अबू धाबी के अस्पताल में ठीक हो रहे हैं कैप्टन स्मित मच्छार, भारत लौटने की तारीख डॉक्टरों के फैसले पर टिकी फ्लाईदुबई विमान में हमले के दौरान 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छार का अबू धाबी में इलाज जारी है। परिवार और डॉक्टरों के मुताबिक पूरी तरह ठीक होने के बाद ही उनके स्वदेश लौटने पर फैसला होगा। हवाई सफर के दौरान जानलेवा हमले का डटकर मुकाबला करने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार इस समय संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी स्थित एक अस्पताल में उपचाराधीन हैं। उनकी शारीरिक स्थिति में क्रमिक सुधार देखा जा रहा है। भारतीय दूतावास और उनके परिजनों ने स्पष्ट किया है कि उन्हें आधुनिक और बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। जानलेवा जोखिम उठाकर सैकड़ों जिंदगियां सुरक्षित जमीन पर उतारने वाले इस बहादुर पायलट का स्वदेश में बेसब्री से इंतजार हो रहा है, लेकिन डॉक्टरों की अंतिम मंजूरी के बिना उनकी यात्रा संभव नहीं होगी। कॉकपिट में हुआ था जानलेवा हमला यह खौफनाक घटना 30 सितंबर को घटी थी, जब फ्लाईदुबई का एक विमान दुबई से उड़ान भरकर तेल अवीव की तरफ बढ़ रहा था। रास्ते में कॉकपिट के भीतर मौजूद को-पायलट ने अचानक कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला बोल दिया था। हमलावर को-पायलट ने न केवल मुख्य पायलट को शारीरिक नुकसान पहुंचाया, बल्कि विमान को भी नुकसान पहुंचाने का खतरनाक प्रयास किया था। उस समय विमान में 174 यात्रियों के साथ-साथ चालक दल के सदस्य भी मौजूद थे। गंभीर रूप से लहुलूहान होने के बाद भी स्मित ने अपना आपा नहीं खोया और सूझबूझ से कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे। इसके तुरंत बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने हमलावर को दबोच लिया, जिससे विमान को सुरक्षित उतार लिया गया। विश्व भर से मिली सराहना और प्रधानमंत्री से बातचीत अत्यंत नाजुक हालात में अदम्य साहस का परिचय देने के बाद कैप्टन स्मित को दुनिया भर में एक नायक का दर्जा दिया जा रहा है। उनके इस साहसिक कदम की सराहना इज़रायल, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात सहित अनेक देशों ने की है। खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी फोन पर कैप्टन स्मित से सीधे संपर्क कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके बेमिसाल हौसले की तारीफ करते हुए उन्हें रियल हीरो बताया। गहरे घाव और लंबा उपचार पारिवारिक सूत्रों के अनुसार हमले के दौरान उन्हें काफी गहरे जख्म लगे हैं। विशेष तौर पर उनके सिर और दोनों हाथों पर गंभीर चोटें आई हैं, जिसके चलते उनका इलाज संयुक्त अरब अमीरात में ही जारी रखा गया है। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि इतने गहरे आघात से पूरी तरह उबरने में उन्हें अभी और वक्त लगेगा। अक्टूबर की शुरुआत में परिजनों को चिकित्सा दल की ओर से अवगत कराया गया था कि कम से कम आठ और दिन उनका सघन उपचार चलेगा। इसके उपरांत ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने पर कोई विचार किया जाएगा, क्योंकि डॉक्टर उन्हें शत-प्रतिशत स्वस्थ होने के बाद ही यात्रा की अनुमति देना चाहते हैं। परिजनों का संबल और वापसी की योजना कैप्टन के पिता उपेंद्र मच्छार ने साझा किया कि उनका बेटा शारीरिक पीड़ा तो सह रहा है, परंतु मानसिक तौर पर पूरी तरह अडिग है। नेताओं और शुभचिंतकों से बातचीत के दौरान भी वे पूरी तरह शांत और संयमित नजर आते हैं। तनाव से दूर रखने के मकसद से परिवार फिलहाल उनके सामने उस दर्दनाक घटना की ज्यादा चर्चा नहीं कर रहा है। अस्पताल में उनकी पत्नी सोनल लगातार उनके साथ मौजूद हैं और उनकी देखभाल कर रही हैं। जहां तक भारत लौटने का प्रश्न है, परिजनों ने साफ किया है कि अभी स्वदेश वापसी की कोई तय तारीख तय नहीं की गई है। परिवार उन्हें जल्द घर लाना चाहता है, लेकिन प्राथमिकता उनकी संपूर्ण रिकवरी है। भारतीय दूतावास भी लगातार परिवार और स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहकर जरूरी सहायता उपलब्ध करा रहा है। वहीं मुंबई में उनके परिजन तथा पड़ोसी उनके जल्द स्वस्थ होने और लौटने की प्रार्थना कर रहे हैं, जबकि खुद स्मित ने परिवार से कुछ समय और मांगते हुए जल्द पूरी तरह ठीक होने का भरोसा दिया है। इसका आप पर असर यह घटना अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर यात्रा करने वाले नागरिकों और विदेशों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों के लिए सुरक्षा और कूटनीतिक समन्वय की अहमियत को रेखांकित करती है। • भारत में: विदेशी एयरलाइनों में कार्यरत भारतीय विमानन कर्मियों के परिवारों को यह भरोसा मिलता है कि आपात स्थिति में भारतीय दूतावास तत्परता से सहयोग करता है। इससे विदेशों में काम करने वाले पेशेवरों के परिजनों की चिंताओं को राहत मिलती है। • मुंबई में: कैप्टन के गृहनगर मुंबई में उनके रिश्तेदार और स्थानीय निवासी उनकी सेहत में हो रहे सुधार पर करीब से नजर रख रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लोग उनके पूरी तरह स्वस्थ होकर शहर वापस लौटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। • हवाई यात्रियों के लिए: यह प्रसंग रेखांकित करता है कि चालक दल का संकट प्रबंधन यात्रियों की जान बचाने में कितना निर्णायक साबित होता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि उड़ान के दौरान क्रू और पायलटों का आपातकालीन प्रशिक्षण कितना महत्वपूर्ण है। • यात्रा नियमों के लिहाज से: गंभीर रूप से घायल मरीजों को अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा की अनुमति केवल संपूर्ण चिकित्सकीय मंजूरी के बाद ही मिलती है। डॉक्टरों द्वारा तय किए गए मानकों के पूरा होने तक मरीज को स्थानीय स्तर पर अस्पताल में ही रहना अनिवार्य होता है। ऐसा क्यों हुआ यह स्थिति 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान में कॉकपिट के भीतर को-पायलट द्वारा अचानक किए गए अप्रत्याशित हमले और प्लेन को क्षति पहुंचाने के प्रयास के कारण उत्पन्न हुई। कैप्टन द्वारा सूझबूझ दिखाते हुए दरवाजा खोलने और यात्रियों व क्रू द्वारा हमलावर को काबू करने के बाद विमान सुरक्षित उतारा जा सका, जिसके बाद घायल पायलट को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। • सीधा कारण: दुबई से तेल अवीव की उड़ान के दौरान को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर घातक वार किए और विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। इसके चलते कैप्टन को सिर और हाथों में गंभीर चोटें आईं। • बचाव की वजह: लहुलूहान होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे चालक दल और यात्रियों को समय रहते अंदर आकर हमलावर को नियंत्रित करने का मौका मिला। • उपचार की निरंतरता: घाव अत्यधिक गहरे होने की वजह से डॉक्टरों ने अक्टूबर की शुरुआत में कम से कम आठ दिन और सघन देखभाल की आवश्यकता बताई थी। इसी कारण उनकी छुट्टी और भारत वापसी की तारीख अभी तय नहीं की गई है। सवाल-जवाब 1. कैप्टन स्मित मच्छार का इलाज इस समय कहां चल रहा है? कैप्टन स्मित मच्छार का इलाज संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी स्थित एक अस्पताल में चल रहा है। 2. फ्लाईदुबई विमान में यह घटना किस तारीख को हुई थी? यह घटना 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में घटी थी। 3. विमान में घटना के समय कुल कितने यात्री सवार थे? उस समय विमान में 174 यात्रियों के साथ-साथ चालक दल के सदस्य भी मौजूद थे। 4. कैप्टन स्मित के शरीर के किन हिस्सों में अधिक चोटें आई हैं? हमले के कारण कैप्टन स्मित के सिर और दोनों हाथों में काफी गंभीर और गहरे घाव लगे हैं। 5. क्या कैप्टन स्मित के भारत लौटने की कोई तारीख तय हो चुकी है? अभी भारत लौटने की कोई निश्चित तारीख तय नहीं हुई है, क्योंकि डॉक्टर पूरी तरह ठीक होने के बाद ही यात्रा की अनुमति देंगे। 6. अस्पताल में उनके साथ परिवार से कौन मौजूद है? अस्पताल में उनकी पत्नी सोनल उनके साथ मौजूद हैं और उनकी देखभाल कर रही हैं। https://trendkia.com/national/abu-dhabi-ke-aspatala-men-thika-ho-rahe-hain-kaiptana-smit-macchar-bharata-lautane-ki-tarikha-doktaron-ke-phaisale-para-tiki-43283 TrendKia — Har trend, sabse pehle.