# देश के आठ प्रमुख शहरों में हवा में सफर कराने की तैयारी, एक लाख करोड़ रुपये से बदलेगी आवाजाही की तस्वीर

> देश भर के आठ अलग-अलग शहरों में ट्रैफिक की समस्या से निजात दिलाने और धार्मिक व पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान बनाने के लिए बड़े पैमाने पर अर्बन रोपवे परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन योजनाओं के तहत एक लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जा रही है जिससे घंटों का सफर मिनटों में सिमट जाएगा।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/air-travel-networks-underway-across-eight-major-cities-with-one-lakh-crore-rupee-outlay-31007 · **Language:** Hindi
**Tags:** रोपवे प्रोजेक्ट, वाराणसी रोपवे, केदारनाथ रोपवे, महाकालेश्वर मंदिर, पर्यटन विकास, इन्फ्रास्ट्रक्चर

यातायात के पारंपरिक साधनों जैसे सड़क मार्ग और रेल परिवहन पर निर्भरता कम करते हुए अब देश के कई प्रमुख हिस्सों में आधुनिक परिवहन प्रणाली के तहत केबल कार नेटवर्क बिछाए जा रहे हैं। इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के जरिए देश के आठ बड़े शहरों और तीर्थ स्थलों पर आवाजाही को पूरी तरह से बदलने की तैयारी की जा रही है, जिस पर कुल मिलाकर एक लाख करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान लगाया गया है। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना और दुर्गम पहाड़ी रास्तों तथा व्यस्त शहरी इलाकों में लोगों को जाम से मुक्त और तेज सफर का विकल्प देना है।

## वाराणसी में देश का पहला शहरी रोपवे
धार्मिक नगरी वाराणसी में देश का पहला अर्बन रोपवे प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इसका काम लगभग पूरा हो गया है। इस करीब 4 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर 6 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च की गई है। कैंट रेलवे स्टेशन से सीधे काशी विश्वनाथ मंदिर तक का यह सफर इस नई प्रणाली के शुरू होने के बाद महज 16 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इस पूरे रूट पर कुल 5 स्टेशन बनाए गए हैं और इसकी दैनिक वहन क्षमता करीब 1 लाख यात्रियों की है, जो बिना किसी भीड़भाड़ या ट्रैफिक जाम में फंसे आसानी से आ-जा सकेंगे।

## सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक का सफर
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक तैयार हो रहा केबल कार नेटवर्क अब तक का सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट माना जा रहा है। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक बनने वाले इस करीब 13 किलोमीटर लंबे रूट पर 4 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की संभावना है। इसके पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद श्रद्धालु महज 36 मिनट के भीतर सोनप्रयाग से केदारनाथ पहुंच जाएंगे, जबकि वर्तमान समय में इसी दूरी को पैदल या अन्य साधनों से तय करने में करीब 8 से 9 घंटे का लंबा वक्त लग जाता है। इस मार्ग पर भी कुल 5 आधुनिक स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

## गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब की आसान यात्रा
उत्तराखंड के ही एक अन्य धार्मिक मार्ग पर गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक जाने के लिए एक नए रोपवे प्रोजेक्ट पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। यह प्रोजेक्ट लगभग 12.4 किलोमीटर लंबा होगा और इस पर 3 हजार करोड़ रुपये का खर्च आने की उम्मीद है। इस व्यवस्था की खूबी यह होगी कि यह प्रति घंटे 1,100 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगा जिससे रोजाना लगभग 11 हजार लोग आसानी से आवाजाही कर सकेंगे। फिलहाल गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक का सफर करीब 21 घंटे का जोखिम भरा रास्ता तय करके पूरा करना होता है, लेकिन इस केबल कार प्रणाली के शुरू होने के बाद यह पूरी दूरी महज आधे घंटे में सिमट जाएगी।

## उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर तक पहुंच
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही को बेहद सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने रेलवे स्टेशन से सीधे मंदिर परिसर तक केबल कार सेवा शुरू करने की मुकम्मल तैयारी कर ली है। करीब 1.7 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट को पूरा करने पर 200 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इस रोपवे के माध्यम से हर घंटे एक हजार से अधिक लोग सफर का आनंद ले सकेंगे और उन्हें रेलवे स्टेशन से मंदिर तक पहुंचने में केवल 7 मिनट का समय लगेगा, जबकि मौजूदा समय में सड़क मार्ग से यह दूरी तय करने में एक घंटे से अधिक का समय बर्बाद होता है।

## हिमाचल प्रदेश के बिजली महादेव का बदला रूट
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित प्रसिद्ध बिजली महादेव तक आवागमन को आसान बनाने के उद्देश्य से सरकार ने पहले ही रोपवे प्रोजेक्ट की घोषणा कर दी थी। इस परियोजना के तहत पहले रूट पिरड़ी से बिजली महादेव मंदिर तक तय किया गया था, जिसे अब बदलकर पिरड़ी से काइसधार कर दिया गया है। करीब 4 किलोमीटर लंबे इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को महाराजा रोपवे नाम दिया गया है। इस रूट में परिवर्तन किए जाने के कारण परियोजना की कुल लागत भी 250 करोड़ रुपये से संशोधित करके 300 करोड़ रुपये कर दी गई है।

## हरियाणा की ढोसी हिल्स और प्रयागराज का संगम
हरियाणा की ऐतिहासिक ढोसी पहाड़ी पर बन रहा केबल कार प्रोजेक्ट आकार में भले हीछोटा है, लेकिन इसका सामरिक और पर्यटन महत्व बहुत अधिक है। मात्र 870 मीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर करीब 57 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की संभावना है। इस पहाड़ी की चढ़ाई पूरी करने में अभी आमतौर पर डेढ़ घंटे तक का वक्त लग जाता है, लेकिन परियोजना पूरी होने के बाद यह सफर मात्र 5 से 10 मिनट में पूरा हो जाएगा जिससे ढोसी हिल्स के पर्यटन को नया पंख मिलेगा। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पवित्र संगम स्थल पर भी रोपवे निर्माण की पूरी तैयारी कर ली गई है जिसके लिए राज्य सरकार ने सर्वेक्षण का काम भी पूरा कर लिया है। इस 2.5 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट पर 210 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने की उम्मीद है। इसके तहत परेड ग्राउंड को त्रिवेणी पुष्प से जोड़ा जाएगा और कुल 14 ट्रॉसियों की मदद से एक बार में 112 यात्रियों को गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के ऊपर से सैर कराई जाएगी।

## श्रीनगर का शंकराचार्य मंदिर
श्रीनगर में स्थित ऐतिहासिक और प्रसिद्ध शंकराचार्य मंदिर तक केबल कार सेवा शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा। करीब 1 किलोमीटर लंबे इस बुनियादी ढांचे के विकास पर लगभग 147 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना जताई गई है। वर्तमान में इस पहाड़ी रास्ते को पार करने में आधे घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है, किंतु यह सुविधा मिलने के बाद यात्री महज 5 मिनट में अपनी मंजिल तक पहुंच सकेंगे। डल झील के पास से शुरू होने वाले इस कार्य को आगामी 2 साल के भीतर पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

## इसका आप पर असर
देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे इन महत्वाकांक्षी रोपवे प्रोजेक्ट्स का सीधा लाभ आम नागरिकों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मिलेगा जिससे उनका यात्रा समय और शारीरिक थकान दोनों में भारी कमी आएगी।

- **भारत में:** देश भर के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर आवाजाही सुगम होने से सड़क हादसों में कमी आएगी और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन मौसम की बाधाओं से कम प्रभावित होगा।
- **वाराणसी में:** कैंट रेलवे स्टेशन से काशी विश्वनाथ मंदिर तक मात्र 16 मिनट में सफर पूरा होने से स्थानीय यात्रियों और पर्यटकों को भारी ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ से स्थाई राहत मिलेगी।
- **उत्तराखंड में:** सोनप्रयाग से केदारनाथ और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब का सफर कुछ ही मिनटों में सिमट जाने से श्रद्धालुओं को घंटों के खतरनाक और थकाऊ पैदल रास्तों से मुक्ति मिलेगी।
- **उज्जैन में:** रेलवे स्टेशन से महाकालेश्वर मंदिर तक का सफर केवल 7 मिनट में तय होने से पर्यटकों और दर्शनार्थियों का बहुमूल्य समय बचेगा।
- **श्रीनगर में:** डल झील के किनारे से शंकराचार्य मंदिर तक केबल कार शुरू होने से पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी और क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर लगातार बढ़ रही भारी भीड़, पारंपरिक सड़क मार्गों पर लगने वाला भीषण जाम और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सफर के दौरान पेश आने वाले भारी जोखिमों के मद्देनजर सरकार ने आधुनिक केबल कार नेटवर्क विकसित करने का यह निर्णय लिया है।

- **तीव्र यातायात की आवश्यकता:** पारंपरिक सड़क मार्ग और संकरे पहाड़ी रास्ते भारी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं का भार उठाने में असमर्थ साबित हो रहे थे, जिसके कारण परिवहन के वैकल्पिक और तेज माध्यमों की सख्त जरूरत महसूस की गई।
- **यात्रा के समय में भारी कमी:** केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और ढोसी हिल्स जैसे स्थलों पर घंटों या दिनों लगने वाले सफर को मिनटों में बदलने के लिए एरियल ट्रांसपोर्ट ही एकमात्र प्रभावी तकनीकी समाधान था।
- **पर्यटन को बढ़ावा देना:** देश के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थलों पर पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तथा स्थानीय आर्थिकी को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
- **सुरक्षा और सुगमता:** पहाड़ी रास्तों पर यात्रा के दौरान होने वाले जोखिमों को न्यूनतम करने तथा बुजुर्ग व दिव्यांग यात्रियों के लिए दर्शन सुलभ बनाने के उद्देश्य से इन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. वाराणसी रोपवे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई कितनी है और इस पर कितना खर्च आया है?
वाराणसी रोपवे प्रोजेक्ट की लंबाई करीब 4 किलोमीटर है और इस पर 6 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए हैं।

### 2. सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक रोपवे बनने के बाद यात्रा में कितना समय लगेगा?
सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक का सफर रोपवे तैयार होने के बाद महज 36 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।

### 3. उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर रोपवे प्रोजेक्ट की लागत और लंबाई कितनी है?
महाकालेश्वर मंदिर प्रोजेक्ट की लंबाई करीब 1.7 किलोमीटर है और इसकी अनुमानित लागत 200 करोड़ रुपये है।

### 4. हिमाचल प्रदेश में बिजली महादेव प्रोजेक्ट का बदला हुआ रूट क्या है?
बिजली महादेव प्रोजेक्ट का रूट पहले पिरड़ी से मंदिर तक था, जिसे बदलकर अब पिरड़ी से काइसधार कर दिया गया है।

### 5. प्रयागराज संगम रोपवे प्रोजेक्ट के तहत किन स्थानों को आपस में जोड़ा जाएगा?
इस प्रोजेक्ट के तहत परेड ग्राउंड को त्रिवेणी पुष्प से जोड़ा जाएगा और यह गंगा, यमुना व सरस्वती नदियों के ऊपर से गुजरेगा।

### 6. श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर रोपवे को पूरा होने में कितना समय लगने की संभावना है?
श्रीनगर के शंकराचार्य मंदिर प्रोजेक्ट को डल झील के किनारे शुरू किया गया है और इसे 2 साल में पूरा किए जाने की संभावना है।

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