# 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राजनाथ सिंह ने रेखांकित की भारतीय सैन्य क्षेत्र की 12 वर्षों की प्रगति

> 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आकाशवाणी से संबोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले 12 वर्षों के दौरान घरेलू उत्पादन, निर्यात और बजट आवंटन में हुए ऐतिहासिक इजाफे का पूरा ब्यौरा पेश किया।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-08-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/80ven-svatntrata-divasa-ki-purva-sndhya-para-rajnath-singh-ne-rekhankita-ki-bharatiya-sainya-kshetra-ki-12-varshon-ki-pragati-16761 · **Language:** Hindi
**Tags:** रक्षा मंत्रालय, राजनाथ सिंह, आत्मनिर्भर भारत, रक्षा निर्यात, डीआरडीओ, अग्नि मिसाइल, रक्षा बजट

80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आकाशवाणी के माध्यम से सशस्त्र बलों के जवानों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले 12 वर्षों में भारत के रक्षा क्षेत्र में आए व्यापक बदलावों और आत्मनिर्भरता की दिशा में हासिल की गई ऐतिहासिक उपलब्धियों का विस्तृत लेखा-जोखा देश के सामने रखा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार रक्षा बलों के आधुनिकीकरण और उन्हें भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी राष्ट्रीय पहलों ने भारत को रक्षा सामग्री के पारंपरिक आयातक देश की छवि से बाहर निकालकर एक मजबूत वैश्विक रक्षा निर्माण केंद्र और शुद्ध निर्यातक देश के रूप में स्थापित कर दिया है।

## घरेलू रक्षा उत्पादन में चार गुना की अभूतपूर्व बढ़ोतरी
वर्ष 2014 के आंकड़ों से तुलना करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन लगभग 46,000 करोड़ रुपये का था। पिछले एक दशक में किए गए नीतिगत सुधारों और बुनियादी ढांचे के विकास के परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह वृद्धि पिछले 12 वर्षों के दौरान उत्पादन में लगभग चार गुना बढ़ोतरी को दर्शाती है। कुल रक्षा उत्पादन के ढांचे की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSU) और अन्य सरकारी संस्थाओं का योगदान लगभग 76 प्रतिशत रहा है। वहीं दूसरी ओर, निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 24 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले वित्तीय वर्ष में 22 प्रतिशत दर्ज की गई थी। निजी क्षेत्र की इस बढ़ती भागीदारी से साफ होता है कि देश में रक्षा विनिर्माण के लिए अनुकूल माहौल तैयार हुआ है और कारोबार करने की सुगमता में निरंतर सुधार हो रहा है।

> 

## रक्षा निर्यात में 5,500 फीसदी से अधिक की ऐतिहासिक छलांग
अंतर्राष्ट्रीय रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती धमक का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 में देश का कुल रक्षा निर्यात केवल 686 करोड़ रुपये था। सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के चलते वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को छू चुका है। यह बदलाव 5,500 प्रतिशत से भी अधिक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी को प्रदर्शित करता है, जो भारत की स्वदेशी तकनीक और विनिर्माण क्षमता पर वैश्विक विश्वास का प्रतीक है। वर्तमान समय में देश के भीतर 145 पंजीकृत रक्षा निर्यातक सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं और भारतीय कारखानों में बने सैन्य उपकरण दुनिया के 80 से अधिक देशों को भेजे जा रहे हैं। रक्षा क्षेत्र की इस गति को बरकरार रखते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय रक्षा निर्यात वर्ष 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लेगा।

## रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये पार, R&D आवंटन में 90 फीसदी वृद्धि
सैन्य आधुनिकीकरण को निरंतर वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए सरकार ने रक्षा बजट के आकार में लगातार बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष 2013-14 में देश का कुल रक्षा बजट 2.53 लाख करोड़ रुपये था, जिसे वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। बजट में यह व्यापक विस्तार देश की सीमाओं की सुरक्षा और आधुनिक सैन्य तकनीकों के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। इसी समयावधि में सैन्य उपकरणों, हथियारों और आधुनिक प्रणालियों की खरीद के लिए दिए जाने वाले पूंजीगत खर्च में भी भारी इजाफा हुआ है, जो 94,588 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.19 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही, भविष्य के युद्धों के अनुकूल तकनीकों के विकास के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) बजट को वित्त वर्ष 2014-15 के 15,283 करोड़ रुपये से 90 प्रतिशत बढ़ाकर वित्त वर्ष 2026-27 में 29,100 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

## 8.75 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी और कमांडर स्तर पर वित्तीय अधिकार दोगुने
खरीद प्रक्रियाओं को सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए किए गए ढांचागत सुधारों का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले एक वर्ष के भीतर रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 8.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न रक्षा परियोजनाओं के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) प्रदान की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि रक्षा प्रणालियों के त्वरित आधुनिकीकरण को सरकार कितनी प्राथमिकता दे रही है। मैदानी स्तर पर परिचालन संबंधी फैसलों में तेजी लाने के लिए फील्ड कमांडरों की वित्तीय शक्तियों की सीमा को दोगुना कर दिया गया है, जिससे वे आपातकालीन और परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार त्वरित निर्णय ले सकें। इसके अतिरिक्त, स्वदेशीकरण अभियान को गति देने के लिए राजस्व मार्ग के माध्यम से 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रक्षा खरीद को मंजूरी दी गई है, जिससे स्थानीय कलपुर्जों और उपकरणों की आपूर्ति शृंखला को मजबूती मिली है।

## MIRV तकनीक से लैस अग्नि मिसाइल और अत्याधुनिक मारक प्रणालियों का सफल परीक्षण
सशस्त्र बलों और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वदेशी युद्धपोतों, लड़ाकू विमानों और आधुनिक प्रणालियों के निर्माण ने भारत की परिचालन क्षमता को नए शिखर पर पहुंचा दिया है। उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन सिस्टम के सफल परीक्षण का विशेष उल्लेख किया, जिसके जरिए पारंपरिक हथियारों को सटीक निशाना लगाने वाले आधुनिक हथियारों में बदला जा सकता है। इसके अलावा, रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को अभूतपूर्व शक्ति प्रदान करते हुए मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक से लैस एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया। इसके साथ ही लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल, रुद्रम-2 (RudraM-II) एयर-टू-सरफेस मिसाइल, नेवल एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज (NASM-SR) और पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट प्रणाली के सफल परीक्षणों ने भारतीय सेनाओं की मारक क्षमता को बहुगुणित किया है। संबोधन के अंत में राजनाथ सिंह ने देश के वीर जवानों के अदम्य साहस, समर्पण और अनुशासन को नमन करते हुए कहा कि उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए संपूर्ण राष्ट्र सदैव उनका ऋणी रहेगा।

> 

>

## इसका आप पर असर
**भारत में:** रक्षा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता से देश की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता घटने से करदाताओं के पैसे की बचत होगी।

**व्यापार और रोजगार में:** घरेलू रक्षा विनिर्माण और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से एमएसएमई (MSME) और तकनीकी क्षेत्र में युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन कितना दर्ज किया गया?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2013-14 में लगभग 46,000 करोड़ रुपये था।

### 2. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने कितना रक्षा निर्यात हासिल किया?
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल किया, जो वित्त वर्ष 2013-14 की तुलना में 5,500 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।

### 3. वर्ष 2029 तक भारत का रक्षा निर्यात लक्ष्य क्या है?
भारत ने वर्ष 2029 तक वार्षिक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

### 4. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश का रक्षा बजट कितना तय किया गया है?
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है, जिसमें पूंजीगत खर्च 2.19 लाख करोड़ रुपये और R&D बजट 29,100 करोड़ रुपये है।

### 5. संबोधन के दौरान किन प्रमुख मिसाइल प्रणालियों और तकनीकों के परीक्षणों का उल्लेख किया गया?
संबोधन में MIRV तकनीक से लैस अग्नि मिसाइल, रुद्रम-2 एयर-टू-सरफेस मिसाइल, लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल, नेवल एंटी-शिप मिसाइल और पिनाका गाइडेड रॉकेट प्रणाली का उल्लेख किया गया।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._