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  "title": "अग्निपथ योजना में दो साल के विस्तार पर बोले पूर्व सेना प्रमुख, बताया सैन्य तैयारियों के लिए बड़ा कदम",
  "summary": "पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवाकाल देने के केंद्र के फैसले का समर्थन किया है, जिससे सैनिकों को नियमित सेवा का दावा मजबूत करने का नया मौका मिलेगा।",
  "content": "केंद्र सरकार द्वारा अग्निपथ योजना के तहत बाकी बचे 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवाकाल देने का निर्णय लिया गया है। इस अहम फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने इसे सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल और संगठनात्मक आवश्यकताओं के अनुकूल बताया है। उनका मानना है कि यह बदलाव सैन्य बलों की जमीनी तैयारियों और युद्धक क्षमता को मजबूत करने में बेहद मददगार साबित होगा। चार साल के शुरुआती कार्यकाल के बाद सैनिकों को सेवा विस्तार देना सैन्य दक्षता के नजरिए से उठाया गया एक व्यावहारिक कदम है।\n\nसशस्त्र बलों के अनुभव और फीडबैक पर आधारित निर्णय\nचार साल पहले जब अग्निपथ योजना की शुरुआत की गई थी, तब यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया था कि समय के साथ मिलने वाले व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर इसमें आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। मूल योजना में सिर्फ 25 फीसदी अग्निवीरों को चार साल बाद नियमित सेवा में बनाए रखने का प्रावधान तय किया गया था। हालांकि, सेवा के दौरान तीनों सेनाओं द्वारा अग्निवीरों की शारीरिक क्षमता, कर्तव्य के प्रति निष्ठा और पेशेवर दक्षता का गहन मूल्यांकन किया गया, जिसमें उनका प्रदर्शन बेहद सराहनीय पाया गया।\n\nतीनों सेनाओं से मिले इस सकारात्मक फीडबैक को ध्यान में रखते हुए नीति में यह महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। सेना का मुख्य उद्देश्य औसतन युवा आयु वर्ग तैयार करना तो था ही, लेकिन साथ ही कठिन परिस्थितियों में प्रशिक्षित और कुशल सैनिकों का एक मजबूत आधार बनाए रखना भी उतना ही अनिवार्य था। दो साल का यह अतिरिक्त कार्यकाल सेना की दोनों जरूरतों के बीच एक बेहतर संतुलन स्थापित करता है।\n\nनियमित सेवा के लिए काबिलियत साबित करने का नया अवसर\nइस नए नीतिगत संशोधन के तहत अग्निवीरों को अपनी सैन्य योग्यता साबित करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। जनरल पांडे ने स्पष्ट किया कि जब जवानों को दो साल का अतिरिक्त अवसर दिया जाता है, तो वे नियमित सेवा में शामिल होने के लिए अपनी दावेदारी को और अधिक पुख्ता कर सकते हैं। सीडीएस द्वारा भी यह पुष्टि की गई है कि अग्निवीरों का अब तक का प्रदर्शन काफी प्रतिस्पर्धी और उच्च स्तर का रहा है, जिससे उन्हें आगे बढ़ने का एक उचित मंच मिलना स्वाभाविक है।\n\nयह निर्णय उन जवानों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होगा जो अपनी क्षमता के बल पर स्थायी रूप से देश सेवा करना चाहते हैं। लंबे समय तक सेवा में रहने से उन्हें जटिल सैन्य हथियारों, तकनीकी प्रणालियों और सामरिक अभ्यासों का बेहतर अनुभव हासिल हो सकेगा, जिसका सीधा लाभ संपूर्ण सैन्य तंत्र को मिलेगा।\n\nकैबिनेट की मंजूरी और वित्तीय लाभ\nसीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, केंद्रीय कैबिनेट ने शेष 75 फीसदी अग्निवीरों के लिए दो वर्ष के दूसरे कार्यकाल के प्रस्ताव पर अपनी औपचारिक मुहर लगा दी है। इस विस्तारित अवधि में सेवा देने वाले जवानों को बेहतर पारिश्रमिक दिया जाएगा और साथ ही वे अतिरिक्त सेवा निधि के लाभ के भी पात्र होंगे।\n\nदो साल के इस अतिरिक्त कार्यकाल के पूरा होने के बाद जवानों के पास नियमित सैनिक बनने का विकल्प रहेगा। हालांकि, यह विकल्प पूरी तरह से जवान की व्यक्तिगत इच्छा और सेना द्वारा निर्धारित कड़े चयन मानदंडों और पात्रता शर्तों को पूरा करने पर निर्भर करेगा।\n\nइसका आप पर असर\nअग्निपथ योजना में दो साल के सेवा विस्तार और बेहतर पारिश्रमिक से भर्ती हुए युवाओं के करियर और सेवा शर्तों पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• भारत में: सशस्त्र बलों में सेवा दे रहे अग्निवीरों को अब चार साल के बजाय कुल छह साल तक देश सेवा करने और नियमित सैनिक बनने का मौका मिलेगा। इससे रक्षा भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं में नौकरी की सुरक्षा और दीर्घकालिक करियर को लेकर अनिश्चितता काफी कम होगी।\n• वित्तीय लाभ: दो साल के अतिरिक्त सेवाकाल के दौरान अग्निवीरों को बढ़ा हुआ वेतन और अतिरिक्त सेवा निधि पैकेज दिया जाएगा। यह संचित निधि उनके भविष्य के लिए एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा कवच का काम करेगी।\n• सेना की क्षमता: प्रशिक्षित और अनुभवी जवानों को दो अतिरिक्त वर्षों तक बनाए रखने से सीमावर्ती और तकनीकी मोर्चों पर सैन्य दक्षता में सुधार होगा। सशस्त्र बलों को बार-बार नए रंगरूटों को बुनियादी प्रशिक्षण देने के बजाय पूरी तरह तैयार कार्यबल उपलब्ध रहेगा।\n• स्थायी सेवा का अवसर: विस्तारित दो साल के कार्यकाल के बाद जवान अपनी योग्यता और इच्छा के आधार पर नियमित सैनिक बनने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे सिर्फ 25 फीसदी तक सीमित रहने वाली चयन प्रक्रिया का दायरा व्यापक हो सकेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nचार साल की सेवा के बाद प्रशिक्षित जवानों के जाने से पैदा होने वाली परिचालन चुनौतियों और तीनों सेनाओं से मिले सकारात्मक फीडबैक के चलते यह नीतिगत संशोधन किया गया है।\n\n• ऑपरेशनल और संगठनात्मक जरूरतें: केवल 25 फीसदी जवानों को बनाए रखने से अनुभवी जनशक्ति की कमी का खतरा था, जिससे परिचालन तत्परता प्रभावित हो सकती थी। दो साल का विस्तार सेना को अनुभवी सैनिकों को रणनीतिक इकाइयों में बनाए रखने की सुविधा देता है।\n• सकारात्मक प्रदर्शन मूल्यांकन: तीनों सेनाओं द्वारा किए गए आंतरिक आकलनों में अग्निवीरों की शारीरिक दक्षता, अनुशासन और तकनीकी कौशल को उत्कृष्ट पाया गया। इसी जमीनी प्रदर्शन के आधार पर रक्षा नेतृत्व ने उनके सेवाकाल को बढ़ाने की सिफारिश की।\n• मूल योजना का लचीलापन: जब चार साल पहले योजना पेश की गई थी, तब सरकार ने स्पष्ट किया था कि व्यावहारिक अनुभवों के अनुसार नियमों में संशोधन किया जाएगा। कैबिनेट की वर्तमान मंजूरी उसी संस्थागत समीक्षा का हिस्सा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. केंद्रीय कैबिनेट ने अग्निवीरों के लिए क्या नया फैसला लिया है?\nकैबिनेट ने बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को शुरुआती चार साल की सेवा के बाद दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल देने की मंजूरी दी है।\n\n2. पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने इस फैसले पर क्या राय दी?\nजनरल मनोज पांडे ने इसे सेना की ऑपरेशनल जरूरतों और संगठनात्मक दक्षता को पूरा करने वाला एक बेहद सकारात्मक कदम बताया।\n\n3. क्या अतिरिक्त दो साल के कार्यकाल के दौरान कोई वित्तीय लाभ मिलेगा?\nहाँ, विस्तारित दो साल की अवधि के दौरान जवानों को बेहतर पारिश्रमिक और अतिरिक्त सेवा निधि का लाभ दिया जाएगा।\n\n4. क्या दो साल के अतिरिक्त कार्यकाल के बाद अग्निवीर नियमित सैनिक बन सकते हैं?\nहाँ, दो साल के बाद नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा, जो जवान की इच्छा और सेना के निर्धारित चयन मानदंडों पर निर्भर करेगा।\n\n5. सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने अग्निवीरों के प्रदर्शन के बारे में क्या बताया?\nसीडीएस ने कहा कि अग्निवीरों का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है और वे काफी प्रतिस्पर्धी साबित हुए हैं।",
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  "publishedAt": "2026-11-04",
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