रीय मंत्री से किसने दखल देने की मांग की है?\nएआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से हस्तक्षेप करने की गुजारिश की है।\n\n4. मस्जिद को कौन सा आधिकारिक दर्जा प्राप्त है?\nयह मस्जिद 1977 से एक अधिसूचित वक्फ संपत्ति है और इसे धरोहर स्थल के रूप में भी सूचीबद्ध किया गया है।\n\n5. मस्जिद के संबंध में किस संगठन ने ज्ञापन सौंपा है?\nजमीयत उलेमा-ए-हिंद ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को मिलकर ज्ञापन सौंपा है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-10-20",
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