अमेठी में 45 साल की उम्र में स्कूल जा रहीं राधा और मालती, उम्र की सीमा तोड़कर सीख रहीं पढ़ना अमेठी में बेसिक शिक्षा विभाग के नव साक्षरता अभियान के तहत 45 साल की उम्र में राधा सिंह और मालती मौर्य जैसी महिलाएं स्कूल पहुंचकर पढ़ाई कर रही हैं और अपने अधिकारों को समझ रही हैं। शिक्षा हमारे बेहतर भविष्य और जीवन के लिए बेहद आवश्यक है, अगर हम शिक्षित नहीं होते हैं तो अपने अधिकारों को भी नहीं समझ पाते हैं। लेकिन यदि बच्चों के बजाय बड़ी उम्र के लोग शिक्षा लेते नजर आएं, तो यह किसी को भी हैरान कर सकता है। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले की है, जहां मालती और राधा जैसी महिलाएं घर की जिम्मेदारियां संभालने की उम्र में अपने हाथों में किताबें थामे नजर आ रही हैं। उन्हें इस बात का कोई आश्चर्य नहीं है, बल्कि उनका साफ कहना है कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है और मैडम के पढ़ाने का तरीका उन्हें बेहद अच्छा लगता है। नव साक्षरता अभियान से संवर रहा जीवन बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से हर साल नव साक्षरता अभियान चलाया जाता है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं को जोड़ना और साक्षर बनाना है, जो किसी वजह से पहले पढ़ नहीं पाई थीं। अमेठी जिले के गौरीगंज की रहने वाली राधा सिंह और मालती मौर्य जैसी महिलाओं की यह कहानी दर्शाती है कि कैसे काम की उम्र में भी हाथों में किताबें थामकर अपना भविष्य संवारा जा सकता है और आत्मनिर्भर बना जा सकता है। क्या कहती हैं राधा और मालती मालती देवी का कहना है कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है। वह घर पर काम करने के साथ-साथ बच्चों के साथ खुद भी किताब लेकर बैठती हैं और पढ़ाई करती हैं। इसके अलावा स्कूल में भी उनकी कक्षाएं चलती हैं और मैडम के पढ़ाने का तरीका उन्हें बहुत पसंद आता है। उनका मानना है कि अगर लोग पढ़े-लिखे रहेंगे तभी अपने अधिकारों को समझ पाएंगे, अन्यथा कोई भी उनका फायदा उठाकर उन्हें ठग सकता है। वहीं, राधा सिंह बताती हैं कि जिले में उन सबको शिक्षा का अधिकार मिल रहा है। पहले वे बिल्कुल पढ़ी-लिखी नहीं थीं और जो थोड़ी-बहुत पढ़ाई की थी, उसे भी भूल चुकी थीं, लेकिन अब सब कुछ फिर से याद आ रहा है। बच्चों के साथ किताबें लेकर पढ़ने बैठने पर उन्हें अपना बचपन भी याद आ जाता है। साक्षर होकर वे आज अपना भविष्य बेहतर बना रही हैं और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं। शिक्षा विभाग की पहल और अधिकारियों का पक्ष जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि नव साक्षरता अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों और परिवेश के 1570 विद्यालयों में समय-समय पर विशेष अभियान चलाया जाता है। इस अभियान में उन महिलाओं को जोड़ा जाता है जो साक्षर नहीं हैं। उन्हें साक्षर बनाने के साथ-साथ उनके कानूनी और सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाता है। इस पहल से काफी फायदा मिल रहा है और महिलाएं जागरूक होने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। इसका आप पर असर यह पहल ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है। • उत्तर प्रदेश में: इस तरह के अभियान से उन महिलाओं को सीधा लाभ मिलता है जो वयस्क होने के बावजूद शिक्षा से वंचित रह गई थीं। इससे समाज में साक्षरता का स्तर सुधरता है और महिलाएं ठगी जाने से बचती हैं। • अमेठी में: गौरीगंज और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अब अपने कानूनी और सामाजिक अधिकारों को जानने का अवसर मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर 1570 विद्यालयों में चल रहे इन अभियानों से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। ऐसा क्यों हुआ यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार और वयस्कों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। • सरकारी योजना: बेसिक शिक्षा विभाग हर साल नव साक्षरता अभियान संचालित करता है जिसके तहत ग्रामीण परिवेश के विद्यालयों को जोड़ा जाता है। • अधिकारों की जानकारी: महिलाओं को शिक्षित कर उन्हें जागरूक बनाना और ठगी तथा शोषण से बचाना इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है। • आत्मनिर्भरता: ग्रामीण महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करना इस पहल का अहम कारण है। सवाल-जवाब 1. यह अभियान किस जिले में चलाया जा रहा है? यह अभियान उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में चलाया जा रहा है। 2. राधा सिंह और मालती मौर्य की उम्र क्या है? राधा सिंह और मालती मौर्य दोनों ही 45 वर्ष की उम्र में स्कूल जाकर पढ़ाई कर रही हैं। 3. इस अभियान को कौन सा विभाग संचालित करता है? इस अभियान का संचालन बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा किया जाता है। 4. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का क्या नाम है? जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का नाम संजय तिवारी है। 5. इस अभियान के तहत कितने विद्यालयों को जोड़ा गया है? ग्रामीण क्षेत्रों और परिवेश के 1570 विद्यालयों को इस अभियान के तहत समय-समय पर जोड़ा जाता है। प्रेरणा और सबक यह कहानी दिखाती है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और दृढ़ संकल्प से किसी भी परिस्थिति को बदला जा सकता है। • उम्र कोई बाधा नहीं: 45 साल की उम्र में भी पढ़ाई शुरू करने वाली राधा और मालती साबित करती हैं कि सीखने के लिए जज्बा होना जरूरी है। • बच्चों से प्रेरणा: घर पर बच्चों के साथ बैठकर पढ़ाई करने से न सिर्फ पारिवारिक बंधन मजबूत होते हैं बल्कि सीखने का माहौल भी बनता है। • जागरूकता ही बचाव: शिक्षा हासिल करने से अधिकारों की समझ बढ़ती है और कोई आपका शोषण नहीं कर पाता है। https://trendkia.com/national/amethi-mein-45-saal-ki-umar-mein-school-ja-rahi-radha-aur-malti-48090 TrendKia — Har trend, sabse pehle.