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  "title": "भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिग्गजों ने किया अमर सेनानियों को नमन",
  "summary": "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित कई नेताओं ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' की 84वीं वर्षगांठ पर स्वतंत्रता सेनानियों के साहस को याद किया है।",
  "content": "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 84वीं वर्षगांठ के मौके पर इस महान संघर्ष में कदम रखने वाले सभी राष्ट्रनायकों और अमर सेनानियों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। प्रधानमंत्री का कहना है कि इन सेनानियों का अदम्य साहस और अटूट समर्पण देश के हर नागरिक के लिए हमेशा प्रेरणा का बड़ा स्रोत बना रहेगा।\n\nसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक संदेश में प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि महात्मा गांधी के नेतृत्व से प्रभावित होकर दिए गए ‘भारत छोड़ो’ के ओजस्वी आह्वान ने देश की आजादी की लड़ाई में एक नई ऊर्जा फूंक दी थी। इससे उपनिवेशवाद के चंगुल से पूरी तरह आजाद होने की भारतवासियों की दृढ़ इच्छाशक्ति दुनिया के सामने स्पष्ट रूप से उजागर हुई थी।\n\nदूसरी ओर, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी इस ऐतिहासिक अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए उन सभी महान सेनानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी जिन्होंने स्वतंत्र देश के सपने को हकीकत में बदलने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि महात्मा गांधी का वह प्रसिद्ध ‘करो या मरो’ का नारा उस दौर में करोड़ों देशवासियों के भीतर अटूट साहस और संकल्प की जीवंत आवाज बन गया था।\n\nलोकसभा अध्यक्ष ने आगे कहा कि इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन के दौरान अनगिनत जाने-माने और गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटिश हुकूमत की जेलों में भीषण यातनाएं झेलीं, लंबा संघर्ष किया और देश के वास्ते अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनका यह कड़ा संघर्ष केवल राजनीतिक सत्ता हासिल करने भर के लिए नहीं था, बल्कि एक ऐसे नए भारत की रचना के वास्ते था जिसके संस्कार सत्य, अहिंसा, लोकतंत्र, समानता और सच्ची राष्ट्रभक्ति जैसे मूल सिद्धांतों पर टिके हों।\n\nइस कड़ी में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी अपने संदेश के जरिए याद दिलाया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कुशल नेतृत्व में अगस्त 1942 के इसी दिन शुरू हुआ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक अत्यंत निर्णायक मोड़ साबित हुआ था। इस ऐतिहासिक ‘अगस्त क्रांति’ ने पूरे देश में एक नई वैचारिक चेतना जागृत की थी और तमाम भारतीयों को स्वाधीनता के साझा लक्ष्य के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी थी।\n\nकेंद्रीय मंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अगस्त क्रांति का पूरा इतिहास देश के उन तमाम गुमनाम योद्धाओं के अभूतपूर्व त्याग, बलिदान और बहादुरी की गाथाओं से भरा पड़ा है, जो आने वाली हर पीढ़ी को देशसेवा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती रहेंगी। इस अवसर पर उन्होंने महात्मा गांधी समेत उन तमाम स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया जिनके संघर्ष के बूते आज स्वतंत्र भारत की बुनियाद इतनी मजबूत हुई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारत छोड़ो आंदोलन की कौन सी वर्षगांठ मनाई गई है?\nइस वर्ष भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ मनाई गई है।\n\n2. भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत कब हुई थी?\nयह आंदोलन अगस्त 1942 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ था।\n\n3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर क्या संदेश दिया?\nप्रधानमंत्री मोदी ने आंदोलन में भाग लेने वाले सभी राष्ट्रनायकों के साहस को हर भारतीय के लिए प्रेरणा बताया है।\n\n4. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने संदेश में किस नारे का जिक्र किया?\nओम बिरला ने महात्मा गांधी द्वारा दिए गए करो या Mro के नारे को याद किया।",
  "url": "https://trendkia.com/national/84th-anniversary-quit-india-movement-narendra-modi-leaders-tribute-15274",
  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-09",
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    "नरेंद्र मोदी",
    "ओम बिरला",
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