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  "type": "article",
  "title": "15 अगस्त को सरकारी इमारतों पर केवल तिरंगा फहराने की नेहरू की जिद और 10 अगस्त 1947 की दो ऐतिहासिक घटनाएं",
  "summary": "आजादी से ठीक पांच दिन पहले जवाहरलाल नेहरू और लॉर्ड माउंटबेटन के बीच यूनियन जैक फहराने को लेकर पत्राचार चल रहा था, वहीं कराची में पाकिस्तान की संविधान सभा की नींव रखी जा रही थी।",
  "content": "भारत की स्वतंत्रता की औपचारिक घोषणा में जब केवल पांच दिन बचे थे, तब देश भर में आजादी के जश्न की जोर-शोर से तैयारियां की जा रही थीं। हालांकि इसी दौरान दिल्ली के प्रशासनिक गलियारों में एक नया और संवेदनशील कूटनीतिक सवाल खड़ा हो गया था। सवाल ब्रिटिश हुकूमत के प्रतीक चिन्ह 'यूनियन जैक' को लेकर था कि भारत के स्वतंत्र होने के बाद इसे सरकारी भवनों पर कब, कैसे और किन मौकों पर फहराया जाएगा। इस गंभीर विषय पर पंडित जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड माउंटबेटन के बीच 5 अगस्त 1947 से 10 अगस्त 1947 के बीच पत्रों का आदान-प्रदान हुआ।\n\nमाउंटबेटन का प्रस्ताव और 10 विशेष तिथियों की सूची\nऐतिहासिक अभिलेखागार में सुरक्षित दस्तावेजों से पता चलता है कि लॉर्ड माउंटबेटन ने 5 अगस्त 1947 को पंडित नेहरू को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में माउंटबेटन ने वर्ष भर की ऐसी 10 विशेष तिथियों का विवरण प्रस्तुत किया था, जिन पर वे चाहते थे कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के साथ-साथ ब्रिटिश यूनियन जैक भी सरकारी भवनों पर फहराया जाए।\n\nमाउंटबेटन द्वारा सुझाई गई इस सूची में निम्नलिखित तिथियां शामिल थीं\n• 1 जनवरी: थल सेना दिवस (आर्मी डे)\n• 1 अप्रैल: वायु सेना दिवस (एयर फोर्स डे)\n• 25 अप्रैल: एंजैक डे\n• 24 मई: राष्ट्रमंडल दिवस (कॉमनवेल्थ डे)\n• 12 जून: ब्रिटेन के राजा का आधिकारिक जन्मदिन\n• 14 जून: संयुक्त राष्ट्र ध्वज दिवस\n• 4 अगस्त: ब्रिटेन की महारानी का जन्मदिन\n• 15 अगस्त: भारतीय स्वतंत्रता दिवस\n• 7 नवंबर: नौसेना दिवस (नेवी डे)\n• 11 नवंबर: स्मरण दिवस (रिमेंबरेंस डे)\n\n6 अगस्त 1947: नेहरू का स्पष्ट रुख और स्वतंत्रता दिवस का सम्मान\nलॉर्ड माउंटबेटन के इस पत्र का जवाब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अगले ही दिन 6 अगस्त 1947 को दिया। नेहरू ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि वे सार्वजनिक भवनों पर दो झंडे फहराने के विचार को समझते हैं, लेकिन 15 अगस्त के दिन वे किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकते।\n\nनेहरू ने वाइसराय को लिखा कि 15 अगस्त को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अपना एक विशेष ऐतिहासिक महत्व है, इसलिए इस पावन दिन पर केवल और केवल भारतीय तिरंगे को ही अकेले फहराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में स्वतंत्रता दिवस की सालगिरह पर भी यही नियम लागू रहना चाहिए।\n\nलंदन स्थित इंडिया हाउस को लेकर विशेष छूट\nपंडित नेहरू ने ब्रिटेन के साथ अपने राजनयिक संबंधों और शिष्टाचार के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए। उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि ब्रिटेन की राजधानी लंदन स्थित 'इंडिया हाउस' के संबंध में उनसे सलाह मांगी गई थी। भारत की धरती पर भले ही केवल तिरंगा लहराना तय हुआ था, लेकिन नेहरू का मानना था कि लंदन में 15 अगस्त को इंडिया हाउस की इमारत पर भारतीय ध्वज के साथ यूनियन जैक फहराना शिष्टाचार के लिहाज से उचित होगा। इस बाबत उन्होंने लंदन में भारत के उच्चायुक्त को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए थे।\n\n9 और 10 अगस्त: संशोधित पत्र और भविष्य पर सहमति\nनेहरू के पत्र के जवाब में लॉर्ड माउंटबेटन ने 9 अगस्त 1947 को पुनः एक पत्र लिखा। उन्होंने अपनी पिछली सूची से 15 अगस्त 1947 की तारीख को हटा दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि आजादी के पहले दिन भारत की इमारतों पर यूनियन जैक नहीं फहराया जाएगा। हालांकि, माउंटबेटन ने प्रस्ताव दिया कि भविष्य में 15 अगस्त के दिन दोनों नए डोमिनियन (भारत और पाकिस्तान) के उच्चायुक्त मिलकर इस बात पर विचार कर सकते हैं कि यूनियन जैक फहराया जाए या नहीं।\n\nइसके बाद 10 अगस्त 1947 को नेहरू ने माउंटबेटन को एक संक्षिप्त और महत्वपूर्ण संदेश भेजा। उन्होंने 9 अगस्त के पत्र के लिए धन्यवाद व्यक्त किया और कहा कि वे अगले वर्ष 15 अगस्त के सवाल पर पाकिस्तान सरकार के साथ मिलकर विचार करने के लिए सहमत हैं। नेहरू ने इस मुद्दे का तुरंत फैसला न करके भविष्य के अंतर-सरकारी विचार-विमर्श पर छोड़ दिया।\n\nकराची में 10 अगस्त: जोगेंद्रनाथ मंडल की भूमिका\nजिस समय दिल्ली में झंडे के प्रोटोकॉल को लेकर नेहरू और माउंटबेटन के बीच पत्र लिखे जा रहे थे, ठीक उसी दिन यानी 10 अगस्त 1947 को कराची में पाकिस्तान की नई संविधान सभा की शुरुआती प्रक्रिया चल रही थी। इस सत्र में बंगाल के प्रमुख दलित नेता जोगेंद्रनाथ मंडल को संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष चुना गया।\n\nजोगेंद्रनाथ मंडल का मानना था कि अनुसूचित जाति के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए मुस्लिम लीग के साथ राजनीतिक सहयोग आवश्यक है। 1946 में हुए भीषण कलकत्ता दंगों (डायरेक्ट एक्शन डे) के समय भी उन्होंने दलित समुदाय से साम्प्रदायिक हिंसा से दूर रहने की अपील की थी। इसी राजनीतिक संबंध के कारण वे मोहम्मद अली जिन्ना के काफी करीब आए।\n\n10 अगस्त को अस्थायी अध्यक्ष का पद संभालने के बाद अगले दिन यानी 11 अगस्त 1947 को मंडल ने आधिकारिक रूप से मोहम्मद अली जिन्ना को पाकिस्तान की संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष घोषित किया। इसके बाद जिन्ना ने अपना प्रसिद्ध भाषण दिया जिसमें उन्होंने नए देश में सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों की बात कही थी। इस प्रकार 10 अगस्त 1947 का दिन भारतीय उपमहाद्वीप के दो अलग-अलग राजनीतिक घटनाक्रमों का गवाह बना।\n\nइसका आप पर असर\nयह एक ऐतिहासिक विवरण है जो स्वतंत्र भारत की कूटनीतिक और ध्वज संबंधी नीतियों को स्पष्ट करता है।\n\n• भारत में: यह घटनाक्रम दिखाता है कि स्वतंत्रता दिवस के दिन भारतीय तिरंगे के स्वाभिमान को बनाए रखने के लिए शीर्ष नेतृत्व ने किस प्रकार दृढ़ फैसले लिए थे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. माउंटबेटन ने 5 अगस्त 1947 को नेहरू को क्या प्रस्ताव भेजा था?\nमाउंटबेटन ने 10 विशेष दिनों की एक सूची भेजी थी जिस पर वे चाहते थे कि भारतीय ध्वज के साथ यूनियन जैक भी फहराया जाए।\n\n2. 15 अगस्त पर यूनियन जैक फहराने के प्रस्ताव पर नेहरू ने क्या निर्णय लिया?\nनेहरू ने स्पष्ट किया कि 15 अगस्त को भारत की सरकारी इमारतों पर केवल भारतीय राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) ही फहराया जाएगा।\n\n3. लंदन स्थित इंडिया हाउस के लिए क्या नियम तय किया गया था?\nनेहरू ने निर्देश दिया कि 15 अगस्त को लंदन स्थित इंडिया हाउस पर भारतीय ध्वज के साथ यूनियन जैक भी फहराया जा सकता है।\n\n4. 10 अगस्त 1947 को कराची में क्या हुआ था?\nकराची में पाकिस्तान की नई संविधान सभा की बैठक हुई जिसमें जोगेंद्रनाथ मंडल को अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-09",
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