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  "type": "article",
  "title": "अमृता फडणवीस की मौजूदगी वाले चंद्रपुर शिवलिंग आयोजन से पहले पुरातत्व विभाग का नोटिस, अवैध निर्माण पर मचा बवाल",
  "summary": "चंद्रपुर के लालपेठ में अमृता फडणवीस की मौजूदगी में होने वाले शिवलिंग जीर्णोद्धार समारोह से ठीक पहले पुरातत्व विभाग ने प्रतिबंधित क्षेत्र में हुए निर्माण को अवैध बताते हुए उसे रोकने का आदेश दिया है.",
  "content": "चंद्रपुर के लालपेठ इलाके में मंगलवार, 8 सितंबर को होने वाला शिवलिंग जीर्णोद्धार समारोह उद्घाटन से ठीक पहले पुरातत्व विभाग की आपत्ति की वजह से सुर्खियों में आ गया है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस की मौजूदगी में होने वाले इस आयोजन से पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने संरक्षित स्मारक के पास हुए निर्माण को अवैध करार दिया है.\n\nनिरीक्षण में क्या मिला\nनियमित जांच के दौरान पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को शिवलिंग के इर्द-गिर्द ग्रेनाइट की फर्श बिछी मिली, साथ ही परिसर में सीमेंट ईंटों से बनी दीवार और पक्की छत वाला शेड भी नजर आया. विभाग का कहना है कि यह सारा काम राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के प्रतिबंधित दायरे में हुआ है और इसी वजह से इस पर गंभीर आपत्ति जताई गई है. इसी आधार पर “लालपेठ विशाल शिवलिंग मंदिर सेवा समिति” के अध्यक्ष को पत्र भेजकर काम फौरन रोकने और कथित अतिक्रमण हटाने को कहा गया है.\n\n100 मीटर की सीमा इतनी सख्त क्यों\nलालपेठ का यह विशाल पत्थर, जिसे आधिकारिक रूप से ‘एकाश्म, चंद्रपुर’ कहा जाता है, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के तहत राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक है. पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के मुताबिक किसी भी संरक्षित स्मारक की सीमा से 100 मीटर तक का इलाका पूरी तरह निर्माण-मुक्त रखा जाना चाहिए, यहां कोई भी नया ढांचा खड़ा करने की इजाजत नहीं होती. इसके आगे 100 से 300 मीटर तक का हिस्सा नियंत्रित क्षेत्र माना जाता है, जहां निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकरण से पहले मंजूरी लेना जरूरी होता है. लालपेठ में बना शेड, दीवार और ग्रेनाइट की फर्श ठीक इसी पहले, पूरी तरह निर्माण-मुक्त दायरे में आते नजर आ रहे हैं, इसीलिए यह मामला जांच के घेरे में आ गया.\n\nविधायक की स्वनिधि और अनुमति पर सवाल\nसामने आई जानकारी के मुताबिक इस निर्माण के लिए स्थानीय विधायक किशोर जोरगेवार ने अपनी स्वनिधि से पैसा दिया था. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रतिबंधित क्षेत्र में यह काम शुरू करने से पहले किसी ने पुरातत्व विभाग से मंजूरी ली थी या नहीं. यही अनुत्तरित सवाल एक धार्मिक जीर्णोद्धार कार्यक्रम को ऐन मौके पर विवाद में बदल गया है, और यही तय करेगा कि यह निर्माण आगे बचेगा भी या नहीं.\n\nजुर्माना, सजा और पुलिस शिकायत की तैयारी\nपुरातत्व विभाग की नोटिस में कहा गया है कि नियमित निरीक्षण के दौरान ‘लालपेठ एकाश्म, चंद्रपुर’ के प्रतिबंधित इलाके में बिना अनुमति निर्माण होने की बात सामने आई. नोटिस में पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम की धारा 20(ए) का हवाला देकर इसे स्पष्ट उल्लंघन बताया गया है. नियम तोड़ने पर दो साल तक की कैद, एक लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है, और समिति को निर्माण हटाकर जगह को पहले जैसी हालत में लाने का निर्देश भी दिया गया है. इसके अलावा लोक आंदोलन न्यास के जिलाध्यक्ष नितिन बन्सोड ने भी इसी मामले में पुरातत्व विभाग से शिकायत की है, और विभाग मंदिर समिति अध्यक्ष के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में बताया जा रहा है. शिकायत दर्ज होते ही मामला महज प्रशासनिक चेतावनी से आगे बढ़कर कानूनी कार्रवाई का रूप ले सकता है, जो महीनों तक खिंच सकती है.\n\nविवाद के बीच जारी हैं समारोह की तैयारियां\nइस पूरे विवाद का असर फिलहाल जमीनी तैयारियों पर पड़ता नहीं दिख रहा. मंगलवार के उद्घाटन से पहले शहर भर में अमृता फडणवीस की मौजूदगी वाले बैनर लग चुके हैं और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां जोरों पर हैं. यह देखना बाकी है कि पुरातत्व विभाग की आपत्ति के बावजूद समारोह तय समय पर होता है या प्रशासन निर्माण की वैधता साफ होने तक कोई कदम उठाता है, और चंद्रपुर के लोग भी इसी उधेड़बुन में हैं.\n\nइसका आप पर असर\nसबसे बड़ा असर यह है कि बिना पुरातत्व विभाग की मंजूरी के संरक्षित स्मारक के पास किया गया निर्माण अब तोड़ा जा सकता है और निर्माण करवाने वालों पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.\n\n• भारत में: देश में किसी भी राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारक के पास निर्माण, जीर्णोद्धार या फर्श तक बिछवाने से पहले यह जांचना जरूरी है कि जगह 100 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में आती है या 100 से 300 मीटर के नियंत्रित क्षेत्र में. 1958 के कानून के तहत बिना अनुमति के काम करने पर निर्माण तोड़े जाने और मुकदमा चलने का खतरा रहता है, जैसा अभी चंद्रपुर में हो रहा है.\n• चंद्रपुर, महाराष्ट्र में: मंगलवार के समारोह में शामिल होने वाले लोगों को हाल ही में बना ग्रेनाइट फर्श, दीवार और शेड आदेश लागू होने पर हटता हुआ दिख सकता है. मंदिर समिति को पुलिस शिकायत और कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है.\n• मंदिर समिति के लिए: उल्लंघन साबित होने पर अध्यक्ष को धारा 20(ए) के तहत दो साल तक की कैद या एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है. समिति को अपने खर्च पर परिसर को पहले जैसी हालत में लाना होगा.\n• जनप्रतिनिधियों के लिए: विधायक किशोर जोरगेवार की स्वनिधि से निर्माण के लिए पैसा दिए जाने पर भी सवाल उठ सकते हैं कि बिना जरूरी मंजूरी वाले काम पर सरकारी फंड खर्च करना कितना उचित था.\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह विवाद इसलिए शुरू हुआ क्योंकि संरक्षित स्मारक के प्रतिबंधित दायरे में कानून की मांग वाली मंजूरी लिए बिना निर्माण हो गया, जिसका पता एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम से ठीक पहले हुई नियमित जांच में चला.\n\n• सीधा कारण: लालपेठ एकाश्म के 100 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में ग्रेनाइट फर्श, सीमेंट ईंटों की दीवार और पक्का शेड बना दिया गया, जबकि पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 यहां किसी भी नए निर्माण की पूरी तरह मनाही करता है.\n• फंडिंग और समय: यह काम विधायक किशोर जोरगेवार की स्वनिधि से हुआ और मंगलवार के जीर्णोद्धार समारोह से पहले पूरा किया गया, लेकिन इसके लिए पहले अनुमति ली गई थी या नहीं, यह अब भी स्पष्ट नहीं है.\n• क्या पहले भी ऐसा हुआ: इस स्थान पर पहले भी ऐसा उल्लंघन हुआ था या नहीं, इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है.\n• आगे क्या होगा: पुरातत्व विभाग ने निर्माण रोकने और अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है, और पुलिस शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की खबर है, जिससे मामला प्रशासनिक नोटिस से आगे बढ़कर कानूनी कार्रवाई तक पहुंच सकता है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. 8 सितंबर को चंद्रपुर में कौन सा कार्यक्रम होने वाला था?\nलालपेठ स्थित ऐतिहासिक संरक्षित शिवलिंग के जीर्णोद्धार का उद्घाटन समारोह अमृता फडणवीस की मौजूदगी में होने वाला था.\n\n2. पुरातत्व विभाग की जांच में क्या मिला?\nस्मारक के प्रतिबंधित क्षेत्र में ग्रेनाइट फर्श, सीमेंट ईंटों की दीवार और पक्का शेड बना मिला.\n\n3. पुरातत्व विभाग ने किसे निर्माण रोकने का आदेश दिया?\nलालपेठ विशाल शिवलिंग मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष को काम रोकने और अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया है.\n\n4. प्रतिबंधित क्षेत्र किस कानून के तहत तय होता है?\nपुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित स्मारक की सीमा से 100 मीटर तक का क्षेत्र प्रतिबंधित माना जाता है.\n\n5. निर्माण के लिए पैसा किसने दिया?\nस्थानीय विधायक किशोर जोरगेवार ने अपनी स्वनिधि से यह राशि दी थी.\n\n6. नियम तोड़ने पर क्या सजा हो सकती है?\nदो साल तक की कैद, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.\n\n7. क्या इस मामले में पुलिस शिकायत हुई है?\nपुरातत्व विभाग मंदिर समिति अध्यक्ष के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में है, और लोक आंदोलन न्यास के नितिन बन्सोड पहले ही शिकायत कर चुके हैं.\n\n8. क्या नोटिस के बाद समारोह की तैयारियां रुक गईं?\nनहीं, शहर में बैनर लग चुके हैं और प्रशासनिक तैयारियां जारी हैं.",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-08",
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