# अभिजीत दिपके को सुप्रीम कोर्ट से राहत, छात्रों की एफआईआर रद्द करने के फैसले पर दखल से इनकार

> सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को पक्षकार बनाने और पुलिस को न्यायपालिका जैसी संप्रभुता देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत एफआईआर रद्द करने का फैसला उचित था।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/abhijeet-dipke-ko-suprima-korta-se-rahata-chhatron-ki-fir-radda-karane-ke-phaisale-para-dakhala-se-inakara-45266 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुप्रीम कोर्ट, अभिजीत दिपके, कॉकरोच जनता पार्टी, सीजेआई सूर्यकांत, अनुच्छेद 142, एफआईआर

उच्चतम न्यायालय ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को पक्षकार बनाने की मांग से जुड़ी अर्जी को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इस याचिका में छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को वापस लेने से जुड़े न्यायिक आदेशों की समीक्षा का आग्रह किया गया था, साथ ही पुलिस प्रशासन को न्यायपालिका के समान स्वतंत्र और संप्रभु दर्जा देने की गुहार लगाई गई थी। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने इन तमाम दलीलों को अस्वीकार करते हुए संबंधित व्यक्ति को बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है।

## छात्रों के भविष्य और अनुच्छेद 142 का दायरा
इस मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की संयुक्त पीठ के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता की तरफ से उपस्थित वकील मैथ्यूज नेडुम्पारा ने आरोप लगाया कि जनहित याचिकाओं का गलत उपयोग किया जा रहा है और लोग अदालतों का रुख ऐसे करते हैं जैसे वह उनकी निजी जागीर हो। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि अदालत ने अपने विशेषाधिकारों का उपयोग करके युवा छात्रों की प्राथमिकियां क्यों निरस्त कीं।

इस आपत्ति पर पीठ की अध्यक्षता कर रहे सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि अदालत को युवा छात्रों और उनके अभिभावकों के भविष्य की चिंता करनी पड़ती है। पीठ ने कहा कि यह कतई उचित नहीं है कि कम उम्र के छात्रों को बार-बार अदालतों के चक्कर काटने के लिए मजबूर किया जाए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि संविधान के अनुच्छेद 142 का प्रयोग पूर्ण न्याय देने के लिए किया जाता है और किसी भी न्यायिक फैसले के शत-प्रतिशत त्रुटिहीन होने की पूर्व गारंटी नहीं दी जा सकती।

## पुलिस की संप्रभुता पर उठी मांग खारिज
याचिका में यह अजीबोगरीब दलील भी दी गई थी कि कानून-व्यवस्था की रक्षा करने वाली पुलिस को भी न्यायपालिका की तर्ज पर पूरी तरह संप्रभु और स्वायत्त संस्था घोषित किया जाए। याचिकाकर्ता का कहना था कि जब तक पुलिस का कोई कदम स्पष्ट तौर पर गैरकानूनी न हो, तब तक उसके संप्रभु कार्यों में न्यायिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। हालांकि, पीठ ने इस अवधारणा को कानून के सिद्धांतों के विपरीत मानते हुए याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

## हिमाचल प्रदेश के विधायकों के दृष्टांत का उल्लेख
अदालत ने सुनवाई के दौरान हिमाचल प्रदेश के जन प्रतिनिधियों से जुड़े एक पुराने न्यायिक दृष्टांत का भी हवाला दिया। पीठ ने याद दिलाया कि हिमाचल प्रदेश में विधायकों ने धरने के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाई थी। उस मामले में उच्च न्यायालय ने प्राथमिकियां रद्द करने से साफ मना कर दिया था, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने परिस्थितियों को देखते हुए राहत दी थी।

सीजेआई ने कहा कि कोविड महामारी के असाधारण संकट के दौरान लोगों ने अपने तात्कालिक हालातों के दबाव में प्रतिक्रियाएं दी थीं। उस मामले में भी राहत देते हुए शीर्ष अदालत ने रेखांकित किया था कि संबंधित व्यक्ति आदतन अपराधी नहीं थे। इसी कानूनी समझ को आगे बढ़ाते हुए पीठ ने छात्रों के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया।

## इसका आप पर असर
यह फैसला युवा छात्रों के कानूनी अधिकारों और जनहित याचिकाओं के दायरे को लेकर स्पष्ट दिशा तय करता है।

- **छात्रों और युवाओं पर प्रभाव:** अदालत ने स्पष्ट किया है कि गैर-आपराधिक पृष्ठभूमि वाले छात्रों के भविष्य को कानूनी मुकदमों में नहीं घसीटा जाना चाहिए। इसका सीधा अर्थ है कि मामूली मामलों में युवाओं को अदालतों के अनावश्यक चक्कर काटने से सुरक्षा मिलेगी।
- **पुलिस प्रशासन के अधिकार:** पुलिस को न्यायपालिका जैसी असीमित और संप्रभु स्वतंत्रता देने की मांग पूरी तरह ठुकरा दी गई है। इससे यह तय रहता है कि पुलिस के हर मनमाने कदम की अदालत में जवाबदेही बरकरार रहेगी।
- **कानूनी प्रक्रियाओं की स्थिति:** संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सर्वोच्च अदालत की व्यापक शक्तियों को एक बार फिर सही ठहराया गया है। पीड़ित पक्ष को असाधारण परिस्थितियों में पूर्ण न्याय दिलाने का यह रास्ता खुला रहेगा।
- **जनहित याचिकाओं की सीमा:** अदालत ने निजी स्वार्थ या अनावश्यक समीक्षा वाली याचिकाओं पर सख्त रुख दिखाया है। बेबुनियाद याचिकाओं के जरिए वास्तविक राहतों को पलटने की कोशिशों पर रोक लगेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को पक्षकार बनाने और छात्रों के खिलाफ रद्द की जा चुकी कानूनी कार्रवाइयों को फिर से शुरू करवाने के लिए दायर अर्जी के कारण सामने आया।

- **याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें:** याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि छात्रों की प्राथमिकियां रद्द करने के फैसले की समीक्षा हो और दिपके को पक्षकार बनाया जाए। साथ ही पुलिस प्रशासन को न्यायिक संप्रभुता देने की मांग रखी गई थी।
- **अदालत का मानवीय दृष्टिकोण:** पीठ ने पाया कि छात्र आदतन अपराधी नहीं हैं और उनके मुकदमों में उलझने से करियर बर्बाद हो सकता है। इसी कारण अदालत ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर दखल से इनकार किया।
- **अदालती दृष्टांत का आधार:** पूर्व में हिमाचल प्रदेश के विधायकों के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही असाधारण हालातों को ध्यान में रखकर राहत दी थी। अदालत ने उसी कानूनी तर्क को इस मामले में भी दोहराया।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट ने अभिजीत दिपके से जुड़ी याचिका पर क्या फैसला सुनाया?
उच्चतम न्यायालय ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को पक्षकार बनाने और छात्रों की एफआईआर बहाल करने की मांग वाली याचिका पूरी तरह खारिज कर दी।

### 2. इस मामले की सुनवाई किस न्यायिक पीठ ने की?
मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने की।

### 3. याचिकाकर्ता ने पुलिस को लेकर क्या मांग रखी थी?
याचिका में मांग की गई थी कि पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मामले में न्यायपालिका की तरह स्वतंत्र और संप्रभु घोषित किया जाए।

### 4. छात्रों की एफआईआर रद्द करने पर सीजेआई सूर्यकांत ने क्या कहा?
सीजेआई ने कहा कि वे युवा छात्र हैं और अदालत को उनके माता-पिता व भविष्य की चिंता है, इसलिए उन्हें अदालतों के चक्कर नहीं काटने चाहिए।

### 5. अदालत ने किस राज्य के विधायकों के मामले का उदाहरण दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के विधायकों के मामले का दृष्टांत दिया, जहां कोविड के तनाव और गैर-आदतन अपराधी होने के आधार पर एफआईआर रद्द की गई थी।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._