एंटी पेपर लीक बिल संसद में पेश, जानिए पुराने नियमों से कितना सख्त हुआ नया कानून सरकार ने संसद में नया एंटी पेपर लीक बिल पेश कर दिया है जिसके तहत अब सजा, जुर्माने और मुकदमों के निपटारे के नियम काफी कड़े कर दिए गए हैं। पेपर लीक का विवाद अब सड़क से उठकर संसद के गलियारों तक पहुंच चुका है और परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सरकार ने एक नया और सख्त एंटी पेपर लीक बिल पेश किया है। लोकसभा में इस महत्वपूर्ण विधेयक को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा रखा गया है, जो हाल ही में जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शनों के बाद आया है। परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाने के उद्देश्य से मोदी सरकार यह सख्त कदम उठाया है। प्रस्तावित कानून के दायरे में यह प्रावधान किया गया है कि देश के प्रत्येक राज्य में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष रूप से फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा, जहां इन मामलों की रोजाना सुनवाई होगी और 90 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा करके अदालत सजा का ऐलान करेगी। विपक्ष पर साधा निशाना और सुधारों पर जोर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखते हुए कहा कि अब इस मुद्दे पर राजनीति करने या इसे भटकाने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जानी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से अपील की है कि विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार जो बड़े सुधार लेकर आई है, उन पर सार्थक चर्चा होना आवश्यक है। किरेन रिजिजू ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह राजनीति करने का समय नहीं है और किसी भी प्रकार की बहानेबाजी अब सहन नहीं की जाएगी। छात्रों के हित में लाया गया यह विधेयक निश्चित तौर पर पारित होगा क्योंकि यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। पुराने कानून और नए संशोधन बिल में क्या-क्या अंतर है सरकार द्वारा लाए गए इस नए संशोधन विधेयक और पुराने प्रावधानों में कई बड़े बदलाव किए गए हैं जो इसे बेहद कड़ा बनाते हैं। • सजा: वर्ष 2024 के पुराने कानून में जहां दोषियों के लिए 3 से 5 साल तक की कैद का प्रावधान था, वहीं नए संशोधन बिल के तहत इसे बढ़ाकर सीधे 5 से 10 साल कर दिया गया है। • जुर्माना: पुराने कानून में पेपर लीक के मामलों में 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का नियम था, जिसे अब भारी भरकम रूप से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है। • जांच एजेंसी: पहले के नियमों के तहत सेंट्रल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी इन मामलों की जांच करती थी, जबकि नए संशोधन बिल के मुताबिक अब विशेष रूप से स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा जो इन मामलों की तह तक जाएगी। • जांच पूरी: पुराने 2024 के कानून में जांच पूरा करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई थी, लेकिन नए संशोधन में साफ तौर पर 2 महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है। • सुनवाई: पहले पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में होती थी, जबकि अब संशोधनों के बाद इनकी सुनवाई विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से की जाएगी। • फैसला: पुराने कानून में फैसला सुनाने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं थी, लेकिन नए संशोधन बिल के अंतर्गत अब 3 महीने के भीतर फैसला सुनाए जाने का प्रावधान किया गया है। • हाईकोर्ट में अपील: पुराने नियमों में हाईकोर्ट में अपील करने का समय तय नहीं था, जबकि नए प्रावधान के तहत अब केवल 30 दिनों के भीतर ही हाईकोर्ट में अपील की जा सकेगी। • हाईकोर्ट का फैसला: पुराने कानून के तहत हाईकोर्ट के फैसले के लिए भी कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं थी, परंतु नए संशोधन बिल के अनुसार ऐसे मामलों में हाईकोर्ट का फैसला भी 3 महीने के भीतर ही आ जाएगा। युवाओं से संवाद और हाई पावर टास्क फोर्स का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मसले पर लगातार देश के युवाओं के साथ सीधा संवाद बनाए हुए हैं। उन्होंने सबसे पहले 23 जुलाई को एक वीडियो जारी कर परीक्षा में धांधली रोकने के लिए एक बिल्कुल नया कानून लाने की बात कही थी, जिसके बाद 24 जुलाई को उन्होंने GenZ के समर्थन के लिए आभार जताया था। इसके बाद 26 जुलाई को अपने तीसरे वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने एक हाई पावर टास्क फोर्स के गठन का औपचारिक ऐलान किया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि नंदन नीलेकणि की अगुवाई में 6 सदस्यों वाली इस कमेटी का मुख्य काम सरकार को पेपर लीक रोकने के लिए ठोस सुझाव देना और परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता लाने के कारगर तरीके सुझाना होगा। प्रधानमंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि पेपर लीक के किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन पहले ही किया जा चुका है। यह कमेटी सरकार को यह भी बताएगी कि किस प्रकार आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग करके परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा और अधिक मजबूत किया जा सकता है। शिक्षा मंत्रालय के नेतृत्व में बदलाव जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंप दी। नेतृत्व में यह बड़ा फेरबदल ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय शिक्षा व्यवस्था एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील दौर से गुजर रही है। वर्तमान में सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी तरह से लागू करने और स्कूली छात्रों के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार को पूरी उम्मीद है कि प्रह्लाद जोशी के लंबे प्रशासनिक अनुभव से शिक्षा क्षेत्र में चल रहे इन तमाम सुधारों को और अधिक गति मिलेगी। शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे। अब तक की गई सख्त कार्रवाइयां पेपर लीक के मामलों के खिलाफ सरकार ने अब तक बेहद कड़ा एक्शन लेते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। जिन अधिकारियों को इस कार्रवाई के तहत हटाया गया है, उनके खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए जाएंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह कदम NTA के ढांचे में बड़े पैमाने पर चल रहे बदलावों की कड़ी के रूप में उठाया गया है और संस्था में सुधार के लिए आने वाले दिनों में और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इससे ठीक पहले गुरुवार को सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों को भी बदला था। इन तमाम प्रशासनिक कार्रवाइयों के साथ-साथ अब NTA की आउटसोर्सिंग व्यवस्था में भी व्यापक बदलाव करने और तकनीकी सुरक्षा उपायों को लागू करने की पुख्ता तैयारियां चल रही हैं ताकि परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और फूल-प्रूफ बनाया जा सके। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने देश भर की सभी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की गहन जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन कर दिया है, जिसके दायरे में संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC से लेकर NTA तक की सभी प्रमुख परीक्षाएं शामिल होंगी। पेपर लीक कांड के कई प्रमुख आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार करके सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इसका आप पर असर भारत में: नया एंटी पेपर लीक कानून लागू होने से देश भर की सभी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता आएगी और छात्रों का भविष्य सुरक्षित होगा। दिल्ली में: दिल्ली पुलिस द्वारा विशेष टास्क फोर्स के गठन से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर सख्त रोक लगेगी। सवाल-जवाब 1. एंटी पेपर लीक बिल संसद में किसने पेश किया? लोकसभा में यह नया विधेयक केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किया गया। 2. नए संशोधन बिल के तहत जुर्माने की राशि कितनी कर दी गई है? पेपर लीक मामलों में जुर्माना बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है। 3. पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए क्या व्यवस्था की गई है? हर राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे जहां रोजाना सुनवाई होगी और 90 दिन के भीतर ट्रायल पूरा किया जाएगा। 4. नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाली कमेटी का क्या काम है? यह 6 सदस्यीय कमेटी सरकार को पेपर लीक रोकने और परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के सुझाव देगी। 5. शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपी गई है? धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपी गई है। https://trendkia.com/national/anti-paper-leak-bill-sansad-mein-pesh-kiye-naye-kanoon-10790 TrendKia — Har trend, sabse pehle.