एयरबस की शुरुआती रिपोर्ट में खुलासा, एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली उड़ान में हाइड्रोलिक खराबी से डिस्कनेक्ट हुआ था ऑटोपायलट 4 अगस्त को एयर इंडिया की उड़ान AI2379 में 300 फीट के अचानक फ्री-फॉल के दौरान लगभग 4 सेकंड तक फ्लाइट कंट्रोल सतहों का नियंत्रण बाधित रहा था, जिसके बाद ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया। एयर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आ रही उड़ान AI2379 में 4 अगस्त को हुई गंभीर टर्बुलेंस घटना की जांच में विमान निर्माता कंपनी एयरबस की शुरुआती तकनीकी समीक्षा सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 300 फीट की ऊंचाई अचानक कम होने के दौरान विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम में एक के बाद एक कई तकनीकी कमियां दर्ज की गई थीं। इसके चलते कुछ सेकंड के लिए फ्लाइट कंट्रोल सर्फेस का नियंत्रण प्रभावित हुआ और विमान का ऑटोपायलट सिस्टम डिस्कनेक्ट हो गया था। इस घटनाक्रम में विमान की पिच में अचानक उछाल दर्ज किया गया था, जिसके बाद कॉकपिट में मौजूद फर्स्ट ऑफिसर को स्थिति संभालने के लिए तत्काल कदम उठाने पड़े थे। हाइड्रोलिक खराबी और 4 सेकंड का कंट्रोल डिस्टर्बेंस एयरबस कस्टमर सर्विस द्वारा 10 अगस्त को जारी तकनीकी डॉजियर के अनुसार, यह मामला एयरबस Airbus A320 विमान MSN 08470 से जुड़ा है। कंपनी ने विमान के डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (DFDR) के आंकड़ों को डिकोड करने के बाद इस तकनीकी स्थिति की विस्तृत समयरेखा तैयार की है। डॉजियर में इस वाकये को 'सडन लॉस ऑफ ए/सी अल्टीट्यूड ऑफ 300 फीट, देन रिकवर्ड' शीर्षक के तहत दर्ज किया गया है। आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि घटना की शुरुआत लगभग 04:02:44 बजे हुई जब ग्रीन हाइड्रोलिक (G HYD) सिस्टम में गड़बड़ी आई। ग्रीन हाइड्रोलिक सिस्टम फेल होने के ठीक एक सेकंड बाद, यानी 04:02:45 बजे, विमान का ब्लू और येलो हाइड्रोलिक सिस्टम भी प्रभावित हो गया। तीनों हाइड्रोलिक प्रणालियों में एक साथ आई इस रुकावट के कारण विमान के दोनों तरफ मौजूद एलिवेटर और एलिरॉन कंट्रोल सर्फेस का नियंत्रण लगभग 4 सेकंड के लिए बाधित हो गया। इस दौरान राइट एलिवेटर लगभग +0.6 डिग्री पर और लेफ्ट एलिवेटर लगभग -1.0 डिग्री पर चला गया था। इसके साथ ही एलिरॉन डैम्पिंग मोड में चले गए, जिससे विमान की डिफ्लेक्शन के कारण पिच अचानक बढ़ गई। ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट और फर्स्ट ऑफिसर का इनपुट विमान में आई इस तकनीकी अस्थिरता के बीच ठीक 04:02:46 बजे विमान का ऑटोपायलट 2 (AP2) अपने आप डिस्कनेक्ट हो गया। ऑटोपायलट बंद होते ही कॉकपिट में मौजूद फर्स्ट ऑफिसर ने तुरंत स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए फुल नोज डाउन इनपुट दिया। इसके कुछ सेकंड बाद हाइड्रोलिक प्रणालियों में रिकवरी दर्ज की जाने लगी। लगभग 04:02:51 बजे सबसे पहले ब्लू हाइड्रोलिक सिस्टम वापस सामान्य हुआ, और उसके कुछ ही सेकंड के भीतर येलो और ग्रीन हाइड्रोलिक सिस्टम ने भी काम करना शुरू कर दिया। इसके साथ ही विमान की सभी फ्लाइट कंट्रोल सर्फेस वापस सक्रिय हो गईं और विमान की स्थिति को संभाल लिया गया। एयरबस द्वारा विस्तृत तकनीकी जांच के निर्देश शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर एयरबस ने एयर इंडिया को विमान के तीनों प्रमुख हाइड्रोलिक प्रणालियों (ग्रीन, ब्लू और येलो) के गहन ऑपरेशनल टेस्ट कराने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त, विमान में लगे सभी संबंधित प्रेशर स्विच, प्रेशर ट्रांसड्यूसर्स और लीक मेजरमेंट स्विच की तकनीकी जांच अनिवार्य की गई है। विमान निर्माता कंपनी ने एयर इंडिया से पिछले एक महीने के दौरान इस विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम पर की गई सभी मेंटेनेंस गतिविधियों का रिकॉर्ड भी मांगा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कोई तकनीकी कमी पहले से बनी हुई थी। स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी और ऑटोमैटिक फ्लाइट सिस्टम की समीक्षा सिस्टम diagnostics के अलावा एयरबस ने ऑटोमैटिक फ्लाइट सिस्टम (AFS) से जुड़े परीक्षण और ग्राउंड स्कैनिंग की सिफारिश की है। कंपनी ने फ्लाइट गाइडेंस और फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा के साथ-साथ फ्लाइट ऑगमेंटेशन कंप्यूटर (FAC) की जानकारी भी तलब की है। चूंकि 300 फीट की ऊंचाई अचानक गिरने के दौरान लोड एक्सीडेंस दर्ज किए गए हैं, इसलिए एयरबस ने स्पष्ट किया है कि केवल इलेक्ट्रॉनिक या हाइड्रोलिक जांच ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विमान के ढांचे की स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी का भी व्यापक मूल्यांकन जरूरी है। इसके साथ ही दोनों पायलटों से घटना के दौरान की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। जांच के अन्य पहलू और अंतिम निष्कर्ष इस पूरी घटना से जुड़ी जांच में एक अन्य पहलू पायलट के नशे में होने का भी सामने आया है, जिसमें जांच के दौरान पायलट के गांजा सेवन की बात उजागर हुई है। हालांकि एयरबस ने साफ कर दिया है कि उसकी ओर से प्रस्तुत तकनीकी आकलन अभी शुरुआती स्तर पर है और घटना की जटिलता को देखते हुए सिस्टम और स्ट्रक्चरल दोनों स्तरों पर गहन विश्लेषण जारी है। आगे मिलने वाले डेटा के आधार पर अतिरिक्त इंस्पेक्शन की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए इस रिपोर्ट को अभी अंतिम कारण नहीं माना जा सकता है। इसका आप पर असर • भारत में: हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एयरलाइन सुरक्षा प्रोटोकॉल और उड़ानों के रखरखाव मानकों की निगरानी कड़ी होने की उम्मीद है। • दिल्ली-फुकेट मार्ग पर: इस व्यस्त अंतरराष्ट्रीय मार्ग का उपयोग करने वाले यात्रियों को उड़ानों की सुरक्षा और तकनीकी जांच प्रक्रियाओं में सुधार देखने को मिल सकता है। सवाल-जवाब 1. एयर इंडिया की किस फ्लाइट में टर्बुलेंस की घटना हुई थी? यह घटना 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 (Airbus A320) में हुई थी। 2. टर्बुलेंस के दौरान विमान कितनी ऊंचाई नीचे गिरा था? घटना के दौरान विमान आसमान में अचानक 300 फीट नीचे गिर गया था। 3. एयरबस की शुरुआती जांच में हाइड्रोलिक सिस्टम को लेकर क्या सामने आया? जांच के अनुसार ग्रीन, ब्लू और येलो तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम प्रभावित हुए थे, जिससे लगभग 4 सेकंड तक एलिवेटर और एलिरॉन कंट्रोल सर्फेस का नियंत्रण बाधित रहा। 4. ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट होने के बाद कॉकपिट में क्या कदम उठाया गया? ऑटोपायलट 2 डिस्कनेक्ट होने पर फर्स्ट ऑफिसर ने तुरंत स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए फुल नोज डाउन इनपुट दिया। 5. एयरबस ने एयर इंडिया को क्या निर्देश दिए हैं? एयरबस ने तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम के ऑपरेशनल टेस्ट, प्रेशर स्विच व ट्रांसड्यूसर की जांच, 1 महीने के मेंटेनेंस रिकॉर्ड और स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी के मूल्यांकन के निर्देश दिए हैं। https://trendkia.com/national/airbus-ki-shuruati-riporta-men-khulasa-air-india-ki-phuket-delhi-urana-men-haidrolika-kharabi-se-diskanekta-hua-tha-topayalata-16474 TrendKia — Har trend, sabse pehle.