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  "type": "article",
  "title": "एयर इंडिया पायलट पर गांजे के सेवन का आरोप और स्पाइस जेट में एसी खराब होने से भारतीय विमानन सुरक्षा पर उठे सवाल",
  "summary": "फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में अचानक 300 फीट की गिरावट के बाद पायलट के ड्रग टेस्ट में गांजे की पुष्टि का दावा किया गया है। वहीं दिल्ली से पुणे जा रही स्पाइस जेट की फ्लाइट में एसी बंद होने से यात्रियों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा।",
  "content": "भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र में हाल ही में घटी कई घटनाओं ने हवाई यात्रियों की सुरक्षा और एयरलाइंस के परिचालन मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हवाई सफर को आमतौर पर सबसे सुरक्षित और आरामदायक परिवहन माध्यम माना जाता है, लेकिन बीते कुछ समय में ऐसी परिस्थितियां सामने आई हैं जिन्होंने यात्रियों के मन में भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। हवा में अचानक विमान के सैकड़ों फीट नीचे गिर जाने से लेकर कॉकपिट के भीतर पायलट के नशे में होने के आरोपों और रनवे पर खड़े प्लेन के अंदर भीषण गर्मी से यात्रियों के बदहवास होने तक की घटनाओं ने उड्डयन नियामक अधिकारियों को सतर्क कर दिया है। इन मामलों के एक साथ सामने आने से यह बहस तेज हो गई है कि क्या विमानन कंपनियां तकनीकी और मानवीय सुरक्षा मानकों का पालन करने में लापरवाही बरत रही हैं।\n\nएयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में 300 फीट का फ्री फॉल और जांच में चौंकाने वाले खुलासे\nसुरक्षा में चूक का सबसे चिंताजनक मामला एयर इंडिया की उस अंतरराष्ट्रीय उड़ान से जुड़ा है जो थाईलैंड के फुकेट से भारत की राजधानी दिल्ली आ रही थी। यात्रा के दौरान बीच हवा में विमान अचानक लगभग 300 फीट की ऊंचाई से नीचे गिर गया। प्लेन में सवार यात्रियों के लिए यह अनुभव बेहद खौफनाक था, क्योंकि उस वक्त ऐसा महसूस हुआ जैसे विमान अचानक मुफ़्त गिरावट यानी फ्री फॉल की स्थिति में आ गया हो। इस अप्रत्याशित झटके के कारण उड़ान में मौजूद कई यात्रियों को शारीरिक चोटें भी आईं। शुरुआती आधिकारिक बयानों में इस घटना का कारण हवा के दबाव में अचानक बदलाव यानी टर्बुलेंस को बताया गया था, परंतु इसके बाद शुरू हुई आंतरिक जांच में जो तथ्य उभरकर सामने आए हैं, उन्होंने इस पूरे वाकये को बेहद संवेदनशील और गंभीर बना दिया है।\n\nमामले की गहराई से की गई जांच से जुड़ी जानकारियों के अनुसार, फ्लाइट के कैप्टन की उड़ान के बाद की गई साइकोएक्टिव सब्सटेंस जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जांच में दावा किया गया है कि पायलट के शरीर में मारिजुआना यानी गांजे के अंश पाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इस प्रक्रिया के तहत किए गए दोनों अलग-अलग टेस्ट में गांजे के सेवन की पुष्टि हुई है। जांच से जुड़े सूत्रों ने यह भी खुलासा किया है कि कैप्टन ने उड़ान के दौरान कॉकपिट के अंदर ही धूम्रपान करने का प्रयास किया था। जब वह कॉकपिट के फर्श पर बैठकर स्मोक करने की कोशिश कर रहा था, तब केबिन क्रू के सदस्यों ने उसे देख लिया और हस्तक्षेप करते हुए वापस उसकी सीट पर बैठाया।\n\nइसके अलावा, जिस समय विमान अचानक 300 फीट नीचे गिरा, उस वक्त कैप्टन अपनी निर्धारित सीट पर बैठने के बजाय को-पायलट के पीछे झुककर खड़ा था। इतना ही नहीं, विमान की दिल्ली में सुरक्षित लैंडिंग हो जाने के बाद भी कैप्टन की स्थिति सामान्य नहीं थी और उसे पैदल चलने में भी कठिनाई हो रही थी। हालांकि, इन सभी गंभीर बिंदुओं को फिलहाल जांच से जुड़ी प्राथमिक जानकारियों के रूप में देखा जा रहा है और अंतिम निष्कर्ष आना अभी बाकी है। किसी भी वाणिज्यिक उड़ान में पायलट पर केवल प्लेन उड़ाने की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि उसके हाथों में सैकड़ों बेकसूर यात्रियों की सांसें टिकी होती हैं। इस तरह की गंभीर लापरवाही की संभावना सामने आने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने एयर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कैंपबेल विल्सन को मंत्रालय में व्यक्तिगत रूप से तलब कर इस पूरे मामले पर कड़ा स्पष्टीकरण मांगा है।\n\nस्पाइस जेट की फ्लाइट SG-105 में एसी ठप, गैस चैंबर जैसी बनी स्थिति\nएयर इंडिया के इस मामले की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि स्पाइस जेट की एक घरेलू उड़ान में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा से खिलवाड़ का नया मामला उजागर हो गया। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से महाराष्ट्र के पुणे शहर के लिए उड़ान भरने वाली स्पाइस जेट की फ्लाइट SG-105 में टेकऑफ से ठीक पहले एक बड़ा तकनीकी संकट पैदा हो गया। विमान अभी रनवे पर ही खड़ा था कि उसके भीतर का वातानुकूलन तंत्र यानी एसी पूरी तरह से बंद हो गया। दिल्ली की भीषण गर्मी के बीच बंद विमान के अंदर का तापमान तेजी से बढ़ने लगा, जिससे केबिन के अंदर मौजूद यात्री तड़पने लगे।\n\nविमान में लगभग 100 यात्री सवार थे, जिनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और गर्भवती महिलाएं भी शामिल थीं। केबिन में हवा का प्रवाह रुक जाने से तापमान अत्यधिक बढ़ गया और लोग पसीने से तर-बतर हो गए। स्थिति इतनी विकट हो गई कि यात्रियों को खुद को ठंडा रखने के लिए पत्रिकाओं और कागजों से हवा करनी पड़ी। यात्रियों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद केबिन क्रू के सदस्यों ने यह आश्वासन देकर उन्हें शांत रखने की कोशिश की कि समस्या जल्द ही ठीक कर ली जाएगी। यात्रियों का आरोप है कि क्रू किसी भी तकनीकी खराबी को स्वीकार करने को तैयार नहीं था और इसी बीच विमान के ब्लोअर चालू कर दिए गए। ब्लोअर चलने से गर्म हवा अंदर आने लगी और पूरा केबिन एक घुटन भरे गैस चैंबर में तब्दील हो गया।\n\nपर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने और अत्यधिक गर्मी के कारण कई यात्रियों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी और उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर परिजनों की चिंता चरम पर पहुंच गई। इसके बावजूद विमान को टेकऑफ कराने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा था। जब स्थिति बर्दाश्त से बाहर हो गई तो यात्रियों ने विमान के अंदर ही कड़ा विरोध और हंगामा शुरू कर दिया। यात्रियों के भारी दबाव को देखते हुए आखिरकार विमान के दरवाजे खोले गए और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। रनवे और एयरपोर्ट परिसर में आते ही नाराज यात्रियों ने स्पाइस जेट प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और टिकट का पूरा पैसा वापस मांगने लगे। यात्रियों ने उस विमान से दोबारा यात्रा करने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि एयरलाइन का तकनीकी अमला पहले विमान की मरम्मत कर उसी से उड़ान संचालित करने की जिद पर अड़ा था, लेकिन गहन जांच के बाद तकनीकी टीम ने स्वीकार किया कि विमान उड़ान भरने योग्य स्थिति में नहीं है। इसके बाद एयरलाइन को वैकल्पिक विमान का इंतजाम करना पड़ा, जिसके कारण यात्रियों के कई मूल्यवान घंटे बर्बाद हुए। स्पाइस जेट ने बाद में बयान जारी कर कहा कि अंतिम क्षणों में आई तकनीकी खराबी के कारण विमान बदलना पड़ा था।\n\nभारत में पायलटों और क्रू के लिए रैंडम ड्रग टेस्ट के कड़े नियम\nकॉकपिट में नशे की हालत में विमान उड़ाना न केवल अंतरराष्ट्रीय उड्डयन कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि यह एक गंभीर आपराधिक कृत्य भी है। एयर इंडिया की घटना के बाद भारत में पायलटों और एयरोड्रोम स्टाफ के मादक पदार्थ परीक्षण से जुड़े नियमों पर दोबारा ध्यान केंद्रित हुआ है। भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों (ATC) के लिए साइकोएक्टिव पदार्थों के नियमित परीक्षण के नियम वर्ष 2021 में तैयार किए थे, जिन्हें वर्ष 2022 से पूर्ण रूप से लागू किया गया था।\n\nइन नियमों के अनुसार, देश की प्रत्येक एयरलाइन और विमानन संगठन के लिए यह अनिवार्य है कि वह अपने कुल फ्लाइट क्रू और एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों में से कम से कम 10 प्रतिशत कर्मचारियों का हर साल रैंडम यानी आकस्मिक ड्रग टेस्ट आयोजित करे। इस परीक्षण के लिए संबंधित कर्मचारी के यूरिन का सैंपल लिया जाता है, जिसे सुरक्षा की दृष्टि से दो अलग-अलग बोतलों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें 'ए' और 'बी' सैंपल कहा जाता है। इस जांच प्रक्रिया में मुख्य रूप से पांच प्रकार के प्रतिबंधित साइकोएक्टिव पदार्थों की मौजूदगी की जांच की जाती है, जिनमें एम्फेटामाइन, ओपिएट्स, कैनाबिस (गांजा या भांग), कोकीन और बेंजोडायजेपाइन्स शामिल हैं।\n\nयदि किसी पायलट का प्रारंभिक स्क्रीन टेस्ट पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से सभी उड़ानों के रोस्टर से हटा दिया जाता है और कॉकपिट में प्रवेश करने से रोक दिया जाता है। इसके बाद यदि 'बी' सैंपल का कन्फर्मेटरी टेस्ट भी पॉजिटिव निकलता है, तो संबंधित व्यक्ति का लाइसेंस निलंबित कर दिया जाता है और उसे अनिवार्य रूप से नशामुक्ति केंद्र यानी डी-एडिक्शन तथा रिहैबिलिटेशन कार्यक्रम के लिए भेजा जाता है। उड्डयन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कड़े नियमों का शत-प्रतिशत पालन ही भारतीय आसमान को सुरक्षित रख सकता है और यात्रियों के डिगते विश्वास को बहाल कर सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को बोर्डिंग से पहले एयरलाइन के आपातकालीन तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था के प्रति सचेत रहना चाहिए तथा किसी भी लापरवाही की तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए।\n\nविमानन उद्योग में: इस घटना के बाद पायलटों के रैंडम मादक पदार्थ परीक्षण और विमानों के प्री-फ्लाइट रखरखाव ऑडिट को और अधिक सख्त किए जाने की संभावना है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में क्या घटना घटी थी?\nफुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट अचानक हवा में लगभग 300 फीट नीचे गिर गई थी, जिससे कई यात्री घायल हो गए थे।\n\n2. एयर इंडिया के पायलट पर क्या गंभीर आरोप लगे हैं?\nजांच रिपोर्ट के अनुसार पायलट का पोस्ट-फ्लाइट ड्रग टेस्ट गांजे के लिए पॉजिटिव आया है और उस पर कॉकपिट में धूम्रपान करने का प्रयास करने का आरोप है।\n\n3. स्पाइस जेट की फ्लाइट SG-105 में यात्रियों को क्या समस्या हुई?\nदिल्ली से पुणे जाने वाली स्पाइस जेट फ्लाइट SG-105 में टेकऑफ से पहले एसी खराब हो गया, जिससे 100 से अधिक यात्री भीषण गर्मी और घुटन से परेशान हो गए।\n\n4. भारत में पायलटों के ड्रग टेस्ट को लेकर क्या नियम हैं?\nडीजीसीए के 2021 नियमों के तहत हर साल कम से कम 10 प्रतिशत फ्लाइट क्रू और एटीसी का रैंडम यूरिन ड्रग टेस्ट करना अनिवार्य है।\n\n5. पायलट के ड्रग टेस्ट में किन पदार्थों की जांच की जाती है?\nइस टेस्ट में मुख्य रूप से गांजा (कैनाबिस), एम्फेटामाइन, ओपिएट्स, कोकीन और बेंजोडायजेपाइन्स जैसे 5 साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच होती है।",
  "url": "https://trendkia.com/national/air-india-ke-payalata-para-ganje-ke-sevana-ka-aropa-aura-spicejet-men-esi-kharaba-hone-se-bharatiya-vimanana-suraksha-para-uthe-sa-16090",
  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-12",
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