वर्षा जल संचयन से गिरता भूजल सुधारने और सिंचाई की राह दिखा रहे अमरोहा के शिक्षक मोनु कुमार अमरोहा के शिक्षक मोनु कुमार ने बारिश के व्यर्थ बह जाने वाले पानी को सहेजकर खेती, घरेलू कार्यों और भूजल रीचार्ज के लिए इस्तेमाल करने का व्यावहारिक मॉडल सामने रखा है। मानसून और बारिश के दिनों में अक्सर जलभराव होकर लाखों लीटर साफ पानी नालों के रास्ते बहकर बर्बाद हो जाता है। अमरोहा जनपद के शिक्षक मोनु कुमार ने इसी बर्बाद होने वाले पानी के सदुपयोग और संरक्षण की एक ठोस पहल सामने रखी है। उन्होंने वर्षा जल संचयन यानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग का ऐसा प्रारूप तैयार किया है जिससे न केवल पानी की बर्बादी रुकेगी, बल्कि ग्रामीणों और किसानों को अपनी दैनिक व कृषि जरूरतों के लिए पर्याप्त जल भी मिल सकेगा। भूजल स्तर में सुधार और सिंचाई का सहारा अमरोहा के शिक्षक मोनु कुमार का मानना है कि आज कई क्षेत्रों में भूजल का दोहन तेजी से बढ़ा है, जिसके कारण जलस्तर निरंतर नीचे जा रहा है। बारिश के पानी को सीधे जमीन के भीतर रीचार्ज गड्ढों या उपयुक्त माध्यमों से पहुंचाने पर गिरते भूजल स्तर को दोबारा बेहतर बनाने में सीधी मदद मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, जो इलाके गंभीर जल संकट से जूझते हैं, वहां संग्रहित वर्षा जल संकटमोचक की भूमिका निभा सकता है। जरूरत के समय किसान इसी जमा किए गए पानी को फसलों की सिंचाई के लिए आसानी से इस्तेमाल में ला सकते हैं, जिससे नलकूपों और भूजल पर उनका दबाव घटेगा। घरेलू उपयोग, बागवानी और फिल्टर कर पीने का विकल्प मोनु कुमार के अनुसार, एकत्रित किए गए वर्षा जल का दायरा केवल खेती तक सीमित नहीं रहता। इसे बागवानी, पेड़-पौधों की देखभाल और घरों के सामान्य कामकाज जैसे धुलाई या सफाई में भी आसानी से उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर इस पानी को वैज्ञानिक और उचित तरीके से फिल्टर किया जाए, तो इसे सुरक्षित रूप से पीने योग्य भी बनाया जा सकता है। एक बार सही तरीके से भंडारण की व्यवस्था हो जाने पर परिवार अपनी आवश्यकता के अनुसार इसका बहुआयामी उपयोग कर सकते हैं। भविष्य के जल संकट से बचाव का संदेश अपने रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट के जरिए शिक्षक मोनु कुमार समाज को यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि बारिश की हर बूंद बहुमूल्य है। सड़कों और खेतों से बहकर बेकार चले जाने वाले पानी को रोककर भविष्य के लिए संचित करना समय की सबसे बड़ी मांग है। यदि प्रत्येक नागरिक और किसान बारिश के पानी के संचयन की आदत अपनाएं, तो बड़े पैमाने पर जल संरक्षण संभव होगा और आने वाले वर्षों में गंभीर सूखे या पानी की किल्लत से बचा जा सकेगा। इसका आप पर असर वर्षा जल संचयन की यह व्यवस्था आम नागरिकों और किसानों के लिए भूजल पर निर्भरता घटाने का सीधा साधन बनती है। • भारत में: देश भर के किसानों और आवासीय कॉलोनियों में वर्षा जल संरक्षण अपनाकर गिरते जलस्तर की समस्या को रोका जा सकता है। इससे गर्मियों के महीनों में होने वाली जल किल्लत और महंगे पानी के टैंकरों के खर्च से राहत मिल सकती है। • अमरोहा में: अमरोha और मुरादाबाद संभाग के स्थानीय किसान इस मॉडल को खेतों में लागू कर सिंचाई संकट दूर कर सकते हैं। अपनी छतों और खेतों से बहने वाले पानी को सहेजकर वे नलकूपों की विफलता से बच सकते हैं। • दैनिक उपयोग में: घरों में कपड़े धोने, सफाई और बागवानी जैसे कार्यों में बारिश के पानी का उपयोग शुरू किया जा सकता है। इससे घरेलू पानी के बिलों और ट्यूबवेल की बिजली खपत में कटौती संभव होगी। • पीने के पानी के लिए: उचित फिल्टर सिस्टम लगाकर बारिश के पानी को सुरक्षित पीने योग्य बनाया जा सकता है। इससे दूषित भूजल वाले इलाकों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी। ऐसा क्यों हुआ यह पहल बरसात में लाखों लीटर साफ पानी के बिना उपयोग नाले-नालियों में बह जाने और क्षेत्र में लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण शुरू की गई। • पानी की बर्बादी: हर मानसून में बड़ी मात्रा में बारिश का पानी जमीन पर बहकर व्यर्थ चला जाता है। इसी व्यर्थ बहते पानी को उपयोगी संसाधन में बदलने के उद्देश्य से यह विचार तैयार किया गया। • गिरता भूजल स्तर: नलकूपों और सबमर्सिबल पंपों के अत्यधिक उपयोग से कई इलाकों में जलस्तर गंभीर रूप से नीचे गिर चुका है। बारिश के पानी को जमीन के भीतर उतारने से जलस्तर को दोबारा बनाए रखने में मदद मिलती है। • सिंचाई की अनिश्चितता: जिन क्षेत्रों में पानी की कमी रहती है, वहां फसलों की सिंचाई के लिए समय पर पानी नहीं मिल पाता। शिक्षक मोनु कुमार ने इसी अंतर को पाटने के लिए वर्षा जल संचय प्रोजेक्ट सामने रखा। सवाल-जवाब 1. अमरोहा के शिक्षक मोनु कुमार के प्रोजेक्ट का क्या नाम है? उनके प्रोजेक्ट का नाम रेन वाटर हार्वेस्टिंग यानी वर्षा जल संचय है। 2. बारिश के संचित पानी का उपयोग किन कार्यों में किया जा सकता है? इस पानी का उपयोग खेतों की सिंचाई, बागवानी, घरेलू सफाई और उचित फिल्टर के बाद पीने के लिए किया जा सकता है। 3. क्या बारिश के पानी से गिरता भूजल स्तर सुधर सकता है? हां, बारिश के पानी को उचित माध्यम से जमीन के भीतर रीचार्ज करने से भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है। 4. क्या बारिश का पानी पीने योग्य बनाया जा सकता है? हां, शिक्षक मोनु कुमार के अनुसार उचित और वैज्ञानिक तरीके से फिल्टर करने के बाद इसे पीने योग्य बनाया जा सकता है। 5. किसानों के लिए वर्षा जल संचय कैसे फायदेमंद है? पानी की कमी वाले क्षेत्रों में किसान जमा किए गए इस पानी से जरूरत के समय फसलों की समय पर सिंचाई कर सकते हैं। प्रेरणा और सबक शिक्षक मोनु कुमार की यह पहल दिखाती है कि एक साधारण नागरिक भी समाज और पर्यावरण की बड़ी चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान खोज सकता है। • समस्या को संसाधन में बदलना: बरसात के पानी को जलभराव का कारण मानने के बजाय उसे भविष्य की संपत्ति बनाकर उपयोग किया जा सकता है। • स्थानीय स्तर पर समाधान: पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े बजट की नहीं, बल्कि स्थानीय जागरूकता और सही तरीकों को अपनाने की जरूरत होती है। • बहुआयामी सोच: एक ही विचार से सिंचाई, भूजल रीचार्ज, घरेलू काम और पेयजल जैसी कई समस्याओं का एक साथ समाधान निकाला जा सकता है। https://trendkia.com/national/amroha-ke-shikshaka-monu-kumar-ne-varsha-jala-snchayana-se-bhujala-stara-sudharane-aura-sinchai-ki-raha-dikhai-46386 TrendKia — Har trend, sabse pehle.