अस्पताल में नहीं मिला बेड तो बीमार मां को व्हीलचेयर पर 2 किलोमीटर खींचकर विधायक के बंगले पहुंचा बेटा तेलंगाना के मंचेरियल में जिला अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा पांच घंटे तक इलाज शुरू न करने पर एक बेबस युवक अपनी बीमार मां को दो किलोमीटर दूर स्थानीय विधायक के आवास तक व्हीलचेयर पर ले गया। स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही की एक गंभीर घटना तेलंगाना के मंचेरियल जिले में दर्ज की गई है। यहां एक 55 वर्षीय महिला, जो किडनी की गंभीर समस्या से जूझ रही थीं, जिला सरकारी अस्पताल में घंटों दर्द से तड़पती रहीं। अस्पताल कर्मियों से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उनके बेटे को मजबूरी में यह असामान्य कदम उठाना पड़ा। पांच घंटे तक व्हीलचेयर पर इंतजार करने को मजबूर पीड़िता बुकिया बुज्जी मंडामर्री मंडल के अंतर्गत आने वाले पुलिमडुगु गांव की निवासी हैं। वे 29 सितंबर को अपने बेटे राज कुमार के साथ उपचार कराने के उद्देश्य से मंचेरियल स्थित सरकारी जिला अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल परिसर में पहुंचने के बाद उन्हें तुरंत बेड या स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया गया। मरीज के बेटे राज कुमार के अनुसार, उन्होंने अपनी मां की गंभीर हालत का हवाला देते हुए चिकित्सा कर्मियों और डॉक्टरों से तुरंत उपचार शुरू करने की लगातार मिन्नतें कीं। इसके बावजूद किसी भी स्वास्थ्यकर्मी ने उनकी मां की स्थिति की सुध नहीं ली और उन्हें करीब पांच घंटे तक व्हीलचेयर पर ही बैठे रहने को विवश होना पड़ा। करीमनगर रेफर करने से इनकार और प्राइवेट जाने की सलाह अस्पताल प्रशासन की बेरुखी से आहत राज कुमार ने अधिकारियों से अनुरोध किया कि यदि वे यहां इलाज करने में असमर्थ हैं, तो मरीज को कम से कम करीमनगर के बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दें। हालांकि, अस्पताल स्टाफ ने इस मांग को भी सिरे से खारिज कर दिया। राज कुमार ने आरोप लगाया कि वहां मौजूद कर्मियों ने उन्हें अपनी मां को किसी निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दे डाली। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के पास निजी इलाज का खर्च उठाने का साधन नहीं था और अस्पताल के इस रवैये के बाद उनके पास कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आ रहा था। विधायक के बंगले तक सड़क पर तय किया दो किलोमीटर का सफर हर तरफ से निराशा हाथ लगने के बाद राज कुमार अपनी मां को उसी व्हीलचेयर पर बैठाकर मुख्य सड़क पर निकल पड़े। वे कड़ी धूप और भारी ट्रैफिक के बीच व्हीलचेयर को धकेलते हुए लगभग दो किलोमीटर की दूरी तय करके स्थानीय विधायक के. प्रेमसागर राव के आधिकारिक आवास पर पहुंचे। उनका मकसद जनप्रतिनिधि के संज्ञान में अस्पताल की इस घोर लापरवाही को लाना और किसी भी तरह अपनी मां के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधा हासिल करना था। सड़क पर व्हीलचेयर खींचते बेबस युवक का यह दृश्य देखकर आसपास के लोग भी सन्न रह गए। प्रशासन की सक्रियता और जांच का आश्वासन घटना की खबर जैसे ही फैली और मामला स्थानीय विधायक तक पहुंचा, स्वास्थ्य तंत्र में हड़कंप मच गया। जिला अस्पताल के रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) आनन-फानन में विधायक आवास पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से बातचीत की और बेहतर इलाज का भरोसा दिया। इसके बाद बीमार महिला को वापस सरकारी जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां तत्काल बेड की व्यवस्था कर उनका उपचार शुरू किया गया। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि ड्यूटी के दौरान मरीज की देखभाल में बरती गई इस गंभीर लापरवाही की गहन जांच की जाएगी। इसका आप पर असर यह घटना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर आम नागरिकों की सुरक्षा और उनके बुनियादी अधिकारों से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों को उजागर करती है। • भारत में: सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में कर्मचारियों की संवेदनहीनता आपातकालीन देखभाल की तलाश कर रहे गरीब परिवारों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसी आपात स्थितियों में मरीज के परिजन अस्पताल अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी या राज्य स्वास्थ्य हेल्पलाइन पर सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं। • तेलंगाना में: मंचेरियल और आसपास के ग्रामीण इलाकों के मरीजों को जिला अस्पतालों में इलाज न मिलने पर भारी मानसिक और शारीरिक यातना झेलनी पड़ती है। यदि स्थानीय जिला अस्पताल प्राथमिक स्तर पर भर्ती या रेफरल देने से मना करे, तो स्थानीय प्रशासन के जन शिकायत प्रकोष्ठ या क्षेत्रीय स्वास्थ्य आयुक्त को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए। • आपातकालीन रेफरल नियम: सरकारी अस्पतालों के लिए गंभीर मरीजों को उचित कारण और एंबुलेंस सहायता के बिना लौटाना नियमों के खिलाफ है। मरीजों के अधिकारों के तहत यदि जिला स्तर पर उपचार संभव नहीं है, तो नजदीकी तृतीयक स्वास्थ्य केंद्र में रेफर करना अनिवार्य व्यवस्था का हिस्सा है। • जनप्रतिनिधि हस्तक्षेप: प्रशासनिक स्तर पर विफलता की स्थिति में स्थानीय विधायक या जनप्रतिनिधि की निगरानी से पीड़ितों को तत्काल राहत मिलना संभव हो पाता है। हालांकि, स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही तय करने के लिए समय पर औचक निरीक्षण और कर्मचारियों की निगरानी बेहद आवश्यक है। ऐसा क्यों हुआ यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति सरकारी अस्पतालों में व्याप्त संवेदनहीनता, अपर्याप्त निगरानी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से आने वाले मरीजों के प्रति उपेक्षा के कारण उत्पन्न हुई। • सीधा कारण: अस्पताल कर्मचारियों ने 55 वर्षीय किडनी रोगी को पांच घंटे तक कोई बेड या चिकित्सीय परामर्श दिए बिना व्हीलचेयर पर बैठाए रखा और करीमनगर रेफर करने से भी मना कर दिया। इस लगातार उपेक्षा और निजी अस्पताल जाने की सलाह के बाद बेबस बेटे को विधायक के आवास तक जाने का फैसला करना पड़ा। • प्रशासनिक विफलता: अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की प्राथमिक स्क्रीनिंग और त्वरित ट्राइएज व्यवस्था का अभाव था। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों और डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर शारीरिक स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया। • जांच और आगामी कदम: घटना उजागर होने के बाद रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर ने मरीज को भर्ती कराकर इलाज शुरू कराया और मामले में लापरवाही की विभागीय जांच का भरोसा दिलाया है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित लापरवाह स्टाफ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई संभावित है। सवाल-जवाब 1. यह घटना किस स्थान और किस दिन की है? यह घटना तेलंगाना के मंचेरियल स्थित सरकारी जिला अस्पताल की है, जो 29 सितंबर को घटित हुई। 2. पीड़ित महिला और उनके बेटे की पहचान क्या है? पीड़ित महिला का नाम 55 वर्षीय बुकिया बुज्जी है, जो पुलिमडुगु गांव की रहने वाली हैं, और उनके बेटे का नाम राज कुमार है। 3. बेटा अपनी मां को विधायक के घर क्यों ले गया? अस्पताल में पांच घंटे इंतजार के बाद भी इलाज और बेड न मिलने तथा रेफर करने से मना करने पर उसने विधायक के हस्तक्षेप के लिए ऐसा किया। 4. राज कुमार अपनी मां को कितनी दूर तक व्हीलचेयर पर ले गया? राज कुमार अपनी बीमार मां को सड़क पर करीब दो किलोमीटर तक व्हीलचेयर पर धकेलते हुए स्थानीय विधायक के आवास तक ले गया। 5. मामले की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने क्या कदम उठाया? आरएमओ ने मौके पर पहुंचकर इलाज का आश्वासन दिया, मरीज को वापस अस्पताल लाकर बेड दिया गया और लापरवाही की जांच का भरोसा दिलाया गया। https://trendkia.com/national/aspatala-men-nahin-mila-beda-to-bimara-man-ko-vhilacheyara-para-2-kilomitara-khinchakara-mla-ke-bngale-pahuncha-beta-40290 TrendKia — Har trend, sabse pehle.