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  "title": "60 लाख रुपये की नई प्रसंस्करण इकाई से चित्रकूट में फिर लौटेगी मोटे अनाज की खेती, किसानों को मिलेगा स्थानीय बाजार",
  "summary": "चित्रकूट में जिला खनिज मद से 60 लाख रुपये की लागत से श्री अन्न प्रसंस्करण इकाई का निर्माण अंतिम दौर में है। इस इकाई के चालू होने से स्थानीय किसानों को ज्वार, बाजरा, कोदो और रागी जैसी फसलों के प्रसंस्करण और मार्केटिंग की सुविधा अपने ही जिले में मिलेगी।",
  "content": "बुंदेलखंड क्षेत्र के चित्रकूट जिले में पारंपरिक मोटे अनाजों यानी श्री अन्न की खेती को नया जीवन देने के लिए एक बड़ी योजना पर तेजी से काम चल रहा है। गनीवा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में जिला खनिज मद से करीब 60 लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक श्री अन्न प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जा रही है। वर्तमान में इस प्रसंस्करण केंद्र का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जिससे आने वाले समय में क्षेत्रीय किसानों को अपनी उपज का प्रसंस्करण कराने के लिए दूसरे जिलों या दूर-दराज के बाजारों का रुख नहीं करना पड़ेगा।\n\nचित्रकूट का इतिहास पारंपरिक रूप से मोटे अनाजों की पैदावार के लिए विख्यात रहा है। पूर्व समय में यहां के किसान बड़े पैमाने पर ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, सांवा, काकुन और रागी जैसी पोषक फसलों की खेती करते थे। हालांकि, समय बीतने के साथ स्थानीय स्तर पर इन अनाजों को बेचने, प्रसंस्कृत करने और उचित मूल्य दिलाने के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था मौजूद नहीं थी। मजबूरी में किसानों को अपनी तैयार फसल बेचने के लिए पड़ोसी जिलों में जाना पड़ता था, जिसके कारण भारी परिवहन खर्च और अतिरिक्त समय बर्बाद होता था। इसी वजह से लागत बढ़ने और मुनाफा घटने के कारण किसानों का रुझान इन फसलों से हटने लगा था और चित्रकूट में श्री अन्न की खेती लगभग समाप्ति की कगार पर पहुंच गई थी।\n\nजिला प्रशासन की पहल और किसानों से संवाद\nलुप्त होती इस कृषि परंपरा को दोबारा जीवित करने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष रणनीति तैयार की। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने स्थानीय किसानों के साथ सीधी बातचीत और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए। इस दौरान किसानों को मोटे अनाजों के स्वास्थ्य लाभों, बाजार की बढ़ती मांग और सरकारी प्रोत्साहन के बारे में जागरूक किया गया। जिलाधिकारी के इस निरंतर प्रोत्साहन का सकारात्मक असर पड़ा और किसानों ने एक बार फिर अपने खेतों में श्री अन्न की बुआई शुरू कर दी। अब प्रशासन का मुख्य ध्यान किसानों की फसल को स्थानीय स्तर पर ही बाजार और प्रसंस्करण की बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने पर केंद्रित है।\n\n60 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रही अत्याधुनिक इकाई\nकिसानों को उनकी ही चौखट पर सुविधाएं देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र गनीवा में 60 लाख रुपये की अनुमानित लागत से इस प्रसंस्करण इकाई का ढांचा खड़ा किया गया है। निर्माण कार्य की प्रगति की बात करें तो मुख्य भवन का फेब्रिकेशन और रंग-रोगन का कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है। इसके साथ ही, प्रसंस्करण कार्य में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनों की पहली खेप भी केंद्र में पहुंच चुकी है। शीघ्र ही इन मशीनों की स्थापना और परीक्षण का काम पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद यह इकाई पूर्ण रूप से क्रियाशील हो जाएगी।\n\nआटा, लड्डू और बिस्किट जैसे तैयार होंगे वेल्यू एडेड उत्पाद\nइस नई इकाई के शुरू होने के बाद चित्रकूट के किसान निर्धारित सरकारी या पारदर्शी दरों का भुगतान करके अपनी ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, सांवा, काकुन और रागी की फसल का प्रसंस्करण यहीं करा सकेंगे। प्रसंस्करण के बाद इस केंद्र में मोटे अनाज से पौष्टिक आटा, स्वादिष्ट लड्डू, बिस्किट और कई प्रकार के तैयार खाद्य पदार्थ बनाए जाएंगे। इन तैयार उत्पादों को आकर्षक पैकिंग के साथ बाजार में उतारा जाएगा, जिससे उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ेगी और किसानों को अपनी उपज का पहले से कहीं अधिक दाम मिल सकेगा।\n\nस्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा\nजिलाधिकारी पुलकित गर्ग के अनुसार, इस प्रसंस्करण इकाई के बनने से न केवल किसानों का समय और भाड़े का खर्च बचेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। जब पैकेज्ड उत्पाद सीधे बाजार में बिकेंगे, तो इससे श्री अन्न से जुड़े छोटे उद्योगों और कुटीर व्यवसायों का विस्तार होगा। इसके अलावा, प्रसंस्करण, पैकिंग और विपणन की पूरी श्रृंखला में स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: मोटे अनाजों (श्री अन्न) के प्रसंस्करण और पैकेजिंग को बढ़ावा मिलने से देश में पौष्टिक आहार की उपलब्धता बढ़ेगी और बाजरा किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे।\n• चित्रकूट (बुंदेलखंड) में: स्थानीय प्रसंस्करण सुविधा मिलने से किसानों का दूसरे जिलों में माल ले जाने का भारी परिवहन खर्च और समय बचेगा, साथ ही जिले में नए छोटे उद्योगों और रोजगार के अवसर बनेंगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चित्रकूट में श्री अन्न प्रसंस्करण इकाई की स्थापना कहाँ और कितनी लागत से की जा रही है?\nयह इकाई चित्रकूट के गनीवा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में जिला खनिज मद से करीब 60 लाख रुपये की लागत से तैयार की जा रही है।\n\n2. इस प्रसंस्करण इकाई में किन-किन अनाजों का प्रसंस्करण किया जा सकेगा?\nइस केंद्र में किसान ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, सांवा, काकुन और रागी जैसे पारंपरिक श्री अन्न अनाजों का प्रसंस्करण करा सकेंगे।\n\n3. प्रसंस्करण के बाद इस इकाई में कौन-कौन से उत्पाद तैयार किए जाएंगे?\nइकाई में मोटे अनाज से पौष्टिक आटा, स्वादिष्ट लड्डू, बिस्किट और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद तैयार करके आकर्षक पैकेजिंग के साथ बाजार में बेचे जाएंगे।\n\n4. इस इकाई के चालू होने से चित्रकूट के किसानों को क्या मुख्य लाभ होगा?\nकिसानों को फसल बेचने के लिए दूसरे जिलों में नहीं जाना पड़ेगा, जिससे उनका परिवहन (भाड़ा) खर्च और समय बचेगा तथा पैकेज्ड उत्पादों से अधिक मूल्य प्राप्त होगा।\n\n5. इस प्रसंस्करण केंद्र के निर्माण की वर्तमान स्थिति क्या है?\nनिर्माण कार्य अंतिम चरण में है, भवन का फेब्रिकेशन और रंग-रोगन पूरा हो चुका है तथा मशीनों की पहली खेप भी कृषि विज्ञान केंद्र पहुंच चुकी है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-16",
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    "श्री अन्न प्रसंस्करण इकाई",
    "कृषि विज्ञान केंद्र गनीवा",
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