# आंबेडकर और मोदी पर टिप्पणी को लेकर रामदास अठावले ने अभिजीत दिपके को दी चेतावनी, माफी की मांग

> केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने डॉ. बीआर आंबेडकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणियों को लेकर सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की चेतावनी दी है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/ambedkar-aura-modi-para-tippani-ko-lekara-ramdas-athawale-ne-abhijeet-dipke-ko-di-chetavani-maphi-ki-manga-42471 · **Language:** Hindi
**Tags:** रामदास अठावले, अभिजीत दिपके, बीआर आंबेडकर, नरेंद्र मोदी, देवेंद्र फडणवीस, आरपीआई, महाराष्ट्र राजनीति

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके के बयानों पर तीखा ऐतराज जताया है। अठावले ने साफ तौर पर कहा कि डॉ. बीआर आंबेडकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर दिपके द्वारा व्यक्त किए गए विचार पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना और अपमानजनक हैं। उन्होंने दिपके को आगाह किया कि इस तरह की अनुचित बयानबाजी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

## नेहरू वाले बयान पर अठावले की कड़ी आपत्ति
मुंबई में मीडिया कर्मियों को संबोधित करते हुए रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के प्रमुख ने अभिजीत दिपके के उस दावे की कड़ी भर्त्सना की, जिसमें उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा डॉ. आंबेडकर को पहचान दिलाने में मदद की बात कही थी। अठावले ने इस पूरे तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसा दावा राष्ट्र निर्माण में आंबेडकर के अमूल्य योगदान की उपेक्षा करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि स्वतंत्र भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने में बाबासाहेब की भूमिका देश के लोकतांत्रिक सफर और विकास की सबसे मजबूत नींव रही है।

## लोकतांत्रिक मर्यादा और आलोचना की सीमा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर की गई टिप्पणियों को लेकर भी आरपीआई नेता ने दिपके को आड़े हाथों लिया। अठावले ने कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र के भीतर जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की आलोचना करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन यह आलोचना मर्यादित होनी चाहिए। उनका आरोप है कि दिपके की भाषा ने जिम्मेदार राजनीतिक संवाद के सभी तय दायरों को लांघ दिया है।

## युवा समर्थन का सही इस्तेमाल करने की नसीहत
छात्रों और युवाओं के बीच अभिजीत दिपके को मिल रहे समर्थन पर बात करते हुए अठावले ने उन्हें सकारात्मक सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवाओं से मिलने वाले जनसमर्थन का उपयोग समाज के रचनात्मक कार्यों में होना चाहिए। सीजेपी प्रमुख को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि निरर्थक विवादों को जन्म देने वाले बयानों के बजाय उन्हें व्यापक जनहित और सामाजिक सरोकार के जरूरी मुद्दों पर अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए।

## विकास कार्यों पर गौर करने और माफी मांगने की मांग
अठावले ने स्पष्ट मांग रखी कि अभिजीत दिपके को डॉ. बीआर आंबेडकर के संदर्भ में कही गई अपनी बातों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ आपत्तिजनक वक्तव्य देने से परहेज करने को कहा। केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों का पक्ष लेते हुए उन्होंने कहा कि दिपके पूरे महाराष्ट्र में घूम रहे हैं, इसलिए उन्हें शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाने से पहले राज्य में हुए इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास की प्रगति को भी देखना चाहिए। आरपीआई प्रमुख ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि दिपके ने इस तरह के अपमानजनक बयान बंद नहीं किए, तो उनकी पार्टी उनके खिलाफ और भी कड़ा रुख अख्तियार करेगी।

## इसका आप पर असर
इस राजनीतिक विवाद का असर महाराष्ट्र और देश के सामाजिक-राजनीतिक विमर्श पर देखने को मिल सकता है।

- **महाराष्ट्र में:** राज्य में राजनीतिक दलों और युवा संगठनों के बीच बयानबाजी तेज हो सकती है। आम नागरिकों को नेताओं और कार्यकर्ताओं की सार्वजनिक गतिविधियों पर नजर रखनी होगी क्योंकि इससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है।
- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर संविधान निर्माताओं और शीर्ष राजनेताओं की ऐतिहासिक भूमिका को लेकर बहस गहरा सकती है। यह घटनाक्रम सार्वजनिक मंचों पर भाषण की स्वतंत्रता और मर्यादा से जुड़ी बहसों को नई दिशा देगा।
- **युवा समर्थकों के लिए:** छात्र और युवा वर्ग के राजनीतिक जुड़ाव को रचनात्मक दिशा में ले जाने पर चर्चा शुरू हो सकती है। इससे आंदोलनकारी नेताओं पर वास्तविक जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रहने का दबाव बढ़ेगा।
- **नागरिकों के लिए:** लोकतांत्रिक व्यवस्था में जन प्रतिनिधियों की जवाबदेही और भाषाई शिष्टाचार को लेकर सजगता बढ़ेगी। लोग यह समझ सकेंगे कि आलोचना और अपमानजनक बयानों के बीच क्या अंतर होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने डॉ. बीआर आंबेडकर और मौजूदा शीर्ष नेताओं को लेकर सार्वजनिक बयान दिए।

- **नेहरू और आंबेडकर पर बयान:** अभिजीत दिपके ने टिप्पणी की थी कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने डॉ. आंबेडकर को पहचान दिलाने में भूमिका निभाई थी। इस बयान को आंबेडकर के ऐतिहासिक योगदान को कम आंकने वाला माना गया।
- **शीर्ष नेताओं की आलोचना:** दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी सार्वजनिक टिप्पणियां की थीं। इन बयानों को सत्तारूढ़ गठबंधन और आरपीआई नेतृत्व ने गैर-जिम्मेदाराना करार दिया।
- **कड़े रुख की पृष्ठभूमि:** रामदास अठावले की पार्टी आंबेडकरवादी आंदोलन और वर्तमान सरकार दोनों से जुड़ी है, इसलिए उन्होंने तुरंत मोर्चा संभाला। इसके चलते आरपीआई ने दिपके से माफी मांगने और बयानबाजी रोकने की सीधी मांग की।

## सवाल-जवाब

### 1. रामदास अठावले ने अभिजीत दिपके को क्या चेतावनी दी है?
अठावले ने कहा कि यदि दिपके ने आपत्तिजनक बयान देना बंद नहीं किया तो रिपब्लिकन पार्टी उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाएगी।

### 2. दिपके के किस बयान पर मुख्य विवाद हुआ है?
दिपके ने दावा किया था कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने डॉ. आंबेडकर को पहचान दिलाने में मदद की थी, जिसे अठावले ने खारिज कर दिया।

### 3. अठावले ने दिपके से क्या मांग की है?
अठावले ने मांग की है कि दिपके आंबेडकर पर दिए गए बयान के लिए माफी मांगें और मोदी तथा फडणवीस के खिलाफ अनर्गल टिप्पणी न करें।

### 4. अभिजीत दिपके किस संगठन से जुड़े हैं?
अभिजीत दिपके 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संस्थापक हैं।

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