# अजीब मोड़ों और गलत लेन डिजाइन से घिरे देश के 5 चर्चित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स

> दिल्ली के बारापुला से लेकर मध्य प्रदेश के 90 डिग्री मोड़ों और मुंबई की निर्माण खामियों तक, बुनियादी ढांचे के पांच ऐसे प्रोजेक्ट्स पर नजर जहां खराब इंजीनियरिंग ने जनता और प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/ajiba-moron-aura-galata-lena-dijaina-se-ghire-desha-ke-5-charchita-infrastructure-projects-44517 · **Language:** Hindi
**Tags:** इंजीनियरिंग, फ्लाईओवर, बुनियादी ढांचा, सड़क सुरक्षा, बारापुला, भोपाल, इंदौर, मुंबई

देश भर में शहरों और कस्बों के भीतर आवागमन को सुगम बनाने के लिए सड़कों, फ्लाईओवरों और पुलों का जाल बिछाया जा रहा है। बुनियादी ढांचे के विकास का मुख्य उद्देश्य सफर के समय को घटाना और यात्रियों को सहूलियत देना होता है। जब निर्माण की योजना सही तरीके से जमीन पर नहीं उतरती, तो वही बुनियादी ढांचा सुविधा देने के बजाय बड़ी मुसीबत बन जाता है। दोषपूर्ण लेआउट, लेन की अचानक घटती संख्या और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण कई बड़े प्रोजेक्ट्स विवादों में आ चुके हैं। बिहार में ढहते पुलों की चर्चाओं के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे कई निर्माण सामने आए हैं, जहां इंजीनियरिंग की भारी चूकों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

## बारापुला फेज 3: छह लेन का ट्रैफिक अचानक तीन लेन में समाया
राजधानी दिल्ली में यातायात के दबाव को कम करने और लंबी दूरी के सफर को आसान बनाने के मकसद से बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर के तीसरे चरण का निर्माण किया गया था। इस कॉरिडोर से वाहन चालकों को जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई गई थी। मार्ग के चालू होने के बाद वाहन चालकों को एक अजीबोगरीब स्थिति का सामना करना पड़ा। इस मार्ग पर दो अलग-अलग तीन लेन वाले हिस्से आगे बढ़कर अचानक एक ही तीन लेन की सड़क में मिल जाते हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि छह लेन से आ रहा भारी ट्रैफिक अचानक तीन लेन में सिमट जाता है।

सनडायल पार्क के समीप यह मिलन बिंदु लगभग 90 डिग्री के कोण पर तैयार किया गया है। ट्रैफिक पुलिस द्वारा कराए गए ड्रोन सर्वे में भी इस हिस्से को डिजाइन से जुड़ी एक बड़ी तकनीकी खामी बताया गया। अचानक लेन कम होने और समकोण पर मुड़ने की वजह से गाड़ियों की रफ्तार थम जाती है, जिससे इस जगह पर अक्सर लंबा जाम लग जाता है और हादसों की आशंका बनी रहती है।

## भोपाल का ऐशबाग ओवरब्रिज: 18 करोड़ का बजट और 90 डिग्री का खतरनाक मोड़
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ऐशबाग इलाके के पास रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण पर करीब 18 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस ओवरब्रिज का सबसे विवादित पहलू इसका एकदम सीधा 90 डिग्री का मोड़ है। निर्माण स्थल पर भूमि और स्थान की कमी का हवाला देकर इस तरह के तीखे मोड़ वाले डिजाइन को मंजूरी दी गई थी। जब इस ओवरब्रिज की तस्वीरें सामने आईं, तो इस अजीबोगरीब बनावट को लेकर भारी बहस छिड़ गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया और जिम्मेदार आठ इंजीनियरों को निलंबित कर दिया। इस मोड़ की बनावट ऐसी है कि यहां से गुजरते वक्त चालकों को अपने वाहनों की रफ्तार बहुत धीमी करनी पड़ती है। हल्की सी लापरवाही या तेज गति इस तीखे मोड़ पर गाड़ियों के नियंत्रण खोने का बड़ा कारण बन सकती है।

## इंदौर का जेड-शेप्ड ब्रिज: एक ही पुल पर दो समकोण मोड़
मध्य प्रदेश के इंदौर में भी पुल निर्माण का एक अनोखा और पेचीदा मामला सामने आया। यहां एक ऐसा ब्रिज तैयार किया जा रहा है जिसे जेड आकार का रूप दिया गया है। सामान्य पुलों की सीधी या हल्की ढलान वाली बनावट के उलट इस पुल में एक नहीं, बल्कि दो तीखे 90 डिग्री के मोड़ शामिल किए गए हैं। इस अजीबोगरीब संरचना के पीछे भी जमीन की अनुपलब्धता और स्थान की तंगी को मुख्य वजह बताया गया।

चलती गाड़ियों के लिए किसी पुल के ऊपर अचानक दो बार 90 डिग्री पर मुड़ना भारी जोखिम भरा साबित हो सकता है। यदि सड़क पर वाहनों का दबाव अधिक हो या चालक रात के समय सामान्य गति से चल रहे हों, तो ऐसे अप्रत्याशित मोड़ दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं। तकनीकी जानकारों का मानना है कि ऐसे डिजाइन शहरी यातायात की सुरक्षा के बिल्कुल अनुकूल नहीं होते।

## मीरा भयंदर का नया फ्लाईओवर: चार लेन से अचानक दो लेन की रुकावट
महाराष्ट्र में मुंबई के पास मीरा भयंदर इलाके में बने नए फ्लाईओवर की लेन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस फ्लाईओवर पर चलने वाले चार लेन के रास्ते को आगे चलकर अचानक घटाकर केवल दो लेन का कर दिया गया है। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी एमएमआरडीए ने इस व्यवस्था को भविष्य की ट्रैफिक योजना का हिस्सा करार दिया है।

सड़क विशेषज्ञों का कहना है कि रास्ते की चौड़ाई इस तरह अचानक आधी हो जाने से वाहन चालकों के सामने भारी असमंजस पैदा होता है। चार लेन से आ रहे वाहनों को जब अचानक केवल दो लेन में अपनी जगह बनानी पड़ती है, तो गाड़ियां एक-दूसरे की लेन में घुसने की कोशिश करती हैं। इससे न केवल गाड़ियों की गति धीमी पड़ जाती है और जाम लगता है, बल्कि आपस में टकराने का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है।

## मुंबई एयरपोर्ट के पास मेट्रो वायडक्ट: विमानन सुरक्षा से ज्यादा ऊंचाई का पेच
पांचवां गंभीर मामला मुंबई हवाई अड्डे के समीप से गुजरने वाले मेट्रो वायडक्ट से जुड़ा हुआ है। किसी भी एयरपोर्ट के आसपास ऊंचे निर्माण कार्यों के लिए नागरिक उड्डयन सुरक्षा के बहुत सख्त नियम तय होते हैं। मुंबई एयरपोर्ट के पास तैयार किए गए मेट्रो लाइन के एक वायडक्ट की ऊंचाई तय विमानन सुरक्षा मानकों से अधिक पाई गई। इस चूक के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा कि निर्माण शुरू होने से पहले ऊंचाई और नो-फ्लाई या फनल जोन के नियमों की सही स्तर पर जांच क्यों नहीं की गई।

यदि संबंधित विमानन प्राधिकरण से ऊंचाई में छूट की अनुमति नहीं मिलती है, तो करीब एक किलोमीटर लंबे वायडक्ट के हिस्से को तोड़कर नए सिरे से बनाना पड़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो इस सार्वजनिक परियोजना में जनता के भारी धन की बर्बादी होगी और परियोजना पूरा होने की समयसीमा भी काफी आगे खिसक जाएगी।

## इसका आप पर असर
दोषपूर्ण इंजीनियरिंग और गलत डिजाइन वाले पुलों के कारण आम वाहन चालकों के सफर का समय बढ़ता है और सड़क हादसों का जोखिम कई गुना हो जाता है।

- **सड़क सुरक्षा:** अचानक तीखे मोड़ और लेन घटने से गाड़ियों के टकराने और संतुलन बिगड़ने की आशंका बढ़ जाती है। वाहन चालकों को ऐसे पुलों और फ्लाईओवरों से गुजरते समय अपनी गति बेहद धीमी रखनी होगी।
- **यात्रा का समय:** छह या चार लेन से आ रहे ट्रैफिक के अचानक संकरे रास्ते में मिलने से गंभीर जाम की स्थिति पैदा होती है। दैनिक यात्रियों को दफ्तर और जरूरी कामों के लिए निकलते समय अतिरिक्त समय लेकर चलना पड़ेगा।
- **जनता के पैसे का नुकसान:** गलत निर्माण के बाद ढांचों को तोड़ने या सुधारने में सार्वजनिक धन और समय की भारी बर्बादी होती है। मुंबई मेट्रो वायडक्ट जैसे मामलों में दोबारा निर्माण होने पर परियोजनाएं महीनों या वर्षों तक लटक जाती हैं।
- **शहरी आवागमन:** जगह की कमी के नाम पर बनाए गए टेढ़े-मेढ़े पुल भविष्य के भारी ट्रैफिक को संभालने में असमर्थ साबित होते हैं। इन रास्तों पर भारी वाहनों और बसों के मुड़ने में भी बड़ी दिक्कतें सामने आती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
शहरी इलाकों में जमीन की कमी, निर्माण पूर्व लचर सर्वे और योजना के स्तर पर की गई समझौतों की वजह से बुनियादी ढांचे में ऐसी गंभीर इंजीनियरिंग खामियां सामने आई हैं।

- **स्थान और भूमि की कमी:** घनी आबादी वाले शहरों में जमीन अधिग्रहण न हो पाने के कारण भोपाल और इंदौर में सीधी सड़कों के बजाय 90 डिग्री और जेड आकार के मोड़ों को मंजूरी दी गई। उचित जगह न होने पर योजनाकारों ने सुरक्षा की अनदेखी कर संकरे रास्तों में काम पूरा करने की कोशिश की।
- **निगरानी और योजना में ढिलाई:** मुंबई मेट्रो वायडक्ट के निर्माण में विमानन सुरक्षा नियमों की पूर्व जांच सही स्तर पर न होने से ऊंचाई का उल्लंघन हुआ। दिल्ली के बारापुला और मीरा भयंदर में लेन गणना और ट्रैफिक संगम के प्रभाव का पूर्व आकलन करने में तकनीकी टीमें विफल रहीं।
- **जवाबदेही और सख्त कार्रवाई:** भोपाल में ओवरब्रिज का विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने आठ इंजीनियरों को निलंबित किया, जिससे यह साफ हुआ कि डिजाइन पास करने में भारी लापरवाही बरती गई थी। ऐसे मामलों में अब डिजाइन की दोबारा समीक्षा और संभावित सुधारात्मक कदमों पर विचार किया जा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. दिल्ली के बारापुला फेज 3 में क्या इंजीनियरिंग खामी पाई गई है?
इस फ्लाईओवर पर दो अलग-अलग तीन लेन वाली सड़कें आगे चलकर अचानक एक ही तीन लेन में मिल जाती हैं, जिससे छह लेन का ट्रैफिक एक संकरी सड़क में सिमट जाता है।

### 2. भोपाल के ऐशबाग ओवरब्रिज के निर्माण पर कितना खर्च हुआ था?
ऐशबाग इलाके में इस 90 डिग्री मोड़ वाले रेलवे ओवरब्रिज को तैयार करने में करीब 18 करोड़ रुपये की लागत आई थी।

### 3. भोपाल ओवरब्रिज विवाद में सरकार ने क्या कदम उठाया?
सोशल मीडिया पर तीखे मोड़ की तस्वीरें सामने आने और विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने आठ जिम्मेदार इंजीनियरों को निलंबित कर दिया।

### 4. इंदौर के ब्रिज को जेड-शेप्ड क्यों कहा जा रहा है?
इस ब्रिज में एक के बाद एक दो तेज 90 डिग्री के मोड़ बनाए जा रहे हैं, जिसके कारण इसका आकार सामान्य पुलों से अलग जेड जैसा दिखता है।

### 5. मीरा भयंदर फ्लाईओवर को लेकर क्या शिकायत सामने आई है?
इस फ्लाईओवर पर चार लेन की सड़क आगे जाकर अचानक केवल दो लेन में तब्दील हो जाती है, जिससे गाड़ियों के टकराने और जाम का खतरा बढ़ जाता है।

### 6. मुंबई एयरपोर्ट के पास मेट्रो वायडक्ट को लेकर क्या समस्या हुई है?
इस मेट्रो वायडक्ट की ऊंचाई विमानन सुरक्षा मानकों से अधिक पाई गई है, और यदि छूट नहीं मिली तो करीब एक किलोमीटर लंबा हिस्सा तोड़ना पड़ सकता है।

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