# अमित शाह के कार्यकाल में आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर बड़े बदलाव, नक्सलवाद और ड्रग्स तस्करी के खिलाफ चली कड़ी मुहिम

> केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यकाल में देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नक्सलवाद के खात्मा और ड्रग्स तस्करी के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाए गए हैं।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/amit-shah-ke-karyakala-men-antarika-suraksha-ke-morche-para-bare-badalava-naxalism-aura-drug-taskari-ke-khilapha-chali-kari-muhima-50554 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमित शाह, नक्सलवाद, गृह मंत्रालय, ड्रग्स तस्करी, आंतरिक सुरक्षा

नई दिल्ली में 22 अक्टूबर 1964 को जन्मे अमित शाह वर्तमान में देश के केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनके जन्मदिन के अवसर पर देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े उन महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा करना प्रासंगिक हो जाता है जिन पर केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान विशेष फोकस किया है। इनमें वामपंथी उग्रवाद या नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए सुरक्षा अभियान और नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी को रोकने के लिए की गई कोशिशें सबसे आगे हैं। गृह मंत्रालय की कमान संभालने के बाद शाह ने विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल को बेहतर बनाने के साथ-साथ देश के संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं और प्रशासन की पहुंच को कई गुना बढ़ाने पर पूरा जोर दिया।

## नक्सलवाद के खात्मा की रणनीति और उसकी रूपरेखा
नक्सलवाद लंबे समय तक भारतीय गणराज्य और उसकी आंतरिक सुरक्षा के सामने एक अत्यंत गंभीर चुनौती के रूप में खड़ा रहा था। छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे कई प्रमुख राज्यों के अंदरूनी और प्रभावित इलाकों में लगातार होने वाली हिंसा के कारण स्थानीय स्तर पर विकास के तमाम काम बुरी तरह बाधित हुए और आम नागरिकों की दैनिक जीवनशैली पर इसका गहरा असर पड़ा। केंद्र सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए केवल पारंपरिक सैन्य या पुलिस अभियानों पर ही निर्भर रहने के बजाय एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया। इस रणनीति के तहत सुरक्षा बलों के ऑपरेशनों के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में पक्की सड़कों के निर्माण, मोबाइल नेटवर्क के विस्तार, बैंकिंग सेवाओं की स्थापना और तमाम बुनियादी सरकारी सेवाओं की उपलब्धता को तेजी से बढ़ाने की योजना पर काम किया गया।

गृह मंत्री अमित शाह ने 24 अगस्त 2024 को देश से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह से समाप्त करने का एक स्पष्ट लक्ष्य सार्वजनिक रूप से घोषित किया था। इस घोषणा के बाद केंद्र सरकार और विभिन्न संबंधित राज्य सरकारों ने आपसी प्रशासनिक समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करते हुए चरणबद्ध तरीके से एंटी-नक्सल अभियान संचालित किए। सुरक्षा बलों द्वारा की गई कड़े ऑपरेशनों की कार्रवाई के अतिरिक्त सरकार ने हथियार छोड़ने वाले और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए पुनर्वास की उचित नीतियों को लागू किया तथा उन इलाकों में सामाजिक-आर्थिक विकास कार्यों को प्राथमिकता दी।

## संसद में रखा गया प्रगति का पूरा ब्योरा
आगे चलकर 30 मार्च 2026 को देश की संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे इस राष्ट्रव्यापी अभियान पर सरकार का आधिकारिक पक्ष सदन के पटल पर रखा। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि देश के तमाम नक्सल प्रभावित इलाकों के भीतर कुल 17,589 किलोमीटर लंबी नई सड़कों के निर्माण कार्यों को आधिकारिक रूप से मंजूरी प्रदान की गई थी। इनमें से लगभग 12,000 किलोमीटर से अधिक की सड़कों का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका था। इसके साथ ही उन्होंने देश के दूरदराज के क्षेत्रों में आधुनिक मोबाइल नेटवर्क टावरों, नई बैंक शाखाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं के दायरे को लगातार बढ़ाने का विशेष तौर पर उल्लेख किया।

## 31 मार्च 2026 का निर्णायक मोड़
निर्धारित समयसीमा के अनुसार 31 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर भारत को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त घोषित करने की ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा की। इस घोषणा को अमित शाह के संपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यकाल की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा सफलताओं में से एक माना जा रहा है। हालांकि इस प्रकार के बड़े दावों और उपलब्धियों को किसी भी सरकारी अभियान के पूर्व निर्धारित लक्ष्यों तथा जमीन पर उनके वास्तविक आकलन के व्यापक संदर्भ में ही समझा जाना चाहिए।

इस संपूर्ण अभियान की सफलता में देश के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, विभिन्न राज्यों की पुलिस इकाइयों और स्थानीय खुफिया व सुरक्षा बलों ने अपनी अहम् भूमिका निभाई। संवेदनशील क्षेत्रों में नए सुरक्षा शिविरों की स्थापना और सटीक खुफिया सूचनाओं के आधार पर बिना चूके कार्रवाई करने को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इसके साथ ही जो भटके हुए लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते थे, उनके लिए आत्मसमर्पण की उदार नीतियों को भी समानांतर रूप से चलाया गया ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।

इस पूरी रणनीति का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बुनियादी विकास कार्यों का विस्तार था। सुदूर जंगलों और गांवों तक सड़कों के जाल और संचार माध्यमों के पहुंचने से शासन-प्रशासन की पहुंच सीधे उन लोगों तक हुई जो अब तक इससे वंचित थे। इससे स्थानीय आम नागरिकों के लिए विभिन्न सरकारी सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाना बहुत आसान हो गया।

## नशीले पदार्थों और ड्रग्स के नेटवर्क पर कड़ा प्रहार
नशे की अवैध तस्करी केवल कानून और व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित एक सामान्य विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा और घातक असर देश की युवा पीढ़ी, परिवारों और संपूर्ण समाज की सुरक्षा एवं भविष्य पर पड़ता है। केंद्र सरकार ने ड्रग्स के इस काले कारोबार पर पूरी तरह लगाम कसने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी एनसीबी और देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस समेत कई प्रमुख जांच एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल और सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करने पर बल दिया।

सरकार की ओर से जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2014 से लेकर 2025 के दौरान देश भर के विभिन्न हिस्सों से कुल मिलाकर करीब 1.11 करोड़ किलोग्राम मादक पदार्थों और ड्रग्स की भारी मात्रा को जब्त किया गया। पकड़े गए इन सभी अवैध पदार्थों की कुल अनुमानित बाजार कीमत लगभग 1.71 लाख करोड़ रुपये आंकी गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समय-समय पर इन बड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए ड्रग्स के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध लड़ने और इस अंतर्राष्ट्रीय व घरेलू तस्करी के संपूर्ण नेटवर्क को जड़ से नेस्तनाबूद करने की सख्त जरूरत पर बल दिया।

इसी कड़ी में 31 मार्च 2025 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के भीतर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और दिल्ली पुलिस द्वारा एक संयुक्त कार्रवाई को अंजाम दिया गया, जिसमें मेथामफेटामाइन, एमडीएमए और कोकीन जैसे खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स भारी मात्रा में बरामद किए गए। इन जप्तशुदा पदार्थों की कुल कीमत लगभग 27.4 करोड़ रुपये बताई गई और इस मामले में कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके ठीक बाद अप्रैल 2025 के दौरान गुजरात आतंकवाद विरोधी दस्ते यानी एटीएस और भारतीय तटरक्षक बल द्वारा एक और सफल ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के बेहद करीब से 300 किलोग्राम मादक पदार्थ को समुद्र के रास्ते से जब्त किया गया। इन तमाम हाई-प्रोफाइल मामलों से यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो जाती है कि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई केवल सड़क किनारे होने वाली छोटी-मोटी खुदरा तस्करी तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके तार बड़े सिंडिकेट से जुड़े थे।

## क्या ड्रग्स की समस्या का पूरी तरह खात्मा हो चुका है?
नशीले पदार्थों के खिलाफ छेड़े गए इस अभियान के तहत भारी मात्रा में जब्ती होना और तस्करों की बड़ी गिरफ्तारियां होना बेशक बहुत महत्वपूर्ण कदम हैं, लेकिन केवल इनके आधार पर यह निष्कर्ष निकाल लेना जल्दबाजी होगी कि यह समस्या समाज से पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। तस्करी के इस बड़े और जटिल नेटवर्क को कमजोर करने के साथ-साथ यह भी उतना ही जरूरी है कि समाज के स्तर पर नशे की कुल मांग को कम किया जाए और जो लोग पहले से ही इस गंभीर लत की चपेट में आ चुके हैं, उन्हें समय पर उचित चिकित्सा और पुनर्वास सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।

इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए फरवरी 2026 के दौरान केंद्र सरकार ने देश को वर्ष 2026 से 2029 तक यानी अगले तीन वर्षों के भीतर पूरी तरह से ड्रग्स मुक्त बनाने के लिए एक व्यापक तीन वर्षीय रोडमैप की विस्तृत जानकारी देश के सामने रखी। इस कार्ययोजना के तहत नशे के इस पूरे नेटवर्क को उसके मूल स्रोत से लेकर अंतिम वितरण बिंदु तक पूरी तरह ध्वस्त करने और सभी संबंधित सुरक्षा व जांच एजेंसियों के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

इसलिए जब भी अमित शाह के पूरे कार्यकाल के दौरान आंतरिक सुरक्षा के इन कार्यों का मूल्यांकन किया जाए, तो केवल जब्त किए गए मादक पदार्थों की कुल मात्रा, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की संख्या और नेटवर्क के खिलाफ हुई छापों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके साथ-साथ अपराध की रोकथाम और पुनर्वास के वास्तविक परिणामों को भी बारीकी से देखना होगा। सरकारी अभियानों के घोषित लक्ष्य अपनी जगह बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन उनकी वास्तविक और दीर्घकालिक सफलता इस बात से तय होगी कि आने वाले समय में देश के भीतर नशे की उपलब्धता और उसके सेवन के मामलों में कितनी स्थायी और ठोस कमी दर्ज की जाती है।

## इसका आप पर असर
आंतरिक सुरक्षा से जुड़े इन अभियानों का सीधा असर देश में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और दूरदराज के इलाकों में विकास पर पड़ा है।

- **भारत में:** नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क और संचार नेटवर्क के विस्तार से नागरिकों का जीवन सुगम हुआ है। देश भर में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई से आपराधिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है।

## ऐसा क्यों हुआ
देश में लंबे समय से चली आ रही आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों और अवैध नेटवर्क के विस्तार को रोकने के लिए सरकार ने यह रणनीति अपनाई।

- **नक्सलवाद की चुनौती:** छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में हिंसा और विकास कार्यों में बाधा के कारण सरकार ने सुरक्षा बलों और बुनियादी ढांचे के विकास का संयुक्त दृष्टिकोण अपनाया।
- **मादक पदार्थों का खतरा:** युवाओं और समाज पर ड्रग्स के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर बड़े पैमाने पर जब्ती अभियान चलाए गए।

## सवाल-जवाब

### 1. नक्सलवाद के खात्मा के लिए केंद्र सरकार ने क्या लक्ष्य तय किया था?
केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया था।

### 2. संसद में नक्सल प्रभावित इलाकों में कितनी सड़कों के निर्माण की जानकारी दी गई?
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार नक्सल प्रभावित इलाकों में 17,589 किलोमीटर सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी गई थी।

### 3. वर्ष 2014 से 2025 के बीच कुल कितनी ड्रग्स जब्त की गई?
वर्ष 2014 से 2025 के दौरान देश में करीब 1.11 करोड़ किलोग्राम ड्रग्स जब्त की गई।

### 4. मार्च 2025 में दिल्ली-एनसीआर में किन मादक पदार्थों की जब्ती हुई?
मार्च 2025 में दिल्ली-एनसीआर में मेथामफेटामाइन, एमडीएमए और कोकीन जब्त की गई।

### 5. भारत को ड्रग्स मुक्त बनाने के लिए कितने वर्ष का रोडमैप जारी किया गया?
भारत को ड्रग्स मुक्त बनाने के लिए 2026 से 2029 तक का तीन वर्षीय रोडमैप जारी किया गया।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._