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  "title": "5 रुपये की कटौती पर डटा रहा यात्री, उपभोक्ता आयोग ने रेलवे पर ठोका 10 हजार का जुर्माना",
  "summary": "लुधियाना के एक यात्री को टिकट रद्द कराने पर रिफंड में सिर्फ 5 रुपये कम मिले थे, जिसकी शिकायत लेकर वह उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा और आयोग ने रेलवे को 5 रुपये लौटाने के साथ 10,000 रुपये की लागत चुकाने का आदेश दिया.",
  "content": "आमतौर पर लोग चंद रुपयों की कटौती पर ध्यान नहीं देते और मामला वहीं खत्म हो जाता है. लेकिन पंजाब के एक यात्री ने महज 5 रुपये की कटौती को इतनी गंभीरता से लिया कि लड़ाई सीधे उपभोक्ता आयोग तक जा पहुंची. नतीजा यह रहा कि आयोग ने रेलवे को सिर्फ वही 5 रुपये लौटाने का ही नहीं, बल्कि साथ में 10,000 रुपये और चुकाने का आदेश सुना दिया.\n\nकहां से शुरू हुई पूरी कहानी\nलुधियाना के रहने वाले 41 वर्षीय प्रेमजीत सिंह ने फरवरी 2023 में अपने और अपने पिता के लिए हिसार से लुधियाना तक के दो रेल टिकट बुक कराए थे. ये टिकट उन्होंने रेलवे स्टेशन के काउंटर पर डेबिट कार्ड से कुल 330 रुपये देकर लिए थे. यात्रा से ठीक एक दिन पहले निजी कारणों से उन्हें योजना बदलनी पड़ी और दोनों टिकट रद्द करा दिए गए. नियमों के मुताबिक रेलवे ने इन पर 240 रुपये कैंसिलेशन शुल्क के तौर पर काटे और 90 रुपये रिफंड के रूप में वापस किए जाने थे.\n\nएक साल बाद पकड़ में आई गड़बड़ी\nकरीब एक साल बीतने के बाद जब प्रेमजीत सिंह ने अपने बैंक खाते का ब्योरा खंगाला, तब असली बात सामने आई. खाते में 90 रुपये के बजाय सिर्फ 85 रुपये ही आए थे, यानी तय रिफंड में से 5 रुपये और काट लिए गए थे. इस अंतर को देखकर उन्होंने रेलवे हेल्पलाइन पर बात की, फिर खुद स्टेशन पहुंचकर अपना टिकट और बैंक स्टेटमेंट तक दिखाया. इसके बाद भी उन्हें कोई साफ जवाब नहीं मिला कि आखिर ये 5 रुपये किस मद में काटे गए.\n\nसंतोषजनक जवाब न मिलने पर कानूनी रास्ता\nरेलवे की ओर से कोई ठोस जानकारी न मिलने पर प्रेमजीत सिंह ने पहले एक कानूनी नोटिस भेजा और फिर जिला उपभोक्ता आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी. उनकी मांग सीधी थी, 5 रुपये की वापसी, और उनका तर्क था कि बिना बताए की गई किसी भी कटौती से उपभोक्ता के अधिकारों का हनन होता है. सुनवाई के दौरान रेलवे ने सफाई दी कि यह 5 रुपये उसने नहीं, बल्कि उसके बैंक State Bank of India ने काटे थे.\n\n2017 के नोटिफिकेशन का सहारा\nअपने बचाव में रेलवे ने रेलवे बोर्ड के 2017 के एक नोटिफिकेशन का हवाला दिया. इसके मुताबिक अगर रिफंड POS मशीन के जरिये किया जाता है और रकम 1,000 रुपये तक होती है, तो बैंक 5 रुपये का ‘रिफंड शुल्क’ वसूल सकता है. आयोग ने यह तो स्वीकार किया कि कटौती इसी प्रावधान के तहत हुई थी, मगर साथ ही यह भी दो टूक कहा कि इस शुल्क की जानकारी यात्रियों को पहले से और स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए थी.\n\nजानकारी छिपाना रेलवे को पड़ा भारी\nआयोग ने पाया कि रेलवे यह साबित ही नहीं कर सका कि टिकट काउंटर पर इस शुल्क से जुड़ी सूचना कहीं स्पष्ट रूप से लगाई गई थी. इतना ही नहीं, शिकायत मिलने के बाद भी यात्री को कटौती की असली वजह नहीं बताई गई. आयोग ने यह टिप्पणी भी की कि खुद रेलवे के अधिकारियों को इस व्यवस्था की पूरी समझ नहीं थी और संबंधित नोटिफिकेशन सुनवाई के एकदम आखिरी चरण में पेश किया गया. इन तमाम बातों को आयोग ने उपभोक्ता के साथ अनुचित बर्ताव और ‘अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस’ करार दिया.\n\n5 रुपये के साथ 10 हजार रुपये का बोझ\nजिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजीव बत्रा और सदस्य मोनिका भगत की पीठ ने फैसला प्रेमजीत सिंह के पक्ष में सुनाया. आयोग ने रेलवे को आदेश दिया कि वह 5 रुपये वापस करे और इसके साथ 10,000 रुपये की समेकित लागत भी अदा करे. पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी रकम 30 दिनों के भीतर चुकानी होगी. यदि रेलवे इस अवधि में भुगतान नहीं करता, तो उसे हर दिन के हिसाब से 200 रुपये अतिरिक्त दंड भरना पड़ेगा. यह फैसला साफ संदेश देता है कि उपभोक्ता के अधिकारों की अनदेखी, चाहे रकम कितनी भी छोटी क्यों न हो, संस्थाओं को महंगी पड़ सकती है.\n\nइसका आप पर असर\nआपके लिए इसका क्या मतलब है:\n\n• भारत में: अगर टिकट रद्द कराने पर आपके खाते में तय रिफंड से कम रकम आती है तो उसे नजरअंदाज न करें, बिना बताए की गई कटौती के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत कर मुआवजा पाया जा सकता है.\n• पंजाब में: लुधियाना और आसपास के यात्रियों के लिए यह फैसला नजीर है कि छोटी रकम के मामले में भी जिला उपभोक्ता आयोग राहत और हर्जाना दिला सकता है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्रेमजीत सिंह को रिफंड में कितने रुपये कम मिले थे?\nउन्हें मिलने वाले 90 रुपये के रिफंड में से 5 रुपये कम, यानी सिर्फ 85 रुपये उनके खाते में आए थे.\n\n2. उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को क्या आदेश दिया?\nआयोग ने रेलवे को 5 रुपये वापस करने और साथ में 10,000 रुपये की समेकित लागत 30 दिनों के भीतर चुकाने का आदेश दिया.\n\n3. अगर रेलवे तय समय में भुगतान नहीं करता तो क्या होगा?\nऐसी स्थिति में रेलवे को हर दिन की देरी पर 200 रुपये अतिरिक्त दंड के रूप में देने होंगे.\n\n4. रेलवे ने 5 रुपये की कटौती की क्या वजह बताई?\nरेलवे ने 2017 के रेलवे बोर्ड नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए कहा कि POS मशीन से 1,000 रुपये तक के रिफंड पर बैंक 5 रुपये का रिफंड शुल्क ले सकता है.",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-06-17",
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