15 अगस्त से पहले रेल नेटवर्क पर आतंकी साया, भीड़भाड़ वाले स्टेशनों में भगदड़ और जासूसी का आईएसआई प्लान उजागर स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले भारतीय रेलवे को निशाना बनाने की आईएसआई साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें जासूसी के साथ फर्जी कॉल के जरिए स्टेशनों पर भगदड़ मचाने की रणनीति शामिल है। देश के स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों के बीच भारत की जीवनरेखा कही जाने वाली रेलवे की सुरक्षा पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। हालिया खुफिया जानकारियों से खुलासा हुआ है कि सीमा पार बैठा आतंकी ढांचा भारतीय रेल नेटवर्क को अस्थिर करने के लिए एक बहुस्तरीय और खतरनाक साजिश पर काम कर रहा है। सुरक्षा तंत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की गुप्तचर संस्था आईएसआई पिछले कुछ महीनों से रेल इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यस्त जंक्शनों और यात्री आवाजाही को निशाना बनाने के लिए निरंतर अपनी रणनीति बदल रही है। इस बार चुनौती केवल विस्फोटक हमलों या पटरियों को क्षति पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टेशनों पर फैली भारी भीड़ का फायदा उठाकर अफवाहों और फर्जी फोन कॉल के जरिए व्यापक अफरा-तफरी और जानलेवा भगदड़ मचाना भी इस षड्यंत्र का प्रमुख हिस्सा है। रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर आईएसआई की बदलती रणनीति भारतीय सुरक्षा तंत्र लंबे समय से सामरिक ठिकानों की निगरानी कर रहा है, लेकिन पिछले लगभग एक वर्ष के दौरान रेल नेटवर्क के प्रति गुप्तचर गतिविधियों में अप्रत्याशित तेजी देखी गई है। विश्लेषकों का मानना है कि जहां एक ओर भारतीय थलसेना की गतिविधियों, रसद आपूर्ति और सैन्य गाड़ियों की आवाजाही से जुड़ी जानकारियां जुटाना आईएसआई का दीर्घकालिक उद्देश्य रहा है, वहीं दूसरी ओर रेलवे पर तत्काल असर डालने वाले हमलों की योजना बनाई जा रही है। सुरक्षा तंत्र का आकलन है कि रेल परिसरों में दैनिक आधार पर करोड़ों यात्री सफर करते हैं, इसलिए यहां उत्पन्न की गई छोटी सी अव्यवस्था भी राष्ट्रीय स्तर पर भय का माहौल बना सकती है। खुफिया विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आतंकी आका केवल भौतिक तबाही मचाने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे एक व्यापक मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, "भारतीय रेलवे से जुड़ी केवल एक झूठी खबर या फर्जी अलार्म भी आम जनता के भीतर भारी दहशत और अनिश्चितता का माहौल पैदा करने के लिए पर्याप्त है।" यही कारण है कि सुरक्षा बल अब पटरियों और ढांचागत सुरक्षा के साथ-साथ सूचना तंत्र और अफवाह नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। फर्जी बम कॉल और भगदड़ मचाने की साजिश साजिश की गहराई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गुप्तचर संस्थाओं ने फर्जी सूचनाएं फैलाने के लिए बाकायदा विशिष्ट लोगों को शामिल किया है। इन एजेंटों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्वतंत्रता दिवस के आसपास के संवेदनशील समय में भीड़भाड़ वाले बड़े स्टेशनों पर बम होने या संदिग्ध वस्तु रखे होने की फर्जी कॉल करें। जब किसी विशाल स्टेशन परिसर में अचानक ऐसी भ्रामक सूचना फैलती है, तो यात्रियों में बिना सोचे-समझे भागने की होड़ मच जाती है, जो अंततः गंभीर दुर्घटना और बड़े पैमाने पर जनहानि का रूप ले लेती है। इस रणनीति के खतरे को रेखांकित करते हुए एक अन्य अधिकारी ने बताया कि "भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशन पर फैलाई गई झूठी अफवाह अफरा-तफरी का माहौल बनाकर जानलेवा भगदड़ का कारण बन सकती है।" इस परिस्थिति को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष न केवल संभावित हमले की अग्रिम भनक लगाने की चुनौती है, बल्कि त्वरित सूचना सत्यापन और भीड़ प्रबंधन के सख्त प्रोटोकॉल लागू करने की आवश्यकता भी खड़ी हो गई है। आतंकी नेटवर्क का बंटवारा और बीकेआई की भूमिका जांच में यह चिंताजनक पहलू भी सामने आया है कि इस साजिश के कार्यान्वयन के लिए आईएसआई ने पारंपरिक कट्टरपंथी समूहों के अलावा पंजाब केंद्रित चरमपंथी संगठनों को भी एकजुट किया है। विशेष रूप से बब्बर खालसा इंटरनेशनल यानी बीकेआई के कैडरों को इस नेटवर्क में सक्रिय भूमिका सौंपी गई है। उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, बीकेआई के गुर्गों को मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों और रेल मार्गों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है, ताकि इन राज्यों में सुरक्षा घेरे में सेंध लगाई जा सके। इसके विपरीत, दिल्ली, मुंबई और देश के अन्य प्रमुख महानगरों के व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों पर हमले या व्यवधान उत्पन्न करने का जिम्मा अन्य सक्रिय आतंकी मॉड्युलों को सौंपा गया है। पिछले एक साल से योजनाबद्ध तरीके से चलाए जा रहे इस नेटवर्क के तार कई राज्यों में फैले हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि भौगोलिक आधार पर कार्यों का यह विभाजन सुरक्षा तंत्र का ध्यान भटकाने और एक साथ कई मोर्चों पर दबाव बनाने की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। 3 हजार में रेकी और सोलर सीसीटीवी का हाई-टेक नेटवर्क स्टेशनों की जमीनी पड़ताल और निगरानी के लिए आतंकी आकाओं ने स्थानीय स्तर पर कम लागत वाले एजेंटों को नियुक्त किया। शुरुआती जांच से पता चला है कि कुछ स्थानीय युवकों को केवल 3 हजार रुपये देकर स्टेशनों के संवेदनशील हिस्सों की निगरानी करने, वहां की फोटोग्राफी करने और यात्रियों की आवाजाही का ब्योरा जुटाने का काम दिया गया था। ये एजेंट सुरक्षा व्यवस्था की कमियों, प्रवेश और निकास द्वारों की स्थिति और पुलिस पिकेट्स की गतिविधियों की जानकारी अपने विदेशी हैंडलर्स तक पहुंचाते थे। निगरानी के इस पैटर्न में तब और अधिक गंभीर मोड़ आया जब एजेंटों को रेलवे परिसरों में गुप्त तरीके से सोलर पैनल से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने के निर्देश दिए गए। इन आधुनिक कैमरों के माध्यम से आतंकी हैंडलर विदेशों में बैठकर स्टेशन की गतिविधियों, ट्रेनों के आगमन-प्रस्थान और सुरक्षा बलों की तैनाती की लाइव फीड प्राप्त करने की कोशिश कर रहे थे। इस तरह के हाई-टेक उपकरण लगाने के लिए प्रति कैमरा 5 हजार रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक की राशि दी जा रही थी। यह तकनीक आधारित जासूसी दर्शाती है कि विरोधी तत्व सुरक्षा जांच से बचने के लिए किस हद तक नए तरीके अपना रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर में हाई अलर्ट और बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही अत्यधिक कड़ी रखी जाती है। हालांकि, इंटेलिजेंस ब्यूरो द्वारा जारी ताजा चेतावनी के बाद दिल्ली-एनसीआर के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों, रेल पटरियों, सिग्नलिंग सिस्टम और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रख दिया गया है। एजेंसियों को अंदेशा है कि आतंकी नेटवर्क स्वतंत्रता दिवस की मुख्य परेड और वीआईपी सुरक्षा में व्यस्त पुलिस बल की प्राथमिकताओं का फायदा उठाने की कोशिश कर सकता है। इसके उत्तर में, रेलवे सुरक्षा बल, स्थानीय पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां संयुक्त रूप से सघन तलाशी अभियान चला रही हैं। पटरियों की गश्त बढ़ा दी गई है, सीसीटीवी निगरानी कक्षों को 24 घंटे सतर्क रखा जा रहा है और संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का अंतिम संदेश स्पष्ट है कि वर्तमान परिदृश्य में खतरा केवल किसी प्रत्यक्ष भौतिक हमले से ही नहीं है, बल्कि फर्जी कॉल, अफवाहों और दहशत फैलाने की किसी भी सूक्ष्म कोशिश से भी है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन और आम जनता दोनों का सतर्क रहना अनिवार्य है। इसका आप पर असर भारत में: रेलवे स्टेशनों पर यात्रा करने वाले यात्रियों को स्वतंत्रता दिवस के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा जांच, बैग चेकिंग और कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ सकता है। रेल यात्रियों के लिए: स्टेशनों पर किसी भी अफवाह या फर्जी अलार्म पर ध्यान न दें और संदिग्ध गतिविधि या लावारिस वस्तु दिखने पर तुरंत रेलवे सुरक्षा बल या स्थानीय पुलिस को सूचित करें। सवाल-जवाब 1. स्वतंत्रता दिवस से पहले भारतीय रेलवे को लेकर क्या अलर्ट जारी किया गया है? इंटेलिजेंस ब्यूरो ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर हाई अलर्ट जारी किया है, क्योंकि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा रेल नेटवर्क को निशाना बनाने की साजिश का खुलासा हुआ है। 2. आईएसआई रेलवे स्टेशनों पर किस तरह की साजिश रच रही है? आईएसआई प्रत्यक्ष हमले के अलावा फर्जी कॉल और झूठी अफवाहें फैलाकर भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर अफरा-तफरी और जानलेवा भगदड़ मचाने की रणनीति पर काम कर रही है। 3. स्टेशनों की जासूसी और रेकी के लिए एजेंटों को कितने रुपये दिए जा रहे थे? जांच के अनुसार, एजेंटों को स्टेशनों की रेकी और तस्वीरें लेने के लिए 3 हजार रुपये तथा गुप्त सोलर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए 5 हजार से 10 हजार रुपये तक दिए जा रहे थे। 4. इस आतंकी साजिश में किन-किन संगठनों की भूमिका सामने आई है? इस साजिश में आईएसआई द्वारा पंजाब और हरियाणा के स्टेशनों के लिए बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) तथा दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों के लिए अन्य आतंकी मॉड्युलों को जिम्मेदारी दी गई है। https://trendkia.com/national/15-agasta-se-pahale-rela-netavarka-para-atnki-saya-bhirabhara-vale-steshanon-men-bhagadara-aura-jasusi-ka-isi-plana-ujagara-16572 TrendKia — Har trend, sabse pehle.